या अनुरागी चित्त की, गति समुझै नहिं कोई। ज्यों-ज्यों बूड़ै, स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जवल होइ॥
या अनुरागी चित्त की, गति समुझै नहिं कोई।
ज्यों-ज्यों बूड़ै, स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जवल होइ॥
- इस पद्यांश में किस अलंकार की योजना है?
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Correct answer: (C) विरोधाभास
Explanation
स्याम रंग में डूबने पर चित्त का उज्ज्वल होना विरोध-सा दिखता है पर वस्तुतः विरोध नहीं है, इसलिए विरोधाभास अलंकार है।