मुंड कटत कहुँ, रूंड नटत कहुँ सुंड पटत धन। गिद्ध लसत कहुँ, सिद्ध हँसत सुख वृद्धि रसत मन॥
मुंड कटत कहुँ, रूंड नटत कहुँ सुंड पटत धन।
गिद्ध लसत कहुँ, सिद्ध हँसत सुख वृद्धि रसत मन॥
- इसमें किस काव्य-गुण की योजना है?
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Correct answer: (B) ओज
Explanation
'मुंड कटत... सुंड पटत' में कठोर वर्णों और संयुक्ताक्षरों से उग्र भाव है, इसलिए ओज गुण है।