“दिवस का अवसान समीप था, गगन था कुछ लोहित हो चला।
“दिवस का अवसान समीप था,
गगन था कुछ लोहित हो चला।
तरुशिखा पर थी अब राजती,
कमलिनी-कुल-वल्लभ की प्रभा।”
उपर्युक्त पद्यांश में कौन-सा छन्द है?
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Correct answer: (A) द्रुतविलम्बित
Explanation
इस पद्यांश (प्रियप्रवास) का छंद द्रुतविलम्बित है, जिसके प्रत्येक चरण में बारह वर्ण होते हैं।