“बालधी बिसाल बिकराल ज्वाल-जाल मानों, लंक लीलिबे को काल रसना पसारी है।
“बालधी बिसाल बिकराल ज्वाल-जाल मानों,
लंक लीलिबे को काल रसना पसारी है।
कैंधो व्योमबीथिका भरे हैं भूरि धूमकेतु,
वीररस बीर तरवारि सी उधारी है॥”
इन पंक्तियों में किस रस का परिपाक है?
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Correct answer: (B) भयानक रस
Explanation
हनुमान की पूँछ की विशाल, विकराल ज्वाला देखकर भय उत्पन्न होता है, इसलिए भयानक रस है।