“चित्तवृत्तियों की परम्परा को परखते हुए साहित्य-परम्परा के साथ सामंजस्य दिखाना ही साहित्य का इतिहास कहलाता है।” यह विचार किस विद्वान् का है?
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Correct answer: (A) रामचंद्र शुक्ल
Explanation
साहित्य के इतिहास की यह परिभाषा आचार्य रामचंद्र शुक्ल की है, जो 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' की भूमिका में मिलती है।