निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं ।
मनुष्य की कीर्ति किससे फैलती है ?
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Correct answer: (A) पुण्य कृतियों से
Explanation
गद्यांश के अंतिम वाक्य के अनुसार मनुष्य की कीर्ति उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं।