Question 143Asked in BPSC TRE 3.0 (2024) Hindi Class 6-8

निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।

निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए । स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं । पाठक और श्रोता किससे नया पाठ सीखा करते हैं ?
  1. Aमनुष्य के उज्ज्वल कार्य से
  2. Bअभिनय से
  3. Cयशगान से
  4. Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
  5. Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) मनुष्य के उज्ज्वल कार्य से

Explanation

गद्यांश के अनुसार पाठक और श्रोता स्वावलंबी मनुष्य के उज्ज्वल कार्यों (उसके जीवन-कर्मों) से नया पाठ सीखते हैं।

From BPSC TRE 3.0 (2024) Hindi Class 6-8 — Previous Year Paper

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