निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
किस अर्थ में आदर्श व्यक्ति का चरित्र प्रशंसनीय होता है ?
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Correct answer: (B) वह धैर्य से संकट को दूर करता है
Explanation
गद्यांश की अंतिम पंक्ति के अनुसार आदर्श व्यक्ति का चरित्र इसलिए प्रशंसनीय है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है।