Question 97Asked in BPSC TRE 1.0 (2023) Language Paper-1 Class 1-5 (2nd Sitting)

निर्देश (प्रश्न सं॰ H-96 से H-100 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए।

निर्देश (प्रश्न सं॰ H-96 से H-100 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए। पुराणों में देखा गया है कि तप देवता करते हैं और राक्षस भी। जिस किसी को कुछ भी सिद्धि प्राप्त करनी है, तप किए बिना कोई चारा नहीं। इसमें उसकी नीयत अगर सात्विक रही, तो उसका और दुनिया का भला होता है। अगर उसकी नीयत बुरी रही, तो वह सारी दुनिया का नाश भी कर सकता है। मनुष्य ने ऐटम बम, हाइड्रोजन बम जैसे अस्त्र तैयार किए। यह सब मनुष्य की तपस्या का ही फल है। इस आसुरी तपस्या से दुनिया का तो नुकसान होता ही है, लेकिन ऐसी तपस्या करने वाला स्वयं आत्मनाश की तैयारी करता है। ‘नीयत’ से तात्पर्य है
  1. Aइरादा
  2. Bसोच
  3. Cअनिश्चय
  4. Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
  5. Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer

Correct answer: (A) इरादा

Explanation

'नीयत' का अर्थ इरादा है।

From BPSC TRE 1.0 (2023) Language Paper-1 Class 1-5 (2nd Sitting) — Previous Year Paper

This is question 97 of BPSC TRE 1.0 (2023) Language Paper-1 Class 1-5 (2nd Sitting) — Previous Year Paper. See all questions of this paper with answers, or attempt the paper as a timed online test to get your score and all-India rank.