Question 123Asked in CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026 + 1 more paper

नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :

नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : यह बात ध्यान देने की है कि ईर्ष्या व्यक्ति-विशेष से होती है। यह नहीं होता कि जिस किसी को ऐश्वर्य, गुण या मन से सम्पन्न देखा उसी से ईर्ष्या हो गई। ईर्ष्या उन्हीं से होती है जिनके विषय में यह धारणा होती है कि लोगों की दृष्टि हमारे साथ-साथ उन पर भी अवश्य पड़ती होगी। अपने से दूरस्थ होने के कारण अपने साथ-साथ जिन पर लोगों का ध्यान जाने का निश्चय नहीं होता उनके प्रति ईर्ष्या नहीं उत्पन्न होती। काशी में रहने वाली किसी धानी को अमेरिका के किसी धानी की बात सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। हिन्दी के किसी कवि को इटली के किसी कवि का महत्त्व सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। संबंधियों, बालसखाओं, सहपाठियों और पड़ोसियों के बीच ईर्ष्या का विकास अधिक देखा जाता है। लड़कपन से जो आदमी एक साथ उठते-बैठते देखे गए हैं उन्हीं में से कोई एक-दूसरे की बढ़ती से जलता हुआ भी पाया गया है। यदि दो साथियों में से कोई किसी अच्छे पद पर पहुँच गया तो वह इस उद्योग में देखा जाता है कि दूसरा किसी अच्छे पद पर न पहुँचने पाए। प्रायः अपनी उन्नति के गुप्त बाधकों का पता लगाते-लगाते लोग अपने किसी बड़े पुराने मित्र तक पहुँच जाते हैं। जिस समय संसर्ग सूत्र में बाँधकर हम औरों को अपने साथ एक पंक्ति में खड़ा करते हैं उस समय सहानुभूति, सहायता आदि की संभावना प्रतिष्ठित होने के साथ ही साथ ईर्ष्या और द्वेष की संभावना की नींव भी पड़ जाती है। अपने किसी विधान से हम भलाई ही भलाई की संभावना का सूत्रपात करें और इस प्रकार भविष्य के अनिश्चय में बाधा डालें, यह कभी हो ही नहीं सकता। भविष्य की अनिश्चयात्मकता अटल और अजेय है। अपनी लाख विद्या-बुद्धि से भी हम उसे बिलकुल हटा नहीं सकते। अब ध्यान देने की बात यह निकली कि ईर्ष्या के संचार के लिए ईर्ष्या करने वाले और ईर्ष्या के पात्र के अतिरिक्त स्थिति पर ध्यान देने वाले समाज की भी आवश्यकता है। इसी समाज की धारणा पर प्रभाव डालने के लिए ही ईर्ष्या की जाती है; ऐश्वर्य, गुण या मन का गुप्त रूप से बिना किसी समुदाय को विदित कराए, सुख या संतोष भोगने के लिए नहीं। किसी परिचित के प्रतिष्ठित हो जाने से
  1. Aउसके विकास को रोकने का मन करता है
  2. Bहमें कोई फर्क नहीं पड़ता है
  3. Cहम उसे पहले से अधिक इज्जत देते हैं
  4. Dईर्ष्या और द्वेष की नींव पड़ती है
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Correct answer: (D) ईर्ष्या और द्वेष की नींव पड़ती है

Explanation

गद्यांश के अनुसार जब हम दूसरों को अपने साथ एक पंक्ति में खड़ा करते हैं तो सहानुभूति के साथ-साथ ईर्ष्या और द्वेष की संभावना की नींव भी पड़ जाती है। परिचित के प्रतिष्ठित होने पर यही होता है।

From CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026 — Previous Year Paper

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