“मुक्तेषु रश्मिषु निरायतपूर्वकाया, निष्कम्पचामरशिखा निभृतोच्चकर्णाः।
“मुक्तेषु रश्मिषु निरायतपूर्वकाया,
निष्कम्पचामरशिखा निभृतोच्चकर्णाः।
आत्मोद्धतैरपि रजोभिरलङ्घनीया,
धावन्त्यमी मृगजवाक्षमयैवरथ्याः॥”
अस्मिन् श्लोके किं छन्दः?
Show answerHide answer
Correct answer: (C) वसन्ततिलका
Explanation
श्लोक के प्रत्येक चरण में चौदह वर्ण हैं और गण त-भ-ज-ज-ग-ग हैं; यह वसन्ततिलका छन्द है।