“इमां सागरपर्यन्तां हिमवद्विन्ध्यकुण्डलाम्। महीमेकातपत्राङ्कां राजसिंहः प्रशास्तु नः॥”
“इमां सागरपर्यन्तां हिमवद्विन्ध्यकुण्डलाम्।
महीमेकातपत्राङ्कां राजसिंहः प्रशास्तु नः॥”
इति भरतवाक्यं कस्मिन्नाटकेऽस्ति?
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Correct answer: (E) उपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
Explanation
आधिकारिक कुञ्जी के अनुसार यह भरतवाक्य दिए गए तीनों नाटकों (शाकुन्तल, उत्तररामचरित, मुद्राराक्षस) में से किसी का नहीं है; इसलिए उत्तर (E) है।