“त्वमेव ननु कल्याणि! सञ्जीवय जगत्पतिम्। प्रियस्पर्शो हि पाणिस्ते तत्रैष निरतो जनः॥”
“त्वमेव ननु कल्याणि! सञ्जीवय जगत्पतिम्।
प्रियस्पर्शो हि पाणिस्ते तत्रैष निरतो जनः॥”
उत्तररामचरितस्य तृतीयेऽङ्के कस्येदं कथनम्?
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Correct answer: (B) तमसायाः
Explanation
तृतीय अंक में सीता को मूर्छित देखकर तमसा राम से स्पर्श द्वारा उन्हें जीवित करने को कहती हैं; यह कथन तमसा का है। उत्तर (B)।