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CTET January 2024 Paper 1, 21 Jan 2024 — Previous Year Paper

Attempt CTET January 2024 Paper 1, 21 Jan 2024 — Previous Year Paper online for free with the official answer key: 149 questions, 150 minutes, no negative marking. Questions in English and Hindi with instant score, all-India rank and detailed solutions on UTpaper.

  • 149 Questions
  • 149 Marks
  • 150 Minutes
  • English + Hindi

About CTET January 2024 Paper 1, 21 Jan 2024 — Previous Year Paper

This is the actual CTET January 2024 Paper 1, 21 Jan 2024 — Previous Year Paper converted into an online test with the official answer key. Attempt it with the real time limit of 150 minutes to see exactly how you would score in the CTET exam, then go through the solutions to fix weak topics. It is one of 7 free tests in the CTET Paper 1 (Class 1-5) Previous Year Papers & Mock Test.

Section-wise pattern

SectionQuestionsMarksCounts for merit?
Child Development and Pedagogy3030Yes
Mathematics3030Yes
Environmental Studies2929Yes
Language I (English)3030Yes
Language II (Hindi)3030Yes

Sample questions from this test

Q120
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इस बार मौसम विज्ञानियों ने घोषणा की हुई है कि अल नीनो प्रभाव के कारण मानसून कमज़ोर रह सकता है। चैत के महीने में बारिश होने के हालात पर घाघ ने भी यही कहा है। चैत यानी मार्च-अप्रैल के दिनों में अगर बारिश होती है तो सावन सूखा जा सकता है। बात सिर्फ़ इस बार के मानसून की नहीं है। अमेरिका में हाल ही में ताजे पानी के हालात पर हुए एक सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुतेरेज ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि 2050 तक पानी का सबसे बड़ा संकट भारत में आने वाला है। भारत पर संकट इसलिए है क्योंकि गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी नदियों का पानी धीरे-धीरे कम होता जाएगा। सिर्फ़ गंगा की बात करें तो 2500 किलोमीटर लंबी यह नदी उत्तराखंड से बंगाल के बीच कई राज्यों से गुजरती है। इसके किनारों पर बसे महानगरों, कस्बों और गाँवों की करीब चालीस करोड़ की आबादी की पानी से जुड़ी जरूरतों को यह पूरा करती है। इसके पानी का स्रोत गंगोत्री ग्लेशियर है। पर्यावरण विज्ञानियों का दावा है कि पिछले 87 साल में तीस किलोमीटर लंबे इस ग्लेशियर का पौने दो किलोमीटर हिस्सा पिघलकर गायब हो चुका है। अभी जलवायु परिवर्तन का जो हाल है, वह पूरे हिमालय क्षेत्र के लिए खतरनाक माना जा रहा है। भारत के हिस्से वाले हिमालय में 9775 ग्लेशियर बताए जाते हैं। इनमें अकेले उत्तराखंड में 968 हैं। अब अगर इनके पिघलने की रफ़्तार तेज होती जाती है तो क्या होगा? भारत की नदियों में जल कम होता जा रहा है। इसका कारण है :
  1. Aग्लेशियरों का न पिघलना
  2. Bग्लेशियरों का तेज़ी से पिघलना
  3. Cग्लेशियरों के क्षेत्रफल में कमी आना
  4. Dग्लेशियरों के क्षेत्रफल में वृद्धि होना
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Q121
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इस बार मौसम विज्ञानियों ने घोषणा की हुई है कि अल नीनो प्रभाव के कारण मानसून कमज़ोर रह सकता है। चैत के महीने में बारिश होने के हालात पर घाघ ने भी यही कहा है। चैत यानी मार्च-अप्रैल के दिनों में अगर बारिश होती है तो सावन सूखा जा सकता है। बात सिर्फ़ इस बार के मानसून की नहीं है। अमेरिका में हाल ही में ताजे पानी के हालात पर हुए एक सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुतेरेज ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि 2050 तक पानी का सबसे बड़ा संकट भारत में आने वाला है। भारत पर संकट इसलिए है क्योंकि गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी नदियों का पानी धीरे-धीरे कम होता जाएगा। सिर्फ़ गंगा की बात करें तो 2500 किलोमीटर लंबी यह नदी उत्तराखंड से बंगाल के बीच कई राज्यों से गुजरती है। इसके किनारों पर बसे महानगरों, कस्बों और गाँवों की करीब चालीस करोड़ की आबादी की पानी से जुड़ी जरूरतों को यह पूरा करती है। इसके पानी का स्रोत गंगोत्री ग्लेशियर है। पर्यावरण विज्ञानियों का दावा है कि पिछले 87 साल में तीस किलोमीटर लंबे इस ग्लेशियर का पौने दो किलोमीटर हिस्सा पिघलकर गायब हो चुका है। अभी जलवायु परिवर्तन का जो हाल है, वह पूरे हिमालय क्षेत्र के लिए खतरनाक माना जा रहा है। भारत के हिस्से वाले हिमालय में 9775 ग्लेशियर बताए जाते हैं। इनमें अकेले उत्तराखंड में 968 हैं। अब अगर इनके पिघलने की रफ़्तार तेज होती जाती है तो क्या होगा? गंगा के किनारे बसे लोगों की आबादी लगभग है :
  1. A87 करोड़
  2. B30 करोड़
  3. C40 करोड़
  4. D96 करोड़
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Q122
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इस बार मौसम विज्ञानियों ने घोषणा की हुई है कि अल नीनो प्रभाव के कारण मानसून कमज़ोर रह सकता है। चैत के महीने में बारिश होने के हालात पर घाघ ने भी यही कहा है। चैत यानी मार्च-अप्रैल के दिनों में अगर बारिश होती है तो सावन सूखा जा सकता है। बात सिर्फ़ इस बार के मानसून की नहीं है। अमेरिका में हाल ही में ताजे पानी के हालात पर हुए एक सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुतेरेज ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि 2050 तक पानी का सबसे बड़ा संकट भारत में आने वाला है। भारत पर संकट इसलिए है क्योंकि गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी नदियों का पानी धीरे-धीरे कम होता जाएगा। सिर्फ़ गंगा की बात करें तो 2500 किलोमीटर लंबी यह नदी उत्तराखंड से बंगाल के बीच कई राज्यों से गुजरती है। इसके किनारों पर बसे महानगरों, कस्बों और गाँवों की करीब चालीस करोड़ की आबादी की पानी से जुड़ी जरूरतों को यह पूरा करती है। इसके पानी का स्रोत गंगोत्री ग्लेशियर है। पर्यावरण विज्ञानियों का दावा है कि पिछले 87 साल में तीस किलोमीटर लंबे इस ग्लेशियर का पौने दो किलोमीटर हिस्सा पिघलकर गायब हो चुका है। अभी जलवायु परिवर्तन का जो हाल है, वह पूरे हिमालय क्षेत्र के लिए खतरनाक माना जा रहा है। भारत के हिस्से वाले हिमालय में 9775 ग्लेशियर बताए जाते हैं। इनमें अकेले उत्तराखंड में 968 हैं। अब अगर इनके पिघलने की रफ़्तार तेज होती जाती है तो क्या होगा? नदियों का पानी धीरे-धीरे कम होता जाएगा। वाक्य में रेखांकित पद हैं : (रेखांकित शब्द: धीरे-धीरे)
  1. Aविशेषण
  2. Bक्रिया
  3. Cक्रिया विशेषण
  4. Dप्रविशेषण
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Q123
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इस बार मौसम विज्ञानियों ने घोषणा की हुई है कि अल नीनो प्रभाव के कारण मानसून कमज़ोर रह सकता है। चैत के महीने में बारिश होने के हालात पर घाघ ने भी यही कहा है। चैत यानी मार्च-अप्रैल के दिनों में अगर बारिश होती है तो सावन सूखा जा सकता है। बात सिर्फ़ इस बार के मानसून की नहीं है। अमेरिका में हाल ही में ताजे पानी के हालात पर हुए एक सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुतेरेज ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि 2050 तक पानी का सबसे बड़ा संकट भारत में आने वाला है। भारत पर संकट इसलिए है क्योंकि गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी नदियों का पानी धीरे-धीरे कम होता जाएगा। सिर्फ़ गंगा की बात करें तो 2500 किलोमीटर लंबी यह नदी उत्तराखंड से बंगाल के बीच कई राज्यों से गुजरती है। इसके किनारों पर बसे महानगरों, कस्बों और गाँवों की करीब चालीस करोड़ की आबादी की पानी से जुड़ी जरूरतों को यह पूरा करती है। इसके पानी का स्रोत गंगोत्री ग्लेशियर है। पर्यावरण विज्ञानियों का दावा है कि पिछले 87 साल में तीस किलोमीटर लंबे इस ग्लेशियर का पौने दो किलोमीटर हिस्सा पिघलकर गायब हो चुका है। अभी जलवायु परिवर्तन का जो हाल है, वह पूरे हिमालय क्षेत्र के लिए खतरनाक माना जा रहा है। भारत के हिस्से वाले हिमालय में 9775 ग्लेशियर बताए जाते हैं। इनमें अकेले उत्तराखंड में 968 हैं। अब अगर इनके पिघलने की रफ़्तार तेज होती जाती है तो क्या होगा? गद्यांश में किस संकट की बात की गई है?
  1. Aखाद्य संकट
  2. Bरोज़गार संकट
  3. Cजल संकट
  4. Dपर्यावरण संकट
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Q124
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इस बार मौसम विज्ञानियों ने घोषणा की हुई है कि अल नीनो प्रभाव के कारण मानसून कमज़ोर रह सकता है। चैत के महीने में बारिश होने के हालात पर घाघ ने भी यही कहा है। चैत यानी मार्च-अप्रैल के दिनों में अगर बारिश होती है तो सावन सूखा जा सकता है। बात सिर्फ़ इस बार के मानसून की नहीं है। अमेरिका में हाल ही में ताजे पानी के हालात पर हुए एक सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुतेरेज ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि 2050 तक पानी का सबसे बड़ा संकट भारत में आने वाला है। भारत पर संकट इसलिए है क्योंकि गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी नदियों का पानी धीरे-धीरे कम होता जाएगा। सिर्फ़ गंगा की बात करें तो 2500 किलोमीटर लंबी यह नदी उत्तराखंड से बंगाल के बीच कई राज्यों से गुजरती है। इसके किनारों पर बसे महानगरों, कस्बों और गाँवों की करीब चालीस करोड़ की आबादी की पानी से जुड़ी जरूरतों को यह पूरा करती है। इसके पानी का स्रोत गंगोत्री ग्लेशियर है। पर्यावरण विज्ञानियों का दावा है कि पिछले 87 साल में तीस किलोमीटर लंबे इस ग्लेशियर का पौने दो किलोमीटर हिस्सा पिघलकर गायब हो चुका है। अभी जलवायु परिवर्तन का जो हाल है, वह पूरे हिमालय क्षेत्र के लिए खतरनाक माना जा रहा है। भारत के हिस्से वाले हिमालय में 9775 ग्लेशियर बताए जाते हैं। इनमें अकेले उत्तराखंड में 968 हैं। अब अगर इनके पिघलने की रफ़्तार तेज होती जाती है तो क्या होगा? अल नीनो का प्रभाव पड़ता है :
  1. Aजलवायु पर
  2. Bजल स्रोतों पर
  3. Cमानसून पर
  4. Dमानव पर
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How to attempt

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Frequently asked questions

Is the CTET January 2024 Paper 1, 21 Jan 2024 — Previous Year Paper free to attempt?
Yes. The test is completely free on UTpaper. Sign in with Google or create a free account, click Attempt test, and your score, rank and solutions appear as soon as you submit.
How many questions and how much time does this test have?
The test has 149 questions for 149 marks and must be finished in 150 minutes. There is no negative marking.
Are the answers in this CTET previous year paper official?
Yes. The answer key follows the official final answer key released by the exam board. Where an official answer is debatable, the explanation says so.
What are the sections in this test?
The test has 5 sections: Child Development and Pedagogy (30 questions), Mathematics (30 questions), Environmental Studies (29 questions), Language I (English) (30 questions) and Language II (Hindi) (30 questions).
Can I reattempt the test and see solutions?
Yes. After submitting you see the correct answer and explanation for every question, your accuracy, section-wise marks and all-India rank. You can reattempt as many times as you like.

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