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CTET February 2026 Paper 2 Social Studies, 1 Mar 2026 — Previous Year Paper

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About CTET February 2026 Paper 2 Social Studies, 1 Mar 2026 — Previous Year Paper

This is the actual CTET February 2026 Paper 2 Social Studies, 1 Mar 2026 — Previous Year Paper converted into an online test with the official answer key. Attempt it with the real time limit of 150 minutes to see exactly how you would score in the CTET exam, then go through the solutions to fix weak topics. It is one of 8 free tests in the CTET Paper 2 Social Studies (Class 6-8) Previous Year Papers & Mock Test.

Section-wise pattern

SectionQuestionsMarksCounts for merit?
Child Development and Pedagogy3030Yes
Social Studies6060Yes
Language I (English)3030Yes
Language II (Hindi)3030Yes

Sample questions from this test

Q121
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है । जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है । वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है । निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द भिन्न है ?
  1. Aधैर्य
  2. Bक्षमा
  3. Cदुर्बल
  4. Dक्रोध
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Q122
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है । जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है । वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है । ‘ऊँचाई प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम है ।’ इस वाक्य में ‘सशक्त’ एक ______________ विशेषण है ।
  1. Aपरिमाणवाचक
  2. Bगुणवाचक
  3. Cसार्वनामिक
  4. Dसंख्यावाचक
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Q123
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है । जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है । वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है । क्षमा क्या नहीं है ?
  1. Aआत्म साधना
  2. Bआत्मा का स्वभाव
  3. Cआत्मा का आभूषण
  4. Dआत्मा का नैसर्गिक गुण
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Q124
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है । जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है । वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है । गंतव्य पर कौन पहुँचता है ?
  1. Aक्षमाशील और शांत चित्त व्यक्ति
  2. Bश्रेष्ठ और कुलीन व्यक्ति
  3. Cशांत चित्त और धैर्यवान व्यक्ति
  4. Dसमर्थ और धैर्यवान व्यक्ति
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Q125
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए । अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है । जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है । वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है । धर्म का दरवाजा किसके लिए खुलता है ?
  1. Aक्षमा न माँगने वाले व्यक्ति के लिए
  2. Bक्षमादान न करने वाले के लिए
  3. Cक्षमादान का अभ्यास करने वाले के लिए
  4. Dक्षमा माँगने वाले के लिए
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How to attempt

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Frequently asked questions

Is the CTET February 2026 Paper 2 Social Studies, 1 Mar 2026 — Previous Year Paper free to attempt?
Yes. The test is completely free on UTpaper. Sign in with Google or create a free account, click Attempt test, and your score, rank and solutions appear as soon as you submit.
How many questions and how much time does this test have?
The test has 150 questions for 150 marks and must be finished in 150 minutes. There is no negative marking.
Are the answers in this CTET previous year paper official?
Yes. The answer key follows the official final answer key released by the exam board. Where an official answer is debatable, the explanation says so.
What are the sections in this test?
The test has 4 sections: Child Development and Pedagogy (30 questions), Social Studies (60 questions), Language I (English) (30 questions) and Language II (Hindi) (30 questions).
Can I reattempt the test and see solutions?
Yes. After submitting you see the correct answer and explanation for every question, your accuracy, section-wise marks and all-India rank. You can reattempt as many times as you like.

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