Question 17Asked in BPSC TRE 3.0 (2024) Mathematics Class 9-10 + 7 more papers

निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए -

निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए - (ख) मनुष्य का जीवन संसार के छोटे-बड़े प्राणियों और पदार्थों में श्रेष्ठ माना गया है। वह इसलिए कि मनुष्य बड़ा बुद्धिमान और कल्पनाशील प्राणी है। अपने विचारों के बल पर ही वह जो चाहे कर सकता है और बहुत ऊँचा उठ सकता है। परंतु विचार सच्चे, सादे और पवित्र होने के साथ-साथ मनुष्य के व्यावहारिक जीवन से संबंध रखने वाले होने चाहिए। इन्हीं बातों को आधार बनाकर ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ को मानव-जीवन की सफलता की सीढ़ी माना गया है। सादगी मनुष्य के पहनावे से नहीं, बल्कि उसके प्रत्येक हाव-भाव, विचार तथा जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए। यही वास्तविक सादगी है, जो विचारों को भी उच्च बनाकर सब प्रकार की उन्नति और विकास का कारण बनती है। संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि आरंभ से ही सादगी पसंद व्यक्ति ही जनता को उच्च विचार देकर उन्नति और विकास की राह प्रशस्त करते आ रहे हैं। महात्मा बुद्ध, संत कबीर, गुरू नानक, महात्मा गाँधी, डॉ. राधाकृष्णन, विनोबा भावे आदि इस तथ्य के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। वास्तविक सादगी क्या है?
  1. Aवैचारिक और व्यावहारिक
  2. Bमनुष्य का पहनावा
  3. Cमनुष्य का दिखावा
  4. Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
  5. Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) वैचारिक और व्यावहारिक

Explanation

गद्यांश कहता है कि सादगी पहनावे से नहीं, बल्कि हाव-भाव, विचार और जीवन के ढंग से टपकनी चाहिए; अर्थात् वास्तविक सादगी वैचारिक और व्यावहारिक है।

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