BPSC TRE · Topic-wise previous year questions

Sanskrit Previous Year Questions (page 7)

399 Sanskrit questions asked in BPSC TRE previous year papers, each with the correct answer and explanation. Read them free on UTpaper, or attempt the full papers as timed online tests.

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Q301BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
  1. Aलता गीतं शृण्वती नृत्यति
  2. Bलता गीतं शृण्वन्ती नृत्यंति
  3. Cलता गीतं शृण्वन्ती नृत्यति
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (A) लता गीतं शृण्वती नृत्यति

Explanation

स्त्रीलिंग में शतृ-प्रत्यान्त का रूप "शृण्वती" होता है और क्रिया "नृत्यति"। अतः (A) शुद्ध है।

Q302BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
  1. Aशिष्यं व्याकरणं बोधयति
  2. Bशिष्याय व्याकरणौ बोधयति
  3. Cशिष्याय व्याकरणः बोधयति
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (A) शिष्यं व्याकरणं बोधयति

Explanation

बोधि (पढ़ाना) द्विकर्मक धातु है, उसके दोनों कर्म द्वितीया में आते हैं: शिष्यं व्याकरणं बोधयति। अतः (A) शुद्ध है।

Q303BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
  1. Aबालकः अध्यापकेन पुस्तकं पठति
  2. Bबालकेन अध्यापकं पुस्तकं पठति
  3. Cबालकोऽध्यापकात् पुस्तकं पठति
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (C) बालकोऽध्यापकात् पुस्तकं पठति

Explanation

जिससे विद्या पढ़ी जाती है उसमें अपादान (पञ्चमी) होती है, इसलिए "बालकोऽध्यापकात् पुस्तकं पठति" शुद्ध है। अतः (C)।

Q304BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
  1. Aश्वेतोऽश्वो धावति
  2. Bश्वेतं अश्वः धावति
  3. Cश्वेतं अश्वं धावति
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (A) श्वेतोऽश्वो धावति

Explanation

विशेषण श्वेत का लिंग-वचन-विभक्ति विशेष्य अश्व के अनुसार होती है: श्वेतोऽश्वो धावति। अतः (A) शुद्ध है।

Q305BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
“अहं शुचिः जलं पेयम्”—अस्य वाक्यस्य शुद्धरूपमस्ति
  1. Aमया शुचि जलः पेयम्
  2. Bमया शुचि जलं पेयम्
  3. Cअहं शुचि जलं पेयम्
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (B) मया शुचि जलं पेयम्

Explanation

विधि अर्थ में (कृत्य प्रत्यय) कर्ता तृतीया में आता है और कर्म प्रथमा में: मया शुचि जलं पेयम्। अतः (B) सही है।

Q306BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
“अध्ययनात् पराजयते”—अस्मिन् वाक्ये ‘अध्ययनात्’ इत्यत्र पञ्चमीविभक्तेः कारणमस्ति
  1. Aवारणार्थानामीप्सितः
  2. Bआख्यातोपयोगे
  3. Cल्यब्लोपे कर्मण्यधिकरणे
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (E) न कोऽपि उपयुक्तः

Explanation

"पराजेरसोढः" सूत्र से जिससे पराजय (असहनीय) हो उसमें अपादान होता है। यह कारण दिए गए विकल्पों में नहीं है, इसलिए (E)।

Q307BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्ध-वाक्यं चिनुत
  1. Aतण्डुलै ओदनं पचति
  2. Bतण्डुलेन ओदनं पचति
  3. Cतण्डुलान् ओदनं पचति
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (C) तण्डुलान् ओदनं पचति

Explanation

आयोग की उत्तर-कुंजी के अनुसार (C) "तण्डुलान् ओदनं पचति" शुद्ध है (तण्डुलों को पकाकर ओदन बनाना; दोनों कर्म द्वितीया में)।

Q308BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
  1. Aयोगेन याति
  2. Bयोगाय याति
  3. Cयोगात् याति
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (B) योगाय याति

Explanation

प्रयोजन (तादर्थ्य) बताने में चतुर्थी विभक्ति होती है: योगाय याति (योग के लिए जाता है)। अतः (B) सही है।

Q309BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
  1. Aहरेः ईर्ष्यति
  2. Bहरिणा ईर्ष्यति
  3. Cहरौ ईर्ष्यति
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (E) न कोऽपि उपयुक्तः

Explanation

ईर्ष्या अर्थ वाली धातुओं के योग में जिससे ईर्ष्या हो उसमें चतुर्थी होती है: हरये ईर्ष्यति। यह रूप विकल्पों में नहीं है, इसलिए (E)।

Q310BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
  1. Aकति बालिकाः पठतः
  2. Bकति जनाः पठन्ति
  3. Cकति जना पठति
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (B) कति जनाः पठन्ति

Explanation

"कति" बहुवचन में होता है, इसलिए कर्ता "जनाः" और क्रिया "पठन्ति" बहुवचन में चाहिए। अतः (B) शुद्ध है।

Q311BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्धं शब्दं चिनुत—
  1. Aअक्षिणौः
  2. Bदाराः
  3. Cअक्षी
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (B) दाराः

Explanation

"दार" शब्द नित्य पुल्लिंग बहुवचन में चलता है, इसलिए "दाराः" शुद्ध है। (A) और (C) अशुद्ध रूप हैं। अतः (B)।

Q312BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
“सः ताः पश्यति”—वाक्यस्य कर्मवाच्यं भवति
  1. Aतेन तं दृश्यध्वे
  2. Bतेन तां दृश्यध्वे
  3. Cतेन तां दृश्यन्ते
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (E) न कोऽपि उपयुक्तः

Explanation

कर्मवाच्य में कर्म प्रथमा में रहता है: तेन ताः दृश्यन्ते। दिए गए विकल्पों में यह शुद्ध रूप नहीं है, इसलिए (E)।

Q313BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
“रामेण रावणः अहन्यत”—वाक्यस्य कर्तृवाच्यं भवति
  1. Aरामः रावणम् अहन्येत्
  2. Bरामः रावणम् अहन्
  3. Cरामेण रावणम् अहन्
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (B) रामः रावणम् अहन्

Explanation

कर्मवाच्य के लङ् रूप "अहन्यत" का कर्तृवाच्य "रामः रावणम् अहन्" (लङ्) है। अतः (B) सही है।

Q314BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
  1. Aदम्पती पुत्राय इच्छति
  2. Bदम्पती पुत्रं इच्छति
  3. Cदम्पती पुत्रं इच्छतः
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (C) दम्पती पुत्रं इच्छतः

Explanation

दम्पती द्विवचन है, इसलिए क्रिया द्विवचन "इच्छतः" होगी और कर्म द्वितीया में: दम्पती पुत्रम् इच्छतः। अतः (C)।

Q315BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
  1. Aमया पाठः पठनीयः
  2. Bअस्माभिः पाठाः पठनीयाः
  3. Cअहं पाठः पठनीयः
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (D) एकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः

Explanation

कृत्य प्रत्यय वाले वाक्य में कर्ता तृतीया में और कर्म के अनुसार कृदन्त का लिंग-वचन होता है। (A) और (B) दोनों शुद्ध हैं, इसलिए (D)।

Q316BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
“गवा तृणानि भक्ष्यन्ते”—वाक्यस्य कर्तृवाच्यं भवति
  1. Aगवां तृणानि भक्षन्ते
  2. Bगौः तृणानि भक्षयति
  3. Cगाव तृणानि भक्षयति
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (B) गौः तृणानि भक्षयति

Explanation

कर्मवाच्य का कर्ता (गवा) कर्तृवाच्य में प्रथमा "गौः" हो जाता है और कर्म द्वितीया "तृणानि" रहता है, क्रिया भक्षयति। अतः (B)।

Q317BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
शुद्ध-वाक्यं चिनुत—
  1. Aअह्ना अनुवाकोऽधीतः
  2. Bअह्नस्य अनुवाकोऽधीतः
  3. Cअह्नात् अनुवाकोऽधीतः
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (A) अह्ना अनुवाकोऽधीतः

Explanation

काल की निरन्तरता में कर्म होने से अहन् शब्द की तृतीया (अह्ना) होती है: अह्ना अनुवाकोऽधीतः। अतः (A)।

Q318BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
“सः मह्यं धनम् अददात्”—वाक्यस्य कर्मवाच्यं भवति
  1. Aतेन मह्यं धनम् अदीयत
  2. Bतस्मै मह्यं धनं अदीयत्
  3. Cतेन मह्यं धनं अदीयत्
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (A) तेन मह्यं धनम् अदीयत

Explanation

कर्मवाच्य में कर्ता तृतीया (तेन) और कर्म प्रथमा (धनम्), क्रिया "अदीयत": तेन मह्यं धनम् अदीयत। अतः (A) शुद्ध है।

Q319BPSC TRE 2.0 (2023) Sanskrit Class 6-8
“वयं सर्वे स्वप्स्यामः”—वाक्यस्य भाववाच्यं भवति
  1. Aवयं सर्वे स्वप्यते
  2. Bअस्मभ्यः सर्वेः स्वप्यते
  3. Cअस्माभिः सर्वैः सुप्यते
  4. Dएकाधिकविकल्पा उपयुक्ताः
  5. Eन कोऽपि उपयुक्तः
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Correct answer: (C) अस्माभिः सर्वैः सुप्यते

Explanation

भाववाच्य में कर्ता तृतीया में आता है और क्रिया प्रथम पुरुष एकवचन में: अस्माभिः सर्वैः सुप्यते। अतः (C) सही है।

Q320BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितेषु उपजीव्यं काव्यमस्ति?
  1. Aऋग्वेदः
  2. Bरामायणम्
  3. Cमहाभारतम्
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (D) उपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः

Explanation

रामायण और महाभारत दोनों परवर्ती कवियों के लिए उपजीव्य (आधार) काव्य हैं, जबकि ऋग्वेद काव्य नहीं है; इसलिए एक से अधिक विकल्प सही हैं।

Q321BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
“चतुर्विंशति साहस्री संहिता” इति कस्य विशेषणम्?
  1. Aश्रीमद्भागवत्पुराणस्य
  2. Bमहाभारतस्य
  3. Cरामायणस्य
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (C) रामायणस्य

Explanation

'चतुर्विंशतिसाहस्री संहिता' वाल्मीकि-रामायण को कहते हैं, क्योंकि उसमें लगभग चौबीस हजार श्लोक हैं।

Q322BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितेषु युग्मेषु उचितं युग्मं चिनुत – (क) ऋग्वेदः – शाकलशाखा (ख) यजुर्वेदः – माण्डूकायनशाखा (ग) सामवेदः – काण्वशाखा (घ) अथर्ववेदः – राणायनीयशाखा
  1. Aक
  2. Bख
  3. Cघ
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (A) क

Explanation

ऋग्वेद की शाकल शाखा सही है। माण्डूकायन ऋग्वेद की, काण्व शुक्लयजुर्वेद की तथा राणायनीय सामवेद की शाखा है, इसलिए (ख), (ग), (घ) गलत हैं और केवल (क) सही है।

Q323BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
तालिका – क तथा च तालिका – ख, इत्यनयोर्मध्ये समुचितं सम्बन्धं स्थापयित्वा अधोऽङ्कितेषु कूटेषु-उचितम् उत्तरं चिनुत – तालिका – क: (अ) ऋग्वेदः (इ) यजुर्वेदः (उ) सामवेदः (ए) अथर्ववेद तालिका – ख: (i) शतपथब्राह्मणम् (ii) गोपथब्राह्मणम् (iii) कौषीतकिब्राह्मणम् (iv) ताण्ड्यमहाब्राह्मणम् कूटम्
  1. Aअ-iv, इ-ii, उ-i, ए-iii
  2. Bअ-i, इ-iii, उ-ii, ए-iv
  3. Cअ-iii, इ-i, उ-iv, ए-ii
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (C) अ-iii, इ-i, उ-iv, ए-ii

Explanation

ऋग्वेद का कौषीतकि ब्राह्मण, यजुर्वेद का शतपथ ब्राह्मण, सामवेद का ताण्ड्य महाब्राह्मण और अथर्ववेद का गोपथ ब्राह्मण है; अतः अ-iii, इ-i, उ-iv, ए-ii सही है।

Q324BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
ऋग्वेदस्य विभाजनमस्ति -
  1. Aकाण्डेषु
  2. Bमण्डलेषु
  3. Cअष्टकेषु
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (D) उपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः

Explanation

ऋग्वेद का विभाजन दो प्रकार से मिलता है: दस मण्डलों में और आठ अष्टकों में; इसलिए एक से अधिक विकल्प सही हैं।

Q325BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
ऋग्वेदस्य मन्त्रद्रष्टा ऋषिका अस्ति -
  1. Aअपाला आत्रेयी
  2. Bघोषा काक्षीवती
  3. Cविश्ववारा आत्रेयी
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (D) उपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः

Explanation

अपाला आत्रेयी, घोषा काक्षीवती और विश्ववारा आत्रेयी तीनों ऋग्वेद की मन्त्रद्रष्टा ऋषिकाएँ हैं, इसलिए एक से अधिक उत्तर सही हैं।

Q326BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
कस्य वेदस्य शुक्ल-कृष्ण इति शाखे स्तः?
  1. Aयजुर्वेदस्य
  2. Bअथर्ववेदस्य
  3. Cसामवेदस्य
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (A) यजुर्वेदस्य

Explanation

शुक्ल और कृष्ण नाम की दो शाखाएँ (संहिताएँ) यजुर्वेद की हैं।

Q327BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितेषु सामवेदस्य उपनिषद् अस्ति -
  1. Aबृहदारण्यकोपनिषद्
  2. Bछान्दोग्योपनिषद्
  3. Cमुण्डकोपनिषद्
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (B) छान्दोग्योपनिषद्

Explanation

छान्दोग्योपनिषद् सामवेद का उपनिषद् है; बृहदारण्यक शुक्लयजुर्वेद का और मुण्डक अथर्ववेद का उपनिषद् है।

Q328BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
निरूक्तवेदाङ्गस्य कोऽस्ति कर्ता?
  1. Aपिङ्गलः
  2. Bलगधः
  3. Cयास्कः
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (C) यास्कः

Explanation

निरुक्त नामक वेदाङ्ग के कर्ता यास्क हैं; पिङ्गल छन्दःशास्त्र के और लगध वेदाङ्ग-ज्योतिष के आचार्य हैं।

Q329BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
वेदाङ्गेषु मुखमिति किमुच्यते?
  1. Aछन्दः
  2. Bकल्पः
  3. Cशिक्षा
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (E) उपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति

Explanation

वेदाङ्गों में व्याकरण को मुख कहा जाता है; छन्द को पाद, कल्प को हाथ और शिक्षा को नासिका कहते हैं। इसलिए दिए गए विकल्पों में कोई सही नहीं है।

Q330BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
तालिका–क तथा च तालिका –ख इत्यनयोर्मध्ये समुचितं सम्बन्धं स्थापयित्वा अधोऽङ्कितेषु कूटेषु उचितम् उत्तरं चिनुत – तालिका – क: (अ) छन्दशास्त्रम् (इ) व्याकरणशास्त्रम् (उ) निरूक्तशास्त्रम् (ए) ज्योतिषशास्त्रम् तालिका – ख: (i) लगधः (ii) यास्कः (iii) पिङ्गलः (iv) पाणिनिः कूटम्
  1. Aअ-iii, इ-iv, उ-ii, ए-i
  2. Bअ-i, इ-iv, उ-ii, ए-iii
  3. Cअ-iii, इ-iv, उ-i, ए-ii
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (A) अ-iii, इ-iv, उ-ii, ए-i

Explanation

छन्दःशास्त्र के आचार्य पिङ्गल, व्याकरण के पाणिनि, निरुक्त के यास्क और ज्योतिष के लगध हैं; इसलिए अ-iii, इ-iv, उ-ii, ए-i सही है।

Q331BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितेषु कस्य “रामायण” इत्यनेन सह सम्बन्धो वर्तते?
  1. Aगौडीयपाठः
  2. Bपश्चिमोत्तरीयपाठः
  3. Cदाक्षिणात्यपाठः
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (D) उपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः

Explanation

रामायण के तीन प्रसिद्ध पाठ (संस्करण) हैं: गौडीय, पश्चिमोत्तरीय और दाक्षिणात्य; इसलिए एक से अधिक विकल्प सही हैं।

Q332BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितेषु कस्य सम्बन्धो नास्ति रामायणेन सह?
  1. Aसायणः
  2. Bउव्वटः
  3. Cमहीधरः
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (E) उपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति

Explanation

Note: the official key gives (E). सायण, उव्वट और महीधर तीनों वेदों के भाष्यकार हैं और रामायण से इनका कोई सम्बन्ध नहीं है, इसलिए प्रश्न की भाषा से (D) भी सम्भव लगता है; फिर भी आधिकारिक उत्तर (E) ही रखा गया है।

Q333BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितेषु महाभारतस्य पर्वसु उचितः क्रमः कः?
  1. Aभीष्म, कर्ण, द्रोण, विराट, उद्योग
  2. Bविराट, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण
  3. Cउद्योग, भीष्म, कर्ण, विराट, द्रोण
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (B) विराट, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण

Explanation

महाभारत के पर्वों का क्रम है: आदि, सभा, वन, विराट, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण आदि। यही क्रम (विराट, उद्योग, भीष्म, द्रोण, कर्ण) विकल्प (B) में है।

Q334BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
महाभारते कस्मिन् पर्वणि श्रीमद्भगवद् गीताया वर्णनमस्ति?
  1. Aभीष्मपर्वणि
  2. Bशान्तिपर्वणि
  3. Cआदिपर्वणि
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (A) भीष्मपर्वणि

Explanation

श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत के भीष्मपर्व में आती है।

Q335BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितेषु कतमो महाभारतस्य पर्व नास्ति?
  1. Aस्त्रीपर्व
  2. Bमौसलपर्व
  3. Cकौशलपर्व
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (C) कौशलपर्व

Explanation

महाभारत के पर्वों में स्त्रीपर्व और मौसलपर्व हैं, कौशलपर्व नामक कोई पर्व नहीं है।

Q336BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितेषु को महाभारतस्य टीकाकारो नास्ति?
  1. Aविमलबोधः
  2. Bनीलाम्बरः
  3. Cनीलकण्ठः
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (B) नीलाम्बरः

Explanation

विमलबोध और नीलकण्ठ महाभारत के टीकाकार हैं; नीलाम्बर इस रूप में महाभारत के टीकाकार नहीं हैं।

Q337BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितेषु कस्य गणना महापुराणेषु न भवति?
  1. Aसौरपुराणस्य
  2. Bविष्णुपुराणस्य
  3. Cवराहपुराणस्य
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (A) सौरपुराणस्य

Explanation

सौरपुराण उपपुराण है, महापुराण नहीं; विष्णुपुराण और वराहपुराण अठारह महापुराणों में गिने जाते हैं।

Q338BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
“ऋतुसंहारम्” इति कस्य रचना?
  1. Aआर्यशूरस्य
  2. Bमाघस्य
  3. Cकुमारदासस्य
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (E) उपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति

Explanation

'ऋतुसंहार' कालिदास की रचना है; आर्यशूर, माघ और कुमारदास में से किसी की नहीं, इसलिए कोई विकल्प सही नहीं है।

Q339BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
तालिका–क तथा च तालिका –ख इत्यनयोर्मध्ये समुचितं सम्बन्धं स्थापयित्वा अधोऽङ्कितेषु कूटेषु उचितम् उत्तरं चिनुत – तालिका – क: (अ) उपमा (इ) अर्थगौरवम् (उ) पदलालित्यम् (ए) कारूण्यम् तालिका – ख: (i) भारविः (ii) भवभूतिः (iii) कालिदासः (iv) दण्डी कूटम्
  1. Aअ-i, इ-ii, उ-iii, ए-iv
  2. Bअ-iv, इ-ii, उ-iii, ए-i
  3. Cअ-iii, इ-i, उ-iv, ए-ii
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (C) अ-iii, इ-i, उ-iv, ए-ii

Explanation

उपमा कालिदास की, अर्थगौरव भारवि का, पदलालित्य दण्डी का और कारुण्य भवभूति का गुण माना जाता है; अतः अ-iii, इ-i, उ-iv, ए-ii सही है।

Q340BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितासु रचनासु अश्वघोषस्य रचना नास्ति?
  1. Aसौन्दरनन्दम्
  2. Bजानकीहरणम्
  3. Cबुद्धचरितम्
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (B) जानकीहरणम्

Explanation

सौन्दरनन्द और बुद्धचरित अश्वघोष की रचनाएँ हैं, जबकि जानकीहरण कुमारदास की रचना है।

Q341BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितेषु कस्य गणना गीतिकाव्येषु भवति?
  1. Aसूक्तिमुक्तावली
  2. Bजानकी-परिणय
  3. Cनर्ममाला
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (E) उपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति

Explanation

सूक्तिमुक्तावली (सुभाषित-संग्रह), जानकीपरिणय और नर्ममाला (क्षेमेन्द्र की व्यंग्य-रचना) गीतिकाव्य की श्रेणी में नहीं आते, इसलिए कोई विकल्प सही नहीं है।

Q342BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधस्तनेषु युग्मेषु उचितं युग्मं चिनुत -
  1. Aबृहत्कथा - गुणाढ्य
  2. Bबृहत्कथामञ्जरी - क्षेमेन्द्र
  3. Cकथासरित्सागर - सोमदेव
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (D) उपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः

Explanation

बृहत्कथा के रचयिता गुणाढ्य, बृहत्कथामञ्जरी के क्षेमेन्द्र और कथासरित्सागर के सोमदेव हैं; तीनों युग्म सही हैं।

Q343BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
पञ्चतन्त्रेऽधोऽङ्कितेषु कतमः तन्त्रो नास्ति?
  1. Aअपरीक्षितकारकम्
  2. Bसुपरीक्षितकारकम्
  3. Cलब्धप्रणाशः
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (B) सुपरीक्षितकारकम्

Explanation

पञ्चतन्त्र के पाँच तन्त्र हैं: मित्रभेद, मित्रसम्प्राप्ति, काकोलूकीय, लब्धप्रणाश और अपरीक्षितकारक। 'सुपरीक्षितकारक' उनमें नहीं है।

Q344BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
‘मृच्छकटिकम्’ इत्यस्य नाटकस्य को लेखकः?
  1. Aमुरारिः
  2. Bराजशेखरः
  3. Cभट्टनारायणः
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (E) उपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति

Explanation

'मृच्छकटिक' नाटक के रचयिता शूद्रक हैं, जो दिए गए विकल्पों में नहीं हैं।

Q345BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
अधोऽङ्कितेषु कोऽस्ति गद्यकारः कविः?
  1. Aअम्बिकादत्तव्यासः
  2. Bबाणभट्टः
  3. Cदण्डी
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (D) उपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः

Explanation

अम्बिकादत्तव्यास, बाणभट्ट और दण्डी तीनों संस्कृत के गद्यकार कवि हैं।

Q346BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
निर्देश : अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा तदाधारितानां प्रश्नानां (97-101) विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत - प्रकृतिः समेषां प्राणिनां संरक्षणाय यतते। इयं सर्वान् पुष्णाति विविधैः प्रकारैः, तर्पयति च सुखसाधनैः। पृथिवी, जलं, तेजो, वायुः, आकाशश्चास्याः प्रमुखानि तत्त्वानि। तान्येव मिलित्वा पृथक्तया वाऽस्माकं पर्यावरणं रचयन्ति। आव्रियते परितः समन्तात् लोकोऽनेनेति पर्यावरणम्। यथाऽजातशिशुः मातृगर्भे सुरक्षित-स्तिष्ठति तथैव मानवः पर्यावरणकुक्षौ। परिष्कृतं प्रदूषणरहितं च पर्यावरणमस्मभ्यं सांसारिकं जीवनसुखं, सद्विचारं, सत्यसङ्कल्पं माङ्गलिकसा-मग्रीञ्च प्रददाति। परन्तु स्वार्थान्धो मानवस्तदेव पर्यावरणमद्य नाशयति। स्वल्पलाभाय जना बहुमूल्यानि वस्तूनि नाशयन्ति। यन्त्रागाराणां विषाक्तं जलं नद्यां निपात्यते येन मत्स्यादीनां जलचराणाञ्च क्षणेनैव नाशो जायते। नदी जलमपि तत्सर्वथाऽपेयं जायते। वनवृक्षा निर्विवेकं छिद्यन्ते व्यापार वर्धनाय, येन अवृष्टिः प्रवर्धते, वनपशवश्च शरणरहिता ग्रामेषु उपद्रवं विदधति। शुद्धवायुरपि वृक्षकर्तनात् सङ्कटापन्नो जातः। एवं हि स्वार्थान्धमानवैर्विकृतिमुपगता प्रकृतिरेव तेषां विनाशकर्त्री सञ्जाता। पर्यावरणे विकृतिमुपगते जायन्ते विविधा रोगा भीषणसमस्याश्च। तत्सर्वमिदानीं चिन्तनीयं प्रतिभाति। अस्य गद्यांशस्य किमुचितं शीर्षकम्?
  1. Aपर्यावरणम्
  2. Bप्रकृतिः
  3. Cमानवः
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (A) पर्यावरणम्

Explanation

गद्यांश का मुख्य विषय पर्यावरण है, इसलिए उचित शीर्षक 'पर्यावरणम्' है।

Q347BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
निर्देश : अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा तदाधारितानां प्रश्नानां (97-101) विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत - प्रकृतिः समेषां प्राणिनां संरक्षणाय यतते। इयं सर्वान् पुष्णाति विविधैः प्रकारैः, तर्पयति च सुखसाधनैः। पृथिवी, जलं, तेजो, वायुः, आकाशश्चास्याः प्रमुखानि तत्त्वानि। तान्येव मिलित्वा पृथक्तया वाऽस्माकं पर्यावरणं रचयन्ति। आव्रियते परितः समन्तात् लोकोऽनेनेति पर्यावरणम्। यथाऽजातशिशुः मातृगर्भे सुरक्षित-स्तिष्ठति तथैव मानवः पर्यावरणकुक्षौ। परिष्कृतं प्रदूषणरहितं च पर्यावरणमस्मभ्यं सांसारिकं जीवनसुखं, सद्विचारं, सत्यसङ्कल्पं माङ्गलिकसा-मग्रीञ्च प्रददाति। परन्तु स्वार्थान्धो मानवस्तदेव पर्यावरणमद्य नाशयति। स्वल्पलाभाय जना बहुमूल्यानि वस्तूनि नाशयन्ति। यन्त्रागाराणां विषाक्तं जलं नद्यां निपात्यते येन मत्स्यादीनां जलचराणाञ्च क्षणेनैव नाशो जायते। नदी जलमपि तत्सर्वथाऽपेयं जायते। वनवृक्षा निर्विवेकं छिद्यन्ते व्यापार वर्धनाय, येन अवृष्टिः प्रवर्धते, वनपशवश्च शरणरहिता ग्रामेषु उपद्रवं विदधति। शुद्धवायुरपि वृक्षकर्तनात् सङ्कटापन्नो जातः। एवं हि स्वार्थान्धमानवैर्विकृतिमुपगता प्रकृतिरेव तेषां विनाशकर्त्री सञ्जाता। पर्यावरणे विकृतिमुपगते जायन्ते विविधा रोगा भीषणसमस्याश्च। तत्सर्वमिदानीं चिन्तनीयं प्रतिभाति। स्वार्थान्धो मानवः किं करोति?
  1. Aस्वार्थं साधयति
  2. Bअन्यान् घातयति
  3. Cपर्यावरणं नाशयति
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (C) पर्यावरणं नाशयति

Explanation

गद्यांश के अनुसार स्वार्थ में अन्धा मनुष्य पर्यावरण को नष्ट करता है।

Q348BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
निर्देश : अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा तदाधारितानां प्रश्नानां (97-101) विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत - प्रकृतिः समेषां प्राणिनां संरक्षणाय यतते। इयं सर्वान् पुष्णाति विविधैः प्रकारैः, तर्पयति च सुखसाधनैः। पृथिवी, जलं, तेजो, वायुः, आकाशश्चास्याः प्रमुखानि तत्त्वानि। तान्येव मिलित्वा पृथक्तया वाऽस्माकं पर्यावरणं रचयन्ति। आव्रियते परितः समन्तात् लोकोऽनेनेति पर्यावरणम्। यथाऽजातशिशुः मातृगर्भे सुरक्षित-स्तिष्ठति तथैव मानवः पर्यावरणकुक्षौ। परिष्कृतं प्रदूषणरहितं च पर्यावरणमस्मभ्यं सांसारिकं जीवनसुखं, सद्विचारं, सत्यसङ्कल्पं माङ्गलिकसा-मग्रीञ्च प्रददाति। परन्तु स्वार्थान्धो मानवस्तदेव पर्यावरणमद्य नाशयति। स्वल्पलाभाय जना बहुमूल्यानि वस्तूनि नाशयन्ति। यन्त्रागाराणां विषाक्तं जलं नद्यां निपात्यते येन मत्स्यादीनां जलचराणाञ्च क्षणेनैव नाशो जायते। नदी जलमपि तत्सर्वथाऽपेयं जायते। वनवृक्षा निर्विवेकं छिद्यन्ते व्यापार वर्धनाय, येन अवृष्टिः प्रवर्धते, वनपशवश्च शरणरहिता ग्रामेषु उपद्रवं विदधति। शुद्धवायुरपि वृक्षकर्तनात् सङ्कटापन्नो जातः। एवं हि स्वार्थान्धमानवैर्विकृतिमुपगता प्रकृतिरेव तेषां विनाशकर्त्री सञ्जाता। पर्यावरणे विकृतिमुपगते जायन्ते विविधा रोगा भीषणसमस्याश्च। तत्सर्वमिदानीं चिन्तनीयं प्रतिभाति। अधोऽङ्कितेषु पर्यावरणस्य किमस्ति प्रमुखं तत्त्वम्?
  1. Aउपवनः
  2. Bआकाशः
  3. Cसमुद्रः
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (B) आकाशः

Explanation

गद्यांश में पृथिवी, जल, तेज, वायु और आकाश को पर्यावरण के प्रमुख तत्त्व कहा गया है; विकल्पों में आकाश है।

Q349BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
निर्देश : अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा तदाधारितानां प्रश्नानां (97-101) विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत - प्रकृतिः समेषां प्राणिनां संरक्षणाय यतते। इयं सर्वान् पुष्णाति विविधैः प्रकारैः, तर्पयति च सुखसाधनैः। पृथिवी, जलं, तेजो, वायुः, आकाशश्चास्याः प्रमुखानि तत्त्वानि। तान्येव मिलित्वा पृथक्तया वाऽस्माकं पर्यावरणं रचयन्ति। आव्रियते परितः समन्तात् लोकोऽनेनेति पर्यावरणम्। यथाऽजातशिशुः मातृगर्भे सुरक्षित-स्तिष्ठति तथैव मानवः पर्यावरणकुक्षौ। परिष्कृतं प्रदूषणरहितं च पर्यावरणमस्मभ्यं सांसारिकं जीवनसुखं, सद्विचारं, सत्यसङ्कल्पं माङ्गलिकसा-मग्रीञ्च प्रददाति। परन्तु स्वार्थान्धो मानवस्तदेव पर्यावरणमद्य नाशयति। स्वल्पलाभाय जना बहुमूल्यानि वस्तूनि नाशयन्ति। यन्त्रागाराणां विषाक्तं जलं नद्यां निपात्यते येन मत्स्यादीनां जलचराणाञ्च क्षणेनैव नाशो जायते। नदी जलमपि तत्सर्वथाऽपेयं जायते। वनवृक्षा निर्विवेकं छिद्यन्ते व्यापार वर्धनाय, येन अवृष्टिः प्रवर्धते, वनपशवश्च शरणरहिता ग्रामेषु उपद्रवं विदधति। शुद्धवायुरपि वृक्षकर्तनात् सङ्कटापन्नो जातः। एवं हि स्वार्थान्धमानवैर्विकृतिमुपगता प्रकृतिरेव तेषां विनाशकर्त्री सञ्जाता। पर्यावरणे विकृतिमुपगते जायन्ते विविधा रोगा भीषणसमस्याश्च। तत्सर्वमिदानीं चिन्तनीयं प्रतिभाति। वनवृक्षाणां विनाशेन किं भवति?
  1. Aअवृष्टिः
  2. Bकृषियोग्या भूमिः
  3. Cक्रीडाक्षेत्रम्
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (A) अवृष्टिः

Explanation

गद्यांश के अनुसार वृक्षों के कटने से अवृष्टि (वर्षा का अभाव) बढ़ती है।

Q350BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 9-10
निर्देश : अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा तदाधारितानां प्रश्नानां (97-101) विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत - प्रकृतिः समेषां प्राणिनां संरक्षणाय यतते। इयं सर्वान् पुष्णाति विविधैः प्रकारैः, तर्पयति च सुखसाधनैः। पृथिवी, जलं, तेजो, वायुः, आकाशश्चास्याः प्रमुखानि तत्त्वानि। तान्येव मिलित्वा पृथक्तया वाऽस्माकं पर्यावरणं रचयन्ति। आव्रियते परितः समन्तात् लोकोऽनेनेति पर्यावरणम्। यथाऽजातशिशुः मातृगर्भे सुरक्षित-स्तिष्ठति तथैव मानवः पर्यावरणकुक्षौ। परिष्कृतं प्रदूषणरहितं च पर्यावरणमस्मभ्यं सांसारिकं जीवनसुखं, सद्विचारं, सत्यसङ्कल्पं माङ्गलिकसा-मग्रीञ्च प्रददाति। परन्तु स्वार्थान्धो मानवस्तदेव पर्यावरणमद्य नाशयति। स्वल्पलाभाय जना बहुमूल्यानि वस्तूनि नाशयन्ति। यन्त्रागाराणां विषाक्तं जलं नद्यां निपात्यते येन मत्स्यादीनां जलचराणाञ्च क्षणेनैव नाशो जायते। नदी जलमपि तत्सर्वथाऽपेयं जायते। वनवृक्षा निर्विवेकं छिद्यन्ते व्यापार वर्धनाय, येन अवृष्टिः प्रवर्धते, वनपशवश्च शरणरहिता ग्रामेषु उपद्रवं विदधति। शुद्धवायुरपि वृक्षकर्तनात् सङ्कटापन्नो जातः। एवं हि स्वार्थान्धमानवैर्विकृतिमुपगता प्रकृतिरेव तेषां विनाशकर्त्री सञ्जाता। पर्यावरणे विकृतिमुपगते जायन्ते विविधा रोगा भीषणसमस्याश्च। तत्सर्वमिदानीं चिन्तनीयं प्रतिभाति। मानवः कुत्र सुरक्षितो भवति?
  1. Aगृहे
  2. Bपरिवारे
  3. Cग्रामे
  4. Dउपर्युक्तेषु एकस्मादधिकः
  5. Eउपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति
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Correct answer: (E) उपर्युक्तेषु किञ्चन अपि नास्ति

Explanation

गद्यांश में कहा है कि मनुष्य पर्यावरण की कुक्षि (गोद) में सुरक्षित रहता है; यह उत्तर दिए गए विकल्पों में नहीं है।

How to use these BPSC TRE Sanskrit questions

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