Q1 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 ‘‘मघवा’’ कस्य देवस्य विशेषणमस्ति ?
A इन्द्रस्य B अग्नेः C वरुणस्य D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) इन्द्रस्य
Explanation
‘मघवा’ (मघवन्) इन्द्र का प्रसिद्ध विशेषण/नाम है, जिसका अर्थ है धन या ऐश्वर्य का स्वामी। अतः (A) सही है।
Q2 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 कुमारसम्भवमहाकाव्यं कति सर्गात्मकमस्ति ?
A अष्टादश B सप्तदश C एकोनविंशति D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) सप्तदश
Explanation
कालिदास के कुमारसम्भव महाकाव्य में सत्रह (सप्तदश) सर्ग माने जाते हैं। अतः (B) सही है।
Q3 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 वेदस्य अपौरुषेयत्वं कः स्वीकरोति ?
A विल्सनः B वेबरः C जैमिनी D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) जैमिनी
Explanation
मीमांसा दर्शन के आचार्य जैमिनि वेदों को अपौरुषेय (किसी पुरुष द्वारा रचित नहीं) मानते हैं; विल्सन और वेबर पाश्चात्य विद्वान हैं। अतः (C) सही है।
Q4 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 वेणीसंहारनाटकम् कतिषु अङ्केषु विभक्तमस्ति ?
A सप्तेषु B षट्सु C पञ्चेषु D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) षट्सु
Explanation
भट्टनारायण रचित वेणीसंहार नाटक छः अङ्कों में विभक्त है। अतः (B) सही है।
Q5 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 ‘‘वरं विरोधोऽपि समं महात्मभिः’’-इति सूक्तिः कस्मात् ग्रन्थात् उद्धृता अस्ति ?
A शिशुपालवधम् B किरातार्जुनीयम् C नैषधीयचरितम् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) किरातार्जुनीयम्
Explanation
यह सूक्ति भारवि के महाकाव्य किरातार्जुनीयम् की है। अतः (B) सही है।
Q6 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 ‘चूर्णम्’ अस्ति
A अनाविद्धललितपदगद्यम् B पद्यभागवद् गद्यम् C आविद्धललितपदगद्यम् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) अनाविद्धललितपदगद्यम्
Explanation
गद्य के भेदों में ‘चूर्णम्’ वह गद्य है जिसमें लम्बे समास नहीं होते और पद कोमल होते हैं, अर्थात् अनाविद्ध-ललित-पद वाला गद्य। अतः (A) सही है।
Q7 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 पद्मगुप्तपरिमलेन विरचितं महा-काव्यमस्ति
A नवसाहसाङ्कचरितम् B कुमारपालचरितम् C विक्रमाङ्कदेवचरितम् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) नवसाहसाङ्कचरितम्
Explanation
पद्मगुप्त (परिमल) ने नवसाहसाङ्कचरित महाकाव्य की रचना की, जो राजा सिन्धुराज के जीवन पर आधारित है। अतः (A) सही है।
Q8 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 वेदाङ्ग-ज्योतिषस्य कर्तुः किं नाम अस्ति ?
A पाणिनिः B लगधः C यास्कः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) लगधः
Explanation
वेदाङ्ग ज्योतिष के रचयिता आचार्य लगध माने जाते हैं; पाणिनि व्याकरण के और यास्क निरुक्त के आचार्य हैं। अतः (B) सही है।
Q9 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 कादम्बर्यां चन्द्रापीडः कस्य राज्यस्य युवराजः अस्ति ?
A उज्जयिन्याः B कौशाम्ब्याः C धारानगर्याः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) उज्जयिन्याः
Explanation
बाणभट्ट की कादम्बरी में चन्द्रापीड उज्जयिनी के राजा तारापीड का पुत्र और युवराज है। अतः (A) सही है।
Q10 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 आख्यानोपाख्यानैः उपबृंहितं काव्यमस्ति
A रघुवंशम् B रामायणम् C महाभारतम् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (D) उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम्
Explanation
रामायण और महाभारत दोनों में मुख्य कथा के साथ अनेक आख्यान और उपाख्यान जुड़े हैं, इसलिए (B) और (C) दोनों सही हैं और उत्तर (D) है।
Q11 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 ‘पुराणी देवी’ कस्याः देव्याः विशेषणमस्ति ?
A पृथिव्याः B उषसः C सरस्वत्याः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) उषसः
Explanation
वेदों में उषा देवी को ‘पुराणी देवी’ (पुरानी, सनातन देवी) कहा गया है। अतः (B) सही है।
Q12 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 ‘‘अर्थो हि कन्या परकीय एव’’- पद्यांशोऽयं कस्मिन् ग्रन्थे उल्लिखितोऽस्ति ?
A मृच्छकटिके B वेणीसंहारे C अभिज्ञानशाकुन्तले D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) अभिज्ञानशाकुन्तले
Explanation
यह कथन अभिज्ञानशाकुन्तल (चतुर्थ अङ्क) में कण्व का है कि कन्या वस्तुतः पराया धन होती है। अतः (C) सही है।
Q13 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 वकारादि कति पुराणानि प्रसिद्धानि ?
A चत्वारि B त्रीणि C पञ्च D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) चत्वारि
Explanation
‘व’ से आरम्भ होने वाले पुराण चार हैं: वराह, वामन, वायु और विष्णु। अतः (A) सही है।
Q14 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 ‘‘उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्ष तत् भारतं नाम भारती तत्र सन्ततिः ।।’’ इति पद्यं कस्मिन् पुराणे उल्लिखितमस्ति ?
A ब्रह्मपुराणे B विष्णुपुराणे C स्कन्धपुराणे D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) विष्णुपुराणे
Explanation
भारत की भौगोलिक सीमा बताने वाला यह प्रसिद्ध श्लोक विष्णुपुराण (2.3.1) में आया है। अतः (B) सही है।
Q15 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 कस्मिन् अलंकारे क्रियायाः प्रतिषेधेऽपि फलव्यक्तिः भवति ?
A विभावनाऽलङ्कारे B निदर्शनाऽलङ्कारे C विशेषोक्तिअलङ्कारे D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) विभावनाऽलङ्कारे
Explanation
विभावना अलंकार में कारण (क्रिया) के न होने पर भी कार्य (फल) का होना बताया जाता है। अतः (A) सही है।
Q16 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 रामायणे जटायु-प्रसङ्गः अस्ति
A पताका अर्थप्रकृतिः B बीज अर्थप्रकृतिः C प्रकरी अर्थप्रकृतिः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) प्रकरी अर्थप्रकृतिः
Explanation
नाट्यशास्त्र के अनुसार अर्थप्रकृतियाँ पाँच हैं: बीज, बिन्दु, पताका, प्रकरी और कार्य। जटायु जैसा छोटा प्रासंगिक प्रसंग प्रकरी कहलाता है। इसलिए आधिकारिक कुंजी के अनुसार (C) है।
Q17 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 मेघदूतम् कस्मिन् छन्दे उपनिबद्धमस्ति ?
A मालिनी छन्दे B मालही छन्दे C मन्दाक्रान्ता छन्दे D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) मन्दाक्रान्ता छन्दे
Explanation
कालिदास का मेघदूत मन्दाक्रान्ता छन्द में रचित है। अतः (C) सही है।
Q18 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 कृष्णयजुर्वेदेन सम्बन्धितः उपनिषद् अस्ति
A ईशावास्योपनिषद् B छान्दोग्योपनिषद् C कठोपनिषद् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) कठोपनिषद्
Explanation
कठोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद की कठ शाखा से सम्बद्ध है; ईशावास्य शुक्ल यजुर्वेद की और छान्दोग्य सामवेद की उपनिषद् है। अतः (C) सही है।
Q19 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 रामायणस्य कस्मिन् काण्डे अश्वमेधयज्ञस्य वर्णनमस्ति ?
A सुन्दरकाण्डे B अयोध्याकाण्डे C उत्तरकाण्डे D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) उत्तरकाण्डे
Explanation
राम के अश्वमेध यज्ञ का वर्णन रामायण के उत्तरकाण्ड में मिलता है। अतः (C) सही है।
Q20 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 वासवदत्तायाः कथायाः नायकः कोऽस्ति ?
A चन्द्रकेतुः B कन्दर्पकेतुः C श्वेतकेतुः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) कन्दर्पकेतुः
Explanation
सुबन्धु रचित वासवदत्ता कथा का नायक कन्दर्पकेतु है और नायिका वासवदत्ता है। अतः (B) सही है।
Q21 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 ‘रात्रिर्गमिष्यति भविष्यति सुप्रभातम्’ इति पद्यांशस्य सम्बन्धः केन रचनाकारेण अस्ति ?
A भवभूतिना B भर्तृहरिणा C अम्बिकादत्तव्यासेन D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) अम्बिकादत्तव्यासेन
Explanation
आधिकारिक कुंजी के अनुसार यह पद्यांश अम्बिकादत्त व्यास की रचना से सम्बद्ध है, इसलिए उत्तर (C) है।
Q22 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 रावणवध-महाकाव्यस्य रचयिता कोऽस्ति ?
A आर्यशूरः B भट्टि स्वामी C कुमारदासः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) भट्टि स्वामी
Explanation
रावणवध (भट्टिकाव्य) के रचयिता भट्टि हैं। अतः (B) सही है।
Q23 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 गायत्रीमन्त्रस्य उपास्य देवता वर्तते –
A रुद्रः B अग्निः C सविता D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) सविता
Explanation
गायत्री मन्त्र के देवता सविता (सूर्य) हैं, जिनके तेज का ध्यान किया जाता है। अतः (C) सही है।
Q24 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 नागानन्दनाटकस्य नायिकायाः नाम किमस्ति ?
A मलयवती B इरावती C लक्ष्मी D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) मलयवती
Explanation
हर्ष रचित नागानन्द नाटक की नायिका मलयवती है, जिसका नायक जीमूतवाहन है। अतः (A) सही है।
Q25 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 राजप्रकृतिः कीदृशी भवति ?
A उज्ज्वला B विह्वला C निर्मला D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) विह्वला
Explanation
आधिकारिक कुंजी के अनुसार उत्तर (B) विह्वला है।
Q26 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 स्वप्नवासवदत्तम् किमस्ति ?
A खण्डकाव्यम् B नाटकम् C उपन्यासः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) नाटकम्
Explanation
स्वप्नवासवदत्तम् भास का प्रसिद्ध नाटक है। अतः (B) सही है।
Q27 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 कस्मिन् पुराणे ‘देवीमाहात्म्यम्’ वर्णितमस्ति ?
A भविष्यपुराणे B मार्कण्डेयपुराणे C मत्स्यपुराणे D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) मार्कण्डेयपुराणे
Explanation
दुर्गासप्तशती (देवीमाहात्म्य) मार्कण्डेय पुराण का अंश है। अतः (B) सही है।
Q28 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 पुराणस्य शैली कीदृशी वर्तते ?
A रूपकमयी B अतिशयोक्तिमयी C उपमामयी D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (D) उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम्
Explanation
पुराणों की शैली में रूपक, अतिशयोक्ति और उपमा तीनों का प्रचुर प्रयोग मिलता है, इसलिए तीनों विकल्प सही हैं और उत्तर (D) है।
Q29 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 ‘तिलकमञ्जरी’ का अस्ति ?
A गद्यकाव्यम् B पद्यकाव्यम् C चम्पूकाव्यम् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) गद्यकाव्यम्
Explanation
धनपाल रचित तिलकमञ्जरी एक गद्यकाव्य (कथा) है। अतः (A) सही है।
Q30 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 शिवराजविजयम् कतिषु निःश्वासेषु विभक्तमस्ति ?
A द्वादशेषु B एकादशेषु C त्रयोदशेषु D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) द्वादशेषु
Explanation
अम्बिकादत्त व्यास का शिवराजविजय बारह निःश्वासों में विभक्त है। अतः (A) सही है।
Q31 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 धर्मनीतिकथानां वर्णनं महाभारतस्य कस्मिन् पर्वणि विद्यते ?
A भीष्म पर्वणि B शान्ति पर्वणि C अनुशासन पर्वणि D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) अनुशासन पर्वणि
Explanation
आधिकारिक कुंजी के अनुसार धर्म और नीति की कथाओं वाला पर्व अनुशासन पर्व (C) है।
Q32 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 ‘‘न गृहं गृहमित्याहुर्गृहिणी गृहमुच्यते’’ कस्मिन् ग्रन्थे उल्लिखितमस्ति ?
A रामायणे B भागवतपुराणे C महाभारते D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) महाभारते
Explanation
यह प्रसिद्ध सुभाषित (घर नहीं, गृहिणी ही घर कहलाती है) महाभारत में आया है। अतः (C) सही है।
Q33 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 जयदेवः कस्य ग्रन्थस्य प्रणेता मन्यते ?
A चन्द्रालोकस्य B दशरूपकस्य C काव्यानुशासनस्य D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) चन्द्रालोकस्य
Explanation
अलंकार शास्त्र के ग्रन्थ चन्द्रालोक के रचयिता जयदेव (पीयूषवर्ष) माने जाते हैं। अतः (A) सही है।
Q34 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 भामहकृत काव्यालङ्कारस्य अध्यायाभिधानमस्ति
A परिच्छेदः B अधिकरणम् C उन्मेषः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) परिच्छेदः
Explanation
भामह के काव्यालंकार के अध्यायों को ‘परिच्छेद’ कहा जाता है। अतः (A) सही है।
Q35 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 106-110 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
निखिलमपि संस्कृतवाङ्मयं विशेषतश्चोपनिषत् साहित्यं व्याप्तं आध्यात्मिकया भावनया । अध्यात्मविद्याप्रधानासु उपनिषत्सु संवादरूपेण अतिमनोहराः उपदेशाः समुल्लसन्ति। सर्वेषां संवादानां तात्पर्यविषयीभूतोऽर्थः आत्मानमधिकृत्य एव प्रस्तुतः । छान्दोग्योपनिषद् बृहदारण्यकोपनिषच्चेति उपनिषद्द्वयम् अतीवमहत्त्वपूर्णं दीर्घाकारञ्च । तत्र छान्दोग्योपनिषदि तृतीये भागे घोरोऽङ्गिरसः नाम्नो महर्षेः श्रीकृष्णेन ब्रह्मविद्योपार्जितेति वर्णितम्। षष्ठे च भागे उद्दालकारुणेयात् तदात्मजेन श्वेतकेतु–आरूणेयेन ब्रह्मविद्या प्राप्तिविवेचनम्। एवमुपनिषन्नाम् अध्यात्मविद्यापरमतीवोज्ज्वलं मनस आत्मनश्च अतीव शान्तिप्रदं ब्रह्मविद्यातन्त्रम् ।
बृहदाकारं उपनिषद् अस्ति
A छान्दोग्योपनिषद् B कठोपनिषद् C बृहदारण्यकोपनिषद् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (D) उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम्
Explanation
गद्यांश में छान्दोग्य और बृहदारण्यक दोनों उपनिषदों को अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और दीर्घाकार कहा गया है। विकल्प (A) और (C) सही हैं, इसलिए (D)।
Q36 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 106-110 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
निखिलमपि संस्कृतवाङ्मयं विशेषतश्चोपनिषत् साहित्यं व्याप्तं आध्यात्मिकया भावनया । अध्यात्मविद्याप्रधानासु उपनिषत्सु संवादरूपेण अतिमनोहराः उपदेशाः समुल्लसन्ति। सर्वेषां संवादानां तात्पर्यविषयीभूतोऽर्थः आत्मानमधिकृत्य एव प्रस्तुतः । छान्दोग्योपनिषद् बृहदारण्यकोपनिषच्चेति उपनिषद्द्वयम् अतीवमहत्त्वपूर्णं दीर्घाकारञ्च । तत्र छान्दोग्योपनिषदि तृतीये भागे घोरोऽङ्गिरसः नाम्नो महर्षेः श्रीकृष्णेन ब्रह्मविद्योपार्जितेति वर्णितम्। षष्ठे च भागे उद्दालकारुणेयात् तदात्मजेन श्वेतकेतु–आरूणेयेन ब्रह्मविद्या प्राप्तिविवेचनम्। एवमुपनिषन्नाम् अध्यात्मविद्यापरमतीवोज्ज्वलं मनस आत्मनश्च अतीव शान्तिप्रदं ब्रह्मविद्यातन्त्रम् ।
श्वेतकेतु-आरुणेयः कस्य पुत्रः अस्ति?
A वाजश्रवसः B उद्दालकस्य C ऋष्यशृङ्गस्य D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) उद्दालकस्य
Explanation
गद्यांश के अनुसार श्वेतकेतु आरुणेय, उद्दालक आरुणि के पुत्र हैं। अतः (B) सही है।
Q37 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 106-110 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
निखिलमपि संस्कृतवाङ्मयं विशेषतश्चोपनिषत् साहित्यं व्याप्तं आध्यात्मिकया भावनया । अध्यात्मविद्याप्रधानासु उपनिषत्सु संवादरूपेण अतिमनोहराः उपदेशाः समुल्लसन्ति। सर्वेषां संवादानां तात्पर्यविषयीभूतोऽर्थः आत्मानमधिकृत्य एव प्रस्तुतः । छान्दोग्योपनिषद् बृहदारण्यकोपनिषच्चेति उपनिषद्द्वयम् अतीवमहत्त्वपूर्णं दीर्घाकारञ्च । तत्र छान्दोग्योपनिषदि तृतीये भागे घोरोऽङ्गिरसः नाम्नो महर्षेः श्रीकृष्णेन ब्रह्मविद्योपार्जितेति वर्णितम्। षष्ठे च भागे उद्दालकारुणेयात् तदात्मजेन श्वेतकेतु–आरूणेयेन ब्रह्मविद्या प्राप्तिविवेचनम्। एवमुपनिषन्नाम् अध्यात्मविद्यापरमतीवोज्ज्वलं मनस आत्मनश्च अतीव शान्तिप्रदं ब्रह्मविद्यातन्त्रम् ।
कः महर्षिः श्रीकृष्णेन ब्रह्मविद्यां प्राप्तवान् ?
A भृगुः B वशिष्ठः C अङ्गिरसः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) अङ्गिरसः
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि घोर आङ्गिरस नामक महर्षि ने श्रीकृष्ण से ब्रह्मविद्या प्राप्त की। अतः (C) सही है।
Q38 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 106-110 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
निखिलमपि संस्कृतवाङ्मयं विशेषतश्चोपनिषत् साहित्यं व्याप्तं आध्यात्मिकया भावनया । अध्यात्मविद्याप्रधानासु उपनिषत्सु संवादरूपेण अतिमनोहराः उपदेशाः समुल्लसन्ति। सर्वेषां संवादानां तात्पर्यविषयीभूतोऽर्थः आत्मानमधिकृत्य एव प्रस्तुतः । छान्दोग्योपनिषद् बृहदारण्यकोपनिषच्चेति उपनिषद्द्वयम् अतीवमहत्त्वपूर्णं दीर्घाकारञ्च । तत्र छान्दोग्योपनिषदि तृतीये भागे घोरोऽङ्गिरसः नाम्नो महर्षेः श्रीकृष्णेन ब्रह्मविद्योपार्जितेति वर्णितम्। षष्ठे च भागे उद्दालकारुणेयात् तदात्मजेन श्वेतकेतु–आरूणेयेन ब्रह्मविद्या प्राप्तिविवेचनम्। एवमुपनिषन्नाम् अध्यात्मविद्यापरमतीवोज्ज्वलं मनस आत्मनश्च अतीव शान्तिप्रदं ब्रह्मविद्यातन्त्रम् ।
मनसः आत्मनश्च अतीव शान्तिप्रदं किमस्ति ?
A जीवतन्त्रम् B ब्रह्मतन्त्रम् C लोकतन्त्रम् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) ब्रह्मतन्त्रम्
Explanation
गद्यांश के अन्तिम वाक्य में ब्रह्मविद्या के तन्त्र को मन और आत्मा के लिए अत्यन्त शान्तिदायक कहा गया है। अतः (B) सही है।
Q39 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 106-110 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
निखिलमपि संस्कृतवाङ्मयं विशेषतश्चोपनिषत् साहित्यं व्याप्तं आध्यात्मिकया भावनया । अध्यात्मविद्याप्रधानासु उपनिषत्सु संवादरूपेण अतिमनोहराः उपदेशाः समुल्लसन्ति। सर्वेषां संवादानां तात्पर्यविषयीभूतोऽर्थः आत्मानमधिकृत्य एव प्रस्तुतः । छान्दोग्योपनिषद् बृहदारण्यकोपनिषच्चेति उपनिषद्द्वयम् अतीवमहत्त्वपूर्णं दीर्घाकारञ्च । तत्र छान्दोग्योपनिषदि तृतीये भागे घोरोऽङ्गिरसः नाम्नो महर्षेः श्रीकृष्णेन ब्रह्मविद्योपार्जितेति वर्णितम्। षष्ठे च भागे उद्दालकारुणेयात् तदात्मजेन श्वेतकेतु–आरूणेयेन ब्रह्मविद्या प्राप्तिविवेचनम्। एवमुपनिषन्नाम् अध्यात्मविद्यापरमतीवोज्ज्वलं मनस आत्मनश्च अतीव शान्तिप्रदं ब्रह्मविद्यातन्त्रम् ।
अस्य गद्यांशस्य उचितः शीर्षकः कः ?
A आध्यात्मिकी भावना B पारलौकिकी भावना C पुनर्जन्मवादः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) आध्यात्मिकी भावना
Explanation
पूरे गद्यांश में उपनिषदों की आध्यात्मिक भावना और ब्रह्मविद्या की चर्चा है, इसलिए उचित शीर्षक ‘आध्यात्मिकी भावना’ है। अतः (A) सही है।
Q40 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 111-115 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
स्त्रीणां कृते शिक्षाया महती आवश्यकता एतस्मात् कारणात् वर्तते यत् ता एव समये प्राप्ते मातरो भवन्ति । यथा मातरो भवन्ति, तथैव सन्ततिर्भवति। यदि मातरोऽशिक्षिताः विद्याशून्याः कर्तव्यज्ञानहीनाश्च सन्ति, तर्हि पुत्राः पुत्र्यश्च तथैवाविद्याग्रस्ताः कुशलतारहिताश्च भविष्यन्ति । यदि नार्यः शिक्षिताः सन्ति, तर्हि ताः स्वपुत्राणां पालनं रक्षणं शिक्षणादिकं च सम्यक्तया करिष्यन्ति, एवं तासां सन्ततिः विद्यायुक्ता हृष्टा पुष्टा सद्गुणोपेता च भविष्यति । अतएव महानिर्वाण तन्त्रेऽप्युक्तमस्ति “कन्याऽप्येवं लालनीया शिक्षणीया प्रयत्नतः” विवाहे संजाते कन्याः गृहस्थाश्रमं प्रविशन्ति । यदि पुरुषो विद्वान् स्त्री च विद्याशून्या भवति तर्हि दाम्पत्यजीवनं सुखकरं न भवति। विद्यायाभावात् स्त्री स्वकीयं कर्तव्यं न जानाति, अतएव बहवो रोगा व्याधयश्च तत्र स्थानं कुर्वन्ति । अतः स्त्रीणामपि शिक्षा पुत्राणां शिक्षावदेष आवश्यकी वर्तते। स्त्रियो मातृशक्तेः प्रतीकभूताः सन्ति, अतस्तासां सदा सम्मानः करणीयः। यस्मिन् देशे समाजे च स्त्रीणामादरो भवति, स देशः समाजश्चोन्नतिं प्राप्नुतः । उक्तं च मनुना– “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”।।
‘‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’’ - केन उक्तमस्ति ?
A मनुना B याज्ञवल्क्येन C नारदेन D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) मनुना
Explanation
गद्यांश के अन्त में लिखा है ‘उक्तं च मनुना’, अर्थात् यह वचन मनु का है। अतः (A) सही है।
Q41 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 111-115 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
स्त्रीणां कृते शिक्षाया महती आवश्यकता एतस्मात् कारणात् वर्तते यत् ता एव समये प्राप्ते मातरो भवन्ति । यथा मातरो भवन्ति, तथैव सन्ततिर्भवति। यदि मातरोऽशिक्षिताः विद्याशून्याः कर्तव्यज्ञानहीनाश्च सन्ति, तर्हि पुत्राः पुत्र्यश्च तथैवाविद्याग्रस्ताः कुशलतारहिताश्च भविष्यन्ति । यदि नार्यः शिक्षिताः सन्ति, तर्हि ताः स्वपुत्राणां पालनं रक्षणं शिक्षणादिकं च सम्यक्तया करिष्यन्ति, एवं तासां सन्ततिः विद्यायुक्ता हृष्टा पुष्टा सद्गुणोपेता च भविष्यति । अतएव महानिर्वाण तन्त्रेऽप्युक्तमस्ति “कन्याऽप्येवं लालनीया शिक्षणीया प्रयत्नतः” विवाहे संजाते कन्याः गृहस्थाश्रमं प्रविशन्ति । यदि पुरुषो विद्वान् स्त्री च विद्याशून्या भवति तर्हि दाम्पत्यजीवनं सुखकरं न भवति। विद्यायाभावात् स्त्री स्वकीयं कर्तव्यं न जानाति, अतएव बहवो रोगा व्याधयश्च तत्र स्थानं कुर्वन्ति । अतः स्त्रीणामपि शिक्षा पुत्राणां शिक्षावदेष आवश्यकी वर्तते। स्त्रियो मातृशक्तेः प्रतीकभूताः सन्ति, अतस्तासां सदा सम्मानः करणीयः। यस्मिन् देशे समाजे च स्त्रीणामादरो भवति, स देशः समाजश्चोन्नतिं प्राप्नुतः । उक्तं च मनुना– “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”।।
समाजस्य उन्नतये किमावश्यकम् अस्ति ?
A बन्धुत्वराहित्यम् B स्त्रीणामादरम् C धनापचयनम् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) स्त्रीणामादरम्
Explanation
गद्यांश के अनुसार जिस देश और समाज में स्त्रियों का आदर होता है, वह उन्नति पाता है। अतः (B) सही है।
Q42 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 111-115 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
स्त्रीणां कृते शिक्षाया महती आवश्यकता एतस्मात् कारणात् वर्तते यत् ता एव समये प्राप्ते मातरो भवन्ति । यथा मातरो भवन्ति, तथैव सन्ततिर्भवति। यदि मातरोऽशिक्षिताः विद्याशून्याः कर्तव्यज्ञानहीनाश्च सन्ति, तर्हि पुत्राः पुत्र्यश्च तथैवाविद्याग्रस्ताः कुशलतारहिताश्च भविष्यन्ति । यदि नार्यः शिक्षिताः सन्ति, तर्हि ताः स्वपुत्राणां पालनं रक्षणं शिक्षणादिकं च सम्यक्तया करिष्यन्ति, एवं तासां सन्ततिः विद्यायुक्ता हृष्टा पुष्टा सद्गुणोपेता च भविष्यति । अतएव महानिर्वाण तन्त्रेऽप्युक्तमस्ति “कन्याऽप्येवं लालनीया शिक्षणीया प्रयत्नतः” विवाहे संजाते कन्याः गृहस्थाश्रमं प्रविशन्ति । यदि पुरुषो विद्वान् स्त्री च विद्याशून्या भवति तर्हि दाम्पत्यजीवनं सुखकरं न भवति। विद्यायाभावात् स्त्री स्वकीयं कर्तव्यं न जानाति, अतएव बहवो रोगा व्याधयश्च तत्र स्थानं कुर्वन्ति । अतः स्त्रीणामपि शिक्षा पुत्राणां शिक्षावदेष आवश्यकी वर्तते। स्त्रियो मातृशक्तेः प्रतीकभूताः सन्ति, अतस्तासां सदा सम्मानः करणीयः। यस्मिन् देशे समाजे च स्त्रीणामादरो भवति, स देशः समाजश्चोन्नतिं प्राप्नुतः । उक्तं च मनुना– “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”।।
दाम्पत्य जीवनस्य कृते किमावश्यकम् ?
A ऐश्वर्यम् B धनम् C विद्या D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) विद्या
Explanation
गद्यांश में कहा है कि पुरुष विद्वान् हो और स्त्री विद्याहीन हो तो दाम्पत्य जीवन सुखकर नहीं होता; अतः दोनों के लिए विद्या आवश्यक है। उत्तर (C)।
Q43 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 111-115 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
स्त्रीणां कृते शिक्षाया महती आवश्यकता एतस्मात् कारणात् वर्तते यत् ता एव समये प्राप्ते मातरो भवन्ति । यथा मातरो भवन्ति, तथैव सन्ततिर्भवति। यदि मातरोऽशिक्षिताः विद्याशून्याः कर्तव्यज्ञानहीनाश्च सन्ति, तर्हि पुत्राः पुत्र्यश्च तथैवाविद्याग्रस्ताः कुशलतारहिताश्च भविष्यन्ति । यदि नार्यः शिक्षिताः सन्ति, तर्हि ताः स्वपुत्राणां पालनं रक्षणं शिक्षणादिकं च सम्यक्तया करिष्यन्ति, एवं तासां सन्ततिः विद्यायुक्ता हृष्टा पुष्टा सद्गुणोपेता च भविष्यति । अतएव महानिर्वाण तन्त्रेऽप्युक्तमस्ति “कन्याऽप्येवं लालनीया शिक्षणीया प्रयत्नतः” विवाहे संजाते कन्याः गृहस्थाश्रमं प्रविशन्ति । यदि पुरुषो विद्वान् स्त्री च विद्याशून्या भवति तर्हि दाम्पत्यजीवनं सुखकरं न भवति। विद्यायाभावात् स्त्री स्वकीयं कर्तव्यं न जानाति, अतएव बहवो रोगा व्याधयश्च तत्र स्थानं कुर्वन्ति । अतः स्त्रीणामपि शिक्षा पुत्राणां शिक्षावदेष आवश्यकी वर्तते। स्त्रियो मातृशक्तेः प्रतीकभूताः सन्ति, अतस्तासां सदा सम्मानः करणीयः। यस्मिन् देशे समाजे च स्त्रीणामादरो भवति, स देशः समाजश्चोन्नतिं प्राप्नुतः । उक्तं च मनुना– “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”।।
मातृशक्तेः प्रतीकभूताः काः ?
A प्रकृतिः B देवताः C स्त्रियः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) स्त्रियः
Explanation
गद्यांश में कहा गया है ‘स्त्रियो मातृशक्तेः प्रतीकभूताः सन्ति’। अतः (C) सही है।
Q44 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 111-115 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
स्त्रीणां कृते शिक्षाया महती आवश्यकता एतस्मात् कारणात् वर्तते यत् ता एव समये प्राप्ते मातरो भवन्ति । यथा मातरो भवन्ति, तथैव सन्ततिर्भवति। यदि मातरोऽशिक्षिताः विद्याशून्याः कर्तव्यज्ञानहीनाश्च सन्ति, तर्हि पुत्राः पुत्र्यश्च तथैवाविद्याग्रस्ताः कुशलतारहिताश्च भविष्यन्ति । यदि नार्यः शिक्षिताः सन्ति, तर्हि ताः स्वपुत्राणां पालनं रक्षणं शिक्षणादिकं च सम्यक्तया करिष्यन्ति, एवं तासां सन्ततिः विद्यायुक्ता हृष्टा पुष्टा सद्गुणोपेता च भविष्यति । अतएव महानिर्वाण तन्त्रेऽप्युक्तमस्ति “कन्याऽप्येवं लालनीया शिक्षणीया प्रयत्नतः” विवाहे संजाते कन्याः गृहस्थाश्रमं प्रविशन्ति । यदि पुरुषो विद्वान् स्त्री च विद्याशून्या भवति तर्हि दाम्पत्यजीवनं सुखकरं न भवति। विद्यायाभावात् स्त्री स्वकीयं कर्तव्यं न जानाति, अतएव बहवो रोगा व्याधयश्च तत्र स्थानं कुर्वन्ति । अतः स्त्रीणामपि शिक्षा पुत्राणां शिक्षावदेष आवश्यकी वर्तते। स्त्रियो मातृशक्तेः प्रतीकभूताः सन्ति, अतस्तासां सदा सम्मानः करणीयः। यस्मिन् देशे समाजे च स्त्रीणामादरो भवति, स देशः समाजश्चोन्नतिं प्राप्नुतः । उक्तं च मनुना– “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”।।
गद्यांशस्य उपयुक्तः शीर्षकः कोऽस्ति ?
A स्त्रीशिक्षायाः आवश्यकता B पुरुषशिक्षायाः महत्त्वम् C समाजविकासः D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) स्त्रीशिक्षायाः आवश्यकता
Explanation
पूरा गद्यांश स्त्रियों की शिक्षा की आवश्यकता पर केन्द्रित है, इसलिए उचित शीर्षक (A) है।
Q45 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 116-120 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
यत् सर्वलोकहित सम्पादने प्रभवति, सर्वस्य च जगतः सुखभावहति, समाजस्य च संरक्षणं विदधाति, तत् सत्यम्। दार्शनिकदृष्ट्या यद् वस्तु शाश्वत रूपेण स्थायि अविनश्वरं च तत् सत्यम् । यत्र देशकालादिभेदेऽपि न वैपरीत्यं परिवर्तन क्षमत्वं वा तत् सत्यमिति । तथाविध विवेचनया जगति ब्रह्मैव सत्यम् इति दर्शनविद्भिः संस्थाप्यते । अत्र दार्शनिकं सत्यं न विवक्षितम्, इति लौकिक सत्यमेव विव्रियते। यद् वस्तु येन रूपेण विद्यते, तस्य तेनैव रूपेण प्रकाशनं विवरणम् अभिधानं च सत्यम् इत्यनेनाभिप्रेतम्। धर्मस्य मूलं सत्यम् । सत्यमेव धर्मः । नहि धर्मः सत्याद् अतिरिच्यते । सत्यं ज्योतिः, सत्यमेव जीवनं द्योतयति ज्वलयति च। सत्यं ब्रह्मणस्तत्त्वम् । अतएव ‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ इति वेदान्तविद्भिःरुदीर्यते। ब्रह्मैव सत्यं, सत्यं च ब्रह्मात्मकम् इति सुकरं वक्तुम्। अतएव ईश्वरस्य स्वस्य निर्देशात्मके सच्चिदानन्दशब्दे सत् शब्दः प्राङ् निर्दिश्यते । छान्दोऽग्योपनिषदि बृहदारण्यकोपनिषदि च सत्यमेव ब्रह्मेति प्रतिपाद्यते तदेव च जिज्ञासितव्यम्।
सत्यं ब्रह्मेति, सत्यं ह्येव ब्रह्म। बृहदारकारोपनिषद् 5/4/2
सत्यं त्वेव विजिज्ञासितव्यम् । छान्दोग्योपनिषद् 7/16/2
सत्यं किमस्ति ?
A कामस्यमूलम् B अर्थस्यमूलम् C धर्मस्यमूलम् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (C) धर्मस्यमूलम्
Explanation
गद्यांश में स्पष्ट लिखा है ‘धर्मस्य मूलं सत्यम्’। अतः (C) सही है।
Q46 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 116-120 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
यत् सर्वलोकहित सम्पादने प्रभवति, सर्वस्य च जगतः सुखभावहति, समाजस्य च संरक्षणं विदधाति, तत् सत्यम्। दार्शनिकदृष्ट्या यद् वस्तु शाश्वत रूपेण स्थायि अविनश्वरं च तत् सत्यम् । यत्र देशकालादिभेदेऽपि न वैपरीत्यं परिवर्तन क्षमत्वं वा तत् सत्यमिति । तथाविध विवेचनया जगति ब्रह्मैव सत्यम् इति दर्शनविद्भिः संस्थाप्यते । अत्र दार्शनिकं सत्यं न विवक्षितम्, इति लौकिक सत्यमेव विव्रियते। यद् वस्तु येन रूपेण विद्यते, तस्य तेनैव रूपेण प्रकाशनं विवरणम् अभिधानं च सत्यम् इत्यनेनाभिप्रेतम्। धर्मस्य मूलं सत्यम् । सत्यमेव धर्मः । नहि धर्मः सत्याद् अतिरिच्यते । सत्यं ज्योतिः, सत्यमेव जीवनं द्योतयति ज्वलयति च। सत्यं ब्रह्मणस्तत्त्वम् । अतएव ‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ इति वेदान्तविद्भिःरुदीर्यते। ब्रह्मैव सत्यं, सत्यं च ब्रह्मात्मकम् इति सुकरं वक्तुम्। अतएव ईश्वरस्य स्वस्य निर्देशात्मके सच्चिदानन्दशब्दे सत् शब्दः प्राङ् निर्दिश्यते । छान्दोऽग्योपनिषदि बृहदारण्यकोपनिषदि च सत्यमेव ब्रह्मेति प्रतिपाद्यते तदेव च जिज्ञासितव्यम्।
सत्यं ब्रह्मेति, सत्यं ह्येव ब्रह्म। बृहदारकारोपनिषद् 5/4/2
सत्यं त्वेव विजिज्ञासितव्यम् । छान्दोग्योपनिषद् 7/16/2
जगति सर्वविधायकं किमस्ति ?
A ऐश्वर्यम् B सत्यम् C अविद्या D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) सत्यम्
Explanation
गद्यांश के अनुसार जो सब लोकों का हित करता है, जगत् को सुख देता और समाज की रक्षा करता है, वही सत्य है। अतः (B) सही है।
Q47 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 116-120 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
यत् सर्वलोकहित सम्पादने प्रभवति, सर्वस्य च जगतः सुखभावहति, समाजस्य च संरक्षणं विदधाति, तत् सत्यम्। दार्शनिकदृष्ट्या यद् वस्तु शाश्वत रूपेण स्थायि अविनश्वरं च तत् सत्यम् । यत्र देशकालादिभेदेऽपि न वैपरीत्यं परिवर्तन क्षमत्वं वा तत् सत्यमिति । तथाविध विवेचनया जगति ब्रह्मैव सत्यम् इति दर्शनविद्भिः संस्थाप्यते । अत्र दार्शनिकं सत्यं न विवक्षितम्, इति लौकिक सत्यमेव विव्रियते। यद् वस्तु येन रूपेण विद्यते, तस्य तेनैव रूपेण प्रकाशनं विवरणम् अभिधानं च सत्यम् इत्यनेनाभिप्रेतम्। धर्मस्य मूलं सत्यम् । सत्यमेव धर्मः । नहि धर्मः सत्याद् अतिरिच्यते । सत्यं ज्योतिः, सत्यमेव जीवनं द्योतयति ज्वलयति च। सत्यं ब्रह्मणस्तत्त्वम् । अतएव ‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ इति वेदान्तविद्भिःरुदीर्यते। ब्रह्मैव सत्यं, सत्यं च ब्रह्मात्मकम् इति सुकरं वक्तुम्। अतएव ईश्वरस्य स्वस्य निर्देशात्मके सच्चिदानन्दशब्दे सत् शब्दः प्राङ् निर्दिश्यते । छान्दोऽग्योपनिषदि बृहदारण्यकोपनिषदि च सत्यमेव ब्रह्मेति प्रतिपाद्यते तदेव च जिज्ञासितव्यम्।
सत्यं ब्रह्मेति, सत्यं ह्येव ब्रह्म। बृहदारकारोपनिषद् 5/4/2
सत्यं त्वेव विजिज्ञासितव्यम् । छान्दोग्योपनिषद् 7/16/2
‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ - केषां उक्तिः वर्तते ?
A वेदान्तविदाम् B योगिनाम् C मीमांसकानाम् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) वेदान्तविदाम्
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि ‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ वेदान्त जानने वाले (वेदान्तविद्) कहते हैं। अतः (A) सही है।
Q48 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 116-120 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
यत् सर्वलोकहित सम्पादने प्रभवति, सर्वस्य च जगतः सुखभावहति, समाजस्य च संरक्षणं विदधाति, तत् सत्यम्। दार्शनिकदृष्ट्या यद् वस्तु शाश्वत रूपेण स्थायि अविनश्वरं च तत् सत्यम् । यत्र देशकालादिभेदेऽपि न वैपरीत्यं परिवर्तन क्षमत्वं वा तत् सत्यमिति । तथाविध विवेचनया जगति ब्रह्मैव सत्यम् इति दर्शनविद्भिः संस्थाप्यते । अत्र दार्शनिकं सत्यं न विवक्षितम्, इति लौकिक सत्यमेव विव्रियते। यद् वस्तु येन रूपेण विद्यते, तस्य तेनैव रूपेण प्रकाशनं विवरणम् अभिधानं च सत्यम् इत्यनेनाभिप्रेतम्। धर्मस्य मूलं सत्यम् । सत्यमेव धर्मः । नहि धर्मः सत्याद् अतिरिच्यते । सत्यं ज्योतिः, सत्यमेव जीवनं द्योतयति ज्वलयति च। सत्यं ब्रह्मणस्तत्त्वम् । अतएव ‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ इति वेदान्तविद्भिःरुदीर्यते। ब्रह्मैव सत्यं, सत्यं च ब्रह्मात्मकम् इति सुकरं वक्तुम्। अतएव ईश्वरस्य स्वस्य निर्देशात्मके सच्चिदानन्दशब्दे सत् शब्दः प्राङ् निर्दिश्यते । छान्दोऽग्योपनिषदि बृहदारण्यकोपनिषदि च सत्यमेव ब्रह्मेति प्रतिपाद्यते तदेव च जिज्ञासितव्यम्।
सत्यं ब्रह्मेति, सत्यं ह्येव ब्रह्म। बृहदारकारोपनिषद् 5/4/2
सत्यं त्वेव विजिज्ञासितव्यम् । छान्दोग्योपनिषद् 7/16/2
समाजस्य संरक्षणं यद् विदधाति तत् अस्ति
A सत्यम् B अर्थम् C कामम् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (A) सत्यम्
Explanation
गद्यांश के आरम्भ में कहा है कि जो समाज का संरक्षण करता है वह सत्य है। अतः (A) सही है।
Q49 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 116-120 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
यत् सर्वलोकहित सम्पादने प्रभवति, सर्वस्य च जगतः सुखभावहति, समाजस्य च संरक्षणं विदधाति, तत् सत्यम्। दार्शनिकदृष्ट्या यद् वस्तु शाश्वत रूपेण स्थायि अविनश्वरं च तत् सत्यम् । यत्र देशकालादिभेदेऽपि न वैपरीत्यं परिवर्तन क्षमत्वं वा तत् सत्यमिति । तथाविध विवेचनया जगति ब्रह्मैव सत्यम् इति दर्शनविद्भिः संस्थाप्यते । अत्र दार्शनिकं सत्यं न विवक्षितम्, इति लौकिक सत्यमेव विव्रियते। यद् वस्तु येन रूपेण विद्यते, तस्य तेनैव रूपेण प्रकाशनं विवरणम् अभिधानं च सत्यम् इत्यनेनाभिप्रेतम्। धर्मस्य मूलं सत्यम् । सत्यमेव धर्मः । नहि धर्मः सत्याद् अतिरिच्यते । सत्यं ज्योतिः, सत्यमेव जीवनं द्योतयति ज्वलयति च। सत्यं ब्रह्मणस्तत्त्वम् । अतएव ‘ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या’ इति वेदान्तविद्भिःरुदीर्यते। ब्रह्मैव सत्यं, सत्यं च ब्रह्मात्मकम् इति सुकरं वक्तुम्। अतएव ईश्वरस्य स्वस्य निर्देशात्मके सच्चिदानन्दशब्दे सत् शब्दः प्राङ् निर्दिश्यते । छान्दोऽग्योपनिषदि बृहदारण्यकोपनिषदि च सत्यमेव ब्रह्मेति प्रतिपाद्यते तदेव च जिज्ञासितव्यम्।
सत्यं ब्रह्मेति, सत्यं ह्येव ब्रह्म। बृहदारकारोपनिषद् 5/4/2
सत्यं त्वेव विजिज्ञासितव्यम् । छान्दोग्योपनिषद् 7/16/2
सत्यं जनं कस्मात् रक्षति ?
A दुःखात् B पापात् C भयात् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (E) उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति
Explanation
गद्यांश में सत्य को समाज का संरक्षक कहा गया है, पर दुःख, पाप या भय से रक्षा करने की बात नहीं कही गई। इसलिए कोई भी विकल्प उपयुक्त नहीं, उत्तर (E)।
Q50 BPSC TRE 3.0 (2024) Sanskrit Class 6-8 निर्देशः – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा 121-125 प्रश्नानां विकल्पात्मकोत्तरेभ्यः उचिततमम् उत्तरं चित्वा लिखत –
स्वराज्यं हि नाम राष्ट्रस्य परमोत्कर्षधायकं तत्त्वम् । सर्वेषां स्वराष्ट्रिय प्रजाजनानां सम्मत्या प्रतिविध्यविधया प्रवर्तितं यद्राज्यं तत्स्वराज्यपदेन व्यपदिश्यते । तादृशस्वराज्योपलब्ध्यर्थमेव जनैः प्रयतितव्यम् इति ऋग्वेदेऽपि समुपदिष्टम् । वेदे स्वराज्य - महिमा वर्णनार्थमेकमखिलं सूक्तमेव पठ्यते तद्धि स्वराज्यसूक्तमिति नाम्ना कथ्यते । अन्यत्रापि बहुत्र स्वराज्य गुणगरिमाऽवलोक्यते। कस्यापि राष्ट्रस्य कृते स्वराज्यसदृशमन्यत् भूतं प्रभूतं वैभवं नास्ति। एतेन ध्वन्यते प्रस्फुटं यत् प्रजातन्त्रं शासनमपि तदेवोत्कृष्टं यत्स्वराज्यसंवलितं भवेत् । एष प्रजातन्त्रप्रसङ्गः अन्यत्रापि संस्कृतसाहित्ये दरीदृश्यते । प्रायशः वर्षाणां सहस्रद्वयी व्यतीयाय यदा राजनीति निपुणः कौटल्यापरनामधेयः आचार्य चाणक्यः बभूव। तेन कूटनीतिधुरंधरेण एकायत्तं नन्दवंश प्रशासनमुदिश्य मौर्यकुलभूषणं चन्द्रगुप्तं राज्यसिंहासने प्रतिष्ठापयामास । महान् राजनीतिज्ञः कौटिल्यः चन्द्रगुप्तस्य कृते साम्राज्यधुरं निर्वोढुमर्थशास्त्रविधं लोक विश्रुतं राजनीतितन्त्रं प्रणिनाय। यत्र प्रजातन्त्रपद्धतिमेवावलभ्य राज्यतन्त्रं सञ्चालयितव्यमिति सर्वं सुनिपुणं प्रतिपादितम् ।
उत्कृष्टं प्रजातन्त्रशासनमस्ति
A राजाश्रितम् B स्वराज्यसंवलितम् C अनुकम्पाश्रितम् D उपर्युक्तेषु एकस्मात् अधिकम् E उपर्युक्तेषु कश्चन अपि नास्ति Show answer Hide answer Correct answer: (B) स्वराज्यसंवलितम्
Explanation
गद्यांश के अनुसार वही प्रजातन्त्र शासन उत्कृष्ट है जो स्वराज्य से युक्त (स्वराज्यसंवलित) हो। अतः (B) सही है।