853 Hindi questions asked in BPSC TRE previous year papers, each with the correct answer and explanation. Read them free on UTpaper, or attempt the full papers as timed online tests.
निर्देश : (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए -
मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है। उसकी प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है। प्रात: कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं। वाटिका के पुष्प उनका पथ सुरभित करते हैं। वैश्वीकरण में दशों दिशाओं में मानव - मार्ग प्रशस्त हो गया है।
‘मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है।’ में किसकी चर्चा की गई है?
Aविधाता की
Bविधाता की सृष्टि की
Cमनुष्य की
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) मनुष्य की
Explanation
गद्यांश के पहले ही वाक्य में मनुष्य को विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी बताया गया है, अर्थात् चर्चा मनुष्य की है।
निर्देश : (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए -
मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है। उसकी प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है। प्रात: कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं। वाटिका के पुष्प उनका पथ सुरभित करते हैं। वैश्वीकरण में दशों दिशाओं में मानव - मार्ग प्रशस्त हो गया है।
प्रकृति परिवेश किसके लिए मुस्कराता है?
Aमनुष्य के लिए
Bसृष्टि के लिए
Cविधाता के लिए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) मनुष्य के लिए
Explanation
गद्यांश के अनुसार मनुष्य की प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है।
निर्देश : (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए -
मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है। उसकी प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है। प्रात: कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं। वाटिका के पुष्प उनका पथ सुरभित करते हैं। वैश्वीकरण में दशों दिशाओं में मानव - मार्ग प्रशस्त हो गया है।
जागरण गीत कौन गा रहा है?
Aसूर्य
Bकिरणें
Cप्रात: काल
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) किरणें
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि प्रात:कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं।
निर्देश : (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए -
मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है। उसकी प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है। प्रात: कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं। वाटिका के पुष्प उनका पथ सुरभित करते हैं। वैश्वीकरण में दशों दिशाओं में मानव - मार्ग प्रशस्त हो गया है।
वाटिका के पुष्प किसका पथ सुरभित करते हैं?
Aमनुष्य का
Bसृष्टि का
Cसूर्य का
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) मनुष्य का
Explanation
गद्यांश के अनुसार वाटिका के पुष्प मनुष्य का पथ सुरभित करते हैं ('उसकी प्रगति' के संदर्भ में)।
निर्देश : (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए -
मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है। उसकी प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है। प्रात: कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं। वाटिका के पुष्प उनका पथ सुरभित करते हैं। वैश्वीकरण में दशों दिशाओं में मानव - मार्ग प्रशस्त हो गया है।
वैश्वीकरण में मार्ग प्रशस्त होने का क्या अर्थ है?
Aहजारों मार्ग होना
Bसैकड़ों मार्ग होना
Cमार्ग सुलभ होना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) मार्ग सुलभ होना
Explanation
'मार्ग प्रशस्त होने' का अर्थ है मार्ग का चौड़ा, अर्थात् सुलभ हो जाना।
निर्देश (प्रश्न संख्या 91 से 95 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए
मनुष्य अपनी सफलता और प्रसन्नता के लिए बचपन से ही प्रयत्नशील रहता है। सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है। माँ की मुस्कान देख हँसने की इच्छा जग जाती है। पिता की उँगली पकड़ कर भागने की इच्छा जग जाती है। साहित्य-चर्चा और सृजन धर्म अपनाने से सरस्वती के उपासक बन जाते हैं।
इसमें किसकी चर्चा की गई है?
Aप्रयत्न की
Bसफलता की
Cप्रसन्नता की
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (E) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Explanation
गद्यांश में सफलता, प्रसन्नता, सहजानुभूति, साहित्य-सृजन आदि अनेक बातें आई हैं, अतः दिए गए तीनों विकल्पों में से केवल एक को उत्तर नहीं कहा जा सकता; आयोग की कुंजी के अनुसार उत्तर 'कोई नहीं' है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 91 से 95 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए
मनुष्य अपनी सफलता और प्रसन्नता के लिए बचपन से ही प्रयत्नशील रहता है। सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है। माँ की मुस्कान देख हँसने की इच्छा जग जाती है। पिता की उँगली पकड़ कर भागने की इच्छा जग जाती है। साहित्य-चर्चा और सृजन धर्म अपनाने से सरस्वती के उपासक बन जाते हैं।
गतिशील रहने की ऊर्जा कब मिलती है?
Aअनुभूति में
Bसहजता में
Cसहजानुभूति में
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) सहजानुभूति में
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 91 से 95 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए
मनुष्य अपनी सफलता और प्रसन्नता के लिए बचपन से ही प्रयत्नशील रहता है। सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है। माँ की मुस्कान देख हँसने की इच्छा जग जाती है। पिता की उँगली पकड़ कर भागने की इच्छा जग जाती है। साहित्य-चर्चा और सृजन धर्म अपनाने से सरस्वती के उपासक बन जाते हैं।
बच्चे को हँसने की इच्छा कब होती है?
Aमाँ को देखकर
Bमुस्कान देखकर
Cमाँ की मुस्कान देखकर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) माँ की मुस्कान देखकर
Explanation
गद्यांश के अनुसार माँ की मुस्कान देखकर हँसने की इच्छा जाग जाती है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 91 से 95 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए
मनुष्य अपनी सफलता और प्रसन्नता के लिए बचपन से ही प्रयत्नशील रहता है। सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है। माँ की मुस्कान देख हँसने की इच्छा जग जाती है। पिता की उँगली पकड़ कर भागने की इच्छा जग जाती है। साहित्य-चर्चा और सृजन धर्म अपनाने से सरस्वती के उपासक बन जाते हैं।
पिता की उँगली पकड़ कर किसे भागने की इच्छा होती है?
Aपुत्र की
Bपुत्री की
Cदोस्त की
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
गद्यांश में केवल 'भागने की इच्छा' की बात है, बच्चा पुत्र या पुत्री कोई भी हो सकता है; इसलिए (A) और (B) दोनों संभव हैं, अतः उत्तर 'एक से अधिक' है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 91 से 95 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए
मनुष्य अपनी सफलता और प्रसन्नता के लिए बचपन से ही प्रयत्नशील रहता है। सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है। माँ की मुस्कान देख हँसने की इच्छा जग जाती है। पिता की उँगली पकड़ कर भागने की इच्छा जग जाती है। साहित्य-चर्चा और सृजन धर्म अपनाने से सरस्वती के उपासक बन जाते हैं।
सरस्वती के उपासक कैसे बनते हैं?
Aसाहित्य-चर्चा से
Bसाहित्य-सृजन से
Cसाहित्य-चर्चा और साहित्य-सृजन से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) साहित्य-चर्चा और साहित्य-सृजन से
Explanation
गद्यांश के अनुसार साहित्य-चर्चा और सृजन-धर्म अपनाने से मनुष्य सरस्वती का उपासक बन जाता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 96 से 100 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर- पत्रक में चिह्नित कीजिए -
पर्वत के झर-झर झरते, झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश संगीतमय बना देते हैं। तरंगों से मचलती सरिता अपने निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है। पर्वत से लुढ़कता पाषाण सरिता की गतिशीलता के संग बहकर कल्याणकारी शिव बन जाता है। वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचकर मचलते लता-गुल्म और वृक्ष बन जाते हैं। वसंत की भींनी हवा कलियों के ओठों पर मधुर मुस्कान ला देती है।
पर्वतीय प्रदेश संगीतमय कैसे बन जाता है?
Aझरने से
Bझरने के झर-झर से
Cझरने के संगीत से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) झरने के संगीत से
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश को संगीतमय बना देते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 96 से 100 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर- पत्रक में चिह्नित कीजिए -
पर्वत के झर-झर झरते, झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश संगीतमय बना देते हैं। तरंगों से मचलती सरिता अपने निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है। पर्वत से लुढ़कता पाषाण सरिता की गतिशीलता के संग बहकर कल्याणकारी शिव बन जाता है। वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचकर मचलते लता-गुल्म और वृक्ष बन जाते हैं। वसंत की भींनी हवा कलियों के ओठों पर मधुर मुस्कान ला देती है।
सरिता का निकटवर्ती क्षेत्र हरा-भरा कैसे हो जाता है?
Aसरिता की निकटता से
Bसरिता की जल-तरंगों से
Cसरिता के मचलने से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
तरंगों से मचलती सरिता निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है; जल-तरंगें और मचलना दोनों कारण दिए गए हैं, अतः एक से अधिक विकल्प सही हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 96 से 100 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर- पत्रक में चिह्नित कीजिए -
पर्वत के झर-झर झरते, झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश संगीतमय बना देते हैं। तरंगों से मचलती सरिता अपने निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है। पर्वत से लुढ़कता पाषाण सरिता की गतिशीलता के संग बहकर कल्याणकारी शिव बन जाता है। वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचकर मचलते लता-गुल्म और वृक्ष बन जाते हैं। वसंत की भींनी हवा कलियों के ओठों पर मधुर मुस्कान ला देती है।
पत्थर से शिव बनने का क्या अर्थ है?
Aसुंदर रूप पाना
Bचमत्कार होना
Cकल्याणकारी होना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) कल्याणकारी होना
Explanation
पत्थर के सरिता के साथ बहकर 'कल्याणकारी शिव' बन जाने का अर्थ है कल्याणकारी होना।
निर्देश (प्रश्न संख्या 96 से 100 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर- पत्रक में चिह्नित कीजिए -
पर्वत के झर-झर झरते, झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश संगीतमय बना देते हैं। तरंगों से मचलती सरिता अपने निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है। पर्वत से लुढ़कता पाषाण सरिता की गतिशीलता के संग बहकर कल्याणकारी शिव बन जाता है। वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचकर मचलते लता-गुल्म और वृक्ष बन जाते हैं। वसंत की भींनी हवा कलियों के ओठों पर मधुर मुस्कान ला देती है।
वनस्पतियों के नए-नए लता-गुल्म दूर-दूर कैसे पहुँच जाते हैं?
Aउनके बीज से
Bपक्षियों से
Cसंगति से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) पक्षियों से
Explanation
गद्यांश के अनुसार वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचते हैं, अर्थात् पक्षियों के द्वारा।
निर्देश (प्रश्न संख्या 96 से 100 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर- पत्रक में चिह्नित कीजिए -
पर्वत के झर-झर झरते, झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश संगीतमय बना देते हैं। तरंगों से मचलती सरिता अपने निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है। पर्वत से लुढ़कता पाषाण सरिता की गतिशीलता के संग बहकर कल्याणकारी शिव बन जाता है। वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचकर मचलते लता-गुल्म और वृक्ष बन जाते हैं। वसंत की भींनी हवा कलियों के ओठों पर मधुर मुस्कान ला देती है।
वसंत में कलियों में मुस्कान क्यों आती है?
Aवसंत की भीनी हवा से
Bहवा से
Cभीनी हवा से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) वसंत की भीनी हवा से
Explanation
गद्यांश में वसंत की भीनी हवा से कलियों के होंठों पर मुस्कान आने की बात कही गई है; पूरा कथन (A) में है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 101 से 105 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
विधाता की सृष्टि सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है। सर सरिता से हरी-भरी, मानवता से परिलसित है। प्रकृति के अप्रतिम सौंदर्य में मानव के मानवीय भावाकर्षण में विधाता को धरती पर बार-बार अवतार लेना पड़ता है। धर्म भूमि संत, महात्माओं को पाकर धन्य हो गई है। शत-शत नमन है यह पावन, दिव्य स्थली मातृभूमि को।
विधाता की सृष्टि किस प्रकार आलोकित है?
Aआभा से आलोकित है
Bसूर्य की आभा से आलोकित है
Cसूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है
Explanation
गद्यांश का पहला वाक्य है कि विधाता की सृष्टि सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 101 से 105 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
विधाता की सृष्टि सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है। सर सरिता से हरी-भरी, मानवता से परिलसित है। प्रकृति के अप्रतिम सौंदर्य में मानव के मानवीय भावाकर्षण में विधाता को धरती पर बार-बार अवतार लेना पड़ता है। धर्म भूमि संत, महात्माओं को पाकर धन्य हो गई है। शत-शत नमन है यह पावन, दिव्य स्थली मातृभूमि को।
किसे परिलसित होने की बात कही गई है?
Aमानवता
Bसर-सरिता
Cसृष्टि
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) सृष्टि
Explanation
'विधाता की सृष्टि ... परिलसित है' वाक्य का कर्ता 'सृष्टि' है, इसलिए कुंजी के अनुसार उत्तर (C) है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 101 से 105 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
विधाता की सृष्टि सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है। सर सरिता से हरी-भरी, मानवता से परिलसित है। प्रकृति के अप्रतिम सौंदर्य में मानव के मानवीय भावाकर्षण में विधाता को धरती पर बार-बार अवतार लेना पड़ता है। धर्म भूमि संत, महात्माओं को पाकर धन्य हो गई है। शत-शत नमन है यह पावन, दिव्य स्थली मातृभूमि को।
विधाता को बार-बार धरती पर अवतार क्यों लेना पड़ता है?
Aप्रकृती से
Bप्रकृति-सौंदर्याकर्षण
Cमानवीय भावाकर्षण
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
गद्यांश में प्रकृति के सौंदर्य और मानव के मानवीय भावाकर्षण दोनों का उल्लेख है, इसलिए एक से अधिक विकल्प (B और C) सही माने गए हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 101 से 105 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
विधाता की सृष्टि सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है। सर सरिता से हरी-भरी, मानवता से परिलसित है। प्रकृति के अप्रतिम सौंदर्य में मानव के मानवीय भावाकर्षण में विधाता को धरती पर बार-बार अवतार लेना पड़ता है। धर्म भूमि संत, महात्माओं को पाकर धन्य हो गई है। शत-शत नमन है यह पावन, दिव्य स्थली मातृभूमि को।
यह भूमि धन्य कैसे हुई?
Aसंत-महात्माओं को पाकर
Bसंत को पाकर
Cमहात्माओं को पाकर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) संत-महात्माओं को पाकर
Explanation
गद्यांश के अनुसार धर्मभूमि संत-महात्माओं को पाकर धन्य हो गई है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 101 से 105 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
विधाता की सृष्टि सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है। सर सरिता से हरी-भरी, मानवता से परिलसित है। प्रकृति के अप्रतिम सौंदर्य में मानव के मानवीय भावाकर्षण में विधाता को धरती पर बार-बार अवतार लेना पड़ता है। धर्म भूमि संत, महात्माओं को पाकर धन्य हो गई है। शत-शत नमन है यह पावन, दिव्य स्थली मातृभूमि को।
किसको शत-शत नमन किया गया है?
Aपावनता को
Bदिव्य स्थली को
Cमातृभूमी को
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) मातृभूमी को
Explanation
अंत में पावन, दिव्य स्थली 'मातृभूमि' को शत-शत नमन किया गया है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 106 से 110 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
गुरू मोमबत्ती की तरह जलकर गलकर शिष्य को उजाला देता है। शिष्य गुरू का सान्निध्य पाकर सन्मार्ग का पथिक बन जाता है। शिष्य में आत्म-विश्वास का आलोक जगमगा उठता है। आत्म-चिंतन, आत्म-विश्वास लक्ष्य तक पहुँचाने का आधार बन जाता है। सफलता का ध्वज उसके मस्तक के पसीने को साफ करने के लिए लहराने लगता है।
गुरू का मोमबत्ती की तरह जलना-गलना का क्या अर्थ है?
Aजीवन-खपाना
Bसद्कार्य करना
Cसमय लगाना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) सद्कार्य करना
Explanation
मोमबत्ती की तरह जलने-गलने का आशय है स्वयं कष्ट सहकर शिष्य के लिए सद्कार्य करना, उसे ज्ञान का उजाला देना।
निर्देश (प्रश्न संख्या 106 से 110 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
गुरू मोमबत्ती की तरह जलकर गलकर शिष्य को उजाला देता है। शिष्य गुरू का सान्निध्य पाकर सन्मार्ग का पथिक बन जाता है। शिष्य में आत्म-विश्वास का आलोक जगमगा उठता है। आत्म-चिंतन, आत्म-विश्वास लक्ष्य तक पहुँचाने का आधार बन जाता है। सफलता का ध्वज उसके मस्तक के पसीने को साफ करने के लिए लहराने लगता है।
सान्निध्य पाना का क्या भाव है?
Aसाथ
Bसहकर्म
Cछत्रछाया
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) छत्रछाया
Explanation
'सान्निध्य' का भाव निकटता है, जिसमें गुरु की छत्रछाया में रहने का भाव है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 106 से 110 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
गुरू मोमबत्ती की तरह जलकर गलकर शिष्य को उजाला देता है। शिष्य गुरू का सान्निध्य पाकर सन्मार्ग का पथिक बन जाता है। शिष्य में आत्म-विश्वास का आलोक जगमगा उठता है। आत्म-चिंतन, आत्म-विश्वास लक्ष्य तक पहुँचाने का आधार बन जाता है। सफलता का ध्वज उसके मस्तक के पसीने को साफ करने के लिए लहराने लगता है।
आत्म-विश्वास का आलोक क्या है?
Aकर्म-पथ पर चलने का सुदृढ़ निश्चय
Bकिसी अन्य पर भरोसा न करना
Cआत्मा-परमात्मा का ज्ञान
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) कर्म-पथ पर चलने का सुदृढ़ निश्चय
Explanation
आत्म-विश्वास का आलोक कर्म-पथ पर चलने का सुदृढ़ निश्चय है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 106 से 110 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
गुरू मोमबत्ती की तरह जलकर गलकर शिष्य को उजाला देता है। शिष्य गुरू का सान्निध्य पाकर सन्मार्ग का पथिक बन जाता है। शिष्य में आत्म-विश्वास का आलोक जगमगा उठता है। आत्म-चिंतन, आत्म-विश्वास लक्ष्य तक पहुँचाने का आधार बन जाता है। सफलता का ध्वज उसके मस्तक के पसीने को साफ करने के लिए लहराने लगता है।
लक्ष्य-प्राप्ति का आधार क्या बताया गया है?
Aआत्म-चिंतन
Bआत्म-विश्वास
Cआत्म-चिंतन और आत्म-विश्वास
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) आत्म-चिंतन और आत्म-विश्वास
Explanation
गद्यांश के अनुसार आत्म-चिंतन और आत्म-विश्वास दोनों लक्ष्य तक पहुँचाने का आधार बनते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 106 से 110 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
गुरू मोमबत्ती की तरह जलकर गलकर शिष्य को उजाला देता है। शिष्य गुरू का सान्निध्य पाकर सन्मार्ग का पथिक बन जाता है। शिष्य में आत्म-विश्वास का आलोक जगमगा उठता है। आत्म-चिंतन, आत्म-विश्वास लक्ष्य तक पहुँचाने का आधार बन जाता है। सफलता का ध्वज उसके मस्तक के पसीने को साफ करने के लिए लहराने लगता है।
मस्तक के पसीने को साफ करने के लिए ध्वज लहराना का क्या भाव है?
Aचर्चित होना
Bसफलता का निश्चयन
Cखुश होना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) सफलता का निश्चयन
Explanation
मस्तक के पसीने को पोंछने के लिए सफलता का ध्वज लहराने का भाव है कि परिश्रम के बाद सफलता निश्चित है।
दयानंद = दया + आनंद (आ + आ = आ), यह दीर्घ स्वर संधि है।
How to use these BPSC TRE Hindi questions
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