181 गद्यांश / पद्यांश (Hindi) questions asked in BPSC TRE previous year papers, each with the correct answer and explanation. Read them free on UTpaper, or attempt the full papers as timed online tests.
Q1BPSC TRE 2.0 (2023) Language (Hindi & English) Class 6-8 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 26 से 30 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के लिए उपयुक्त विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
संघर्ष के मार्ग में अकेला ही चलना पड़ता है। कोई बाहरी शक्ति आपकी सहायता नहीं करती है। परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति व लगन आदि मानवीय गुण व्यक्ति को संघर्ष करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। दो महत्त्वपूर्ण तथ्य स्मरणीय हैं। प्रत्येक समस्या अपने साथ संघर्ष लेकर आती है। प्रत्येक संघर्ष के गर्भ में विजय निहित रहती है। एक अध्यापक छोड़ने वाले अपने छात्रों को यह संदेश दिया था, तुम्हें जीवन में सफल होने के लिए समस्याओं से संघर्ष करने का अभ्यास करना होगा। हम कोई भी कार्य करें, सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने का संकल्प लेकर चलें। सफलता हमें कभी निराश नहीं करेगी। समस्त ग्रंथों और महापुरुषों के अनुभवों का निष्कर्ष यह है कि संघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना अहितकर है, मानव धर्म के प्रतिकूल है और अपने विकास को अनावश्यक रूप से बाधित करना है। आप जागिए, उठिए, दृढ़-संकल्प और उत्साह एवं साहस के साथ संघर्षरूपी विजय रथ पर चढ़िए और अपने जीवन के विकास की बाधाओंरूपी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कीजिए।
मनुष्य के जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं
Aकर्मठता, जागरूकता, सामूहिकता
Bपरिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति, लगन
Cआत्मविश्वास, श्रम, जागरूकता
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति, लगन
Explanation
अवतरण के अनुसार परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
Q2BPSC TRE 2.0 (2023) Language (Hindi & English) Class 6-8 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 26 से 30 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के लिए उपयुक्त विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
संघर्ष के मार्ग में अकेला ही चलना पड़ता है। कोई बाहरी शक्ति आपकी सहायता नहीं करती है। परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति व लगन आदि मानवीय गुण व्यक्ति को संघर्ष करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। दो महत्त्वपूर्ण तथ्य स्मरणीय हैं। प्रत्येक समस्या अपने साथ संघर्ष लेकर आती है। प्रत्येक संघर्ष के गर्भ में विजय निहित रहती है। एक अध्यापक छोड़ने वाले अपने छात्रों को यह संदेश दिया था, तुम्हें जीवन में सफल होने के लिए समस्याओं से संघर्ष करने का अभ्यास करना होगा। हम कोई भी कार्य करें, सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने का संकल्प लेकर चलें। सफलता हमें कभी निराश नहीं करेगी। समस्त ग्रंथों और महापुरुषों के अनुभवों का निष्कर्ष यह है कि संघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना अहितकर है, मानव धर्म के प्रतिकूल है और अपने विकास को अनावश्यक रूप से बाधित करना है। आप जागिए, उठिए, दृढ़-संकल्प और उत्साह एवं साहस के साथ संघर्षरूपी विजय रथ पर चढ़िए और अपने जीवन के विकास की बाधाओंरूपी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कीजिए।
प्रत्येक समस्या अपने साथ क्या लेकर आती है?
Aसंघर्ष
Bआत्मविश्वास
Cविरोध
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (A) संघर्ष
Explanation
अवतरण में कहा गया है कि प्रत्येक समस्या अपने साथ संघर्ष लेकर आती है।
Q3BPSC TRE 2.0 (2023) Language (Hindi & English) Class 6-8 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 26 से 30 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के लिए उपयुक्त विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
संघर्ष के मार्ग में अकेला ही चलना पड़ता है। कोई बाहरी शक्ति आपकी सहायता नहीं करती है। परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति व लगन आदि मानवीय गुण व्यक्ति को संघर्ष करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। दो महत्त्वपूर्ण तथ्य स्मरणीय हैं। प्रत्येक समस्या अपने साथ संघर्ष लेकर आती है। प्रत्येक संघर्ष के गर्भ में विजय निहित रहती है। एक अध्यापक छोड़ने वाले अपने छात्रों को यह संदेश दिया था, तुम्हें जीवन में सफल होने के लिए समस्याओं से संघर्ष करने का अभ्यास करना होगा। हम कोई भी कार्य करें, सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने का संकल्प लेकर चलें। सफलता हमें कभी निराश नहीं करेगी। समस्त ग्रंथों और महापुरुषों के अनुभवों का निष्कर्ष यह है कि संघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना अहितकर है, मानव धर्म के प्रतिकूल है और अपने विकास को अनावश्यक रूप से बाधित करना है। आप जागिए, उठिए, दृढ़-संकल्प और उत्साह एवं साहस के साथ संघर्षरूपी विजय रथ पर चढ़िए और अपने जीवन के विकास की बाधाओंरूपी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कीजिए।
‘अनावश्यक’ में किस उपसर्ग का प्रयोग हुआ है?
Aअन
Bअन्
Cअना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (B) अन्
Explanation
'अनावश्यक' = अन् + आवश्यक, इसलिए उपसर्ग 'अन्' है।
Q4BPSC TRE 2.0 (2023) Language (Hindi & English) Class 6-8 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 26 से 30 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के लिए उपयुक्त विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
संघर्ष के मार्ग में अकेला ही चलना पड़ता है। कोई बाहरी शक्ति आपकी सहायता नहीं करती है। परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति व लगन आदि मानवीय गुण व्यक्ति को संघर्ष करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। दो महत्त्वपूर्ण तथ्य स्मरणीय हैं। प्रत्येक समस्या अपने साथ संघर्ष लेकर आती है। प्रत्येक संघर्ष के गर्भ में विजय निहित रहती है। एक अध्यापक छोड़ने वाले अपने छात्रों को यह संदेश दिया था, तुम्हें जीवन में सफल होने के लिए समस्याओं से संघर्ष करने का अभ्यास करना होगा। हम कोई भी कार्य करें, सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने का संकल्प लेकर चलें। सफलता हमें कभी निराश नहीं करेगी। समस्त ग्रंथों और महापुरुषों के अनुभवों का निष्कर्ष यह है कि संघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना अहितकर है, मानव धर्म के प्रतिकूल है और अपने विकास को अनावश्यक रूप से बाधित करना है। आप जागिए, उठिए, दृढ़-संकल्प और उत्साह एवं साहस के साथ संघर्षरूपी विजय रथ पर चढ़िए और अपने जीवन के विकास की बाधाओंरूपी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कीजिए।
प्रत्येक संघर्ष के गर्भ में क्या निहित होता है?
Aसफलता
Bआत्मविश्वास
Cजागरूकता
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (E) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Explanation
अवतरण में कहा है कि प्रत्येक संघर्ष के गर्भ में विजय निहित रहती है; 'विजय' विकल्पों में नहीं है।
Q5BPSC TRE 2.0 (2023) Language (Hindi & English) Class 6-8 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 26 से 30 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के लिए उपयुक्त विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
संघर्ष के मार्ग में अकेला ही चलना पड़ता है। कोई बाहरी शक्ति आपकी सहायता नहीं करती है। परिश्रम, दृढ़ इच्छाशक्ति व लगन आदि मानवीय गुण व्यक्ति को संघर्ष करने और जीवन में सफलता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। दो महत्त्वपूर्ण तथ्य स्मरणीय हैं। प्रत्येक समस्या अपने साथ संघर्ष लेकर आती है। प्रत्येक संघर्ष के गर्भ में विजय निहित रहती है। एक अध्यापक छोड़ने वाले अपने छात्रों को यह संदेश दिया था, तुम्हें जीवन में सफल होने के लिए समस्याओं से संघर्ष करने का अभ्यास करना होगा। हम कोई भी कार्य करें, सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने का संकल्प लेकर चलें। सफलता हमें कभी निराश नहीं करेगी। समस्त ग्रंथों और महापुरुषों के अनुभवों का निष्कर्ष यह है कि संघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना अहितकर है, मानव धर्म के प्रतिकूल है और अपने विकास को अनावश्यक रूप से बाधित करना है। आप जागिए, उठिए, दृढ़-संकल्प और उत्साह एवं साहस के साथ संघर्षरूपी विजय रथ पर चढ़िए और अपने जीवन के विकास की बाधाओंरूपी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कीजिए।
समस्त ग्रंथों और महापुरुषों के अनुभवों का निष्कर्ष क्या है?
Aसंघर्ष से डरना अथवा उससे विमुख होना पराजय है
Bसंघर्ष से डरना अहितकर है
Cसंघर्ष से विमुख होना अहितकर है
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
निष्कर्ष है कि संघर्ष से डरना अथवा विमुख होना अहितकर है, इसलिए B और C दोनों सही हैं।
Q6BPSC TRE 2.0 (2023) Language (Hindi & English) Class 6-8 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 75 तक) : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में अंकित कीजिए।
एक था किसान। उसके चार लड़के थे। पर, उन लड़कों में मेल नहीं था। वे आपस में बराबर लड़ते-झगड़ते रहते थे। एक दिन किसान बहुत बीमार पड़ा। जब वह मृत्यु के निकट पहुँच गया, तब उसने अपने चारों लड़कों को बुलाया और मिल-जुलकर रहने की शिक्षा दी। किन्तु लड़कों पर उसकी बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। तब किसान ने लकड़ियों का गट्ठर मँगाया और लड़कों को तोड़ने को कहा। किसी से वह गट्ठर न टूटा। फिर, लकड़ियाँ गट्ठर से अलग की गईं। किसान ने अपने सभी लड़कों को बारी-बारी से बुलाया और लकड़ियों को अलग-अलग तोड़ने को कहा। सबने आसानी से ऐसा किया और लकड़ियाँ एक-एक कर टूटती गईं। अब लड़कों की आँखें खुलीं। तभी उन्होंने समझा कि आपस में मिल-जुलकर रहने में कितना बल है।
किसान ने लड़कों को लकड़ियों का गट्ठर तोड़ने के लिए दिया, ताकि
Aलड़कों को आपस में मिल-जुलकर रहने का बल समझ में आ जाए
Bवे आपस में प्रेम से रहें
Cवे आपसी वैमनस्य छोड़ दें
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
किसान ने गट्ठर इसलिए तुड़वाया कि बेटे मिल-जुलकर रहने के बल को समझें, वैमनस्य छोड़ें और प्रेम से रहें; तीनों कथन सही हैं।
Q7BPSC TRE 2.0 (2023) Language (Hindi & English) Class 6-8 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 75 तक) : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में अंकित कीजिए।
एक था किसान। उसके चार लड़के थे। पर, उन लड़कों में मेल नहीं था। वे आपस में बराबर लड़ते-झगड़ते रहते थे। एक दिन किसान बहुत बीमार पड़ा। जब वह मृत्यु के निकट पहुँच गया, तब उसने अपने चारों लड़कों को बुलाया और मिल-जुलकर रहने की शिक्षा दी। किन्तु लड़कों पर उसकी बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। तब किसान ने लकड़ियों का गट्ठर मँगाया और लड़कों को तोड़ने को कहा। किसी से वह गट्ठर न टूटा। फिर, लकड़ियाँ गट्ठर से अलग की गईं। किसान ने अपने सभी लड़कों को बारी-बारी से बुलाया और लकड़ियों को अलग-अलग तोड़ने को कहा। सबने आसानी से ऐसा किया और लकड़ियाँ एक-एक कर टूटती गईं। अब लड़कों की आँखें खुलीं। तभी उन्होंने समझा कि आपस में मिल-जुलकर रहने में कितना बल है।
किसान ने लड़कों को बारी-बारी से बुलाकर लकड़ियों को अलग-अलग तोड़ने के लिए क्यों कहा?
Aलकड़ियों को आसानी से तोड़ने के लिए
Bक्योंकि लड़कों को गट्ठर तोड़ने में सफलता नहीं मिली
Cक्योंकि किसान अपने लड़कों से बहुत स्नेह करता था
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (E) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Explanation
किसान ने बारी-बारी से अलग-अलग लकड़ी तुड़वाई ताकि लड़के देख सकें कि अलग होकर कमज़ोर हैं; दिए विकल्पों में यह पूरी तरह नहीं आया, अतः कुंजी E है।
Q8BPSC TRE 2.0 (2023) Language (Hindi & English) Class 6-8 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 75 तक) : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में अंकित कीजिए।
एक था किसान। उसके चार लड़के थे। पर, उन लड़कों में मेल नहीं था। वे आपस में बराबर लड़ते-झगड़ते रहते थे। एक दिन किसान बहुत बीमार पड़ा। जब वह मृत्यु के निकट पहुँच गया, तब उसने अपने चारों लड़कों को बुलाया और मिल-जुलकर रहने की शिक्षा दी। किन्तु लड़कों पर उसकी बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। तब किसान ने लकड़ियों का गट्ठर मँगाया और लड़कों को तोड़ने को कहा। किसी से वह गट्ठर न टूटा। फिर, लकड़ियाँ गट्ठर से अलग की गईं। किसान ने अपने सभी लड़कों को बारी-बारी से बुलाया और लकड़ियों को अलग-अलग तोड़ने को कहा। सबने आसानी से ऐसा किया और लकड़ियाँ एक-एक कर टूटती गईं। अब लड़कों की आँखें खुलीं। तभी उन्होंने समझा कि आपस में मिल-जुलकर रहने में कितना बल है।
मरणासन्न किसान ने अपने चारों लड़कों को क्यों बुलाया?
Aबेटों को समझाने के लिए
Bबेटों को मिल-जुलकर रहने की शिक्षा देने के लिए
Cबेटों से अंतिम भेंट करने के लिए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
किसान ने मृत्यु के निकट बेटों को समझाने और मिल-जुलकर रहने की शिक्षा देने के लिए बुलाया, अतः एक से अधिक विकल्प सही हैं।
Q9BPSC TRE 2.0 (2023) Language (Hindi & English) Class 6-8 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 75 तक) : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में अंकित कीजिए।
एक था किसान। उसके चार लड़के थे। पर, उन लड़कों में मेल नहीं था। वे आपस में बराबर लड़ते-झगड़ते रहते थे। एक दिन किसान बहुत बीमार पड़ा। जब वह मृत्यु के निकट पहुँच गया, तब उसने अपने चारों लड़कों को बुलाया और मिल-जुलकर रहने की शिक्षा दी। किन्तु लड़कों पर उसकी बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। तब किसान ने लकड़ियों का गट्ठर मँगाया और लड़कों को तोड़ने को कहा। किसी से वह गट्ठर न टूटा। फिर, लकड़ियाँ गट्ठर से अलग की गईं। किसान ने अपने सभी लड़कों को बारी-बारी से बुलाया और लकड़ियों को अलग-अलग तोड़ने को कहा। सबने आसानी से ऐसा किया और लकड़ियाँ एक-एक कर टूटती गईं। अब लड़कों की आँखें खुलीं। तभी उन्होंने समझा कि आपस में मिल-जुलकर रहने में कितना बल है।
जब लकड़ियाँ एक-एक कर टूटती गयीं, तब क्या हुआ?
Aलड़कों को खुशी हुई
Bलड़कों की आँखें खुलीं
Cलड़कों को मिल-जुलकर रहने का बल समझ में आया
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
लकड़ियाँ टूटने पर लड़कों की आँखें खुलीं और उन्हें मिल-जुलकर रहने का बल समझ आया, इसलिए B और C दोनों सही हैं।
Q10BPSC TRE 2.0 (2023) Language (Hindi & English) Class 6-8 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 75 तक) : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में अंकित कीजिए।
एक था किसान। उसके चार लड़के थे। पर, उन लड़कों में मेल नहीं था। वे आपस में बराबर लड़ते-झगड़ते रहते थे। एक दिन किसान बहुत बीमार पड़ा। जब वह मृत्यु के निकट पहुँच गया, तब उसने अपने चारों लड़कों को बुलाया और मिल-जुलकर रहने की शिक्षा दी। किन्तु लड़कों पर उसकी बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। तब किसान ने लकड़ियों का गट्ठर मँगाया और लड़कों को तोड़ने को कहा। किसी से वह गट्ठर न टूटा। फिर, लकड़ियाँ गट्ठर से अलग की गईं। किसान ने अपने सभी लड़कों को बारी-बारी से बुलाया और लकड़ियों को अलग-अलग तोड़ने को कहा। सबने आसानी से ऐसा किया और लकड़ियाँ एक-एक कर टूटती गईं। अब लड़कों की आँखें खुलीं। तभी उन्होंने समझा कि आपस में मिल-जुलकर रहने में कितना बल है।
उपर्युक्त अपठित गद्यांश का शीर्षक है
Aमित्रता
Bबंधुत्व
Cएकता
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) एकता
Explanation
गद्यांश एकता के बल की शिक्षा देता है, इसलिए शीर्षक 'एकता' उपयुक्त है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
लोग आश्चर्यविमूढ़ क्यों होते हैं ?
Aआदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर
Bआदर्श व्यक्ति का साहस देखकर
Cआदर्श व्यक्ति का ज्ञान देखकर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) आदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर
Explanation
गद्यांश के अनुसार लोग आदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
आदर्श व्यक्ति के जीवन में किसके लिए स्थान नहीं होता ?
Aआलस्य के लिए
Bमनोविनोद के लिए
Cविश्राम के लिए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (A) आलस्य के लिए
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि आदर्श व्यक्ति के जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
आदर्श व्यक्ति किसमें आस्था रखता है ?
Aप्रेम में
Bसद्व्यवहार में
Cसद्कर्म में
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (C) सद्कर्म में
Explanation
गद्यांश की पहली पंक्ति के अनुसार आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है
Aआदर्श व्यक्ति
Bसद्कर्म
Cकर्मशीलता
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (A) आदर्श व्यक्ति
Explanation
पूरा गद्यांश आदर्श व्यक्ति के गुणों का वर्णन करता है, इसलिए उपयुक्त शीर्षक 'आदर्श व्यक्ति' है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
किस अर्थ में आदर्श व्यक्ति का चरित्र प्रशंसनीय होता है ?
Aवह बहादुरी से संकटों का सामना करता है
Bवह ज्ञान से संकट को दूर करता है
Cवह धैर्य से संकट को दूर करता है
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (C) वह धैर्य से संकट को दूर करता है
Explanation
अंतिम पंक्ति में बताया गया है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है, इसलिए उसका चरित्र प्रशंसनीय है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
व्यक्ति के पतन का कारण है
Aअत्यधिक विभूति
Bअत्यधिक शक्ति
Cचारित्रिक दोष
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (C) चारित्रिक दोष
Explanation
गद्यांश में लिखा है कि चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
विभिन्न दूषणों से मुक्त होने का अर्थ है
Aधन की रक्षा
Bचरित्र की रक्षा
Cपरिवार की रक्षा
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (B) चरित्र की रक्षा
Explanation
गद्यांश के अनुसार चरित्र की रक्षा का अर्थ काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
स्वस्थ व्यक्ति का लक्षण है
Aअत्यधिक बल
Bआत्मसंयम
Cअपार संपदा
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (B) आत्मसंयम
Explanation
गद्यांश कहता है कि वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो, अतः आत्मसंयम स्वस्थ व्यक्ति का लक्षण है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
किसी व्यक्ति का विकास किस पर आश्रित है ?
Aआत्मसंयम
Bसमुचित अध्ययन
Cसत्संगति
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (A) आत्मसंयम
Explanation
आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
स्वास्थ्य का सहोदर है
Aव्यायाम
Bऔषधि
Cपौष्टिक भोजन
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (A) व्यायाम
Explanation
गद्यांश में व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
लोग आश्चर्यविमूढ़ क्यों होते हैं ?
Aआदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर
Bआदर्श व्यक्ति का ज्ञान देखकर
Cआदर्श व्यक्ति का साहस देखकर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (A) आदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर
Explanation
गद्यांश के अनुसार लोग आदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
किस अर्थ में आदर्श व्यक्ति का चरित्र प्रशंसनीय होता है ?
Aवह बहादुरी से संकटों का सामना करता है
Bवह धैर्य से संकट को दूर करता है
Cवह ज्ञान से संकट को दूर करता है
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) वह धैर्य से संकट को दूर करता है
Explanation
अंतिम पंक्ति में बताया गया है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है, इसलिए उसका चरित्र प्रशंसनीय है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है
Aआदर्श व्यक्ति
Bकर्मशीलता
Cसद्कर्म
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) आदर्श व्यक्ति
Explanation
पूरा गद्यांश आदर्श व्यक्ति के गुणों का वर्णन करता है, इसलिए उपयुक्त शीर्षक 'आदर्श व्यक्ति' है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
आदर्श व्यक्ति के जीवन में किसके लिए स्थान नहीं होता ?
Aआलस्य के लिए
Bविश्राम के लिए
Cमनोविनोद के लिए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (A) आलस्य के लिए
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि आदर्श व्यक्ति के जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
आदर्श व्यक्ति किसमें आस्था रखता है ?
Aप्रेम में
Bसद्कर्म में
Cसद्व्यवहार में
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) सद्कर्म में
Explanation
गद्यांश की पहली पंक्ति के अनुसार आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
स्वास्थ्य का सहोदर है
Aव्यायाम
Bपौष्टिक भोजन
Cऔषधि
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (A) व्यायाम
Explanation
गद्यांश में व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
स्वस्थ व्यक्ति का लक्षण है
Aअत्यधिक बल
Bअपार संपदा
Cआत्मसंयम
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (C) आत्मसंयम
Explanation
गद्यांश कहता है कि वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो, अतः आत्मसंयम स्वस्थ व्यक्ति का लक्षण है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
किसी व्यक्ति का विकास किस पर आश्रित है ?
Aआत्मसंयम
Bसत्संगति
Cसमुचित अध्ययन
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (A) आत्मसंयम
Explanation
आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
व्यक्ति के पतन का कारण है
Aअत्यधिक विभूति
Bचारित्रिक दोष
Cअत्यधिक शक्ति
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (B) चारित्रिक दोष
Explanation
गद्यांश में लिखा है कि चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
विभिन्न दूषणों से मुक्त होने का अर्थ है
Aधन की रक्षा
Bपरिवार की रक्षा
Cचरित्र की रक्षा
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) चरित्र की रक्षा
Explanation
गद्यांश के अनुसार चरित्र की रक्षा का अर्थ काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 126 से 130 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
पुस्तकालय वह विशाल ज्ञान-सिंधु है जिसमें विद्या की अक्षय निधियाँ मौजूद हैं जिनके अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है । पुस्तकालय शब्द का निर्माण पुस्तक + आलय दो शब्दों से हुआ है । अर्थात् पुस्तकों के लिए घर/पुस्तकालय में उपयोगी पुस्तकों का संग्रह किया जाता है; जिससे मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, और जीवन की उन्नति होती है । इससे मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है और मस्तिष्क का विकास होता है ।
मनुष्य के उच्च चरित्र निर्माण में सहायक हैं
Aयात्राएँ
Bपुस्तकें
Cमनुष्य
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) पुस्तकें
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि पुस्तकालय में पुस्तकों के संग्रह से मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, अर्थात् पुस्तकें सहायक हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 126 से 130 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
पुस्तकालय वह विशाल ज्ञान-सिंधु है जिसमें विद्या की अक्षय निधियाँ मौजूद हैं जिनके अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है । पुस्तकालय शब्द का निर्माण पुस्तक + आलय दो शब्दों से हुआ है । अर्थात् पुस्तकों के लिए घर/पुस्तकालय में उपयोगी पुस्तकों का संग्रह किया जाता है; जिससे मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, और जीवन की उन्नति होती है । इससे मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है और मस्तिष्क का विकास होता है ।
विद्या की अक्षय निधियाँ कहाँ मौजूद होती हैं ?
Aस्वाध्याय
Bमस्तिष्क
Cपुस्तकालय
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) पुस्तकालय
Explanation
गद्यांश के पहले वाक्य के अनुसार विद्या की अक्षय निधियाँ पुस्तकालय में मौजूद हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 126 से 130 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
पुस्तकालय वह विशाल ज्ञान-सिंधु है जिसमें विद्या की अक्षय निधियाँ मौजूद हैं जिनके अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है । पुस्तकालय शब्द का निर्माण पुस्तक + आलय दो शब्दों से हुआ है । अर्थात् पुस्तकों के लिए घर/पुस्तकालय में उपयोगी पुस्तकों का संग्रह किया जाता है; जिससे मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, और जीवन की उन्नति होती है । इससे मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है और मस्तिष्क का विकास होता है ।
स्वाध्याय में सहायक हैं
Aजीवन की उन्नति
Bमस्तिष्क
Cपुस्तकालय
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (C) पुस्तकालय
Explanation
गद्यांश के अनुसार पुस्तकालय से मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है, इसलिए पुस्तकालय स्वाध्याय में सहायक है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 126 से 130 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
पुस्तकालय वह विशाल ज्ञान-सिंधु है जिसमें विद्या की अक्षय निधियाँ मौजूद हैं जिनके अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है । पुस्तकालय शब्द का निर्माण पुस्तक + आलय दो शब्दों से हुआ है । अर्थात् पुस्तकों के लिए घर/पुस्तकालय में उपयोगी पुस्तकों का संग्रह किया जाता है; जिससे मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, और जीवन की उन्नति होती है । इससे मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है और मस्तिष्क का विकास होता है ।
हमारा हृदय विशाल और उन्नत कैसे बनता है ?
Aसामाजिक-राजनीतिक विकास से
Bपुस्तकों के अध्ययन से
Cविभिन्न रीति-रिवाजों के माध्यम से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (B) पुस्तकों के अध्ययन से
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि पुस्तकों के अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 126 से 130 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
पुस्तकालय वह विशाल ज्ञान-सिंधु है जिसमें विद्या की अक्षय निधियाँ मौजूद हैं जिनके अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है । पुस्तकालय शब्द का निर्माण पुस्तक + आलय दो शब्दों से हुआ है । अर्थात् पुस्तकों के लिए घर/पुस्तकालय में उपयोगी पुस्तकों का संग्रह किया जाता है; जिससे मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, और जीवन की उन्नति होती है । इससे मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है और मस्तिष्क का विकास होता है ।
‘ज्ञान सिंधु’ का अर्थ है
Aज्ञान का सागर
Bज्ञान की नदी
Cज्ञान की व्यवस्था
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) ज्ञान का सागर
Explanation
'ज्ञान सिंधु' का अर्थ ज्ञान का सागर है, क्योंकि सिंधु का अर्थ समुद्र है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 131 से 135 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
औद्योगीकरण के फलस्वरूप नगरों की आबादी तेजी से बढ़ी है । गाँव के लोग रोटी रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर गंदी बस्तियों की वृद्धि करते हैं । औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है और वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है । औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के समय प्रदूषण नियंत्रण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है । आग, धूल, राख और धुआँ की कालिमा का प्रभाव घर, बाग-बगीचे सहित दूर-दूर तक होता है । इससे आँखों में चिपचिपापन, रोहा, दृष्टि कमजोर होना, टी. बी., कैंसर आदि रोग फैलते हैं । औद्योगीकरण के फलस्वरूप तेजाबी वर्षा भी होती है जो फसलों, पेड़-पौधों आदि को विशेष हानि पहुँचाती है । अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता भी घट जाती है ।
भूमि की उत्पादन क्षमता क्यों घट जाती है ?
Aविस्थापन के कारण
Bकृषि योग्य भूमि में कमी होने के कारण
Cअम्लीय और क्षारीयकरण के कारण
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (C) अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण
Explanation
गद्यांश के अंत में कहा गया है कि अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता घट जाती है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 131 से 135 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
औद्योगीकरण के फलस्वरूप नगरों की आबादी तेजी से बढ़ी है । गाँव के लोग रोटी रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर गंदी बस्तियों की वृद्धि करते हैं । औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है और वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है । औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के समय प्रदूषण नियंत्रण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है । आग, धूल, राख और धुआँ की कालिमा का प्रभाव घर, बाग-बगीचे सहित दूर-दूर तक होता है । इससे आँखों में चिपचिपापन, रोहा, दृष्टि कमजोर होना, टी. बी., कैंसर आदि रोग फैलते हैं । औद्योगीकरण के फलस्वरूप तेजाबी वर्षा भी होती है जो फसलों, पेड़-पौधों आदि को विशेष हानि पहुँचाती है । अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता भी घट जाती है ।
कृषि योग्य भूमि में कमी क्यों हुई है ?
Aतेजाबी वर्षा के कारण
Bबाग-बगीचों की बहुतायत के कारण
Cऔद्योगीकरण के कारण
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (C) औद्योगीकरण के कारण
Explanation
गद्यांश के अनुसार औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 131 से 135 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
औद्योगीकरण के फलस्वरूप नगरों की आबादी तेजी से बढ़ी है । गाँव के लोग रोटी रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर गंदी बस्तियों की वृद्धि करते हैं । औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है और वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है । औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के समय प्रदूषण नियंत्रण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है । आग, धूल, राख और धुआँ की कालिमा का प्रभाव घर, बाग-बगीचे सहित दूर-दूर तक होता है । इससे आँखों में चिपचिपापन, रोहा, दृष्टि कमजोर होना, टी. बी., कैंसर आदि रोग फैलते हैं । औद्योगीकरण के फलस्वरूप तेजाबी वर्षा भी होती है जो फसलों, पेड़-पौधों आदि को विशेष हानि पहुँचाती है । अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता भी घट जाती है ।
औद्योगीकरण के कारण जनसंख्या कहाँ तेजी से बढ़ी है ?
Aदेश
Bगाँव
Cशहर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) शहर
Explanation
गद्यांश के पहले वाक्य के अनुसार औद्योगीकरण से नगरों (शहरों) की आबादी तेजी से बढ़ी है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 131 से 135 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
औद्योगीकरण के फलस्वरूप नगरों की आबादी तेजी से बढ़ी है । गाँव के लोग रोटी रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर गंदी बस्तियों की वृद्धि करते हैं । औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है और वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है । औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के समय प्रदूषण नियंत्रण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है । आग, धूल, राख और धुआँ की कालिमा का प्रभाव घर, बाग-बगीचे सहित दूर-दूर तक होता है । इससे आँखों में चिपचिपापन, रोहा, दृष्टि कमजोर होना, टी. बी., कैंसर आदि रोग फैलते हैं । औद्योगीकरण के फलस्वरूप तेजाबी वर्षा भी होती है जो फसलों, पेड़-पौधों आदि को विशेष हानि पहुँचाती है । अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता भी घट जाती है ।
हरियाली क्यों नष्ट हो गई है ?
Aवनों के विनाश के कारण
Bप्रदूषण के कारण
Cभूमि की उर्वरा क्षमता में कमी के कारण
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) वनों के विनाश के कारण
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 131 से 135 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
औद्योगीकरण के फलस्वरूप नगरों की आबादी तेजी से बढ़ी है । गाँव के लोग रोटी रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर गंदी बस्तियों की वृद्धि करते हैं । औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है और वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है । औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के समय प्रदूषण नियंत्रण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है । आग, धूल, राख और धुआँ की कालिमा का प्रभाव घर, बाग-बगीचे सहित दूर-दूर तक होता है । इससे आँखों में चिपचिपापन, रोहा, दृष्टि कमजोर होना, टी. बी., कैंसर आदि रोग फैलते हैं । औद्योगीकरण के फलस्वरूप तेजाबी वर्षा भी होती है जो फसलों, पेड़-पौधों आदि को विशेष हानि पहुँचाती है । अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता भी घट जाती है ।
लोग गाँव से आकर शहरों में क्यों बसते हैं ?
Aउत्तम सुविधाओं के लिए
Bरोजगार के लिए
Cमनोरंजन के लिए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) रोजगार के लिए
Explanation
गद्यांश के अनुसार गाँव के लोग रोटी-रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर बसते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 136 से 140 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
आलस्य को छोड़ने के लिए शारीरिक श्रम करना चाहिए । आलस्य को जीतने का एक यही उपाय है । यदि इससे काम न लिया गया, तो उसकी सजा प्रकृति की ओर से मिले बिना न रहेगी । बीमारियों के या किसी और कष्ट के रूप में वह सजा भोगनी ही पड़ेगी । शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता । इसका प्रतिफल अवश्य मिलता है । उत्तम आरोग्य प्राप्त होता है । शारीरिक रोग का जैसे मन पर असर होता है, वैसे ही शारीरिक आरोग्य का भी होता है । यह अनुभव सिद्ध है ।
शरीर श्रम में क्या लगता है ?
Aसमय
Bअनुभव
Cशरीर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) समय
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता, यानी श्रम में समय लगता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 136 से 140 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
आलस्य को छोड़ने के लिए शारीरिक श्रम करना चाहिए । आलस्य को जीतने का एक यही उपाय है । यदि इससे काम न लिया गया, तो उसकी सजा प्रकृति की ओर से मिले बिना न रहेगी । बीमारियों के या किसी और कष्ट के रूप में वह सजा भोगनी ही पड़ेगी । शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता । इसका प्रतिफल अवश्य मिलता है । उत्तम आरोग्य प्राप्त होता है । शारीरिक रोग का जैसे मन पर असर होता है, वैसे ही शारीरिक आरोग्य का भी होता है । यह अनुभव सिद्ध है ।
आरोग्य से तात्पर्य है
Aरोगमुक्त होना
Bरोगी होना
Cस्वस्थ होना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
'आरोग्य' का अर्थ रोग से मुक्त होना भी है और स्वस्थ होना भी, इसलिए 'एक से अधिक' सही है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 136 से 140 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
आलस्य को छोड़ने के लिए शारीरिक श्रम करना चाहिए । आलस्य को जीतने का एक यही उपाय है । यदि इससे काम न लिया गया, तो उसकी सजा प्रकृति की ओर से मिले बिना न रहेगी । बीमारियों के या किसी और कष्ट के रूप में वह सजा भोगनी ही पड़ेगी । शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता । इसका प्रतिफल अवश्य मिलता है । उत्तम आरोग्य प्राप्त होता है । शारीरिक रोग का जैसे मन पर असर होता है, वैसे ही शारीरिक आरोग्य का भी होता है । यह अनुभव सिद्ध है ।
आलस्य के परिणामस्वरूप सजा किस रूप में मिलती है ?
Aप्रकृति से दूर होना
Bमन का दुखी होना
Cबीमारी एवं कष्ट होना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) बीमारी एवं कष्ट होना
Explanation
गद्यांश के अनुसार आलस्य की सजा प्रकृति की ओर से बीमारियों या किसी और कष्ट के रूप में मिलती है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 136 से 140 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
आलस्य को छोड़ने के लिए शारीरिक श्रम करना चाहिए । आलस्य को जीतने का एक यही उपाय है । यदि इससे काम न लिया गया, तो उसकी सजा प्रकृति की ओर से मिले बिना न रहेगी । बीमारियों के या किसी और कष्ट के रूप में वह सजा भोगनी ही पड़ेगी । शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता । इसका प्रतिफल अवश्य मिलता है । उत्तम आरोग्य प्राप्त होता है । शारीरिक रोग का जैसे मन पर असर होता है, वैसे ही शारीरिक आरोग्य का भी होता है । यह अनुभव सिद्ध है ।
रोग का प्रभाव किस पर पड़ता है ?
Aआलस्य
Bश्रम
Cमन
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) मन
Explanation
गद्यांश के अनुसार शारीरिक रोग का असर मन पर होता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 136 से 140 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
आलस्य को छोड़ने के लिए शारीरिक श्रम करना चाहिए । आलस्य को जीतने का एक यही उपाय है । यदि इससे काम न लिया गया, तो उसकी सजा प्रकृति की ओर से मिले बिना न रहेगी । बीमारियों के या किसी और कष्ट के रूप में वह सजा भोगनी ही पड़ेगी । शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता । इसका प्रतिफल अवश्य मिलता है । उत्तम आरोग्य प्राप्त होता है । शारीरिक रोग का जैसे मन पर असर होता है, वैसे ही शारीरिक आरोग्य का भी होता है । यह अनुभव सिद्ध है ।
आलस्य को जीतने का क्या उपाय है ?
Aव्यर्थ काम न करना
Bशारीरिक श्रम करना
Cशारीरिक रूप से स्वस्थ होना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) शारीरिक श्रम करना
Explanation
गद्यांश के पहले वाक्यों के अनुसार आलस्य को जीतने का एक ही उपाय शारीरिक श्रम करना है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं ।
चंद्रिका का पर्यायवाची है
Aविभा
Bप्रकाश
Cचाँदनी
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) चाँदनी
Explanation
'चंद्रिका' का अर्थ चाँदनी है, यही उसका सही पर्यायवाची है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं ।
मनुष्य की कीर्ति किससे फैलती है ?
Aपुण्य कृतियों से
Bकवियों और लेखकों से
Cशारीरिक सुन्दरता से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) पुण्य कृतियों से
Explanation
गद्यांश के अंतिम वाक्य के अनुसार मनुष्य की कीर्ति उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं ।
पाठक और श्रोता किससे नया पाठ सीखा करते हैं ?
Aमनुष्य के उज्ज्वल कार्य से
Bअभिनय से
Cयशगान से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) मनुष्य के उज्ज्वल कार्य से
Explanation
गद्यांश के अनुसार पाठक और श्रोता स्वावलंबी मनुष्य के उज्ज्वल कार्यों (उसके जीवन-कर्मों) से नया पाठ सीखते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं ।
चारण और भाट किसका यशगान करते हैं ?
Aपूर्णिमा की चंद्रिका का
Bस्वावलंबी मनुष्य का
Cकवियों और लेखकों का
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) स्वावलंबी मनुष्य का
Explanation
गद्यांश के आरंभ में कहा गया है कि चारण और भाट स्वावलंबी मनुष्य का यशगान करते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं ।
‘धवल’ का अर्थ है
Aश्याम
Bस्वच्छ
Cउजला
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
'धवल' का अर्थ स्वच्छ भी है और उजला भी, इसलिए 'एक से अधिक' सही है।
How to use these BPSC TRE Hindi questions
Every question here was asked in a real BPSC TRE paper; the paper and shift are shown on the card, and the number opens the question on its own page. Try each one before tapping Show answer, then attempt the full BPSC TRE papers as timed tests to check your speed under exam conditions.