853 Hindi questions asked in BPSC TRE previous year papers, each with the correct answer and explanation. Read them free on UTpaper, or attempt the full papers as timed online tests.
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
लोग आश्चर्यविमूढ़ क्यों होते हैं ?
Aआदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर
Bआदर्श व्यक्ति का साहस देखकर
Cआदर्श व्यक्ति का ज्ञान देखकर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) आदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर
Explanation
गद्यांश के अनुसार लोग आदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
आदर्श व्यक्ति के जीवन में किसके लिए स्थान नहीं होता ?
Aआलस्य के लिए
Bमनोविनोद के लिए
Cविश्राम के लिए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) आलस्य के लिए
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि आदर्श व्यक्ति के जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
आदर्श व्यक्ति किसमें आस्था रखता है ?
Aप्रेम में
Bसद्व्यवहार में
Cसद्कर्म में
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) सद्कर्म में
Explanation
गद्यांश की पहली पंक्ति के अनुसार आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है
Aआदर्श व्यक्ति
Bसद्कर्म
Cकर्मशीलता
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) आदर्श व्यक्ति
Explanation
पूरा गद्यांश आदर्श व्यक्ति के गुणों का वर्णन करता है, इसलिए उपयुक्त शीर्षक 'आदर्श व्यक्ति' है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
किस अर्थ में आदर्श व्यक्ति का चरित्र प्रशंसनीय होता है ?
Aवह बहादुरी से संकटों का सामना करता है
Bवह ज्ञान से संकट को दूर करता है
Cवह धैर्य से संकट को दूर करता है
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) वह धैर्य से संकट को दूर करता है
Explanation
अंतिम पंक्ति में बताया गया है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है, इसलिए उसका चरित्र प्रशंसनीय है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
व्यक्ति के पतन का कारण है
Aअत्यधिक विभूति
Bअत्यधिक शक्ति
Cचारित्रिक दोष
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) चारित्रिक दोष
Explanation
गद्यांश में लिखा है कि चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
विभिन्न दूषणों से मुक्त होने का अर्थ है
Aधन की रक्षा
Bचरित्र की रक्षा
Cपरिवार की रक्षा
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) चरित्र की रक्षा
Explanation
गद्यांश के अनुसार चरित्र की रक्षा का अर्थ काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
स्वस्थ व्यक्ति का लक्षण है
Aअत्यधिक बल
Bआत्मसंयम
Cअपार संपदा
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) आत्मसंयम
Explanation
गद्यांश कहता है कि वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो, अतः आत्मसंयम स्वस्थ व्यक्ति का लक्षण है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
किसी व्यक्ति का विकास किस पर आश्रित है ?
Aआत्मसंयम
Bसमुचित अध्ययन
Cसत्संगति
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) आत्मसंयम
Explanation
आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
स्वास्थ्य का सहोदर है
Aव्यायाम
Bऔषधि
Cपौष्टिक भोजन
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) व्यायाम
Explanation
गद्यांश में व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
लोग आश्चर्यविमूढ़ क्यों होते हैं ?
Aआदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर
Bआदर्श व्यक्ति का ज्ञान देखकर
Cआदर्श व्यक्ति का साहस देखकर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) आदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर
Explanation
गद्यांश के अनुसार लोग आदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
किस अर्थ में आदर्श व्यक्ति का चरित्र प्रशंसनीय होता है ?
Aवह बहादुरी से संकटों का सामना करता है
Bवह धैर्य से संकट को दूर करता है
Cवह ज्ञान से संकट को दूर करता है
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) वह धैर्य से संकट को दूर करता है
Explanation
अंतिम पंक्ति में बताया गया है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है, इसलिए उसका चरित्र प्रशंसनीय है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है
Aआदर्श व्यक्ति
Bकर्मशीलता
Cसद्कर्म
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) आदर्श व्यक्ति
Explanation
पूरा गद्यांश आदर्श व्यक्ति के गुणों का वर्णन करता है, इसलिए उपयुक्त शीर्षक 'आदर्श व्यक्ति' है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
आदर्श व्यक्ति के जीवन में किसके लिए स्थान नहीं होता ?
Aआलस्य के लिए
Bविश्राम के लिए
Cमनोविनोद के लिए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) आलस्य के लिए
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि आदर्श व्यक्ति के जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
आदर्श व्यक्ति किसमें आस्था रखता है ?
Aप्रेम में
Bसद्कर्म में
Cसद्व्यवहार में
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) सद्कर्म में
Explanation
गद्यांश की पहली पंक्ति के अनुसार आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
स्वास्थ्य का सहोदर है
Aव्यायाम
Bपौष्टिक भोजन
Cऔषधि
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) व्यायाम
Explanation
गद्यांश में व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
स्वस्थ व्यक्ति का लक्षण है
Aअत्यधिक बल
Bअपार संपदा
Cआत्मसंयम
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) आत्मसंयम
Explanation
गद्यांश कहता है कि वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो, अतः आत्मसंयम स्वस्थ व्यक्ति का लक्षण है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
किसी व्यक्ति का विकास किस पर आश्रित है ?
Aआत्मसंयम
Bसत्संगति
Cसमुचित अध्ययन
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) आत्मसंयम
Explanation
आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
व्यक्ति के पतन का कारण है
Aअत्यधिक विभूति
Bचारित्रिक दोष
Cअत्यधिक शक्ति
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) चारित्रिक दोष
Explanation
गद्यांश में लिखा है कि चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
विभिन्न दूषणों से मुक्त होने का अर्थ है
Aधन की रक्षा
Bपरिवार की रक्षा
Cचरित्र की रक्षा
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (C) चरित्र की रक्षा
Explanation
गद्यांश के अनुसार चरित्र की रक्षा का अर्थ काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना है।
'अंगूठा दिखाना' मुहावरे का अर्थ ऐन मौके पर इनकार करके धोखा देना है।
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