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गद्यांश / पद्यांश के प्रश्न (page 5)

229 गद्यांश / पद्यांश (Hindi) questions asked in CTET previous year papers, each with the correct answer and explanation. Read them free on UTpaper, or attempt the full papers as timed online tests.

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Q201CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। प्रत्येक व्यक्ति का जन्म राजा बनने के लिए हुआ है, इसे इस रूप में भी समझ सकते हैं कि हर व्यक्ति के पूरे जीवन का सतत संघर्ष एक सत्ता को पाना है। ऐसी सत्ता जिसकी प्रकृति, जिसकी सीमाएँ, जिसके व्यवहार को वह व्यक्ति स्वयं निर्धारित करता है। इस संघर्ष के अलग-अलग रूप हम अपने आसपास के तमाम रिश्तों में भी देख सकते हैं। परिवार के अंदर भी यह चीज दिखती है। उदाहरण के लिए एक परिवार में कोई एक व्यक्ति मुखिया बनकर अपनी भूमिका का विस्तार करता है और उस परिवार जैसी इकाई का राजा बनता है। कोई व्यक्ति अपनी कॉलोनी में लीडर बनता है तो कोई गली-मोहल्ले का राजा बनना चाहता है। कोई विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनकर अपनी सीमाओं का विस्तार करना और एक बड़े हिस्से का राजा बनना चाहता है। जो इन सब चक्करों में नहीं है, अकेला व्यक्ति है, वह भी अपने शरीर का राजा बनना चाहता है। अपने शरीर पर अपना अधिकार भी बड़ी बात है। गद्यांश के अनुसार __________ अपने शरीर का राजा बनना चाहता है।
  1. Aलीडर
  2. Bव्यक्ति
  3. Cसांसद
  4. Dमुखिया
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Correct answer: (B) व्यक्ति

Explanation

गद्यांश में लिखा है कि जो इन सब चक्करों में नहीं है, ऐसा अकेला व्यक्ति भी अपने शरीर का राजा बनना चाहता है।

Q202CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। प्रत्येक व्यक्ति का जन्म राजा बनने के लिए हुआ है, इसे इस रूप में भी समझ सकते हैं कि हर व्यक्ति के पूरे जीवन का सतत संघर्ष एक सत्ता को पाना है। ऐसी सत्ता जिसकी प्रकृति, जिसकी सीमाएँ, जिसके व्यवहार को वह व्यक्ति स्वयं निर्धारित करता है। इस संघर्ष के अलग-अलग रूप हम अपने आसपास के तमाम रिश्तों में भी देख सकते हैं। परिवार के अंदर भी यह चीज दिखती है। उदाहरण के लिए एक परिवार में कोई एक व्यक्ति मुखिया बनकर अपनी भूमिका का विस्तार करता है और उस परिवार जैसी इकाई का राजा बनता है। कोई व्यक्ति अपनी कॉलोनी में लीडर बनता है तो कोई गली-मोहल्ले का राजा बनना चाहता है। कोई विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनकर अपनी सीमाओं का विस्तार करना और एक बड़े हिस्से का राजा बनना चाहता है। जो इन सब चक्करों में नहीं है, अकेला व्यक्ति है, वह भी अपने शरीर का राजा बनना चाहता है। अपने शरीर पर अपना अधिकार भी बड़ी बात है। गद्यांश के अनुसार मनुष्य -
  1. Aपूरे विश्व पर आधिपत्य चाहता है।
  2. Bअपनी भूमिका का विस्तार चाहता है।
  3. Cअपने विचारों पर अधिकार चाहता है।
  4. Dसतत संघर्षरत रहना चाहता है।
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Correct answer: (B) अपनी भूमिका का विस्तार चाहता है।

Explanation

गद्यांश के अनुसार व्यक्ति मुखिया, लीडर, विधायक या प्रधानमंत्री बनकर अपनी भूमिका और सीमाओं का विस्तार करना चाहता है। संघर्ष उसका साधन है, लक्ष्य नहीं।

Q203CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। प्रत्येक व्यक्ति का जन्म राजा बनने के लिए हुआ है, इसे इस रूप में भी समझ सकते हैं कि हर व्यक्ति के पूरे जीवन का सतत संघर्ष एक सत्ता को पाना है। ऐसी सत्ता जिसकी प्रकृति, जिसकी सीमाएँ, जिसके व्यवहार को वह व्यक्ति स्वयं निर्धारित करता है। इस संघर्ष के अलग-अलग रूप हम अपने आसपास के तमाम रिश्तों में भी देख सकते हैं। परिवार के अंदर भी यह चीज दिखती है। उदाहरण के लिए एक परिवार में कोई एक व्यक्ति मुखिया बनकर अपनी भूमिका का विस्तार करता है और उस परिवार जैसी इकाई का राजा बनता है। कोई व्यक्ति अपनी कॉलोनी में लीडर बनता है तो कोई गली-मोहल्ले का राजा बनना चाहता है। कोई विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनकर अपनी सीमाओं का विस्तार करना और एक बड़े हिस्से का राजा बनना चाहता है। जो इन सब चक्करों में नहीं है, अकेला व्यक्ति है, वह भी अपने शरीर का राजा बनना चाहता है। अपने शरीर पर अपना अधिकार भी बड़ी बात है। समूह से भिन्न शब्द है -
  1. Aमुख्यमंत्री
  2. Bसांसद
  3. Cसंघर्ष
  4. Dराजा
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Correct answer: (C) संघर्ष

Explanation

मुख्यमंत्री, सांसद और राजा तीनों पद या व्यक्ति (शासक) के नाम हैं, जबकि संघर्ष एक भाव/क्रिया का नाम है। इसलिए संघर्ष समूह से भिन्न है।

Q204CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। प्रत्येक व्यक्ति का जन्म राजा बनने के लिए हुआ है, इसे इस रूप में भी समझ सकते हैं कि हर व्यक्ति के पूरे जीवन का सतत संघर्ष एक सत्ता को पाना है। ऐसी सत्ता जिसकी प्रकृति, जिसकी सीमाएँ, जिसके व्यवहार को वह व्यक्ति स्वयं निर्धारित करता है। इस संघर्ष के अलग-अलग रूप हम अपने आसपास के तमाम रिश्तों में भी देख सकते हैं। परिवार के अंदर भी यह चीज दिखती है। उदाहरण के लिए एक परिवार में कोई एक व्यक्ति मुखिया बनकर अपनी भूमिका का विस्तार करता है और उस परिवार जैसी इकाई का राजा बनता है। कोई व्यक्ति अपनी कॉलोनी में लीडर बनता है तो कोई गली-मोहल्ले का राजा बनना चाहता है। कोई विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनकर अपनी सीमाओं का विस्तार करना और एक बड़े हिस्से का राजा बनना चाहता है। जो इन सब चक्करों में नहीं है, अकेला व्यक्ति है, वह भी अपने शरीर का राजा बनना चाहता है। अपने शरीर पर अपना अधिकार भी बड़ी बात है। ‘इक’ प्रत्यय का प्रयोग __________ शब्द में नहीं हो सकता?
  1. Aव्यवहार
  2. Bप्रकृति
  3. Cजीवन
  4. Dपरिवार
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Correct answer: (C) जीवन

Explanation

‘इक’ प्रत्यय से व्यवहार से व्यावहारिक, प्रकृति से प्राकृतिक और परिवार से पारिवारिक बनते हैं। ‘जीवन’ के साथ ‘इक’ लगाकर कोई प्रचलित शब्द नहीं बनता।

Q205CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। प्रत्येक व्यक्ति का जन्म राजा बनने के लिए हुआ है, इसे इस रूप में भी समझ सकते हैं कि हर व्यक्ति के पूरे जीवन का सतत संघर्ष एक सत्ता को पाना है। ऐसी सत्ता जिसकी प्रकृति, जिसकी सीमाएँ, जिसके व्यवहार को वह व्यक्ति स्वयं निर्धारित करता है। इस संघर्ष के अलग-अलग रूप हम अपने आसपास के तमाम रिश्तों में भी देख सकते हैं। परिवार के अंदर भी यह चीज दिखती है। उदाहरण के लिए एक परिवार में कोई एक व्यक्ति मुखिया बनकर अपनी भूमिका का विस्तार करता है और उस परिवार जैसी इकाई का राजा बनता है। कोई व्यक्ति अपनी कॉलोनी में लीडर बनता है तो कोई गली-मोहल्ले का राजा बनना चाहता है। कोई विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनकर अपनी सीमाओं का विस्तार करना और एक बड़े हिस्से का राजा बनना चाहता है। जो इन सब चक्करों में नहीं है, अकेला व्यक्ति है, वह भी अपने शरीर का राजा बनना चाहता है। अपने शरीर पर अपना अधिकार भी बड़ी बात है। गद्यांश के अनुसार एक व्यक्ति का जन्म __________ बनने के लिए हुआ है।
  1. Aराजा
  2. Bमुखिया
  3. Cलीडर
  4. Dपरिवार
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Correct answer: (A) राजा

Explanation

गद्यांश का पहला वाक्य है: ‘प्रत्येक व्यक्ति का जन्म राजा बनने के लिए हुआ है।’

Q206CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। प्रत्येक व्यक्ति का जन्म राजा बनने के लिए हुआ है, इसे इस रूप में भी समझ सकते हैं कि हर व्यक्ति के पूरे जीवन का सतत संघर्ष एक सत्ता को पाना है। ऐसी सत्ता जिसकी प्रकृति, जिसकी सीमाएँ, जिसके व्यवहार को वह व्यक्ति स्वयं निर्धारित करता है। इस संघर्ष के अलग-अलग रूप हम अपने आसपास के तमाम रिश्तों में भी देख सकते हैं। परिवार के अंदर भी यह चीज दिखती है। उदाहरण के लिए एक परिवार में कोई एक व्यक्ति मुखिया बनकर अपनी भूमिका का विस्तार करता है और उस परिवार जैसी इकाई का राजा बनता है। कोई व्यक्ति अपनी कॉलोनी में लीडर बनता है तो कोई गली-मोहल्ले का राजा बनना चाहता है। कोई विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनकर अपनी सीमाओं का विस्तार करना और एक बड़े हिस्से का राजा बनना चाहता है। जो इन सब चक्करों में नहीं है, अकेला व्यक्ति है, वह भी अपने शरीर का राजा बनना चाहता है। अपने शरीर पर अपना अधिकार भी बड़ी बात है। गद्यांश के अनुसार व्यक्ति __________ के लिए संघर्ष करता है।
  1. Aसत्ता की सीमाएँ निर्धारित करने
  2. Bबड़े साम्राज्य का राजा बनने
  3. Cसत्ता प्राप्त करने
  4. Dसत्ता को बढ़ाने
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Correct answer: (C) सत्ता प्राप्त करने

Explanation

गद्यांश के अनुसार हर व्यक्ति के पूरे जीवन का सतत संघर्ष ‘एक सत्ता को पाना’ है, यानी व्यक्ति सत्ता प्राप्त करने के लिए संघर्ष करता है।

Q207CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। प्रत्येक व्यक्ति का जन्म राजा बनने के लिए हुआ है, इसे इस रूप में भी समझ सकते हैं कि हर व्यक्ति के पूरे जीवन का सतत संघर्ष एक सत्ता को पाना है। ऐसी सत्ता जिसकी प्रकृति, जिसकी सीमाएँ, जिसके व्यवहार को वह व्यक्ति स्वयं निर्धारित करता है। इस संघर्ष के अलग-अलग रूप हम अपने आसपास के तमाम रिश्तों में भी देख सकते हैं। परिवार के अंदर भी यह चीज दिखती है। उदाहरण के लिए एक परिवार में कोई एक व्यक्ति मुखिया बनकर अपनी भूमिका का विस्तार करता है और उस परिवार जैसी इकाई का राजा बनता है। कोई व्यक्ति अपनी कॉलोनी में लीडर बनता है तो कोई गली-मोहल्ले का राजा बनना चाहता है। कोई विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री बनकर अपनी सीमाओं का विस्तार करना और एक बड़े हिस्से का राजा बनना चाहता है। जो इन सब चक्करों में नहीं है, अकेला व्यक्ति है, वह भी अपने शरीर का राजा बनना चाहता है। अपने शरीर पर अपना अधिकार भी बड़ी बात है। ‘लीडर’ शब्द है -
  1. Aआगत
  2. Bतत्सम
  3. Cतद्भव
  4. Dदेशज
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Correct answer: (A) आगत

Explanation

‘लीडर’ अंग्रेज़ी भाषा (leader) से हिंदी में आया शब्द है। दूसरी भाषाओं से आए शब्द आगत (विदेशज) शब्द कहलाते हैं।

Q208CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इन दिनों फिर से हिंदी बनाम स्थानीय भाषाओं को लेकर शोर मचा है। इसमें कुछ चीजें समझने वाली हैं। सबसे पहले तो यही कि हिंदी हमारी मातृभाषा जरूर है, लेकिन कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल समेत अन्य प्रांत में जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए यह मातृभाषा नहीं हो सकती। जितना प्रेम हमें हिंदी से है, उतना ही प्रेम पंजाब में जन्मे व्यक्ति को पंजाबी से होगा, कर्नाटक में जन्मे शख्स को कन्नड़ से होगा, तमिलनाडु में जन्मे व्यक्ति को तमिल से होगा। हिंदी राजभाषा है, उसका सम्मान सर्वोपरि है, मगर हमें यह भी ध्यान देना होगा कि हिंदी का सम्मान करने के अति उत्साह में कहीं हम अन्य भाषाओं का अपमान तो नहीं कर रहे? जैसे हमारी माता, वैसे ही सबकी माता। हिंदी हमारी मातृभाषा है, तो कन्नड़, तमिल, मलयालम, तेलुगु भी किसी न किसी की मातृभाषा है। हिन्दुस्तान हमारा राष्ट्र है, हिंदी इसकी एक प्रमुख भाषा, लेकिन तमिल, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगु, मलयालम आदि भी इसी राष्ट्र में बोली जाने वाली भाषाएँ हैं, जिनका बराबर सम्मान होना चाहिए। तभी हम गर्व से कह पाएँगे कि अनेकता में एकता हमारी सभ्यता है। ‘जैसी हमारी माता, वैसे ही सबकी माता।’ वाक्य किस संदर्भ में कहा गया है?
  1. Aभाषा के संदर्भ में
  2. Bमाता के संदर्भ में
  3. Cराष्ट्र के संदर्भ में
  4. Dराजनीति के संदर्भ में
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Correct answer: (A) भाषा के संदर्भ में

Explanation

यह वाक्य मातृभाषा के लिए कहा गया है: जैसे हिंदी हमारी मातृभाषा है, वैसे ही कन्नड़, तमिल आदि दूसरों की मातृभाषा हैं। अतः यह भाषा के संदर्भ में है।

Q209CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इन दिनों फिर से हिंदी बनाम स्थानीय भाषाओं को लेकर शोर मचा है। इसमें कुछ चीजें समझने वाली हैं। सबसे पहले तो यही कि हिंदी हमारी मातृभाषा जरूर है, लेकिन कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल समेत अन्य प्रांत में जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए यह मातृभाषा नहीं हो सकती। जितना प्रेम हमें हिंदी से है, उतना ही प्रेम पंजाब में जन्मे व्यक्ति को पंजाबी से होगा, कर्नाटक में जन्मे शख्स को कन्नड़ से होगा, तमिलनाडु में जन्मे व्यक्ति को तमिल से होगा। हिंदी राजभाषा है, उसका सम्मान सर्वोपरि है, मगर हमें यह भी ध्यान देना होगा कि हिंदी का सम्मान करने के अति उत्साह में कहीं हम अन्य भाषाओं का अपमान तो नहीं कर रहे? जैसे हमारी माता, वैसे ही सबकी माता। हिंदी हमारी मातृभाषा है, तो कन्नड़, तमिल, मलयालम, तेलुगु भी किसी न किसी की मातृभाषा है। हिन्दुस्तान हमारा राष्ट्र है, हिंदी इसकी एक प्रमुख भाषा, लेकिन तमिल, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगु, मलयालम आदि भी इसी राष्ट्र में बोली जाने वाली भाषाएँ हैं, जिनका बराबर सम्मान होना चाहिए। तभी हम गर्व से कह पाएँगे कि अनेकता में एकता हमारी सभ्यता है। ‘हिंदी राजभाषा है, उसका सम्मान सर्वोपरि है।’ से आशय है :
  1. Aराजकीय कामकाज की भाषा होने के कारण हिंदी का सम्मान सबसे ऊपर है
  2. Bराज्य विशेष की भाषा होने के कारण हिंदी का सम्मान सबसे ऊपर है
  3. Cभारत की राष्ट्रभाषा होने के कारण हिंदी का सम्मान सबसे ऊपर है
  4. Dराजाओं की भाषा होने के कारण हिंदी का सम्मान सबसे ऊपर है
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Correct answer: (A) राजकीय कामकाज की भाषा होने के कारण हिंदी का सम्मान सबसे ऊपर है

Explanation

राजभाषा का अर्थ है सरकारी (राजकीय) कामकाज की भाषा। हिंदी संघ की राजभाषा है, इसलिए उसका सम्मान सर्वोपरि बताया गया है; संविधान में उसे राष्ट्रभाषा नहीं कहा गया है।

Q210CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इन दिनों फिर से हिंदी बनाम स्थानीय भाषाओं को लेकर शोर मचा है। इसमें कुछ चीजें समझने वाली हैं। सबसे पहले तो यही कि हिंदी हमारी मातृभाषा जरूर है, लेकिन कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल समेत अन्य प्रांत में जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए यह मातृभाषा नहीं हो सकती। जितना प्रेम हमें हिंदी से है, उतना ही प्रेम पंजाब में जन्मे व्यक्ति को पंजाबी से होगा, कर्नाटक में जन्मे शख्स को कन्नड़ से होगा, तमिलनाडु में जन्मे व्यक्ति को तमिल से होगा। हिंदी राजभाषा है, उसका सम्मान सर्वोपरि है, मगर हमें यह भी ध्यान देना होगा कि हिंदी का सम्मान करने के अति उत्साह में कहीं हम अन्य भाषाओं का अपमान तो नहीं कर रहे? जैसे हमारी माता, वैसे ही सबकी माता। हिंदी हमारी मातृभाषा है, तो कन्नड़, तमिल, मलयालम, तेलुगु भी किसी न किसी की मातृभाषा है। हिन्दुस्तान हमारा राष्ट्र है, हिंदी इसकी एक प्रमुख भाषा, लेकिन तमिल, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगु, मलयालम आदि भी इसी राष्ट्र में बोली जाने वाली भाषाएँ हैं, जिनका बराबर सम्मान होना चाहिए। तभी हम गर्व से कह पाएँगे कि अनेकता में एकता हमारी सभ्यता है। ‘अनेकता में एकता हमारी सभ्यता है।’ वाक्य से आशय है :
  1. Aविविधता ही किसी राष्ट्र की पहचान होती है
  2. Bविविधता से ही समरसता आती है
  3. Cविविधता होते हुए भी हम सब एक हैं
  4. Dविविधता में एकता पुरानी बात हो गई है
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Correct answer: (C) विविधता होते हुए भी हम सब एक हैं

Explanation

‘अनेकता में एकता’ का अर्थ है कि भाषा, क्षेत्र आदि की विविधता होते हुए भी हम सब एक हैं।

Q211CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इन दिनों फिर से हिंदी बनाम स्थानीय भाषाओं को लेकर शोर मचा है। इसमें कुछ चीजें समझने वाली हैं। सबसे पहले तो यही कि हिंदी हमारी मातृभाषा जरूर है, लेकिन कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल समेत अन्य प्रांत में जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए यह मातृभाषा नहीं हो सकती। जितना प्रेम हमें हिंदी से है, उतना ही प्रेम पंजाब में जन्मे व्यक्ति को पंजाबी से होगा, कर्नाटक में जन्मे शख्स को कन्नड़ से होगा, तमिलनाडु में जन्मे व्यक्ति को तमिल से होगा। हिंदी राजभाषा है, उसका सम्मान सर्वोपरि है, मगर हमें यह भी ध्यान देना होगा कि हिंदी का सम्मान करने के अति उत्साह में कहीं हम अन्य भाषाओं का अपमान तो नहीं कर रहे? जैसे हमारी माता, वैसे ही सबकी माता। हिंदी हमारी मातृभाषा है, तो कन्नड़, तमिल, मलयालम, तेलुगु भी किसी न किसी की मातृभाषा है। हिन्दुस्तान हमारा राष्ट्र है, हिंदी इसकी एक प्रमुख भाषा, लेकिन तमिल, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगु, मलयालम आदि भी इसी राष्ट्र में बोली जाने वाली भाषाएँ हैं, जिनका बराबर सम्मान होना चाहिए। तभी हम गर्व से कह पाएँगे कि अनेकता में एकता हमारी सभ्यता है। ‘स्थानीय’ में प्रत्यय है -
  1. Aनीय
  2. Bईय
  3. Cइय
  4. Dय
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Correct answer: (B) ईय

Explanation

‘स्थानीय’ = स्थान + ईय। जैसे भारत + ईय = भारतीय, वैसे ही यहाँ ‘ईय’ प्रत्यय है।

Q212CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इन दिनों फिर से हिंदी बनाम स्थानीय भाषाओं को लेकर शोर मचा है। इसमें कुछ चीजें समझने वाली हैं। सबसे पहले तो यही कि हिंदी हमारी मातृभाषा जरूर है, लेकिन कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल समेत अन्य प्रांत में जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए यह मातृभाषा नहीं हो सकती। जितना प्रेम हमें हिंदी से है, उतना ही प्रेम पंजाब में जन्मे व्यक्ति को पंजाबी से होगा, कर्नाटक में जन्मे शख्स को कन्नड़ से होगा, तमिलनाडु में जन्मे व्यक्ति को तमिल से होगा। हिंदी राजभाषा है, उसका सम्मान सर्वोपरि है, मगर हमें यह भी ध्यान देना होगा कि हिंदी का सम्मान करने के अति उत्साह में कहीं हम अन्य भाषाओं का अपमान तो नहीं कर रहे? जैसे हमारी माता, वैसे ही सबकी माता। हिंदी हमारी मातृभाषा है, तो कन्नड़, तमिल, मलयालम, तेलुगु भी किसी न किसी की मातृभाषा है। हिन्दुस्तान हमारा राष्ट्र है, हिंदी इसकी एक प्रमुख भाषा, लेकिन तमिल, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगु, मलयालम आदि भी इसी राष्ट्र में बोली जाने वाली भाषाएँ हैं, जिनका बराबर सम्मान होना चाहिए। तभी हम गर्व से कह पाएँगे कि अनेकता में एकता हमारी सभ्यता है। गद्यांश के अनुसार किस बात का शोर हो रहा है?
  1. Aहिंदी बनाम क्षेत्रीय भाषाएँ
  2. Bहिंदी बनाम आधुनिक भाषाएँ
  3. Cहिंदी बनाम बोलियाँ
  4. Dहिंदी बनाम तमिल
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Correct answer: (A) हिंदी बनाम क्षेत्रीय भाषाएँ

Explanation

गद्यांश के पहले वाक्य में ‘हिंदी बनाम स्थानीय भाषाओं’ के शोर की बात है। स्थानीय भाषाएँ ही क्षेत्रीय भाषाएँ हैं।

Q213CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इन दिनों फिर से हिंदी बनाम स्थानीय भाषाओं को लेकर शोर मचा है। इसमें कुछ चीजें समझने वाली हैं। सबसे पहले तो यही कि हिंदी हमारी मातृभाषा जरूर है, लेकिन कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल समेत अन्य प्रांत में जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए यह मातृभाषा नहीं हो सकती। जितना प्रेम हमें हिंदी से है, उतना ही प्रेम पंजाब में जन्मे व्यक्ति को पंजाबी से होगा, कर्नाटक में जन्मे शख्स को कन्नड़ से होगा, तमिलनाडु में जन्मे व्यक्ति को तमिल से होगा। हिंदी राजभाषा है, उसका सम्मान सर्वोपरि है, मगर हमें यह भी ध्यान देना होगा कि हिंदी का सम्मान करने के अति उत्साह में कहीं हम अन्य भाषाओं का अपमान तो नहीं कर रहे? जैसे हमारी माता, वैसे ही सबकी माता। हिंदी हमारी मातृभाषा है, तो कन्नड़, तमिल, मलयालम, तेलुगु भी किसी न किसी की मातृभाषा है। हिन्दुस्तान हमारा राष्ट्र है, हिंदी इसकी एक प्रमुख भाषा, लेकिन तमिल, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगु, मलयालम आदि भी इसी राष्ट्र में बोली जाने वाली भाषाएँ हैं, जिनका बराबर सम्मान होना चाहिए। तभी हम गर्व से कह पाएँगे कि अनेकता में एकता हमारी सभ्यता है। गद्यांश में निम्न में से किस भाषा का ज़िक्र नहीं है?
  1. Aपंजाबी
  2. Bकन्नड़
  3. Cतमिल
  4. Dमैथिली
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Correct answer: (D) मैथिली

Explanation

गद्यांश में पंजाबी, कन्नड़, तमिल, मलयालम और तेलुगु का ज़िक्र है, पर मैथिली का कहीं उल्लेख नहीं है।

Q214CTET February 2026 Paper 1, 8 Feb 2026
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। इन दिनों फिर से हिंदी बनाम स्थानीय भाषाओं को लेकर शोर मचा है। इसमें कुछ चीजें समझने वाली हैं। सबसे पहले तो यही कि हिंदी हमारी मातृभाषा जरूर है, लेकिन कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल समेत अन्य प्रांत में जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए यह मातृभाषा नहीं हो सकती। जितना प्रेम हमें हिंदी से है, उतना ही प्रेम पंजाब में जन्मे व्यक्ति को पंजाबी से होगा, कर्नाटक में जन्मे शख्स को कन्नड़ से होगा, तमिलनाडु में जन्मे व्यक्ति को तमिल से होगा। हिंदी राजभाषा है, उसका सम्मान सर्वोपरि है, मगर हमें यह भी ध्यान देना होगा कि हिंदी का सम्मान करने के अति उत्साह में कहीं हम अन्य भाषाओं का अपमान तो नहीं कर रहे? जैसे हमारी माता, वैसे ही सबकी माता। हिंदी हमारी मातृभाषा है, तो कन्नड़, तमिल, मलयालम, तेलुगु भी किसी न किसी की मातृभाषा है। हिन्दुस्तान हमारा राष्ट्र है, हिंदी इसकी एक प्रमुख भाषा, लेकिन तमिल, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगु, मलयालम आदि भी इसी राष्ट्र में बोली जाने वाली भाषाएँ हैं, जिनका बराबर सम्मान होना चाहिए। तभी हम गर्व से कह पाएँगे कि अनेकता में एकता हमारी सभ्यता है। ‘अनेकता’ शब्द है -
  1. Aविशेषण
  2. Bक्रिया
  3. Cप्रविशेषण
  4. Dसंज्ञा
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Correct answer: (D) संज्ञा

Explanation

‘अनेक’ विशेषण है; उसमें ‘ता’ प्रत्यय लगाकर बना ‘अनेकता’ एक भाव को बताता है, इसलिए यह भाववाचक संज्ञा है।

Q215CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 121–128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति पर वैज्ञानिकों को भी कभी संदेह नहीं रहा। जिन लोगों ने घर पर चिंपैंजी पाले हैं, उन्होंने देखा है कि जन्म के बाद दो-एक वर्षों में चिंपैंजी के बच्चे मानव-शिशुओं से अधिक तेजी से नयी बातें सीख जाते हैं। हाँ, जब मानव-शिशु बोलना सीख जाता है, वह चिंपैंजी से तेजी से आगे निकलने लगता है। सूँस और चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति की तुलना करना अति कठिन है, क्योंकि इस तरह के दो अत्यंत भिन्न जीवों पर तुलनात्मक प्रयोग कर पाना लगभग असम्भव होता है। इसी तरह की कठिनाइयाँ इसी तरह के अन्य प्रयोगों में भी आती हैं। उदाहरण के लिए, भूल-भुलैया में सही मार्ग खोज निकालना तथा मेज पर रखी तीन वस्तुओं में अटपटी वस्तु को चुन निकालना एक-सी बुद्धिशक्ति के प्रमाण हैं। एक बात से प्रायः सभी विज्ञानी सहमत हैं कि पशुओं में स्तनपायियों का बुद्धिमत्ता पर लगभग एकाधिकार है। औजारों का प्रयोग करना भी बुद्धिमानी का एक चिह्न है। गालापगोस द्वीप का कठफोड़वा कैक्टस की डंडी से वृक्षों की दरार अथवा छिद्र से कीड़े-मकोड़े निकालकर खाता है। कुछ लोग कौए और उसके भाईबंदों को भी बहुत नम्बर देते हैं। शिकारी की बंदूक की पहुँच से दूर रहने की कला कौआ बखूबी जानता है। और कुछ वैज्ञानिकों का यह खयाल है कि काग और तोते में मनुष्य की बोली के चंद शब्द सीखने की जो क्षमता है, वह केवल आनुवंशिक क्षमता नहीं, बल्कि बुद्धिशक्ति का प्रमाण है। कुछ लोग हाथी को सबसे बुद्धिमान जीव मानते हैं। हाथी के पर्याय हैं
  1. Aवनराज, हस्ती, कुंज
  2. Bहस्ति, गज, वनराज
  3. Cगज, हस्ती, कुंज
  4. Dकुंजरू, हस्ती, गज
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Correct answer: (D) कुंजरू, हस्ती, गज

Explanation

गज, हस्ती और कुंजर — तीनों 'हाथी' के पर्यायवाची हैं (विकल्प में 'कुंजरू' छपा है, जो 'कुंजर' का ही रूप है)। वनराज का अर्थ शेर है और कुंज का अर्थ लताओं से घिरा स्थान है, इसलिए बाकी विकल्प गलत हैं।

Q216CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 121–128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति पर वैज्ञानिकों को भी कभी संदेह नहीं रहा। जिन लोगों ने घर पर चिंपैंजी पाले हैं, उन्होंने देखा है कि जन्म के बाद दो-एक वर्षों में चिंपैंजी के बच्चे मानव-शिशुओं से अधिक तेजी से नयी बातें सीख जाते हैं। हाँ, जब मानव-शिशु बोलना सीख जाता है, वह चिंपैंजी से तेजी से आगे निकलने लगता है। सूँस और चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति की तुलना करना अति कठिन है, क्योंकि इस तरह के दो अत्यंत भिन्न जीवों पर तुलनात्मक प्रयोग कर पाना लगभग असम्भव होता है। इसी तरह की कठिनाइयाँ इसी तरह के अन्य प्रयोगों में भी आती हैं। उदाहरण के लिए, भूल-भुलैया में सही मार्ग खोज निकालना तथा मेज पर रखी तीन वस्तुओं में अटपटी वस्तु को चुन निकालना एक-सी बुद्धिशक्ति के प्रमाण हैं। एक बात से प्रायः सभी विज्ञानी सहमत हैं कि पशुओं में स्तनपायियों का बुद्धिमत्ता पर लगभग एकाधिकार है। औजारों का प्रयोग करना भी बुद्धिमानी का एक चिह्न है। गालापगोस द्वीप का कठफोड़वा कैक्टस की डंडी से वृक्षों की दरार अथवा छिद्र से कीड़े-मकोड़े निकालकर खाता है। कुछ लोग कौए और उसके भाईबंदों को भी बहुत नम्बर देते हैं। शिकारी की बंदूक की पहुँच से दूर रहने की कला कौआ बखूबी जानता है। और कुछ वैज्ञानिकों का यह खयाल है कि काग और तोते में मनुष्य की बोली के चंद शब्द सीखने की जो क्षमता है, वह केवल आनुवंशिक क्षमता नहीं, बल्कि बुद्धिशक्ति का प्रमाण है। कुछ लोग हाथी को सबसे बुद्धिमान जीव मानते हैं। ‘अत्यंत’ का संधि-विच्छेद है
  1. Aअत् + यंत
  2. Bअति + अंत
  3. Cअती + अंत
  4. Dअत् + अंत
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Correct answer: (B) अति + अंत

Explanation

अत्यंत = अति + अंत। यहाँ 'इ' के बाद भिन्न स्वर 'अ' आने पर 'इ' का 'य्' हो जाता है, इसलिए यह यण् संधि है।

Q217CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 121–128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति पर वैज्ञानिकों को भी कभी संदेह नहीं रहा। जिन लोगों ने घर पर चिंपैंजी पाले हैं, उन्होंने देखा है कि जन्म के बाद दो-एक वर्षों में चिंपैंजी के बच्चे मानव-शिशुओं से अधिक तेजी से नयी बातें सीख जाते हैं। हाँ, जब मानव-शिशु बोलना सीख जाता है, वह चिंपैंजी से तेजी से आगे निकलने लगता है। सूँस और चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति की तुलना करना अति कठिन है, क्योंकि इस तरह के दो अत्यंत भिन्न जीवों पर तुलनात्मक प्रयोग कर पाना लगभग असम्भव होता है। इसी तरह की कठिनाइयाँ इसी तरह के अन्य प्रयोगों में भी आती हैं। उदाहरण के लिए, भूल-भुलैया में सही मार्ग खोज निकालना तथा मेज पर रखी तीन वस्तुओं में अटपटी वस्तु को चुन निकालना एक-सी बुद्धिशक्ति के प्रमाण हैं। एक बात से प्रायः सभी विज्ञानी सहमत हैं कि पशुओं में स्तनपायियों का बुद्धिमत्ता पर लगभग एकाधिकार है। औजारों का प्रयोग करना भी बुद्धिमानी का एक चिह्न है। गालापगोस द्वीप का कठफोड़वा कैक्टस की डंडी से वृक्षों की दरार अथवा छिद्र से कीड़े-मकोड़े निकालकर खाता है। कुछ लोग कौए और उसके भाईबंदों को भी बहुत नम्बर देते हैं। शिकारी की बंदूक की पहुँच से दूर रहने की कला कौआ बखूबी जानता है। और कुछ वैज्ञानिकों का यह खयाल है कि काग और तोते में मनुष्य की बोली के चंद शब्द सीखने की जो क्षमता है, वह केवल आनुवंशिक क्षमता नहीं, बल्कि बुद्धिशक्ति का प्रमाण है। कुछ लोग हाथी को सबसे बुद्धिमान जीव मानते हैं। प्राणियों, प्राणी संज्ञा का _____ रूप है।
  1. Aस्त्रीलिंग बहुवचन तिर्यक
  2. Bपुल्लिंग बहुवचन तिर्यक
  3. Cपुल्लिंग बहुवचन सामान्य
  4. Dस्त्रीलिंग बहुवचन सामान्य
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Correct answer: (B) पुल्लिंग बहुवचन तिर्यक

Explanation

'प्राणी' पुल्लिंग शब्द है। 'प्राणियों' में '-ओं' लगा है, जो बहुवचन का वह रूप है जिसके बाद परसर्ग (का, को, में) आता है; इसे तिर्यक (विकारी) रूप कहते हैं। अतः यह पुल्लिंग बहुवचन तिर्यक रूप है।

Q218CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 121–128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति पर वैज्ञानिकों को भी कभी संदेह नहीं रहा। जिन लोगों ने घर पर चिंपैंजी पाले हैं, उन्होंने देखा है कि जन्म के बाद दो-एक वर्षों में चिंपैंजी के बच्चे मानव-शिशुओं से अधिक तेजी से नयी बातें सीख जाते हैं। हाँ, जब मानव-शिशु बोलना सीख जाता है, वह चिंपैंजी से तेजी से आगे निकलने लगता है। सूँस और चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति की तुलना करना अति कठिन है, क्योंकि इस तरह के दो अत्यंत भिन्न जीवों पर तुलनात्मक प्रयोग कर पाना लगभग असम्भव होता है। इसी तरह की कठिनाइयाँ इसी तरह के अन्य प्रयोगों में भी आती हैं। उदाहरण के लिए, भूल-भुलैया में सही मार्ग खोज निकालना तथा मेज पर रखी तीन वस्तुओं में अटपटी वस्तु को चुन निकालना एक-सी बुद्धिशक्ति के प्रमाण हैं। एक बात से प्रायः सभी विज्ञानी सहमत हैं कि पशुओं में स्तनपायियों का बुद्धिमत्ता पर लगभग एकाधिकार है। औजारों का प्रयोग करना भी बुद्धिमानी का एक चिह्न है। गालापगोस द्वीप का कठफोड़वा कैक्टस की डंडी से वृक्षों की दरार अथवा छिद्र से कीड़े-मकोड़े निकालकर खाता है। कुछ लोग कौए और उसके भाईबंदों को भी बहुत नम्बर देते हैं। शिकारी की बंदूक की पहुँच से दूर रहने की कला कौआ बखूबी जानता है। और कुछ वैज्ञानिकों का यह खयाल है कि काग और तोते में मनुष्य की बोली के चंद शब्द सीखने की जो क्षमता है, वह केवल आनुवंशिक क्षमता नहीं, बल्कि बुद्धिशक्ति का प्रमाण है। कुछ लोग हाथी को सबसे बुद्धिमान जीव मानते हैं। गद्यांश के अनुसार कौन-सा कथन सही है?
  1. Aचिंपैंजी की बुद्धिशक्ति संदेह के घेरे में रही है।
  2. Bप्राणियों में स्तनपायी पशुओं का बुद्धिमत्ता पर एकाधिकार है।
  3. Cदो तरह के प्राणियों पर तुलनात्मक प्रयोग करना आसान है।
  4. Dऔजारों का प्रयोग करना मूर्खता की निशानी है।
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Correct answer: (B) प्राणियों में स्तनपायी पशुओं का बुद्धिमत्ता पर एकाधिकार है।

Explanation

गद्यांश में लिखा है कि पशुओं में स्तनपायियों का बुद्धिमत्ता पर लगभग एकाधिकार है। बाकी कथन गद्यांश के विपरीत हैं — चिंपैंजी की बुद्धि पर संदेह नहीं रहा, तुलनात्मक प्रयोग कठिन है और औजारों का प्रयोग बुद्धिमानी का चिह्न है।

Q219CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 121–128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति पर वैज्ञानिकों को भी कभी संदेह नहीं रहा। जिन लोगों ने घर पर चिंपैंजी पाले हैं, उन्होंने देखा है कि जन्म के बाद दो-एक वर्षों में चिंपैंजी के बच्चे मानव-शिशुओं से अधिक तेजी से नयी बातें सीख जाते हैं। हाँ, जब मानव-शिशु बोलना सीख जाता है, वह चिंपैंजी से तेजी से आगे निकलने लगता है। सूँस और चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति की तुलना करना अति कठिन है, क्योंकि इस तरह के दो अत्यंत भिन्न जीवों पर तुलनात्मक प्रयोग कर पाना लगभग असम्भव होता है। इसी तरह की कठिनाइयाँ इसी तरह के अन्य प्रयोगों में भी आती हैं। उदाहरण के लिए, भूल-भुलैया में सही मार्ग खोज निकालना तथा मेज पर रखी तीन वस्तुओं में अटपटी वस्तु को चुन निकालना एक-सी बुद्धिशक्ति के प्रमाण हैं। एक बात से प्रायः सभी विज्ञानी सहमत हैं कि पशुओं में स्तनपायियों का बुद्धिमत्ता पर लगभग एकाधिकार है। औजारों का प्रयोग करना भी बुद्धिमानी का एक चिह्न है। गालापगोस द्वीप का कठफोड़वा कैक्टस की डंडी से वृक्षों की दरार अथवा छिद्र से कीड़े-मकोड़े निकालकर खाता है। कुछ लोग कौए और उसके भाईबंदों को भी बहुत नम्बर देते हैं। शिकारी की बंदूक की पहुँच से दूर रहने की कला कौआ बखूबी जानता है। और कुछ वैज्ञानिकों का यह खयाल है कि काग और तोते में मनुष्य की बोली के चंद शब्द सीखने की जो क्षमता है, वह केवल आनुवंशिक क्षमता नहीं, बल्कि बुद्धिशक्ति का प्रमाण है। कुछ लोग हाथी को सबसे बुद्धिमान जीव मानते हैं। गद्यांश के अनुसार बुद्धिमत्ता का प्रमाण नहीं है
  1. Aभूल-भुलैया में सही मार्ग खोजना
  2. Bभिन्न वस्तु की पहचान करना
  3. Cतोते द्वारा भाषा के कुछ शब्द सीखना
  4. Dकिसी धुन अथवा ताल पर नृत्य करना
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Correct answer: (D) किसी धुन अथवा ताल पर नृत्य करना

Explanation

गद्यांश में भूल-भुलैया में मार्ग खोजना, अटपटी वस्तु चुनना और तोते का शब्द सीखना बुद्धि के प्रमाण बताए गए हैं। धुन या ताल पर नृत्य करने का कहीं उल्लेख नहीं है, इसलिए वह बुद्धिमत्ता का प्रमाण नहीं है।

Q220CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 121–128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति पर वैज्ञानिकों को भी कभी संदेह नहीं रहा। जिन लोगों ने घर पर चिंपैंजी पाले हैं, उन्होंने देखा है कि जन्म के बाद दो-एक वर्षों में चिंपैंजी के बच्चे मानव-शिशुओं से अधिक तेजी से नयी बातें सीख जाते हैं। हाँ, जब मानव-शिशु बोलना सीख जाता है, वह चिंपैंजी से तेजी से आगे निकलने लगता है। सूँस और चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति की तुलना करना अति कठिन है, क्योंकि इस तरह के दो अत्यंत भिन्न जीवों पर तुलनात्मक प्रयोग कर पाना लगभग असम्भव होता है। इसी तरह की कठिनाइयाँ इसी तरह के अन्य प्रयोगों में भी आती हैं। उदाहरण के लिए, भूल-भुलैया में सही मार्ग खोज निकालना तथा मेज पर रखी तीन वस्तुओं में अटपटी वस्तु को चुन निकालना एक-सी बुद्धिशक्ति के प्रमाण हैं। एक बात से प्रायः सभी विज्ञानी सहमत हैं कि पशुओं में स्तनपायियों का बुद्धिमत्ता पर लगभग एकाधिकार है। औजारों का प्रयोग करना भी बुद्धिमानी का एक चिह्न है। गालापगोस द्वीप का कठफोड़वा कैक्टस की डंडी से वृक्षों की दरार अथवा छिद्र से कीड़े-मकोड़े निकालकर खाता है। कुछ लोग कौए और उसके भाईबंदों को भी बहुत नम्बर देते हैं। शिकारी की बंदूक की पहुँच से दूर रहने की कला कौआ बखूबी जानता है। और कुछ वैज्ञानिकों का यह खयाल है कि काग और तोते में मनुष्य की बोली के चंद शब्द सीखने की जो क्षमता है, वह केवल आनुवंशिक क्षमता नहीं, बल्कि बुद्धिशक्ति का प्रमाण है। कुछ लोग हाथी को सबसे बुद्धिमान जीव मानते हैं। गद्यांश में वर्णित बुद्धिमान प्राणियों का समूह नहीं है
  1. Aचिंपैंजी, सूँस, हाथी
  2. Bसूँस, तोता, कौआ
  3. Cसूँस, हाथी, बंदर
  4. Dचिंपैंजी, तोता, काग
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Correct answer: (C) सूँस, हाथी, बंदर

Explanation

गद्यांश में चिंपैंजी, सूँस, कठफोड़वा, कौआ (काग), तोता और हाथी का उल्लेख है, पर बंदर का नहीं। इसलिए 'सूँस, हाथी, बंदर' वाला समूह गद्यांश में वर्णित नहीं है।

Q221CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 121–128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति पर वैज्ञानिकों को भी कभी संदेह नहीं रहा। जिन लोगों ने घर पर चिंपैंजी पाले हैं, उन्होंने देखा है कि जन्म के बाद दो-एक वर्षों में चिंपैंजी के बच्चे मानव-शिशुओं से अधिक तेजी से नयी बातें सीख जाते हैं। हाँ, जब मानव-शिशु बोलना सीख जाता है, वह चिंपैंजी से तेजी से आगे निकलने लगता है। सूँस और चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति की तुलना करना अति कठिन है, क्योंकि इस तरह के दो अत्यंत भिन्न जीवों पर तुलनात्मक प्रयोग कर पाना लगभग असम्भव होता है। इसी तरह की कठिनाइयाँ इसी तरह के अन्य प्रयोगों में भी आती हैं। उदाहरण के लिए, भूल-भुलैया में सही मार्ग खोज निकालना तथा मेज पर रखी तीन वस्तुओं में अटपटी वस्तु को चुन निकालना एक-सी बुद्धिशक्ति के प्रमाण हैं। एक बात से प्रायः सभी विज्ञानी सहमत हैं कि पशुओं में स्तनपायियों का बुद्धिमत्ता पर लगभग एकाधिकार है। औजारों का प्रयोग करना भी बुद्धिमानी का एक चिह्न है। गालापगोस द्वीप का कठफोड़वा कैक्टस की डंडी से वृक्षों की दरार अथवा छिद्र से कीड़े-मकोड़े निकालकर खाता है। कुछ लोग कौए और उसके भाईबंदों को भी बहुत नम्बर देते हैं। शिकारी की बंदूक की पहुँच से दूर रहने की कला कौआ बखूबी जानता है। और कुछ वैज्ञानिकों का यह खयाल है कि काग और तोते में मनुष्य की बोली के चंद शब्द सीखने की जो क्षमता है, वह केवल आनुवंशिक क्षमता नहीं, बल्कि बुद्धिशक्ति का प्रमाण है। कुछ लोग हाथी को सबसे बुद्धिमान जीव मानते हैं। कौए और तोते का भाषा सीख लेना उनकी
  1. Aआनुवंशिक क्षमता है
  2. Bबौद्धिक शक्ति का प्रमाण है
  3. Cनकलकर सीखने का प्रमाण है
  4. Dसहज वृत्ति है
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Correct answer: (B) बौद्धिक शक्ति का प्रमाण है

Explanation

गद्यांश के अनुसार कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि काग और तोते की मनुष्य के शब्द सीखने की क्षमता केवल आनुवंशिक नहीं, बल्कि बुद्धिशक्ति का प्रमाण है।

Q222CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 121–128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति पर वैज्ञानिकों को भी कभी संदेह नहीं रहा। जिन लोगों ने घर पर चिंपैंजी पाले हैं, उन्होंने देखा है कि जन्म के बाद दो-एक वर्षों में चिंपैंजी के बच्चे मानव-शिशुओं से अधिक तेजी से नयी बातें सीख जाते हैं। हाँ, जब मानव-शिशु बोलना सीख जाता है, वह चिंपैंजी से तेजी से आगे निकलने लगता है। सूँस और चिंपैंजी की बुद्धिशक्ति की तुलना करना अति कठिन है, क्योंकि इस तरह के दो अत्यंत भिन्न जीवों पर तुलनात्मक प्रयोग कर पाना लगभग असम्भव होता है। इसी तरह की कठिनाइयाँ इसी तरह के अन्य प्रयोगों में भी आती हैं। उदाहरण के लिए, भूल-भुलैया में सही मार्ग खोज निकालना तथा मेज पर रखी तीन वस्तुओं में अटपटी वस्तु को चुन निकालना एक-सी बुद्धिशक्ति के प्रमाण हैं। एक बात से प्रायः सभी विज्ञानी सहमत हैं कि पशुओं में स्तनपायियों का बुद्धिमत्ता पर लगभग एकाधिकार है। औजारों का प्रयोग करना भी बुद्धिमानी का एक चिह्न है। गालापगोस द्वीप का कठफोड़वा कैक्टस की डंडी से वृक्षों की दरार अथवा छिद्र से कीड़े-मकोड़े निकालकर खाता है। कुछ लोग कौए और उसके भाईबंदों को भी बहुत नम्बर देते हैं। शिकारी की बंदूक की पहुँच से दूर रहने की कला कौआ बखूबी जानता है। और कुछ वैज्ञानिकों का यह खयाल है कि काग और तोते में मनुष्य की बोली के चंद शब्द सीखने की जो क्षमता है, वह केवल आनुवंशिक क्षमता नहीं, बल्कि बुद्धिशक्ति का प्रमाण है। कुछ लोग हाथी को सबसे बुद्धिमान जीव मानते हैं। मानव शिशु बुद्धिमत्ता में चिंपैंजी के शिशु से कब आगे निकलता है?
  1. Aजब वह पैदा होता है
  2. Bजब वह लिखना सीख लेता है
  3. Cजब वह बोलना सीख लेता है
  4. Dजब वह पैदल चलने लगता है
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Correct answer: (C) जब वह बोलना सीख लेता है

Explanation

गद्यांश में कहा गया है कि जब मानव-शिशु बोलना सीख जाता है, तब वह चिंपैंजी से तेजी से आगे निकलने लगता है।

Q223CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 129–135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : आज पूरी दुनिया, नयी, पुरानी, पढ़ी-लिखी, अनपढ़ दुनिया भी इन्हीं प्लास्टिक की थैलियों को लेकर एक अंतहीन यात्रा पर निकल पड़ी है। छोटे-बड़े बाज़ार, देशी-विदेशी दुकानें हमारे हाथों में प्लास्टिक की थैली थमा देती हैं। हम इन थैलियों को लेकर घर आते हैं। कुछ घरों में ये आते ही कचरे में फेंक दी जाती हैं तो कुछ साधारण घरों में कुछ दिन लपेट कर सम्भाल कर रख दी जाती हैं, फिर किसी और दिन कचरे में डालने के लिए। इस तरह आज नहीं तो कल कचरे में फेंक दी गयी इन थैलियों को फिर हवा ले उड़ती है, एक और अंतहीन यात्रा पर। फिर यह हल्का कचरा ज़मीन पर उड़ते हुए, नदी-नालों में पहुँच कर बहने लगता है। और फिर वहाँ से बहते-बहते समुद्र में। यहाँ भी एक और अंतहीन यात्रा शुरू हो जाती है। खोज करने वालों ने इस प्लास्टिक की समुद्री यात्रा को भी समझने की कोशिश की है। उन्हें यह जानकर अचरज हुआ कि हमारे घरों से निकला यह प्लास्टिक का कचरा अब समुद्रों में भी खूब बड़े-बड़े ढेर की तरह तैर रहा है न वह ज़मीन पर गलता है, सड़ता है, न समुद्र में ही। यह प्लास्टिक तो आत्मा की तरह अजर-अमर है। प्लास्टिक के फैलते, पसरते व्यवहार को कई देशों ने, कई समाजों ने अपनी-अपनी तरह से रोकने के कई प्रयत्न किए हैं। कुछ देशों ने इस पर प्लास्टिक टैक्स लगा कर देखा है। ऐसा टैक्स लगते ही खपत में एकदम गिरावट भी देखी गयी है। कहीं-कहीं इन पर सीधे प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसके बदले फिर अखबार, कागज़, कपड़े की थैलियाँ, लिफाफे भी चलन में आये हैं। दुकानों से घर तक चीज़ें लाने का माध्यम इतनी कम उमर का क्यों हो, वह चिरंजीव क्यों न बने—प्लास्टिक के कारण अब ऐसे सवाल भी हमारे मन में नहीं उठ पाते। प्लास्टिक की थैलियों की यात्रा को अंतहीन क्यों कहा गया है?
  1. Aहम थैलियों को सँभालकर रखते हैं
  2. Bहम थैलियाँ घर लेकर आते हैं
  3. Cकचरे में फेंकी थैलियों को हवा उड़ाकर ले जाती है
  4. Dहम कचरे में थैलियाँ फेंक देते हैं
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Correct answer: (C) कचरे में फेंकी थैलियों को हवा उड़ाकर ले जाती है

Explanation

कचरे में फेंकी गई थैलियों को हवा उड़ा ले जाती है, फिर वे नदी-नालों से होकर समुद्र तक पहुँचती हैं — यह यात्रा कभी खत्म नहीं होती, इसलिए इसे अंतहीन कहा गया है।

Q224CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 129–135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : आज पूरी दुनिया, नयी, पुरानी, पढ़ी-लिखी, अनपढ़ दुनिया भी इन्हीं प्लास्टिक की थैलियों को लेकर एक अंतहीन यात्रा पर निकल पड़ी है। छोटे-बड़े बाज़ार, देशी-विदेशी दुकानें हमारे हाथों में प्लास्टिक की थैली थमा देती हैं। हम इन थैलियों को लेकर घर आते हैं। कुछ घरों में ये आते ही कचरे में फेंक दी जाती हैं तो कुछ साधारण घरों में कुछ दिन लपेट कर सम्भाल कर रख दी जाती हैं, फिर किसी और दिन कचरे में डालने के लिए। इस तरह आज नहीं तो कल कचरे में फेंक दी गयी इन थैलियों को फिर हवा ले उड़ती है, एक और अंतहीन यात्रा पर। फिर यह हल्का कचरा ज़मीन पर उड़ते हुए, नदी-नालों में पहुँच कर बहने लगता है। और फिर वहाँ से बहते-बहते समुद्र में। यहाँ भी एक और अंतहीन यात्रा शुरू हो जाती है। खोज करने वालों ने इस प्लास्टिक की समुद्री यात्रा को भी समझने की कोशिश की है। उन्हें यह जानकर अचरज हुआ कि हमारे घरों से निकला यह प्लास्टिक का कचरा अब समुद्रों में भी खूब बड़े-बड़े ढेर की तरह तैर रहा है न वह ज़मीन पर गलता है, सड़ता है, न समुद्र में ही। यह प्लास्टिक तो आत्मा की तरह अजर-अमर है। प्लास्टिक के फैलते, पसरते व्यवहार को कई देशों ने, कई समाजों ने अपनी-अपनी तरह से रोकने के कई प्रयत्न किए हैं। कुछ देशों ने इस पर प्लास्टिक टैक्स लगा कर देखा है। ऐसा टैक्स लगते ही खपत में एकदम गिरावट भी देखी गयी है। कहीं-कहीं इन पर सीधे प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसके बदले फिर अखबार, कागज़, कपड़े की थैलियाँ, लिफाफे भी चलन में आये हैं। दुकानों से घर तक चीज़ें लाने का माध्यम इतनी कम उमर का क्यों हो, वह चिरंजीव क्यों न बने—प्लास्टिक के कारण अब ऐसे सवाल भी हमारे मन में नहीं उठ पाते। प्लास्टिक की समुद्री यात्रा देखकर आश्चर्य क्यों हुआ?
  1. Aसमुद्र में प्लास्टिक सड़ गया था
  2. Bप्लास्टिक अजर-अमर है
  3. Cसमुद्र में चारों ओर प्लास्टिक की थैलियाँ थीं
  4. Dघरों का प्लास्टिक कचरा समुद्र में तैर रहा था
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Correct answer: (D) घरों का प्लास्टिक कचरा समुद्र में तैर रहा था

Explanation

खोज करने वालों को यह जानकर अचरज हुआ कि घरों से निकला प्लास्टिक का कचरा समुद्रों में बड़े-बड़े ढेरों की तरह तैर रहा है।

Q225CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 129–135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : आज पूरी दुनिया, नयी, पुरानी, पढ़ी-लिखी, अनपढ़ दुनिया भी इन्हीं प्लास्टिक की थैलियों को लेकर एक अंतहीन यात्रा पर निकल पड़ी है। छोटे-बड़े बाज़ार, देशी-विदेशी दुकानें हमारे हाथों में प्लास्टिक की थैली थमा देती हैं। हम इन थैलियों को लेकर घर आते हैं। कुछ घरों में ये आते ही कचरे में फेंक दी जाती हैं तो कुछ साधारण घरों में कुछ दिन लपेट कर सम्भाल कर रख दी जाती हैं, फिर किसी और दिन कचरे में डालने के लिए। इस तरह आज नहीं तो कल कचरे में फेंक दी गयी इन थैलियों को फिर हवा ले उड़ती है, एक और अंतहीन यात्रा पर। फिर यह हल्का कचरा ज़मीन पर उड़ते हुए, नदी-नालों में पहुँच कर बहने लगता है। और फिर वहाँ से बहते-बहते समुद्र में। यहाँ भी एक और अंतहीन यात्रा शुरू हो जाती है। खोज करने वालों ने इस प्लास्टिक की समुद्री यात्रा को भी समझने की कोशिश की है। उन्हें यह जानकर अचरज हुआ कि हमारे घरों से निकला यह प्लास्टिक का कचरा अब समुद्रों में भी खूब बड़े-बड़े ढेर की तरह तैर रहा है न वह ज़मीन पर गलता है, सड़ता है, न समुद्र में ही। यह प्लास्टिक तो आत्मा की तरह अजर-अमर है। प्लास्टिक के फैलते, पसरते व्यवहार को कई देशों ने, कई समाजों ने अपनी-अपनी तरह से रोकने के कई प्रयत्न किए हैं। कुछ देशों ने इस पर प्लास्टिक टैक्स लगा कर देखा है। ऐसा टैक्स लगते ही खपत में एकदम गिरावट भी देखी गयी है। कहीं-कहीं इन पर सीधे प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसके बदले फिर अखबार, कागज़, कपड़े की थैलियाँ, लिफाफे भी चलन में आये हैं। दुकानों से घर तक चीज़ें लाने का माध्यम इतनी कम उमर का क्यों हो, वह चिरंजीव क्यों न बने—प्लास्टिक के कारण अब ऐसे सवाल भी हमारे मन में नहीं उठ पाते। प्लास्टिक के अजर-अमर होने का सही आशय है
  1. Aयह नदी-नालों से बहकर समुद्र में पहुँचता है
  2. Bयह जमीन पर या पानी में गलता व सड़ता नहीं है
  3. Cयह समुद्र में तैरता है
  4. Dयह हवा में उड़ता है
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Correct answer: (B) यह जमीन पर या पानी में गलता व सड़ता नहीं है

Explanation

प्लास्टिक न जमीन पर गलता-सड़ता है, न समुद्र में; इसी कारण उसे आत्मा की तरह 'अजर-अमर' कहा गया है।

Q226CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 129–135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : आज पूरी दुनिया, नयी, पुरानी, पढ़ी-लिखी, अनपढ़ दुनिया भी इन्हीं प्लास्टिक की थैलियों को लेकर एक अंतहीन यात्रा पर निकल पड़ी है। छोटे-बड़े बाज़ार, देशी-विदेशी दुकानें हमारे हाथों में प्लास्टिक की थैली थमा देती हैं। हम इन थैलियों को लेकर घर आते हैं। कुछ घरों में ये आते ही कचरे में फेंक दी जाती हैं तो कुछ साधारण घरों में कुछ दिन लपेट कर सम्भाल कर रख दी जाती हैं, फिर किसी और दिन कचरे में डालने के लिए। इस तरह आज नहीं तो कल कचरे में फेंक दी गयी इन थैलियों को फिर हवा ले उड़ती है, एक और अंतहीन यात्रा पर। फिर यह हल्का कचरा ज़मीन पर उड़ते हुए, नदी-नालों में पहुँच कर बहने लगता है। और फिर वहाँ से बहते-बहते समुद्र में। यहाँ भी एक और अंतहीन यात्रा शुरू हो जाती है। खोज करने वालों ने इस प्लास्टिक की समुद्री यात्रा को भी समझने की कोशिश की है। उन्हें यह जानकर अचरज हुआ कि हमारे घरों से निकला यह प्लास्टिक का कचरा अब समुद्रों में भी खूब बड़े-बड़े ढेर की तरह तैर रहा है न वह ज़मीन पर गलता है, सड़ता है, न समुद्र में ही। यह प्लास्टिक तो आत्मा की तरह अजर-अमर है। प्लास्टिक के फैलते, पसरते व्यवहार को कई देशों ने, कई समाजों ने अपनी-अपनी तरह से रोकने के कई प्रयत्न किए हैं। कुछ देशों ने इस पर प्लास्टिक टैक्स लगा कर देखा है। ऐसा टैक्स लगते ही खपत में एकदम गिरावट भी देखी गयी है। कहीं-कहीं इन पर सीधे प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसके बदले फिर अखबार, कागज़, कपड़े की थैलियाँ, लिफाफे भी चलन में आये हैं। दुकानों से घर तक चीज़ें लाने का माध्यम इतनी कम उमर का क्यों हो, वह चिरंजीव क्यों न बने—प्लास्टिक के कारण अब ऐसे सवाल भी हमारे मन में नहीं उठ पाते। घर तक चीजें लाने का माध्यम _____ होना चाहिए।
  1. Aचिरंजीव
  2. Bअल्पायु
  3. Cअजर-अमर
  4. Dप्लास्टिक का
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Correct answer: (A) चिरंजीव

Explanation

लेखक पूछता है कि दुकान से घर तक चीजें लाने का माध्यम इतनी कम उम्र का क्यों हो, वह 'चिरंजीव' (लंबे समय तक चलने वाला) क्यों न बने। अतः माध्यम चिरंजीव होना चाहिए।

Q227CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 129–135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : आज पूरी दुनिया, नयी, पुरानी, पढ़ी-लिखी, अनपढ़ दुनिया भी इन्हीं प्लास्टिक की थैलियों को लेकर एक अंतहीन यात्रा पर निकल पड़ी है। छोटे-बड़े बाज़ार, देशी-विदेशी दुकानें हमारे हाथों में प्लास्टिक की थैली थमा देती हैं। हम इन थैलियों को लेकर घर आते हैं। कुछ घरों में ये आते ही कचरे में फेंक दी जाती हैं तो कुछ साधारण घरों में कुछ दिन लपेट कर सम्भाल कर रख दी जाती हैं, फिर किसी और दिन कचरे में डालने के लिए। इस तरह आज नहीं तो कल कचरे में फेंक दी गयी इन थैलियों को फिर हवा ले उड़ती है, एक और अंतहीन यात्रा पर। फिर यह हल्का कचरा ज़मीन पर उड़ते हुए, नदी-नालों में पहुँच कर बहने लगता है। और फिर वहाँ से बहते-बहते समुद्र में। यहाँ भी एक और अंतहीन यात्रा शुरू हो जाती है। खोज करने वालों ने इस प्लास्टिक की समुद्री यात्रा को भी समझने की कोशिश की है। उन्हें यह जानकर अचरज हुआ कि हमारे घरों से निकला यह प्लास्टिक का कचरा अब समुद्रों में भी खूब बड़े-बड़े ढेर की तरह तैर रहा है न वह ज़मीन पर गलता है, सड़ता है, न समुद्र में ही। यह प्लास्टिक तो आत्मा की तरह अजर-अमर है। प्लास्टिक के फैलते, पसरते व्यवहार को कई देशों ने, कई समाजों ने अपनी-अपनी तरह से रोकने के कई प्रयत्न किए हैं। कुछ देशों ने इस पर प्लास्टिक टैक्स लगा कर देखा है। ऐसा टैक्स लगते ही खपत में एकदम गिरावट भी देखी गयी है। कहीं-कहीं इन पर सीधे प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसके बदले फिर अखबार, कागज़, कपड़े की थैलियाँ, लिफाफे भी चलन में आये हैं। दुकानों से घर तक चीज़ें लाने का माध्यम इतनी कम उमर का क्यों हो, वह चिरंजीव क्यों न बने—प्लास्टिक के कारण अब ऐसे सवाल भी हमारे मन में नहीं उठ पाते। प्लास्टिक का उपयोग कम करने का उपाय नहीं है
  1. Aटैक्स लगाना
  2. Bप्रतिबंध लगाना
  3. Cप्लास्टिक की थैली का बार-बार प्रयोग करना
  4. Dकपड़े के थैले का प्रयोग करना
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Correct answer: (C) प्लास्टिक की थैली का बार-बार प्रयोग करना

Explanation

टैक्स लगाना, प्रतिबंध लगाना और कपड़े के थैले का प्रयोग — ये प्लास्टिक कम करने के उपाय हैं। प्लास्टिक की थैली का बार-बार प्रयोग करने से प्लास्टिक का प्रयोग ही चलता रहता है, इसलिए यह उपाय नहीं है।

Q228CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 129–135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : आज पूरी दुनिया, नयी, पुरानी, पढ़ी-लिखी, अनपढ़ दुनिया भी इन्हीं प्लास्टिक की थैलियों को लेकर एक अंतहीन यात्रा पर निकल पड़ी है। छोटे-बड़े बाज़ार, देशी-विदेशी दुकानें हमारे हाथों में प्लास्टिक की थैली थमा देती हैं। हम इन थैलियों को लेकर घर आते हैं। कुछ घरों में ये आते ही कचरे में फेंक दी जाती हैं तो कुछ साधारण घरों में कुछ दिन लपेट कर सम्भाल कर रख दी जाती हैं, फिर किसी और दिन कचरे में डालने के लिए। इस तरह आज नहीं तो कल कचरे में फेंक दी गयी इन थैलियों को फिर हवा ले उड़ती है, एक और अंतहीन यात्रा पर। फिर यह हल्का कचरा ज़मीन पर उड़ते हुए, नदी-नालों में पहुँच कर बहने लगता है। और फिर वहाँ से बहते-बहते समुद्र में। यहाँ भी एक और अंतहीन यात्रा शुरू हो जाती है। खोज करने वालों ने इस प्लास्टिक की समुद्री यात्रा को भी समझने की कोशिश की है। उन्हें यह जानकर अचरज हुआ कि हमारे घरों से निकला यह प्लास्टिक का कचरा अब समुद्रों में भी खूब बड़े-बड़े ढेर की तरह तैर रहा है न वह ज़मीन पर गलता है, सड़ता है, न समुद्र में ही। यह प्लास्टिक तो आत्मा की तरह अजर-अमर है। प्लास्टिक के फैलते, पसरते व्यवहार को कई देशों ने, कई समाजों ने अपनी-अपनी तरह से रोकने के कई प्रयत्न किए हैं। कुछ देशों ने इस पर प्लास्टिक टैक्स लगा कर देखा है। ऐसा टैक्स लगते ही खपत में एकदम गिरावट भी देखी गयी है। कहीं-कहीं इन पर सीधे प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसके बदले फिर अखबार, कागज़, कपड़े की थैलियाँ, लिफाफे भी चलन में आये हैं। दुकानों से घर तक चीज़ें लाने का माध्यम इतनी कम उमर का क्यों हो, वह चिरंजीव क्यों न बने—प्लास्टिक के कारण अब ऐसे सवाल भी हमारे मन में नहीं उठ पाते। भिन्न शब्द पहचानिए।
  1. Aसमाजों
  2. Bथैलियों
  3. Cआँकड़ों
  4. Dपहाड़ों
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Correct answer: (B) थैलियों

Explanation

समाजों, आँकड़ों और पहाड़ों — तीनों पुल्लिंग संज्ञाओं (समाज, आँकड़ा, पहाड़) के बहुवचन रूप हैं, जबकि 'थैलियों' स्त्रीलिंग संज्ञा 'थैली' का बहुवचन रूप है। इसलिए 'थैलियों' भिन्न शब्द है।

Q229CTET February 2026 Paper 1, 7 Feb 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न सं॰ 129–135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : आज पूरी दुनिया, नयी, पुरानी, पढ़ी-लिखी, अनपढ़ दुनिया भी इन्हीं प्लास्टिक की थैलियों को लेकर एक अंतहीन यात्रा पर निकल पड़ी है। छोटे-बड़े बाज़ार, देशी-विदेशी दुकानें हमारे हाथों में प्लास्टिक की थैली थमा देती हैं। हम इन थैलियों को लेकर घर आते हैं। कुछ घरों में ये आते ही कचरे में फेंक दी जाती हैं तो कुछ साधारण घरों में कुछ दिन लपेट कर सम्भाल कर रख दी जाती हैं, फिर किसी और दिन कचरे में डालने के लिए। इस तरह आज नहीं तो कल कचरे में फेंक दी गयी इन थैलियों को फिर हवा ले उड़ती है, एक और अंतहीन यात्रा पर। फिर यह हल्का कचरा ज़मीन पर उड़ते हुए, नदी-नालों में पहुँच कर बहने लगता है। और फिर वहाँ से बहते-बहते समुद्र में। यहाँ भी एक और अंतहीन यात्रा शुरू हो जाती है। खोज करने वालों ने इस प्लास्टिक की समुद्री यात्रा को भी समझने की कोशिश की है। उन्हें यह जानकर अचरज हुआ कि हमारे घरों से निकला यह प्लास्टिक का कचरा अब समुद्रों में भी खूब बड़े-बड़े ढेर की तरह तैर रहा है न वह ज़मीन पर गलता है, सड़ता है, न समुद्र में ही। यह प्लास्टिक तो आत्मा की तरह अजर-अमर है। प्लास्टिक के फैलते, पसरते व्यवहार को कई देशों ने, कई समाजों ने अपनी-अपनी तरह से रोकने के कई प्रयत्न किए हैं। कुछ देशों ने इस पर प्लास्टिक टैक्स लगा कर देखा है। ऐसा टैक्स लगते ही खपत में एकदम गिरावट भी देखी गयी है। कहीं-कहीं इन पर सीधे प्रतिबंध भी लगाया गया है। इसके बदले फिर अखबार, कागज़, कपड़े की थैलियाँ, लिफाफे भी चलन में आये हैं। दुकानों से घर तक चीज़ें लाने का माध्यम इतनी कम उमर का क्यों हो, वह चिरंजीव क्यों न बने—प्लास्टिक के कारण अब ऐसे सवाल भी हमारे मन में नहीं उठ पाते। गिरावट एक _____ संज्ञा है।
  1. Aगणनीय
  2. Bव्यक्तिवाचक
  3. Cभाववाचक
  4. Dजातिवाचक
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Correct answer: (C) भाववाचक

Explanation

'गिरावट' 'गिरना' क्रिया से बनी संज्ञा है जो किसी वस्तु का नहीं, बल्कि एक दशा/भाव का बोध कराती है। इसलिए यह भाववाचक संज्ञा है।

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