181 गद्यांश / पद्यांश (Hindi) questions asked in BPSC TRE previous year papers, each with the correct answer and explanation. Read them free on UTpaper, or attempt the full papers as timed online tests.
Q101BPSC TRE 1.0 (2023) Language Paper-1 Class 1-5 (1st Sitting)
निर्देश (प्रश्न सं. 96 से 100 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
संकटों से वीर घबराते नहीं,
आपदाएँ देख छिप जाते नहीं।
लग गए जिस काम में पूरा किया,
काम करके व्यर्थ पछताते नहीं॥
कठिन पथ को देख मुस्कुराते सदा,
संकटों के बीच वे गाते सदा।
है असंभव कुछ नहीं उनके लिए,
सरल-संभव कर दिखाते वे सदा॥
पद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक है
Aसंकट के बादल
Bवीर
Cकठिन पथ
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) वीर
Explanation
पद्यांश में वीरों के साहस और संकटों में न घबराने का वर्णन है, इसलिए शीर्षक वीर है।
Q102BPSC TRE 1.0 (2023) Language Paper-1 Class 1-5 (1st Sitting)
निर्देश (प्रश्न सं. 96 से 100 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
संकटों से वीर घबराते नहीं,
आपदाएँ देख छिप जाते नहीं।
लग गए जिस काम में पूरा किया,
काम करके व्यर्थ पछताते नहीं॥
कठिन पथ को देख मुस्कुराते सदा,
संकटों के बीच वे गाते सदा।
है असंभव कुछ नहीं उनके लिए,
सरल-संभव कर दिखाते वे सदा॥
वीर संकटों को देखकर क्या करते हैं?
Aछिप जाते हैं
Bरोते हैं
Cसोते हैं
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (E) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Explanation
पद्यांश के अनुसार वीर संकट देखकर घबराते या छिपते नहीं; दिए गए तीन विकल्प सही नहीं हैं, इसलिए कोई नहीं।
Q103BPSC TRE 1.0 (2023) Language Paper-1 Class 1-5 (1st Sitting)
निर्देश (प्रश्न सं. 96 से 100 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
संकटों से वीर घबराते नहीं,
आपदाएँ देख छिप जाते नहीं।
लग गए जिस काम में पूरा किया,
काम करके व्यर्थ पछताते नहीं॥
कठिन पथ को देख मुस्कुराते सदा,
संकटों के बीच वे गाते सदा।
है असंभव कुछ नहीं उनके लिए,
सरल-संभव कर दिखाते वे सदा॥
वीर सभी कार्य को कैसे करते हैं?
Aसोचते हुए
Bछिपते हुए
Cमुस्कुराते हुए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) मुस्कुराते हुए
Explanation
वीर कठिन पथ देखकर मुस्कुराते और संकटों में गाते हैं, यानी मुस्कुराते हुए काम करते हैं।
Q104BPSC TRE 1.0 (2023) Language Paper-1 Class 1-5 (1st Sitting)
निर्देश (प्रश्न सं. 96 से 100 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
संकटों से वीर घबराते नहीं,
आपदाएँ देख छिप जाते नहीं।
लग गए जिस काम में पूरा किया,
काम करके व्यर्थ पछताते नहीं॥
कठिन पथ को देख मुस्कुराते सदा,
संकटों के बीच वे गाते सदा।
है असंभव कुछ नहीं उनके लिए,
सरल-संभव कर दिखाते वे सदा॥
वीर किसे देखकर मुस्कुराते हैं?
Aमित्र
Bकठिन पथ
Cअसंभव
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) कठिन पथ
Explanation
पद्यांश में कहा है कि वीर कठिन पथ को देखकर मुस्कुराते हैं।
Q105BPSC TRE 1.0 (2023) Language Paper-1 Class 1-5 (1st Sitting)
निर्देश (प्रश्न सं. 96 से 100 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
संकटों से वीर घबराते नहीं,
आपदाएँ देख छिप जाते नहीं।
लग गए जिस काम में पूरा किया,
काम करके व्यर्थ पछताते नहीं॥
कठिन पथ को देख मुस्कुराते सदा,
संकटों के बीच वे गाते सदा।
है असंभव कुछ नहीं उनके लिए,
सरल-संभव कर दिखाते वे सदा॥
‘आपदाएँ’ शब्द का अर्थ क्या है?
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 80 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत-से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक ओर विश्वभर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेंगी और दूसरी ओर डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्रों में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और माँग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज-विज्ञान और मानविकी के विविध विषयों में योग्यता रखते हों। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से हमें ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के नये रास्ते खोजने होंगे और इस कारण भी जीव-विज्ञान, रसायन, भौतिक-विज्ञान, कृषि, जलवायु-विज्ञान और समाज-विज्ञान के क्षेत्रों में नए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। महामारी और महामारी के बढ़ते उद्भव संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास में सहयोगी अनुसंधान और परिणामी सामाजिक मुद्दे बहुविषयक अधिगम की आवश्यकता को बढ़ाते हैं। मानविकी और कला की माँग बढ़ेगी, क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के साथ-साथ दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है।
कौन परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है?
Aभारत
Bविश्व
Cपूरा विश्व
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) पूरा विश्व
Explanation
गद्यांश की पहली पंक्ति के अनुसार ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 80 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत-से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक ओर विश्वभर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेंगी और दूसरी ओर डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्रों में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और माँग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज-विज्ञान और मानविकी के विविध विषयों में योग्यता रखते हों। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से हमें ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के नये रास्ते खोजने होंगे और इस कारण भी जीव-विज्ञान, रसायन, भौतिक-विज्ञान, कृषि, जलवायु-विज्ञान और समाज-विज्ञान के क्षेत्रों में नए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। महामारी और महामारी के बढ़ते उद्भव संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास में सहयोगी अनुसंधान और परिणामी सामाजिक मुद्दे बहुविषयक अधिगम की आवश्यकता को बढ़ाते हैं। मानविकी और कला की माँग बढ़ेगी, क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के साथ-साथ दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है।
परिवर्तन के दौर का परिदृश्य क्या है?
Aकला
Bविज्ञान
Cज्ञान
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) ज्ञान
Explanation
गद्यांश 'ज्ञान के परिदृश्य में' से शुरू होता है, अतः परिवर्तन के दौर का परिदृश्य ज्ञान है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 80 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत-से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक ओर विश्वभर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेंगी और दूसरी ओर डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्रों में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और माँग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज-विज्ञान और मानविकी के विविध विषयों में योग्यता रखते हों। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से हमें ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के नये रास्ते खोजने होंगे और इस कारण भी जीव-विज्ञान, रसायन, भौतिक-विज्ञान, कृषि, जलवायु-विज्ञान और समाज-विज्ञान के क्षेत्रों में नए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। महामारी और महामारी के बढ़ते उद्भव संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास में सहयोगी अनुसंधान और परिणामी सामाजिक मुद्दे बहुविषयक अधिगम की आवश्यकता को बढ़ाते हैं। मानविकी और कला की माँग बढ़ेगी, क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के साथ-साथ दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है।
वैज्ञानिक और तकनीकी विकास का क्षेत्र क्या है?
Aबिग डेटा
Bबिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
Cआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
Explanation
गद्यांश में बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तीनों को वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के क्षेत्र बताया गया है, इसलिए पूरा विकल्प (B) सही है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 80 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत-से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक ओर विश्वभर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेंगी और दूसरी ओर डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्रों में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और माँग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज-विज्ञान और मानविकी के विविध विषयों में योग्यता रखते हों। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से हमें ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के नये रास्ते खोजने होंगे और इस कारण भी जीव-विज्ञान, रसायन, भौतिक-विज्ञान, कृषि, जलवायु-विज्ञान और समाज-विज्ञान के क्षेत्रों में नए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। महामारी और महामारी के बढ़ते उद्भव संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास में सहयोगी अनुसंधान और परिणामी सामाजिक मुद्दे बहुविषयक अधिगम की आवश्यकता को बढ़ाते हैं। मानविकी और कला की माँग बढ़ेगी, क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के साथ-साथ दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है।
मशीनें किसके एवज में काम करने लगेंगी?
Aमनुष्य
Bअकुशल कामगार
Cकामगार
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) अकुशल कामगार
Explanation
गद्यांश के अनुसार अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेंगी।
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 80 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत-से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक ओर विश्वभर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेंगी और दूसरी ओर डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्रों में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और माँग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज-विज्ञान और मानविकी के विविध विषयों में योग्यता रखते हों। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से हमें ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के नये रास्ते खोजने होंगे और इस कारण भी जीव-विज्ञान, रसायन, भौतिक-विज्ञान, कृषि, जलवायु-विज्ञान और समाज-विज्ञान के क्षेत्रों में नए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। महामारी और महामारी के बढ़ते उद्भव संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास में सहयोगी अनुसंधान और परिणामी सामाजिक मुद्दे बहुविषयक अधिगम की आवश्यकता को बढ़ाते हैं। मानविकी और कला की माँग बढ़ेगी, क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के साथ-साथ दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है।
कुशल कामगारों की माँग किस क्षेत्र में बढ़ेगी?
Aडेटा साइंस
Bकम्प्यूटर साइंस
Cगणित
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित, तीनों क्षेत्रों में कुशल कामगारों की माँग बढ़ेगी, इसलिए (A), (B), (C) सब सही हैं और उत्तर 'एक से अधिक' है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 80 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत-से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक ओर विश्वभर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेंगी और दूसरी ओर डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्रों में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और माँग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज-विज्ञान और मानविकी के विविध विषयों में योग्यता रखते हों। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से हमें ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के नये रास्ते खोजने होंगे और इस कारण भी जीव-विज्ञान, रसायन, भौतिक-विज्ञान, कृषि, जलवायु-विज्ञान और समाज-विज्ञान के क्षेत्रों में नए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। महामारी और महामारी के बढ़ते उद्भव संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास में सहयोगी अनुसंधान और परिणामी सामाजिक मुद्दे बहुविषयक अधिगम की आवश्यकता को बढ़ाते हैं। मानविकी और कला की माँग बढ़ेगी, क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के साथ-साथ दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है।
हमें नये रास्ते खोजने होंगे
Aऊर्जा के लिए
Bऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि के लिए
Cघटते प्राकृतिक संसाधन के लिए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि के लिए
Explanation
जलवायु परिवर्तन आदि के कारण ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के नये रास्ते खोजने होंगे।
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 80 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत-से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक ओर विश्वभर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेंगी और दूसरी ओर डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्रों में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और माँग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज-विज्ञान और मानविकी के विविध विषयों में योग्यता रखते हों। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से हमें ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के नये रास्ते खोजने होंगे और इस कारण भी जीव-विज्ञान, रसायन, भौतिक-विज्ञान, कृषि, जलवायु-विज्ञान और समाज-विज्ञान के क्षेत्रों में नए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। महामारी और महामारी के बढ़ते उद्भव संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास में सहयोगी अनुसंधान और परिणामी सामाजिक मुद्दे बहुविषयक अधिगम की आवश्यकता को बढ़ाते हैं। मानविकी और कला की माँग बढ़ेगी, क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के साथ-साथ दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है।
नए कुशल कामगारों की जरूरत किन क्षेत्रों में है?
Aजीव-विज्ञान और रसायन
Bभौतिक-विज्ञान, कृषि
Cजलवायु-विज्ञान, समाज-विज्ञान
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
गद्यांश में जीव-विज्ञान, रसायन, भौतिक-विज्ञान, कृषि, जलवायु-विज्ञान और समाज-विज्ञान, सभी में नए कुशल कामगारों की जरूरत बताई गई है; इसलिए (A), (B), (C) तीनों सही हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 80 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत-से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक ओर विश्वभर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेंगी और दूसरी ओर डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्रों में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और माँग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज-विज्ञान और मानविकी के विविध विषयों में योग्यता रखते हों। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से हमें ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के नये रास्ते खोजने होंगे और इस कारण भी जीव-विज्ञान, रसायन, भौतिक-विज्ञान, कृषि, जलवायु-विज्ञान और समाज-विज्ञान के क्षेत्रों में नए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। महामारी और महामारी के बढ़ते उद्भव संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास में सहयोगी अनुसंधान और परिणामी सामाजिक मुद्दे बहुविषयक अधिगम की आवश्यकता को बढ़ाते हैं। मानविकी और कला की माँग बढ़ेगी, क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के साथ-साथ दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है।
महामारी रोकने के लिए आवश्यक है
Aरोग प्रबंधन
Bसंक्रामक रोग प्रबंधन व टीकों का विकास
Cचिकित्सा
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (B) संक्रामक रोग प्रबंधन व टीकों का विकास
Explanation
गद्यांश में संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास को महामारी से निपटने के लिए आवश्यक बताया गया है, अतः (B) सही है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 80 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत-से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक ओर विश्वभर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेंगी और दूसरी ओर डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्रों में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और माँग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज-विज्ञान और मानविकी के विविध विषयों में योग्यता रखते हों। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से हमें ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के नये रास्ते खोजने होंगे और इस कारण भी जीव-विज्ञान, रसायन, भौतिक-विज्ञान, कृषि, जलवायु-विज्ञान और समाज-विज्ञान के क्षेत्रों में नए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। महामारी और महामारी के बढ़ते उद्भव संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास में सहयोगी अनुसंधान और परिणामी सामाजिक मुद्दे बहुविषयक अधिगम की आवश्यकता को बढ़ाते हैं। मानविकी और कला की माँग बढ़ेगी, क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के साथ-साथ दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है।
भारत कैसा देश बनने की दिशा में अग्रसर है?
Aविकसित
Bअर्धविकसित
Cअविकसित
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (A) विकसित
Explanation
गद्यांश के अनुसार भारत एक विकसित देश बनने की ओर अग्रसर है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 71 से 80 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
ज्ञान के परिदृश्य में पूरा विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। बिग डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हो रहे बहुत-से वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के चलते एक ओर विश्वभर में अकुशल कामगारों की जगह मशीनें काम करने लगेंगी और दूसरी ओर डेटा साइंस, कम्प्यूटर साइंस और गणित के क्षेत्रों में ऐसे कुशल कामगारों की जरूरत और माँग बढ़ेगी जो विज्ञान, समाज-विज्ञान और मानविकी के विविध विषयों में योग्यता रखते हों। जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और घटते प्राकृतिक संसाधनों की वजह से हमें ऊर्जा, भोजन, पानी व स्वच्छता आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने के नये रास्ते खोजने होंगे और इस कारण भी जीव-विज्ञान, रसायन, भौतिक-विज्ञान, कृषि, जलवायु-विज्ञान और समाज-विज्ञान के क्षेत्रों में नए कुशल कामगारों की जरूरत होगी। महामारी और महामारी के बढ़ते उद्भव संक्रामक रोग प्रबंधन और टीकों के विकास में सहयोगी अनुसंधान और परिणामी सामाजिक मुद्दे बहुविषयक अधिगम की आवश्यकता को बढ़ाते हैं। मानविकी और कला की माँग बढ़ेगी, क्योंकि भारत एक विकसित देश बनने के साथ-साथ दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है।
तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर अग्रसर है
Aभारत
Bचीन
Cजापान
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (A) भारत
Explanation
गद्यांश के अंत में कहा गया है कि भारत दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर बढ़ रहा है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 81 से 85 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा संचालित ‘बंगदर्शन’ मासिक पत्रिका उनके देहांत के पश्चात् बंद हो गया था, जिसे रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सन् 1901 में पुनः प्रकाशित करना आरंभ किया। यह सत्साहित्य द्वारा सामाजिक प्रगति का एक साधन तो था ही, पर रवि बाबू उसके माध्यम से राजनीतिक अन्याय के विरुद्ध भी आवाज उठाया करते थे। जब दक्षिण अफ्रीका की बोअर जाति की हत्या गोरों ने की तब रवि बाबू ने गोरों के इस घृणित कार्य का विरोध करने के लिए कई लेख ‘बंगदर्शन’ में लिखे थे। इस मासिक पत्रिका में टैगोर की कई साहित्यिक कृतियाँ प्रकाशित हुई थीं। उनकी समस्त साहित्यिक कृतियों का उद्देश्य है—मनुष्य का मानसिक स्तर उच्च हो और मनुष्य निम्न प्रवृत्तियों का त्यागकर समाज का उपयोगी सदस्य बने। उनकी ‘जन-गण-मन-अधिनायक’ कविता तो देश-प्रेम की सच्ची अनुभूति का भंडार होने के कारण राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार कर ली गयी है।
बंकिमचंद्र चटर्जी के समय ‘बंगदर्शन’ पत्रिका का उद्देश्य था
Aबंगाल का उत्थान
Bगोरों के अत्याचार का विरोध
Cसत्साहित्य द्वारा सामाजिक प्रगति
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (C) सत्साहित्य द्वारा सामाजिक प्रगति
Explanation
गद्यांश के अनुसार बंकिमचंद्र के समय 'बंगदर्शन' सत्साहित्य द्वारा सामाजिक प्रगति का साधन था।
निर्देश (प्रश्न संख्या 81 से 85 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा संचालित ‘बंगदर्शन’ मासिक पत्रिका उनके देहांत के पश्चात् बंद हो गया था, जिसे रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सन् 1901 में पुनः प्रकाशित करना आरंभ किया। यह सत्साहित्य द्वारा सामाजिक प्रगति का एक साधन तो था ही, पर रवि बाबू उसके माध्यम से राजनीतिक अन्याय के विरुद्ध भी आवाज उठाया करते थे। जब दक्षिण अफ्रीका की बोअर जाति की हत्या गोरों ने की तब रवि बाबू ने गोरों के इस घृणित कार्य का विरोध करने के लिए कई लेख ‘बंगदर्शन’ में लिखे थे। इस मासिक पत्रिका में टैगोर की कई साहित्यिक कृतियाँ प्रकाशित हुई थीं। उनकी समस्त साहित्यिक कृतियों का उद्देश्य है—मनुष्य का मानसिक स्तर उच्च हो और मनुष्य निम्न प्रवृत्तियों का त्यागकर समाज का उपयोगी सदस्य बने। उनकी ‘जन-गण-मन-अधिनायक’ कविता तो देश-प्रेम की सच्ची अनुभूति का भंडार होने के कारण राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार कर ली गयी है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपने लेख में गोरों का विरोध कब किया?
Aजब गोरों द्वारा दक्षिण अफ्रीका की बोअर जाति की हत्या की गयी
Bजब गोरों द्वारा अत्याचार किया गया
Cजब गोरों द्वारा अपराध किया गया
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) जब गोरों द्वारा दक्षिण अफ्रीका की बोअर जाति की हत्या की गयी
Explanation
गद्यांश में आया है कि जब गोरों ने दक्षिण अफ्रीका की बोअर जाति की हत्या की, तब रवि बाबू ने उनका विरोध करते हुए लेख लिखे।
निर्देश (प्रश्न संख्या 81 से 85 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा संचालित ‘बंगदर्शन’ मासिक पत्रिका उनके देहांत के पश्चात् बंद हो गया था, जिसे रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सन् 1901 में पुनः प्रकाशित करना आरंभ किया। यह सत्साहित्य द्वारा सामाजिक प्रगति का एक साधन तो था ही, पर रवि बाबू उसके माध्यम से राजनीतिक अन्याय के विरुद्ध भी आवाज उठाया करते थे। जब दक्षिण अफ्रीका की बोअर जाति की हत्या गोरों ने की तब रवि बाबू ने गोरों के इस घृणित कार्य का विरोध करने के लिए कई लेख ‘बंगदर्शन’ में लिखे थे। इस मासिक पत्रिका में टैगोर की कई साहित्यिक कृतियाँ प्रकाशित हुई थीं। उनकी समस्त साहित्यिक कृतियों का उद्देश्य है—मनुष्य का मानसिक स्तर उच्च हो और मनुष्य निम्न प्रवृत्तियों का त्यागकर समाज का उपयोगी सदस्य बने। उनकी ‘जन-गण-मन-अधिनायक’ कविता तो देश-प्रेम की सच्ची अनुभूति का भंडार होने के कारण राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार कर ली गयी है।
‘जन-गण-मन-अधिनायक’ के राष्ट्रगान बनने का कारण है
Aरवि बाबू की संवेदनशीलता
Bइस कविता में व्याप्त देश-प्रेम की सच्ची अनुभूति
Cरवि बाबू का देश-प्रेम
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) इस कविता में व्याप्त देश-प्रेम की सच्ची अनुभूति
Explanation
'जन-गण-मन-अधिनायक' कविता देश-प्रेम की सच्ची अनुभूति का भंडार होने के कारण राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार की गई।
निर्देश (प्रश्न संख्या 81 से 85 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा संचालित ‘बंगदर्शन’ मासिक पत्रिका उनके देहांत के पश्चात् बंद हो गया था, जिसे रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सन् 1901 में पुनः प्रकाशित करना आरंभ किया। यह सत्साहित्य द्वारा सामाजिक प्रगति का एक साधन तो था ही, पर रवि बाबू उसके माध्यम से राजनीतिक अन्याय के विरुद्ध भी आवाज उठाया करते थे। जब दक्षिण अफ्रीका की बोअर जाति की हत्या गोरों ने की तब रवि बाबू ने गोरों के इस घृणित कार्य का विरोध करने के लिए कई लेख ‘बंगदर्शन’ में लिखे थे। इस मासिक पत्रिका में टैगोर की कई साहित्यिक कृतियाँ प्रकाशित हुई थीं। उनकी समस्त साहित्यिक कृतियों का उद्देश्य है—मनुष्य का मानसिक स्तर उच्च हो और मनुष्य निम्न प्रवृत्तियों का त्यागकर समाज का उपयोगी सदस्य बने। उनकी ‘जन-गण-मन-अधिनायक’ कविता तो देश-प्रेम की सच्ची अनुभूति का भंडार होने के कारण राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार कर ली गयी है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ‘बंगदर्शन’ पत्रिका का पुनः प्रकाशन किया
Aसन् 1901 में
Bदक्षिण अफ्रीका में बोअर जाति की हत्या होने पर
Cबंकिमचंद्र चटर्जी के निधन के बाद ‘बंगदर्शन’ बंद हो जाने पर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
टैगोर ने बंकिमचंद्र के निधन के बाद बंद हो चुकी पत्रिका को सन् 1901 में फिर शुरू किया, इसलिए (A) और (C) दोनों सही हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 81 से 85 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा संचालित ‘बंगदर्शन’ मासिक पत्रिका उनके देहांत के पश्चात् बंद हो गया था, जिसे रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सन् 1901 में पुनः प्रकाशित करना आरंभ किया। यह सत्साहित्य द्वारा सामाजिक प्रगति का एक साधन तो था ही, पर रवि बाबू उसके माध्यम से राजनीतिक अन्याय के विरुद्ध भी आवाज उठाया करते थे। जब दक्षिण अफ्रीका की बोअर जाति की हत्या गोरों ने की तब रवि बाबू ने गोरों के इस घृणित कार्य का विरोध करने के लिए कई लेख ‘बंगदर्शन’ में लिखे थे। इस मासिक पत्रिका में टैगोर की कई साहित्यिक कृतियाँ प्रकाशित हुई थीं। उनकी समस्त साहित्यिक कृतियों का उद्देश्य है—मनुष्य का मानसिक स्तर उच्च हो और मनुष्य निम्न प्रवृत्तियों का त्यागकर समाज का उपयोगी सदस्य बने। उनकी ‘जन-गण-मन-अधिनायक’ कविता तो देश-प्रेम की सच्ची अनुभूति का भंडार होने के कारण राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार कर ली गयी है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर की साहित्यिक कृतियों का उद्देश्य है
Aमनुष्य और समाज का कल्याण करना
Bमनुष्य के मन को श्रेष्ठ बनाना
Cमनुष्य अपनी निम्न प्रवृत्तियों का त्यागकर समाज का उपयोगी सदस्य बने
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) मनुष्य अपनी निम्न प्रवृत्तियों का त्यागकर समाज का उपयोगी सदस्य बने
Explanation
गद्यांश में कृतियों का उद्देश्य बताया है कि मनुष्य का मानसिक स्तर ऊँचा हो और वह निम्न प्रवृत्तियों को त्यागकर समाज का उपयोगी सदस्य बने।
निर्देश (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
जिस भूमि की मिट्टी से तुम्हारा देह बना है, जिसकी गंगा का तुमने निर्मल जल पिया है, और जिसके गौरव के सामने संसार का कोई देश ठहर नहीं सकता, उस पवित्र भारत-भूमि में रहते हुए तुम उसके यश को उज्ज्वल करोगे, यह मुझे पूरी आशा है। इसके साथ ही जिस सरस्वती की कोख से तुमने दूसरा जन्म लिया है, उसे मत भूलना। किसी भी काम को करते हुए सावित्री माता की उपासना से विमुख न होना।
किस मिट्टी से देह बनी है?
Aगंगा की मिट्टी
Bभारत की मिट्टी
Cभूमि की मिट्टी
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) भारत की मिट्टी
Explanation
गद्यांश में 'जिस भूमि की मिट्टी से तुम्हारा देह बना है' कहा गया है; यह पवित्र भारत-भूमि है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
जिस भूमि की मिट्टी से तुम्हारा देह बना है, जिसकी गंगा का तुमने निर्मल जल पिया है, और जिसके गौरव के सामने संसार का कोई देश ठहर नहीं सकता, उस पवित्र भारत-भूमि में रहते हुए तुम उसके यश को उज्ज्वल करोगे, यह मुझे पूरी आशा है। इसके साथ ही जिस सरस्वती की कोख से तुमने दूसरा जन्म लिया है, उसे मत भूलना। किसी भी काम को करते हुए सावित्री माता की उपासना से विमुख न होना।
किसका निर्मल जल पीने का उल्लेख है?
Aभारत की नदी
Bनदी का जल
Cगंगा का जल
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) गंगा का जल
Explanation
गद्यांश के अनुसार तुमने गंगा का निर्मल जल पिया है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
जिस भूमि की मिट्टी से तुम्हारा देह बना है, जिसकी गंगा का तुमने निर्मल जल पिया है, और जिसके गौरव के सामने संसार का कोई देश ठहर नहीं सकता, उस पवित्र भारत-भूमि में रहते हुए तुम उसके यश को उज्ज्वल करोगे, यह मुझे पूरी आशा है। इसके साथ ही जिस सरस्वती की कोख से तुमने दूसरा जन्म लिया है, उसे मत भूलना। किसी भी काम को करते हुए सावित्री माता की उपासना से विमुख न होना।
किसकी कोख से जन्म लेने की बात कही गयी है?
Aगंगा
Bभारत-भूमि
Cसरस्वती
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) सरस्वती
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि जिस सरस्वती की कोख से तुमने दूसरा जन्म लिया है, उसे मत भूलना।
निर्देश (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
जिस भूमि की मिट्टी से तुम्हारा देह बना है, जिसकी गंगा का तुमने निर्मल जल पिया है, और जिसके गौरव के सामने संसार का कोई देश ठहर नहीं सकता, उस पवित्र भारत-भूमि में रहते हुए तुम उसके यश को उज्ज्वल करोगे, यह मुझे पूरी आशा है। इसके साथ ही जिस सरस्वती की कोख से तुमने दूसरा जन्म लिया है, उसे मत भूलना। किसी भी काम को करते हुए सावित्री माता की उपासना से विमुख न होना।
किसी भी काम को करते हुए किसकी उपासना की बात कही गयी है?
Aगंगा
Bसावित्री माता
Cभारत माता
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) सावित्री माता
Explanation
गद्यांश के अंतिम वाक्य में किसी भी काम को करते हुए सावित्री माता की उपासना से विमुख न होने को कहा गया है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
जिस भूमि की मिट्टी से तुम्हारा देह बना है, जिसकी गंगा का तुमने निर्मल जल पिया है, और जिसके गौरव के सामने संसार का कोई देश ठहर नहीं सकता, उस पवित्र भारत-भूमि में रहते हुए तुम उसके यश को उज्ज्वल करोगे, यह मुझे पूरी आशा है। इसके साथ ही जिस सरस्वती की कोख से तुमने दूसरा जन्म लिया है, उसे मत भूलना। किसी भी काम को करते हुए सावित्री माता की उपासना से विमुख न होना।
लेखक ने किसके गौरव की बात कही है?
Aभारत माता
Bगंगा
Cसरस्वती माता
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) भारत माता
Explanation
गद्यांश में कहा है कि जिस भूमि के गौरव के सामने संसार का कोई देश ठहर नहीं सकता, वह भारत-भूमि है, अर्थात् भारत माता।
“दिवस का अवसान समीप था,
गगन था कुछ लोहित हो चला।
तरुशिखा पर थी अब राजती,
कमलिनी-कुल-वल्लभ की प्रभा।”
उपर्युक्त पद्यांश में कौन-सा छन्द है?
Aद्रुतविलम्बित
Bमंदाक्रांता
Cवसन्ततिलका
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) द्रुतविलम्बित
Explanation
इस पद्यांश (प्रियप्रवास) का छंद द्रुतविलम्बित है, जिसके प्रत्येक चरण में बारह वर्ण होते हैं।
Q128BPSC TRE 2.0 (2023) Mathematics Class 9-10 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 27 से 30 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के लिए उपयुक्त विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
राष्ट्रीय चेतना का प्रवाह अविराम गति से बहता रहता है। जिस प्रकार हिमालय से निकलने वाली गंगा अनेक मार्ग और रूप ग्रहण करती है तथा भारत के लोगों की आध्यात्मिक और भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करती है। उसी प्रकार हिमालय की कन्दराओं में रहने वाले मनीषियों के विचार देशवासियों को अनेक रूपों में एकता का संदेश देने वाले प्रेरणास्रोत रहे हैं। गंगा एक है, किन्तु उसके नाम अनेक हैं। चाहे उसे देवनदी कहें या भागीरथी अथवा किसी अन्य नाम से पुकारें, वह है एक ही। उसका पवित्र जल लोगों को तृप्ति प्रदान करने वाली संजीवनी है। गंगा देश के विभिन्न स्थानों, विभिन्न वर्गों, जातियों, गाँवों और शहरों के निवासियों का माँ के समान पालन-पोषण करती है। अपनी जन्मभूमि के प्रति भी यही मातृत्व भावना भारतीयों की राष्ट्रीय चेतना का मूल आधार है।
‘मनीषियों’ शब्द से आशय है
Aव्यापारियों
Bउद्यमियों
Cविद्वानों
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) विद्वानों
Explanation
मनीषी का अर्थ विद्वान या चिंतक है।
Q129BPSC TRE 2.0 (2023) Mathematics Class 9-10 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 27 से 30 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के लिए उपयुक्त विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
राष्ट्रीय चेतना का प्रवाह अविराम गति से बहता रहता है। जिस प्रकार हिमालय से निकलने वाली गंगा अनेक मार्ग और रूप ग्रहण करती है तथा भारत के लोगों की आध्यात्मिक और भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करती है। उसी प्रकार हिमालय की कन्दराओं में रहने वाले मनीषियों के विचार देशवासियों को अनेक रूपों में एकता का संदेश देने वाले प्रेरणास्रोत रहे हैं। गंगा एक है, किन्तु उसके नाम अनेक हैं। चाहे उसे देवनदी कहें या भागीरथी अथवा किसी अन्य नाम से पुकारें, वह है एक ही। उसका पवित्र जल लोगों को तृप्ति प्रदान करने वाली संजीवनी है। गंगा देश के विभिन्न स्थानों, विभिन्न वर्गों, जातियों, गाँवों और शहरों के निवासियों का माँ के समान पालन-पोषण करती है। अपनी जन्मभूमि के प्रति भी यही मातृत्व भावना भारतीयों की राष्ट्रीय चेतना का मूल आधार है।
मनीषियों के विचार देशवासियों को क्या संदेश देते हैं?
Aएकता
Bभौतिकता
Cअकिंचनता
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) एकता
Explanation
अवतरण के अनुसार मनीषियों के विचार देशवासियों को अनेक रूपों में एकता का संदेश देते हैं।
Q130BPSC TRE 2.0 (2023) Mathematics Class 9-10 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 27 से 30 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के लिए उपयुक्त विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
राष्ट्रीय चेतना का प्रवाह अविराम गति से बहता रहता है। जिस प्रकार हिमालय से निकलने वाली गंगा अनेक मार्ग और रूप ग्रहण करती है तथा भारत के लोगों की आध्यात्मिक और भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करती है। उसी प्रकार हिमालय की कन्दराओं में रहने वाले मनीषियों के विचार देशवासियों को अनेक रूपों में एकता का संदेश देने वाले प्रेरणास्रोत रहे हैं। गंगा एक है, किन्तु उसके नाम अनेक हैं। चाहे उसे देवनदी कहें या भागीरथी अथवा किसी अन्य नाम से पुकारें, वह है एक ही। उसका पवित्र जल लोगों को तृप्ति प्रदान करने वाली संजीवनी है। गंगा देश के विभिन्न स्थानों, विभिन्न वर्गों, जातियों, गाँवों और शहरों के निवासियों का माँ के समान पालन-पोषण करती है। अपनी जन्मभूमि के प्रति भी यही मातृत्व भावना भारतीयों की राष्ट्रीय चेतना का मूल आधार है।
राष्ट्रीय चेतना का मूल आधार है
Aजन्मभूमि के प्रति मातृत्व की भावना
Bलोगों की भौतिक आवश्यकताएँ
Cसांसारिक सुख
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) जन्मभूमि के प्रति मातृत्व की भावना
Explanation
अंतिम पंक्ति में कहा गया है कि जन्मभूमि के प्रति मातृत्व भावना ही राष्ट्रीय चेतना का मूल आधार है।
Q131BPSC TRE 2.0 (2023) Mathematics Class 9-10 (Re-exam)
निर्देश (प्रश्न संख्या 27 से 30 तक) : निम्नलिखित अवतरण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के लिए उपयुक्त विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए।
राष्ट्रीय चेतना का प्रवाह अविराम गति से बहता रहता है। जिस प्रकार हिमालय से निकलने वाली गंगा अनेक मार्ग और रूप ग्रहण करती है तथा भारत के लोगों की आध्यात्मिक और भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करती है। उसी प्रकार हिमालय की कन्दराओं में रहने वाले मनीषियों के विचार देशवासियों को अनेक रूपों में एकता का संदेश देने वाले प्रेरणास्रोत रहे हैं। गंगा एक है, किन्तु उसके नाम अनेक हैं। चाहे उसे देवनदी कहें या भागीरथी अथवा किसी अन्य नाम से पुकारें, वह है एक ही। उसका पवित्र जल लोगों को तृप्ति प्रदान करने वाली संजीवनी है। गंगा देश के विभिन्न स्थानों, विभिन्न वर्गों, जातियों, गाँवों और शहरों के निवासियों का माँ के समान पालन-पोषण करती है। अपनी जन्मभूमि के प्रति भी यही मातृत्व भावना भारतीयों की राष्ट्रीय चेतना का मूल आधार है।
उपर्युक्त अवतरण का उपयुक्त शीर्षक हो सकता है
Aलोगों की शारीरिक आवश्यकताएँ
Bराष्ट्रीय चेतना
Cदेशवासियों का पालन-पोषण
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) राष्ट्रीय चेतना
Explanation
पूरा अवतरण राष्ट्रीय चेतना के प्रवाह और उसके आधार की बात करता है, इसलिए उपयुक्त शीर्षक 'राष्ट्रीय चेतना' है।
निर्देश : (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए -
मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है। उसकी प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है। प्रात: कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं। वाटिका के पुष्प उनका पथ सुरभित करते हैं। वैश्वीकरण में दशों दिशाओं में मानव - मार्ग प्रशस्त हो गया है।
‘मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है।’ में किसकी चर्चा की गई है?
Aविधाता की
Bविधाता की सृष्टि की
Cमनुष्य की
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) मनुष्य की
Explanation
गद्यांश के पहले ही वाक्य में मनुष्य को विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी बताया गया है, अर्थात् चर्चा मनुष्य की है।
निर्देश : (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए -
मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है। उसकी प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है। प्रात: कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं। वाटिका के पुष्प उनका पथ सुरभित करते हैं। वैश्वीकरण में दशों दिशाओं में मानव - मार्ग प्रशस्त हो गया है।
प्रकृति परिवेश किसके लिए मुस्कराता है?
Aमनुष्य के लिए
Bसृष्टि के लिए
Cविधाता के लिए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) मनुष्य के लिए
Explanation
गद्यांश के अनुसार मनुष्य की प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है।
निर्देश : (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए -
मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है। उसकी प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है। प्रात: कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं। वाटिका के पुष्प उनका पथ सुरभित करते हैं। वैश्वीकरण में दशों दिशाओं में मानव - मार्ग प्रशस्त हो गया है।
जागरण गीत कौन गा रहा है?
Aसूर्य
Bकिरणें
Cप्रात: काल
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) किरणें
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि प्रात:कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं।
निर्देश : (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए -
मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है। उसकी प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है। प्रात: कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं। वाटिका के पुष्प उनका पथ सुरभित करते हैं। वैश्वीकरण में दशों दिशाओं में मानव - मार्ग प्रशस्त हो गया है।
वाटिका के पुष्प किसका पथ सुरभित करते हैं?
Aमनुष्य का
Bसृष्टि का
Cसूर्य का
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) मनुष्य का
Explanation
गद्यांश के अनुसार वाटिका के पुष्प मनुष्य का पथ सुरभित करते हैं ('उसकी प्रगति' के संदर्भ में)।
निर्देश : (प्रश्न संख्या 86 से 90 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए -
मनुष्य विधाता की सृष्टि का सर्वाधिक चिंतनशील प्राणी है। उसकी प्रगति के लिए प्रकृति परिवेश सदा मुस्कराता रहता है। प्रात: कालीन सूर्य की स्वर्णिम किरणें जागरण गीत सुनाती हैं। वाटिका के पुष्प उनका पथ सुरभित करते हैं। वैश्वीकरण में दशों दिशाओं में मानव - मार्ग प्रशस्त हो गया है।
वैश्वीकरण में मार्ग प्रशस्त होने का क्या अर्थ है?
Aहजारों मार्ग होना
Bसैकड़ों मार्ग होना
Cमार्ग सुलभ होना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) मार्ग सुलभ होना
Explanation
'मार्ग प्रशस्त होने' का अर्थ है मार्ग का चौड़ा, अर्थात् सुलभ हो जाना।
निर्देश (प्रश्न संख्या 91 से 95 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए
मनुष्य अपनी सफलता और प्रसन्नता के लिए बचपन से ही प्रयत्नशील रहता है। सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है। माँ की मुस्कान देख हँसने की इच्छा जग जाती है। पिता की उँगली पकड़ कर भागने की इच्छा जग जाती है। साहित्य-चर्चा और सृजन धर्म अपनाने से सरस्वती के उपासक बन जाते हैं।
इसमें किसकी चर्चा की गई है?
Aप्रयत्न की
Bसफलता की
Cप्रसन्नता की
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (E) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Explanation
गद्यांश में सफलता, प्रसन्नता, सहजानुभूति, साहित्य-सृजन आदि अनेक बातें आई हैं, अतः दिए गए तीनों विकल्पों में से केवल एक को उत्तर नहीं कहा जा सकता; आयोग की कुंजी के अनुसार उत्तर 'कोई नहीं' है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 91 से 95 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए
मनुष्य अपनी सफलता और प्रसन्नता के लिए बचपन से ही प्रयत्नशील रहता है। सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है। माँ की मुस्कान देख हँसने की इच्छा जग जाती है। पिता की उँगली पकड़ कर भागने की इच्छा जग जाती है। साहित्य-चर्चा और सृजन धर्म अपनाने से सरस्वती के उपासक बन जाते हैं।
गतिशील रहने की ऊर्जा कब मिलती है?
Aअनुभूति में
Bसहजता में
Cसहजानुभूति में
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
Show answerHide answer
Correct answer: (C) सहजानुभूति में
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 91 से 95 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए
मनुष्य अपनी सफलता और प्रसन्नता के लिए बचपन से ही प्रयत्नशील रहता है। सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है। माँ की मुस्कान देख हँसने की इच्छा जग जाती है। पिता की उँगली पकड़ कर भागने की इच्छा जग जाती है। साहित्य-चर्चा और सृजन धर्म अपनाने से सरस्वती के उपासक बन जाते हैं।
बच्चे को हँसने की इच्छा कब होती है?
Aमाँ को देखकर
Bमुस्कान देखकर
Cमाँ की मुस्कान देखकर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) माँ की मुस्कान देखकर
Explanation
गद्यांश के अनुसार माँ की मुस्कान देखकर हँसने की इच्छा जाग जाती है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 91 से 95 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए
मनुष्य अपनी सफलता और प्रसन्नता के लिए बचपन से ही प्रयत्नशील रहता है। सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है। माँ की मुस्कान देख हँसने की इच्छा जग जाती है। पिता की उँगली पकड़ कर भागने की इच्छा जग जाती है। साहित्य-चर्चा और सृजन धर्म अपनाने से सरस्वती के उपासक बन जाते हैं।
पिता की उँगली पकड़ कर किसे भागने की इच्छा होती है?
Aपुत्र की
Bपुत्री की
Cदोस्त की
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
गद्यांश में केवल 'भागने की इच्छा' की बात है, बच्चा पुत्र या पुत्री कोई भी हो सकता है; इसलिए (A) और (B) दोनों संभव हैं, अतः उत्तर 'एक से अधिक' है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 91 से 95 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर पत्रक में चिह्नित कीजिए
मनुष्य अपनी सफलता और प्रसन्नता के लिए बचपन से ही प्रयत्नशील रहता है। सहजानुभूति में गतिशील रहने की ऊर्जा मिलती है। माँ की मुस्कान देख हँसने की इच्छा जग जाती है। पिता की उँगली पकड़ कर भागने की इच्छा जग जाती है। साहित्य-चर्चा और सृजन धर्म अपनाने से सरस्वती के उपासक बन जाते हैं।
सरस्वती के उपासक कैसे बनते हैं?
Aसाहित्य-चर्चा से
Bसाहित्य-सृजन से
Cसाहित्य-चर्चा और साहित्य-सृजन से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) साहित्य-चर्चा और साहित्य-सृजन से
Explanation
गद्यांश के अनुसार साहित्य-चर्चा और सृजन-धर्म अपनाने से मनुष्य सरस्वती का उपासक बन जाता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 96 से 100 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर- पत्रक में चिह्नित कीजिए -
पर्वत के झर-झर झरते, झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश संगीतमय बना देते हैं। तरंगों से मचलती सरिता अपने निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है। पर्वत से लुढ़कता पाषाण सरिता की गतिशीलता के संग बहकर कल्याणकारी शिव बन जाता है। वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचकर मचलते लता-गुल्म और वृक्ष बन जाते हैं। वसंत की भींनी हवा कलियों के ओठों पर मधुर मुस्कान ला देती है।
पर्वतीय प्रदेश संगीतमय कैसे बन जाता है?
Aझरने से
Bझरने के झर-झर से
Cझरने के संगीत से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) झरने के संगीत से
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश को संगीतमय बना देते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 96 से 100 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर- पत्रक में चिह्नित कीजिए -
पर्वत के झर-झर झरते, झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश संगीतमय बना देते हैं। तरंगों से मचलती सरिता अपने निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है। पर्वत से लुढ़कता पाषाण सरिता की गतिशीलता के संग बहकर कल्याणकारी शिव बन जाता है। वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचकर मचलते लता-गुल्म और वृक्ष बन जाते हैं। वसंत की भींनी हवा कलियों के ओठों पर मधुर मुस्कान ला देती है।
सरिता का निकटवर्ती क्षेत्र हरा-भरा कैसे हो जाता है?
Aसरिता की निकटता से
Bसरिता की जल-तरंगों से
Cसरिता के मचलने से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
तरंगों से मचलती सरिता निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है; जल-तरंगें और मचलना दोनों कारण दिए गए हैं, अतः एक से अधिक विकल्प सही हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 96 से 100 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर- पत्रक में चिह्नित कीजिए -
पर्वत के झर-झर झरते, झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश संगीतमय बना देते हैं। तरंगों से मचलती सरिता अपने निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है। पर्वत से लुढ़कता पाषाण सरिता की गतिशीलता के संग बहकर कल्याणकारी शिव बन जाता है। वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचकर मचलते लता-गुल्म और वृक्ष बन जाते हैं। वसंत की भींनी हवा कलियों के ओठों पर मधुर मुस्कान ला देती है।
पत्थर से शिव बनने का क्या अर्थ है?
Aसुंदर रूप पाना
Bचमत्कार होना
Cकल्याणकारी होना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) कल्याणकारी होना
Explanation
पत्थर के सरिता के साथ बहकर 'कल्याणकारी शिव' बन जाने का अर्थ है कल्याणकारी होना।
निर्देश (प्रश्न संख्या 96 से 100 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर- पत्रक में चिह्नित कीजिए -
पर्वत के झर-झर झरते, झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश संगीतमय बना देते हैं। तरंगों से मचलती सरिता अपने निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है। पर्वत से लुढ़कता पाषाण सरिता की गतिशीलता के संग बहकर कल्याणकारी शिव बन जाता है। वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचकर मचलते लता-गुल्म और वृक्ष बन जाते हैं। वसंत की भींनी हवा कलियों के ओठों पर मधुर मुस्कान ला देती है।
वनस्पतियों के नए-नए लता-गुल्म दूर-दूर कैसे पहुँच जाते हैं?
Aउनके बीज से
Bपक्षियों से
Cसंगति से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) पक्षियों से
Explanation
गद्यांश के अनुसार वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचते हैं, अर्थात् पक्षियों के द्वारा।
निर्देश (प्रश्न संख्या 96 से 100 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर- पत्रक में चिह्नित कीजिए -
पर्वत के झर-झर झरते, झरने अपने संगीत से पर्वतीय प्रदेश संगीतमय बना देते हैं। तरंगों से मचलती सरिता अपने निकटवर्ती क्षेत्र को हरा-भरा कर देती है। पर्वत से लुढ़कता पाषाण सरिता की गतिशीलता के संग बहकर कल्याणकारी शिव बन जाता है। वनस्पतियों के बीज पक्षियों का संग पाकर दूर-दूर पहुँचकर मचलते लता-गुल्म और वृक्ष बन जाते हैं। वसंत की भींनी हवा कलियों के ओठों पर मधुर मुस्कान ला देती है।
वसंत में कलियों में मुस्कान क्यों आती है?
Aवसंत की भीनी हवा से
Bहवा से
Cभीनी हवा से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) वसंत की भीनी हवा से
Explanation
गद्यांश में वसंत की भीनी हवा से कलियों के होंठों पर मुस्कान आने की बात कही गई है; पूरा कथन (A) में है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 101 से 105 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
विधाता की सृष्टि सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है। सर सरिता से हरी-भरी, मानवता से परिलसित है। प्रकृति के अप्रतिम सौंदर्य में मानव के मानवीय भावाकर्षण में विधाता को धरती पर बार-बार अवतार लेना पड़ता है। धर्म भूमि संत, महात्माओं को पाकर धन्य हो गई है। शत-शत नमन है यह पावन, दिव्य स्थली मातृभूमि को।
विधाता की सृष्टि किस प्रकार आलोकित है?
Aआभा से आलोकित है
Bसूर्य की आभा से आलोकित है
Cसूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है
Explanation
गद्यांश का पहला वाक्य है कि विधाता की सृष्टि सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 101 से 105 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
विधाता की सृष्टि सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है। सर सरिता से हरी-भरी, मानवता से परिलसित है। प्रकृति के अप्रतिम सौंदर्य में मानव के मानवीय भावाकर्षण में विधाता को धरती पर बार-बार अवतार लेना पड़ता है। धर्म भूमि संत, महात्माओं को पाकर धन्य हो गई है। शत-शत नमन है यह पावन, दिव्य स्थली मातृभूमि को।
किसे परिलसित होने की बात कही गई है?
Aमानवता
Bसर-सरिता
Cसृष्टि
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) सृष्टि
Explanation
'विधाता की सृष्टि ... परिलसित है' वाक्य का कर्ता 'सृष्टि' है, इसलिए कुंजी के अनुसार उत्तर (C) है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 101 से 105 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
विधाता की सृष्टि सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है। सर सरिता से हरी-भरी, मानवता से परिलसित है। प्रकृति के अप्रतिम सौंदर्य में मानव के मानवीय भावाकर्षण में विधाता को धरती पर बार-बार अवतार लेना पड़ता है। धर्म भूमि संत, महात्माओं को पाकर धन्य हो गई है। शत-शत नमन है यह पावन, दिव्य स्थली मातृभूमि को।
विधाता को बार-बार धरती पर अवतार क्यों लेना पड़ता है?
Aप्रकृती से
Bप्रकृति-सौंदर्याकर्षण
Cमानवीय भावाकर्षण
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
गद्यांश में प्रकृति के सौंदर्य और मानव के मानवीय भावाकर्षण दोनों का उल्लेख है, इसलिए एक से अधिक विकल्प (B और C) सही माने गए हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 101 से 105 तक) : प्रस्तुत अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए -
विधाता की सृष्टि सूर्य और चाँद की आभा से आलोकित है। सर सरिता से हरी-भरी, मानवता से परिलसित है। प्रकृति के अप्रतिम सौंदर्य में मानव के मानवीय भावाकर्षण में विधाता को धरती पर बार-बार अवतार लेना पड़ता है। धर्म भूमि संत, महात्माओं को पाकर धन्य हो गई है। शत-शत नमन है यह पावन, दिव्य स्थली मातृभूमि को।
यह भूमि धन्य कैसे हुई?
Aसंत-महात्माओं को पाकर
Bसंत को पाकर
Cमहात्माओं को पाकर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) संत-महात्माओं को पाकर
Explanation
गद्यांश के अनुसार धर्मभूमि संत-महात्माओं को पाकर धन्य हो गई है।
How to use these BPSC TRE Hindi questions
Every question here was asked in a real BPSC TRE paper; the paper and shift are shown on the card, and the number opens the question on its own page. Try each one before tapping Show answer, then attempt the full BPSC TRE papers as timed tests to check your speed under exam conditions.