853 Hindi questions asked in BPSC TRE previous year papers, each with the correct answer and explanation. Read them free on UTpaper, or attempt the full papers as timed online tests.
निम्नलिखित रचनाओं को उनके काल के साथ सुमेलित कीजिए तथा सही कूट का चयन कीजिए :
रचनाएँ:
a. पृथ्वीराज रासो
b. पदमावत
c. बिहारी सतसई
d. भारत-भारती
काल:
1. आधुनिक काल
2. आदिकाल
3. भक्तिकाल
4. रीतिकाल
Aa-1, b-3, c-2, d-4
Ba-2, b-3, c-4, d-1
Ca-2, b-3, c-1, d-4
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) a-2, b-3, c-4, d-1
Explanation
पृथ्वीराज रासो आदिकाल की, पदमावत भक्तिकाल की, बिहारी सतसई रीतिकाल की और भारत-भारती आधुनिक काल की रचना है, अतः क्रम a-2, b-3, c-4, d-1 है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 126 से 130 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
पुस्तकालय वह विशाल ज्ञान-सिंधु है जिसमें विद्या की अक्षय निधियाँ मौजूद हैं जिनके अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है । पुस्तकालय शब्द का निर्माण पुस्तक + आलय दो शब्दों से हुआ है । अर्थात् पुस्तकों के लिए घर/पुस्तकालय में उपयोगी पुस्तकों का संग्रह किया जाता है; जिससे मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, और जीवन की उन्नति होती है । इससे मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है और मस्तिष्क का विकास होता है ।
मनुष्य के उच्च चरित्र निर्माण में सहायक हैं
Aयात्राएँ
Bपुस्तकें
Cमनुष्य
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) पुस्तकें
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि पुस्तकालय में पुस्तकों के संग्रह से मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, अर्थात् पुस्तकें सहायक हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 126 से 130 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
पुस्तकालय वह विशाल ज्ञान-सिंधु है जिसमें विद्या की अक्षय निधियाँ मौजूद हैं जिनके अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है । पुस्तकालय शब्द का निर्माण पुस्तक + आलय दो शब्दों से हुआ है । अर्थात् पुस्तकों के लिए घर/पुस्तकालय में उपयोगी पुस्तकों का संग्रह किया जाता है; जिससे मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, और जीवन की उन्नति होती है । इससे मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है और मस्तिष्क का विकास होता है ।
विद्या की अक्षय निधियाँ कहाँ मौजूद होती हैं ?
Aस्वाध्याय
Bमस्तिष्क
Cपुस्तकालय
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) पुस्तकालय
Explanation
गद्यांश के पहले वाक्य के अनुसार विद्या की अक्षय निधियाँ पुस्तकालय में मौजूद हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 126 से 130 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
पुस्तकालय वह विशाल ज्ञान-सिंधु है जिसमें विद्या की अक्षय निधियाँ मौजूद हैं जिनके अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है । पुस्तकालय शब्द का निर्माण पुस्तक + आलय दो शब्दों से हुआ है । अर्थात् पुस्तकों के लिए घर/पुस्तकालय में उपयोगी पुस्तकों का संग्रह किया जाता है; जिससे मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, और जीवन की उन्नति होती है । इससे मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है और मस्तिष्क का विकास होता है ।
स्वाध्याय में सहायक हैं
Aजीवन की उन्नति
Bमस्तिष्क
Cपुस्तकालय
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) पुस्तकालय
Explanation
गद्यांश के अनुसार पुस्तकालय से मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है, इसलिए पुस्तकालय स्वाध्याय में सहायक है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 126 से 130 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
पुस्तकालय वह विशाल ज्ञान-सिंधु है जिसमें विद्या की अक्षय निधियाँ मौजूद हैं जिनके अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है । पुस्तकालय शब्द का निर्माण पुस्तक + आलय दो शब्दों से हुआ है । अर्थात् पुस्तकों के लिए घर/पुस्तकालय में उपयोगी पुस्तकों का संग्रह किया जाता है; जिससे मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, और जीवन की उन्नति होती है । इससे मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है और मस्तिष्क का विकास होता है ।
हमारा हृदय विशाल और उन्नत कैसे बनता है ?
Aसामाजिक-राजनीतिक विकास से
Bपुस्तकों के अध्ययन से
Cविभिन्न रीति-रिवाजों के माध्यम से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) पुस्तकों के अध्ययन से
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि पुस्तकों के अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 126 से 130 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
पुस्तकालय वह विशाल ज्ञान-सिंधु है जिसमें विद्या की अक्षय निधियाँ मौजूद हैं जिनके अध्ययन मात्र से हमारा हृदय विशाल और उन्नत बनता है । पुस्तकालय शब्द का निर्माण पुस्तक + आलय दो शब्दों से हुआ है । अर्थात् पुस्तकों के लिए घर/पुस्तकालय में उपयोगी पुस्तकों का संग्रह किया जाता है; जिससे मनुष्य के उच्च चरित्र का निर्माण होता है, और जीवन की उन्नति होती है । इससे मनुष्य में स्वाध्याय की रुचि पैदा होती है और मस्तिष्क का विकास होता है ।
‘ज्ञान सिंधु’ का अर्थ है
Aज्ञान का सागर
Bज्ञान की नदी
Cज्ञान की व्यवस्था
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) ज्ञान का सागर
Explanation
'ज्ञान सिंधु' का अर्थ ज्ञान का सागर है, क्योंकि सिंधु का अर्थ समुद्र है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 131 से 135 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
औद्योगीकरण के फलस्वरूप नगरों की आबादी तेजी से बढ़ी है । गाँव के लोग रोटी रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर गंदी बस्तियों की वृद्धि करते हैं । औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है और वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है । औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के समय प्रदूषण नियंत्रण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है । आग, धूल, राख और धुआँ की कालिमा का प्रभाव घर, बाग-बगीचे सहित दूर-दूर तक होता है । इससे आँखों में चिपचिपापन, रोहा, दृष्टि कमजोर होना, टी. बी., कैंसर आदि रोग फैलते हैं । औद्योगीकरण के फलस्वरूप तेजाबी वर्षा भी होती है जो फसलों, पेड़-पौधों आदि को विशेष हानि पहुँचाती है । अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता भी घट जाती है ।
भूमि की उत्पादन क्षमता क्यों घट जाती है ?
Aविस्थापन के कारण
Bकृषि योग्य भूमि में कमी होने के कारण
Cअम्लीय और क्षारीयकरण के कारण
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण
Explanation
गद्यांश के अंत में कहा गया है कि अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता घट जाती है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 131 से 135 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
औद्योगीकरण के फलस्वरूप नगरों की आबादी तेजी से बढ़ी है । गाँव के लोग रोटी रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर गंदी बस्तियों की वृद्धि करते हैं । औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है और वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है । औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के समय प्रदूषण नियंत्रण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है । आग, धूल, राख और धुआँ की कालिमा का प्रभाव घर, बाग-बगीचे सहित दूर-दूर तक होता है । इससे आँखों में चिपचिपापन, रोहा, दृष्टि कमजोर होना, टी. बी., कैंसर आदि रोग फैलते हैं । औद्योगीकरण के फलस्वरूप तेजाबी वर्षा भी होती है जो फसलों, पेड़-पौधों आदि को विशेष हानि पहुँचाती है । अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता भी घट जाती है ।
कृषि योग्य भूमि में कमी क्यों हुई है ?
Aतेजाबी वर्षा के कारण
Bबाग-बगीचों की बहुतायत के कारण
Cऔद्योगीकरण के कारण
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) औद्योगीकरण के कारण
Explanation
गद्यांश के अनुसार औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 131 से 135 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
औद्योगीकरण के फलस्वरूप नगरों की आबादी तेजी से बढ़ी है । गाँव के लोग रोटी रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर गंदी बस्तियों की वृद्धि करते हैं । औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है और वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है । औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के समय प्रदूषण नियंत्रण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है । आग, धूल, राख और धुआँ की कालिमा का प्रभाव घर, बाग-बगीचे सहित दूर-दूर तक होता है । इससे आँखों में चिपचिपापन, रोहा, दृष्टि कमजोर होना, टी. बी., कैंसर आदि रोग फैलते हैं । औद्योगीकरण के फलस्वरूप तेजाबी वर्षा भी होती है जो फसलों, पेड़-पौधों आदि को विशेष हानि पहुँचाती है । अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता भी घट जाती है ।
औद्योगीकरण के कारण जनसंख्या कहाँ तेजी से बढ़ी है ?
Aदेश
Bगाँव
Cशहर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) शहर
Explanation
गद्यांश के पहले वाक्य के अनुसार औद्योगीकरण से नगरों (शहरों) की आबादी तेजी से बढ़ी है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 131 से 135 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
औद्योगीकरण के फलस्वरूप नगरों की आबादी तेजी से बढ़ी है । गाँव के लोग रोटी रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर गंदी बस्तियों की वृद्धि करते हैं । औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है और वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है । औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के समय प्रदूषण नियंत्रण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है । आग, धूल, राख और धुआँ की कालिमा का प्रभाव घर, बाग-बगीचे सहित दूर-दूर तक होता है । इससे आँखों में चिपचिपापन, रोहा, दृष्टि कमजोर होना, टी. बी., कैंसर आदि रोग फैलते हैं । औद्योगीकरण के फलस्वरूप तेजाबी वर्षा भी होती है जो फसलों, पेड़-पौधों आदि को विशेष हानि पहुँचाती है । अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता भी घट जाती है ।
हरियाली क्यों नष्ट हो गई है ?
Aवनों के विनाश के कारण
Bप्रदूषण के कारण
Cभूमि की उर्वरा क्षमता में कमी के कारण
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) वनों के विनाश के कारण
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 131 से 135 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
औद्योगीकरण के फलस्वरूप नगरों की आबादी तेजी से बढ़ी है । गाँव के लोग रोटी रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर गंदी बस्तियों की वृद्धि करते हैं । औद्योगीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि में कमी हुई है और वनों के विनाश के कारण ही हरियाली नष्ट हो गई है । औद्योगिक केंद्रों की स्थापना के समय प्रदूषण नियंत्रण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है । आग, धूल, राख और धुआँ की कालिमा का प्रभाव घर, बाग-बगीचे सहित दूर-दूर तक होता है । इससे आँखों में चिपचिपापन, रोहा, दृष्टि कमजोर होना, टी. बी., कैंसर आदि रोग फैलते हैं । औद्योगीकरण के फलस्वरूप तेजाबी वर्षा भी होती है जो फसलों, पेड़-पौधों आदि को विशेष हानि पहुँचाती है । अम्लीय और क्षारीयकरण के कारण भूमि की उत्पादन क्षमता भी घट जाती है ।
लोग गाँव से आकर शहरों में क्यों बसते हैं ?
Aउत्तम सुविधाओं के लिए
Bरोजगार के लिए
Cमनोरंजन के लिए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) रोजगार के लिए
Explanation
गद्यांश के अनुसार गाँव के लोग रोटी-रोजगार के चक्कर में शहरों में आकर बसते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 136 से 140 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
आलस्य को छोड़ने के लिए शारीरिक श्रम करना चाहिए । आलस्य को जीतने का एक यही उपाय है । यदि इससे काम न लिया गया, तो उसकी सजा प्रकृति की ओर से मिले बिना न रहेगी । बीमारियों के या किसी और कष्ट के रूप में वह सजा भोगनी ही पड़ेगी । शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता । इसका प्रतिफल अवश्य मिलता है । उत्तम आरोग्य प्राप्त होता है । शारीरिक रोग का जैसे मन पर असर होता है, वैसे ही शारीरिक आरोग्य का भी होता है । यह अनुभव सिद्ध है ।
शरीर श्रम में क्या लगता है ?
Aसमय
Bअनुभव
Cशरीर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) समय
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता, यानी श्रम में समय लगता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 136 से 140 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
आलस्य को छोड़ने के लिए शारीरिक श्रम करना चाहिए । आलस्य को जीतने का एक यही उपाय है । यदि इससे काम न लिया गया, तो उसकी सजा प्रकृति की ओर से मिले बिना न रहेगी । बीमारियों के या किसी और कष्ट के रूप में वह सजा भोगनी ही पड़ेगी । शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता । इसका प्रतिफल अवश्य मिलता है । उत्तम आरोग्य प्राप्त होता है । शारीरिक रोग का जैसे मन पर असर होता है, वैसे ही शारीरिक आरोग्य का भी होता है । यह अनुभव सिद्ध है ।
आरोग्य से तात्पर्य है
Aरोगमुक्त होना
Bरोगी होना
Cस्वस्थ होना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
'आरोग्य' का अर्थ रोग से मुक्त होना भी है और स्वस्थ होना भी, इसलिए 'एक से अधिक' सही है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 136 से 140 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
आलस्य को छोड़ने के लिए शारीरिक श्रम करना चाहिए । आलस्य को जीतने का एक यही उपाय है । यदि इससे काम न लिया गया, तो उसकी सजा प्रकृति की ओर से मिले बिना न रहेगी । बीमारियों के या किसी और कष्ट के रूप में वह सजा भोगनी ही पड़ेगी । शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता । इसका प्रतिफल अवश्य मिलता है । उत्तम आरोग्य प्राप्त होता है । शारीरिक रोग का जैसे मन पर असर होता है, वैसे ही शारीरिक आरोग्य का भी होता है । यह अनुभव सिद्ध है ।
आलस्य के परिणामस्वरूप सजा किस रूप में मिलती है ?
Aप्रकृति से दूर होना
Bमन का दुखी होना
Cबीमारी एवं कष्ट होना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) बीमारी एवं कष्ट होना
Explanation
गद्यांश के अनुसार आलस्य की सजा प्रकृति की ओर से बीमारियों या किसी और कष्ट के रूप में मिलती है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 136 से 140 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
आलस्य को छोड़ने के लिए शारीरिक श्रम करना चाहिए । आलस्य को जीतने का एक यही उपाय है । यदि इससे काम न लिया गया, तो उसकी सजा प्रकृति की ओर से मिले बिना न रहेगी । बीमारियों के या किसी और कष्ट के रूप में वह सजा भोगनी ही पड़ेगी । शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता । इसका प्रतिफल अवश्य मिलता है । उत्तम आरोग्य प्राप्त होता है । शारीरिक रोग का जैसे मन पर असर होता है, वैसे ही शारीरिक आरोग्य का भी होता है । यह अनुभव सिद्ध है ।
रोग का प्रभाव किस पर पड़ता है ?
Aआलस्य
Bश्रम
Cमन
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) मन
Explanation
गद्यांश के अनुसार शारीरिक रोग का असर मन पर होता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 136 से 140 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
आलस्य को छोड़ने के लिए शारीरिक श्रम करना चाहिए । आलस्य को जीतने का एक यही उपाय है । यदि इससे काम न लिया गया, तो उसकी सजा प्रकृति की ओर से मिले बिना न रहेगी । बीमारियों के या किसी और कष्ट के रूप में वह सजा भोगनी ही पड़ेगी । शरीर श्रम में जो समय लगता है, वह व्यर्थ नहीं जाता । इसका प्रतिफल अवश्य मिलता है । उत्तम आरोग्य प्राप्त होता है । शारीरिक रोग का जैसे मन पर असर होता है, वैसे ही शारीरिक आरोग्य का भी होता है । यह अनुभव सिद्ध है ।
आलस्य को जीतने का क्या उपाय है ?
Aव्यर्थ काम न करना
Bशारीरिक श्रम करना
Cशारीरिक रूप से स्वस्थ होना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) शारीरिक श्रम करना
Explanation
गद्यांश के पहले वाक्यों के अनुसार आलस्य को जीतने का एक ही उपाय शारीरिक श्रम करना है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं ।
चंद्रिका का पर्यायवाची है
Aविभा
Bप्रकाश
Cचाँदनी
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) चाँदनी
Explanation
'चंद्रिका' का अर्थ चाँदनी है, यही उसका सही पर्यायवाची है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं ।
मनुष्य की कीर्ति किससे फैलती है ?
Aपुण्य कृतियों से
Bकवियों और लेखकों से
Cशारीरिक सुन्दरता से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) पुण्य कृतियों से
Explanation
गद्यांश के अंतिम वाक्य के अनुसार मनुष्य की कीर्ति उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं ।
पाठक और श्रोता किससे नया पाठ सीखा करते हैं ?
Aमनुष्य के उज्ज्वल कार्य से
Bअभिनय से
Cयशगान से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) मनुष्य के उज्ज्वल कार्य से
Explanation
गद्यांश के अनुसार पाठक और श्रोता स्वावलंबी मनुष्य के उज्ज्वल कार्यों (उसके जीवन-कर्मों) से नया पाठ सीखते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं ।
चारण और भाट किसका यशगान करते हैं ?
Aपूर्णिमा की चंद्रिका का
Bस्वावलंबी मनुष्य का
Cकवियों और लेखकों का
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) स्वावलंबी मनुष्य का
Explanation
गद्यांश के आरंभ में कहा गया है कि चारण और भाट स्वावलंबी मनुष्य का यशगान करते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या 141 से 145 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
स्वावलंबी मनुष्य की यश-कीर्ति पूर्णिमा की चंद्रिका के समान चारों ओर फैलती है । उसका यशगान चारण और भाट शताब्दियों तक गाया करते हैं । कवियों और लेखकों की लेखनी उसकी धवल कृतियों का निरंतर बखान किया करती है । उनका अभिनय रंगशालाओं तथा चित्रपटों पर हुआ करता है । पाठक और श्रोता उससे मनोरंजन के अतिरिक्त नित्य नया पाठ सीखा करते हैं । मनुष्य की कीर्ति उसकी शारीरिक सुंदरता नहीं वरन् उसकी पुण्य कृतियाँ फैलाती हैं ।
‘धवल’ का अर्थ है
Aश्याम
Bस्वच्छ
Cउजला
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (D) उपर्युक्त में से एक से अधिक
Explanation
'धवल' का अर्थ स्वच्छ भी है और उजला भी, इसलिए 'एक से अधिक' सही है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 146 से 150 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
व्यक्ति की उन्नति से ही देश की उन्नति संभव है । बिना आत्मोन्नति के देश का उन्नयन असंभव है । धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र, राज्य आदि छोटी-छोटी बातों पर लड़ना, द्वेष फैलाता है । देश को पीछे ले जाता है । राष्ट्र की गरिमा घटती है । हमें सभी प्रकार के मतभेदों को भुलाकर आपस में भाईचारे का संबंध रखना चाहिए । देश की शक्ति और व्यवस्था को बनाए रखना हम सबका कर्तव्य है । राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है ।
राष्ट्र की गरिमा कैसे घटती है ?
Aभाषा से
Bआत्मोन्नति से
Cआपसी लड़ाई और द्वेष से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) आपसी लड़ाई और द्वेष से
Explanation
गद्यांश के अनुसार धर्म, जाति, भाषा आदि पर आपसी लड़ाई और द्वेष से राष्ट्र की गरिमा घटती है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 146 से 150 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
व्यक्ति की उन्नति से ही देश की उन्नति संभव है । बिना आत्मोन्नति के देश का उन्नयन असंभव है । धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र, राज्य आदि छोटी-छोटी बातों पर लड़ना, द्वेष फैलाता है । देश को पीछे ले जाता है । राष्ट्र की गरिमा घटती है । हमें सभी प्रकार के मतभेदों को भुलाकर आपस में भाईचारे का संबंध रखना चाहिए । देश की शक्ति और व्यवस्था को बनाए रखना हम सबका कर्तव्य है । राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है ।
देश की उन्नति किसकी उन्नति से संबंधित है ?
Aभाषा
Bधर्म
Cव्यक्ति
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) व्यक्ति
Explanation
गद्यांश के पहले वाक्य के अनुसार देश की उन्नति व्यक्ति की उन्नति से ही संभव है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 146 से 150 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
व्यक्ति की उन्नति से ही देश की उन्नति संभव है । बिना आत्मोन्नति के देश का उन्नयन असंभव है । धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र, राज्य आदि छोटी-छोटी बातों पर लड़ना, द्वेष फैलाता है । देश को पीछे ले जाता है । राष्ट्र की गरिमा घटती है । हमें सभी प्रकार के मतभेदों को भुलाकर आपस में भाईचारे का संबंध रखना चाहिए । देश की शक्ति और व्यवस्था को बनाए रखना हम सबका कर्तव्य है । राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है ।
राष्ट्र की उन्नति कैसे संभव है ?
Aराज्यों के विकास से
Bव्यक्ति की स्वतंत्रता से
Cदेश की शक्ति और व्यवस्था को बनाए रखने से
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) देश की शक्ति और व्यवस्था को बनाए रखने से
Explanation
गद्यांश के अंत में कहा गया है कि देश की शक्ति और व्यवस्था बनाए रखने से ही राष्ट्र की उन्नति संभव है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 146 से 150 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
व्यक्ति की उन्नति से ही देश की उन्नति संभव है । बिना आत्मोन्नति के देश का उन्नयन असंभव है । धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र, राज्य आदि छोटी-छोटी बातों पर लड़ना, द्वेष फैलाता है । देश को पीछे ले जाता है । राष्ट्र की गरिमा घटती है । हमें सभी प्रकार के मतभेदों को भुलाकर आपस में भाईचारे का संबंध रखना चाहिए । देश की शक्ति और व्यवस्था को बनाए रखना हम सबका कर्तव्य है । राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है ।
देश को पीछे क्या ले जाता है ?
Aधर्म और जाति
Bछोटी-छोटी बातों पर लड़ना
Cकेवल अपनी उन्नति करना
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) छोटी-छोटी बातों पर लड़ना
Explanation
गद्यांश के अनुसार छोटी-छोटी बातों पर लड़ना द्वेष फैलाता है और देश को पीछे ले जाता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या 146 से 150 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
व्यक्ति की उन्नति से ही देश की उन्नति संभव है । बिना आत्मोन्नति के देश का उन्नयन असंभव है । धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र, राज्य आदि छोटी-छोटी बातों पर लड़ना, द्वेष फैलाता है । देश को पीछे ले जाता है । राष्ट्र की गरिमा घटती है । हमें सभी प्रकार के मतभेदों को भुलाकर आपस में भाईचारे का संबंध रखना चाहिए । देश की शक्ति और व्यवस्था को बनाए रखना हम सबका कर्तव्य है । राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है ।
भाईचारे के संबंध के लिए आवश्यक है
Aमतभेदों को भुलाना
Bदेश की उन्नति
Cधर्म में आस्था
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) मतभेदों को भुलाना
Explanation
गद्यांश के अनुसार भाईचारे का संबंध रखने के लिए सभी प्रकार के मतभेदों को भुलाना आवश्यक है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
किस अर्थ में आदर्श व्यक्ति का चरित्र प्रशंसनीय होता है ?
Aवह ज्ञान से संकट को दूर करता है
Bवह धैर्य से संकट को दूर करता है
Cवह बहादुरी से संकटों का सामना करता है
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) वह धैर्य से संकट को दूर करता है
Explanation
गद्यांश की अंतिम पंक्ति के अनुसार आदर्श व्यक्ति का चरित्र इसलिए प्रशंसनीय है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
आदर्श व्यक्ति के जीवन में किसके लिए स्थान नहीं होता ?
Aमनोविनोद के लिए
Bविश्राम के लिए
Cआलस्य के लिए
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) आलस्य के लिए
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि आदर्श व्यक्ति के जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है
Aसद्कर्म
Bकर्मशीलता
Cआदर्श व्यक्ति
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) आदर्श व्यक्ति
Explanation
पूरा गद्यांश आदर्श व्यक्ति के गुणों का वर्णन करता है, इसलिए उपयुक्त शीर्षक 'आदर्श व्यक्ति' है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
लोग आश्चर्यविमूढ़ क्यों होते हैं ?
Aआदर्श व्यक्ति का साहस देखकर
Bआदर्श व्यक्ति का ज्ञान देखकर
Cआदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) आदर्श व्यक्ति की कार्यकुशलता देखकर
Explanation
गद्यांश में लिखा है कि लोग उसकी कार्यकुशलता देखकर आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 1
आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है । इसी में वह अपने जीवन की सार्थकता समझता है । उसके जीवन का प्रत्येक क्षण सद्कर्म में ही व्यतीत होता है । विश्राम और विनोद के लिए उसके पास निश्चित समय रहता है । वह शेष समय समाज के उत्थान में लगाता है । उसके जीवन में आलस्य के लिए कोई स्थान नहीं होता । विपत्तियों में भी वह अपने चरित्र का सच्चा परिचय देता है । धैर्यरूपी कुदाल से वह बड़े-बड़े संकटरूपी पर्वतों को निर्मूल कर देता है । उसकी कार्यकुशलता देखकर लोग आश्चर्यविमूढ़ हो जाते हैं । वह परिस्थितियों का दास नहीं होता, परिस्थितियाँ उसकी दासी होती हैं । इस अर्थ में उसका चरित्र प्रशंसनीय होता है कि वह धैर्य से अपने सारे संकट दूर करता है ।
आदर्श व्यक्ति किसमें आस्था रखता है ?
Aसद्व्यवहार में
Bसद्कर्म में
Cप्रेम में
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) सद्कर्म में
Explanation
गद्यांश की पहली पंक्ति के अनुसार आदर्श व्यक्ति सद्कर्मों में आस्था रखता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
स्वास्थ्य का सहोदर है
Aऔषधि
Bपौष्टिक भोजन
Cव्यायाम
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) व्यायाम
Explanation
गद्यांश में व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
स्वस्थ व्यक्ति का लक्षण है
Aआत्मसंयम
Bअपार संपदा
Cअत्यधिक बल
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) आत्मसंयम
Explanation
गद्यांश के अनुसार वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
किसी व्यक्ति का विकास किस पर आश्रित है ?
Aसमुचित अध्ययन
Bसत्संगति
Cआत्मसंयम
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (C) आत्मसंयम
Explanation
आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है, जिसके माध्यम से व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
व्यक्ति के पतन का कारण है
Aअत्यधिक शक्ति
Bचारित्रिक दोष
Cअत्यधिक विभूति
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (B) चारित्रिक दोष
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि चारित्रिक दूषण (दोष) व्यक्ति के पतन का कारण होता है।
निर्देश (प्रश्न संख्या H-9 से H-18 तक) : निम्नलिखित अपठित गद्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर-पत्रक में चिह्नित कीजिए ।
गद्यांश - 2
स्वास्थ्य और चरित्र एक-दूसरे से घनिष्ठता के साथ जुड़े होते हैं । वही व्यक्ति स्वस्थ होता है जिसके चरित्र में आत्मसंयम हो । चारित्रिक दूषण व्यक्ति के पतन का कारण होता है । आत्मसंयम को चरित्र की सीढ़ी कहा गया है । इसी सीढ़ी के माध्यम से कोई व्यक्ति उत्तरोत्तर विकास की यात्रा तय करता है । व्यायाम को स्वास्थ्य का सहोदर कहा गया है । यही किसी व्यक्ति की काया और चित्त को निर्मल और नीरुज (रोगरहित) बनाता है । चरित्र की रक्षा का अर्थ है - काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना ।
विभिन्न दूषणों से मुक्त होने का अर्थ है
Aचरित्र की रक्षा
Bपरिवार की रक्षा
Cधन की रक्षा
Dउपर्युक्त में से एक से अधिक
Eउपर्युक्त में से कोई नहीं
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Correct answer: (A) चरित्र की रक्षा
Explanation
गद्यांश के अनुसार चरित्र की रक्षा का अर्थ काया और चित्त को विभिन्न दूषणों से मुक्त करना है।
सही शब्द 'अनधिकार' है (अन् + अधिकार); 'अनाधिकार' और 'अनधीकार' अशुद्ध हैं।
How to use these BPSC TRE Hindi questions
Every question here was asked in a real BPSC TRE paper; the paper and shift are shown on the card, and the number opens the question on its own page. Try each one before tapping Show answer, then attempt the full BPSC TRE papers as timed tests to check your speed under exam conditions.