450 Hindi questions asked in CTET previous year papers, each with the correct answer and explanation. Read them free on UTpaper, or attempt the full papers as timed online tests.
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
सभी व्यक्तियों को समान दृष्टि से देखने में सहायक है -
Aव्यवहारिक होना
Bध्यान का अभ्यास
Cसमान दृष्टि का अभ्यास
Dआचरण का अभ्यास
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Correct answer: (B) ध्यान का अभ्यास
Explanation
गद्यांश में लिखा है - ‘ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है।’ इसलिए सही उत्तर ध्यान का अभ्यास है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
किसी भी कार्य की सफलता में __________ योगदान होता है।
Aसभी की सम दृष्टि का
Bपदाधिकारियों के श्रम का
Cसभी के परिश्रम का
Dसभी के धन का
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Correct answer: (C) सभी के परिश्रम का
Explanation
गद्यांश के अनुसार कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता; अधिक या कम वेतन पाने वाले सभी अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। अतः सफलता में सभी के परिश्रम का योगदान होता है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
समूह से भिन्न शब्द है -
Aसंस्कृति
Bज़्यादा
Cव्यक्ति
Dमहत्वपूर्ण
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Correct answer: (B) ज़्यादा
Explanation
संस्कृति, व्यक्ति और महत्वपूर्ण - तीनों संस्कृत से आए तत्सम शब्द हैं, जबकि ‘ज़्यादा’ फ़ारसी/अरबी से आया आगत (विदेशी) शब्द है। इसलिए यह समूह से भिन्न है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
‘संस्कृति’ शब्द में __________ प्रत्यय का प्रयोग होगा।
Aइय
Bईय
Cइक
Dइत
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Correct answer: (C) इक
Explanation
‘संस्कृति’ में ‘इक’ प्रत्यय लगाने पर विशेषण ‘सांस्कृतिक’ बनता है (आदि स्वर की वृद्धि के साथ), जैसे - समाज से सामाजिक, इतिहास से ऐतिहासिक।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
गद्यांश में सभी मनुष्यों को समान भाव से देखने एवं __________ पर बल दिया गया है।
Aव्यवहार करने
Bविशेष मानने
Cसमान वेतन देने
Dसमान नौकरी देने
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Correct answer: (A) व्यवहार करने
Explanation
गद्यांश कहता है कि चौकीदार, क्लर्क या कैशियर भी मालिक जितना ही महत्वपूर्ण है, यानी सबको समान भाव से देखना और उनके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए। समान वेतन या नौकरी की बात गद्यांश में नहीं है।
जब एक शुरुआती पाठक पाठ्यवस्तु की थीम, सांस्कृतिक पहलू आदि के बारे में अपने सामान्य ज्ञान का प्रयोग करता है, जिससे कि वह उस विशिष्ट पाठगत् सामग्री से अर्थ निकाल सके, तो यह क्या कहलाएगी?
Aतल - ऊर्ध्वगामी उपागम
Bतल - अधोगामी उपागम
Cऊर्ध्व-अधोगामी उपागम
Dऊर्ध्व-ऊर्ध्वगामी उपागम
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Correct answer: (C) ऊर्ध्व-अधोगामी उपागम
Explanation
जब पाठक अपने पूर्व ज्ञान और संदर्भ (थीम, संस्कृति) से अर्थ बनाता है, तो यह ऊर्ध्व-अधोगामी (टॉप-डाउन) उपागम है। अक्षर-शब्द से शुरू करके अर्थ तक जाना तल-ऊर्ध्वगामी (बॉटम-अप) होता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा पाठ्य सामग्री की बोधगम्यता और शब्दावली के विकास में मदद नहीं करेगा?
Aथीम मानचित्र
Bचित्र शब्दकोश
Cशब्द मानचित्र
Dवर्णमाला चार्ट
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Correct answer: (D) वर्णमाला चार्ट
Explanation
वर्णमाला चार्ट केवल अक्षरों की पहचान में मदद करता है। थीम मानचित्र, चित्र शब्दकोश और शब्द मानचित्र अर्थ और शब्दों के संबंध समझाकर बोध और शब्दावली बढ़ाते हैं।
निम्नलिखित में से किसके द्वारा समावेशी कक्षा सृजित करने में मदद नहीं मिलेगी?
Aबहुभाषिक उपागम का अनुपालन करना
Bकक्षा में कुछ विद्यार्थियों को कक्षा प्रमुख (मॉनीटर) बना देना
Cसहपाठी समूह अन्तः क्रिया और पृष्ठ पोषण व्यवस्था
Dसमूहों में कार्य करने के लिए देना
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Correct answer: (B) कक्षा में कुछ विद्यार्थियों को कक्षा प्रमुख (मॉनीटर) बना देना
Explanation
कुछ ही विद्यार्थियों को मॉनीटर बनाने से कक्षा में ऊँच-नीच का भाव पैदा होता है और सबकी समान भागीदारी नहीं होती। बहुभाषिकता, सहपाठी अंतःक्रिया और समूह कार्य समावेशन बढ़ाते हैं।
बुनियादी अन्तः वैयक्तिक सम्प्रेषणात्मक कौशलों को किस रूप में जाना जाता है?
Aदिन-प्रतिदिन के सम्प्रेषण के प्रयुक्त भाषा
Bअन्तरभाषा (इंटरलैंग्विज)
Cउच्च स्तरीय भाषा कौशल
Dअमूर्तता की भाषा
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Correct answer: (A) दिन-प्रतिदिन के सम्प्रेषण के प्रयुक्त भाषा
Explanation
जिम कमिंस के अनुसार BICS (बुनियादी अंतःवैयक्तिक संप्रेषण कौशल) रोज़मर्रा की बातचीत की भाषा है। उच्च स्तरीय और अमूर्त भाषा CALP (शैक्षिक भाषा दक्षता) कहलाती है।
एक अध्यापक हिंदी भाषी विद्यार्थियों को द्वितीय भाषा के रूप मे अंग्रेजी का अध्यापन करते समय उन्हें स्पष्ट रूप से नियम बताए बगैर अंग्रेजी में संक्षिप्त संवाद करने के संदर्भ और अवसर देता है वह उनके वार्तालाप में प्रयुक्त उदाहरण उनके समक्ष प्रस्तुत करता है। धीरे-धीरे शिक्षार्थी अध्यापक की मदद से स्वतः ही नियम सीख लेते हैं। अध्यापक किस मॉडल/उपागम का अनुपालन कर रहा है?
Aसम्प्रेषणात्मक उपागम
Bप्रत्यक्ष (डायरेक्ट) विधि
Cव्याकरण अनुवाद विधि
Dश्रव्य-भाषिक विधि
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Correct answer: (A) सम्प्रेषणात्मक उपागम
Explanation
संदर्भ में बातचीत के अवसर देना और नियम सीधे न बताकर बच्चों से स्वयं खोजवाना सम्प्रेषणात्मक उपागम की पहचान है, जिसमें भाषा का प्रयोग संवाद के लिए होता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा सम्प्रेषणात्मक उपागम का गुणधर्म नहीं है?
Aस्पष्टता के साथ शिक्षण के स्थान पर व्याकरण के नियमों की खोज करना
Bसम्प्रेषणात्मक दक्षता का विकास करना
Cप्रकार्य की अपेक्षा नियमों पर अधिक ध्यान देना
Dभाषा का संदर्भगत प्रयोग
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Correct answer: (C) प्रकार्य की अपेक्षा नियमों पर अधिक ध्यान देना
Explanation
सम्प्रेषणात्मक उपागम में भाषा के प्रकार्य (उपयोग/अर्थ) पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है, नियमों (रूप) पर नहीं। इसलिए ‘प्रकार्य की अपेक्षा नियमों पर अधिक ध्यान’ इसका गुण नहीं है।
निम्नलिखित में से कौन-सा बाल साहित्य का अपेक्षित गुणधर्म नहीं है?
Aबड़ा फोंट आकार और परिचित शब्द
Bआकर्षक चित्र
Cपशु पात्र
Dनैतिक मूल्यों का स्पष्टतः प्रदर्शन
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Correct answer: (D) नैतिक मूल्यों का स्पष्टतः प्रदर्शन
Explanation
अच्छे बाल साहित्य में नैतिक मूल्य उपदेश की तरह सीधे नहीं थोपे जाते, बल्कि कहानी से अपने आप निकलते हैं। बड़ा फोंट, परिचित शब्द, आकर्षक चित्र और पशु पात्र बच्चों को पसंद आते हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा अधिगम का मुख्य क्षेत्र (डोमेन) नहीं है?
Aभावात्मक
Bमनोगत्यात्मक
Cसंज्ञानात्मक
Dसामाजिक सांस्कृतिक
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Correct answer: (D) सामाजिक सांस्कृतिक
Explanation
ब्लूम आदि के अनुसार अधिगम के तीन मुख्य क्षेत्र हैं - संज्ञानात्मक, भावात्मक और मनोगत्यात्मक (मनोशारीरिक)। ‘सामाजिक सांस्कृतिक’ इनमें शामिल नहीं है।
Q271CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द भिन्न है ?
Aधैर्य
Bक्षमा
Cदुर्बल
Dक्रोध
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Correct answer: (C) दुर्बल
Explanation
धैर्य, क्षमा और क्रोध भाववाचक संज्ञाएँ हैं, जबकि ‘दुर्बल’ विशेषण है (दुर्बल व्यक्ति), इसलिए यह शब्द भिन्न है।
Q272CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
‘ऊँचाई प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम है ।’ इस वाक्य में ‘सशक्त’ एक ______________ विशेषण है ।
Aपरिमाणवाचक
Bगुणवाचक
Cसार्वनामिक
Dसंख्यावाचक
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Correct answer: (B) गुणवाचक
Explanation
‘सशक्त’ शब्द ‘माध्यम’ के गुण (शक्ति से युक्त होना) को बताता है, इसलिए यह गुणवाचक विशेषण है।
Q273CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
क्षमा क्या नहीं है ?
Aआत्म साधना
Bआत्मा का स्वभाव
Cआत्मा का आभूषण
Dआत्मा का नैसर्गिक गुण
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Correct answer: (A) आत्म साधना
Explanation
गद्यांश में क्षमा को आत्मा का आभूषण, आत्मा का स्वभाव और आत्मा का नैसर्गिक गुण कहा गया है; ‘आत्म साधना’ नहीं कहा गया (क्षमाशीलता को साधना सिद्धि का राजपथ कहा गया है)।
Q274CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
गंतव्य पर कौन पहुँचता है ?
Aक्षमाशील और शांत चित्त व्यक्ति
Bश्रेष्ठ और कुलीन व्यक्ति
Cशांत चित्त और धैर्यवान व्यक्ति
Dसमर्थ और धैर्यवान व्यक्ति
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Correct answer: (A) क्षमाशील और शांत चित्त व्यक्ति
Explanation
गद्यांश के अनुसार जो व्यक्ति क्षमाशीलता अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है।
Q275CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
धर्म का दरवाजा किसके लिए खुलता है ?
Aक्षमा न माँगने वाले व्यक्ति के लिए
Bक्षमादान न करने वाले के लिए
Cक्षमादान का अभ्यास करने वाले के लिए
Dक्षमा माँगने वाले के लिए
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Correct answer: (C) क्षमादान का अभ्यास करने वाले के लिए
Explanation
गद्यांश में लिखा है कि जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता; अर्थात् यह क्षमादान का अभ्यास करने वाले के लिए खुलता है।
Q276CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
व्यक्तित्व का महत्त्वपूर्ण घटक क्या है ?
Aक्रोध
Bगरिमा
Cइंद्रिय संयम
Dक्षमा
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Correct answer: (D) क्षमा
Explanation
गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है।
Q277CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
क्षमा करना कौन जानता है ?
Aसमर्थवान व्यक्ति
Bसक्षम व्यक्ति
Cआत्मबलहीन व्यक्ति
Dक्रोधहीन व्यक्ति
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Correct answer: (A) समर्थवान व्यक्ति
Explanation
गद्यांश के अनुसार ‘समर्थ ही क्षमा करना जानता है’, दुर्बल या आत्मबलहीन व्यक्ति क्षमा नहीं कर सकता; इसलिए समर्थवान व्यक्ति सही है।
Q278CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द भिन्न है ?
Aसहनशीलता
Bसँभालता
Cसहिष्णुता
Dमहानता
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Correct answer: (B) सँभालता
Explanation
सहनशीलता, सहिष्णुता और महानता भाववाचक संज्ञाएँ हैं, जबकि ‘सँभालता’ क्रिया का रूप है, इसलिए यह भिन्न है।
Q279CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
अक्षम लोग में ‘लोग’ ___________ संज्ञा है ।
Aगणनीय
Bनिर्जीव
Cसमूहवाचक
Dव्यक्तिवाचक
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Correct answer: (C) समूहवाचक
Explanation
‘लोग’ शब्द किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि व्यक्तियों के समूह का बोध कराता है, इसलिए यह समूहवाचक संज्ञा है।
Q280CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
सामर्थ्युक्त, पुरुषार्थहीन और अधैर्यवान _____________ शब्द हैं ।
Aविशेषण
Bक्रिया-विशेषण
Cसंज्ञा
Dसर्वनाम
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Correct answer: (A) विशेषण
Explanation
सामर्थ्युक्त, पुरुषार्थहीन और अधैर्यवान तीनों शब्द व्यक्ति/गुण की विशेषता बताते हैं, इसलिए ये विशेषण हैं।
Q281CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
क्षमा माँगने से व्यक्ति का कद _____________ ।
Aसमान रहता है
Bपहले से घट जाता है
Cपहले से बढ़ जाता है
Dबदल जाता है
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Correct answer: (C) पहले से बढ़ जाता है
Explanation
गद्यांश के अनुसार अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से हृदय में विनयशीलता आती है और व्यक्ति का कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है।
Q282CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
वाक्य पूरा कीजिए :
अहमवश अपनी ग़लती न मानकर ____________ ।
Aक्षमा माँग लेते हैं
Bक्षमा नहीं माँगते
Cक्षमा माँगने में संकोच करते हैं
Dक्षमा दान कर देते हैं
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Correct answer: (C) क्षमा माँगने में संकोच करते हैं
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं।
Q283CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
_____________ लोग क्षमा को कायरता कहते हैं ।
Aसहिष्णु
Bउदार
Cक्षमाशील
Dपुरुषार्थहीन
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Correct answer: (D) पुरुषार्थहीन
Explanation
गद्यांश के अनुसार सहिष्णुता, उदारता जैसे गुण पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में नहीं होते और ऐसे अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताते हैं।
Q284CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
क्षमा करने से व्यक्तित्व में क्या प्रकट नहीं होता ?
Aकायरता
Bसरलता
Cआनंद
Dतेजस्विता
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Correct answer: (A) कायरता
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है और यह व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है; अतः क्षमा से कायरता प्रकट नहीं होती।
Q285CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति कब होती है ?
Aजब हम क्षमा माँगने में संकोच करते हैं ।
Bजब हम क्षमा माँग लेते हैं ।
Cजब हम ग़लती स्वीकार लेते हैं ।
Dजब हम क्षमा दे देते हैं ।
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Correct answer: (A) जब हम क्षमा माँगने में संकोच करते हैं ।
Explanation
गद्यांश के अनुसार अहम के कारण जब हम क्षमा माँगने में संकोच करते हैं, तब समय-समय पर हृदय में ग्लानि की अनुभूति होती है, पर उसे उजागर नहीं होने देते।
Q286CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
एक शिक्षक होने के नाते, आप अपनी कक्षा में शिक्षण करते समय श्रव्य-दृश्य सामग्री और शारीरिक गतिविधियों का प्रयोग करना पसंद करते हैं । आप ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि इससे :
Aआपको कक्षा में आराम के मौके मिल जाते हैं ।
Bशिक्षार्थियों का ध्यान दूसरी तरफ लग जाता है ।
Cआकलन प्रभावशाली रूप से हो पाता है ।
Dअधिगम संवर्द्धन हेतु इन्द्रियों का अधिकतम संख्या में उपयोग होता है ।
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Correct answer: (D) अधिगम संवर्द्धन हेतु इन्द्रियों का अधिकतम संख्या में उपयोग होता है ।
Explanation
श्रव्य-दृश्य सामग्री और शारीरिक गतिविधियों से देखना, सुनना, करना जैसी कई इन्द्रियाँ एक साथ सक्रिय होती हैं, जिससे सीखना अधिक गहरा और स्थायी होता है।
Q287CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
आपने अपने विद्यार्थी की उत्तर-पुस्तिका को पढ़ा और उसमें अपनी टिप्पणियाँ लिखीं । यह किसका उदाहरण है ?
Aदैनिक टिप्पणियाँ
Bमूल्यांकन
Cपृष्ठपोषण (फीडबैक)
Dउत्तर-पुस्तिका की जाँच
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Correct answer: (C) पृष्ठपोषण (फीडबैक)
Explanation
विद्यार्थी के उत्तर पढ़कर उस पर टिप्पणी लिखना उसे अपने काम के बारे में जानकारी लौटाना है, अर्थात् पृष्ठपोषण (फीडबैक)।
Q288CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
अच्छे वक्ताओं के पास किस तरह की योग्यता होती है ?
Aभावानुवाद/व्याख्या करने की
Bतुरंत विश्लेषण करने की
Cबोध की
Dअनुवाद करने की
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Correct answer: (B) तुरंत विश्लेषण करने की
Explanation
अच्छा वक्ता बोलते समय श्रोताओं और स्थिति का तुरंत विश्लेषण करके अपनी बात को ढालता है, इसलिए उसमें तुरंत विश्लेषण करने की योग्यता होती है।
Q289CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
आपकी कक्षा का एक विद्यार्थी राकेश अकसर काल रूप की ग़लतियाँ करता है । इस समस्या से उबरने के लिए आप :
Aराकेश को नियम सिखाने के लिए डाँट सकते हैं ।
Bराकेश को अपनी नोटबुक में दस बार नियम लिखने के लिए कह सकते हैं ।
Cउसे व्याकरण के नियम समझा सकते हैं ।
Dसमूची कक्षा में कई उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं और राकेश पर विशेष ध्यान दे सकते हैं ।
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Correct answer: (D) समूची कक्षा में कई उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं और राकेश पर विशेष ध्यान दे सकते हैं ।
Explanation
काल की ग़लतियाँ सुधारने के लिए डाँटने या रटवाने के बजाय संदर्भ में कई उदाहरण देना और विद्यार्थी पर विशेष ध्यान देना सबसे प्रभावी तरीका है।
Q290CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
आप सर्वाधिक रूप से उपयुक्त शिक्षण सामग्री का चयन करना चाह रहे हैं ? सही शिक्षण सामग्री के चयन के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा बिन्दु प्रासंगिक नहीं है ?
Aयह जरूरी नहीं कि इसकी विशिष्ट शैक्षिक महत्ता हो ।
Bयह बाल-केन्द्रित होना चाहिए ।
Cयह कक्षा में पढ़ाए जा रहे विषय के समरूप होना चाहिए ।
Dयह प्रयोग के संदर्भ में सरल और सादा होना चाहिए ।
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Correct answer: (A) यह जरूरी नहीं कि इसकी विशिष्ट शैक्षिक महत्ता हो ।
Explanation
शिक्षण सामग्री बाल-केन्द्रित, विषय के अनुरूप और प्रयोग में सरल होनी चाहिए तथा उसकी शैक्षिक महत्ता होनी ही चाहिए; इसलिए ‘शैक्षिक महत्ता ज़रूरी नहीं’ वाला बिन्दु प्रासंगिक नहीं है।
Q291CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निम्नलिखित में से कौन-सा उद्गामी साक्षरता से संबंधित नहीं है ?
Aमुद्रित/लिखित सामग्री के प्रति समझ बनाना
Bआरंभिक ध्वन्यात्मक जागरूकता
Cनोट (टिप्पणी) लेना
Dआधारभूत वर्णमाला ज्ञान
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Correct answer: (C) नोट (टिप्पणी) लेना
Explanation
उद्गामी साक्षरता में छपी सामग्री की समझ, आरंभिक ध्वन्यात्मक जागरूकता और वर्णमाला का आधारभूत ज्ञान आते हैं; नोट लेना बाद का, विकसित पठन-लेखन कौशल है।
Q292CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
चुनौती बाधित कुछ बच्चों ने एक नए विद्यालय में प्रवेश लिया । अध्यापकों ने भिन्न-भिन्न प्रकार से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की । कौन-सी प्रतिक्रिया समावेशी शिक्षा की अवधारणा को प्रतिबिम्बित करती है ?
A“ओफ्फो ! मैं ऐसे बच्चों को कैसे पढ़ा सकती हूँ जो सुन ही नहीं सकते ?”
B“अरे वाह ! इस तरह से बच्चों को एक-दूसरे की मदद करने व सहयोग करने के अच्छे अवसर मिलेंगे ।”
C“ओफ्फो ! ये बच्चे कक्षा के दूसरे बच्चों के साथ कैसे घुल-मिल पाएँगे ?”
D“अरे ! इन बच्चों के लिए तो एक पृथक अनुभाग होना चाहिए ।”
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Correct answer: (B) “अरे वाह ! इस तरह से बच्चों को एक-दूसरे की मदद करने व सहयोग करने के अच्छे अवसर मिलेंगे ।”
Explanation
समावेशी शिक्षा सभी बच्चों को एक साथ पढ़ाने और विविधता को अवसर मानने पर बल देती है; दूसरी प्रतिक्रिया में बच्चों के आपसी सहयोग को सकारात्मक रूप में देखा गया है।
Q293CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
आपको कक्षा में विमर्श करना बहुत अच्छा लगता है क्योंकि :
Aयह शिक्षार्थियों के योगदान को महत्त्व नहीं देता है ।
Bयह वाक् में स्पष्टता और विशिष्टता प्रदान करता है ।
Cयह शिक्षार्थियों को चिंतन करने के लिए शायद ही प्रेरित करता है ।
Dयह आपको अध्यापक होने की सत्ता प्रदान करता है ।
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Correct answer: (B) यह वाक् में स्पष्टता और विशिष्टता प्रदान करता है ।
Explanation
कक्षा में विमर्श से विद्यार्थी अपने विचार बोलकर व्यक्त करते हैं, जिससे उनकी वाक् (बोलने) में स्पष्टता और विशिष्टता आती है; बाकी विकल्प विमर्श के उद्देश्य के विपरीत हैं।
Q294CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य वायगोत्सकी और पियाज़े के सिद्धान्त के मध्य महत्त्वपूर्ण अन्तर पर प्रकाश डालता है ?
Aभाषा और विचार के मध्य संबंध
Bअर्थ-निर्माण की प्रक्रिया में बच्चों की रचनात्मक/वस्तुपरक भूमिका
Cयह समझ कि बच्चे सक्रिय/निष्क्रिय रूप से शुरुआत करते हैं
Dयह समझना कि अधिगम एक सरल/जटिल प्रक्रिया है
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Correct answer: (A) भाषा और विचार के मध्य संबंध
Explanation
पियाज़े के अनुसार विचार पहले विकसित होता है और भाषा उसे व्यक्त करती है, जबकि वायगोत्सकी भाषा को विचार के विकास का मुख्य साधन मानते हैं; भाषा और विचार का संबंध ही दोनों के बीच प्रमुख अंतर है।
Q295CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
सम्प्रेषणात्मक भाषा शिक्षण में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तथ्य :
Aअर्थ
Bभाषा की संरचना
Cलेखन कौशल
Dव्याकरण के नियमों को कंठस्थ करना
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Correct answer: (A) अर्थ
Explanation
सम्प्रेषणात्मक भाषा शिक्षण में अर्थपूर्ण संप्रेषण सबसे महत्त्वपूर्ण है; संरचना और व्याकरण के नियम रटना गौण हैं।
Q296CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
किस वक्ता में कोड-मिश्रण में संलग्न होने की सबसे अधिक संभावना होगी ?
Aएकलभाषी वयस्क – सत्यवीर
Bद्विभाषी बालक – गर्व
Cद्विभाषी वयस्क – मीरा
Dएकलभाषी बालिका – अर्पिता
Show answerHide answer
Correct answer: (B) द्विभाषी बालक – गर्व
Explanation
कोड-मिश्रण के लिए दो भाषाओं का ज्ञान आवश्यक है, इसलिए एकलभाषी वक्ता इसे नहीं करते; द्विभाषी बच्चे भाषाएँ सीखते हुए स्वाभाविक रूप से दोनों भाषाओं को सबसे अधिक मिलाते हैं।
Q297CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
आपकी जानकारी में यह बात आई कि कक्षा IV की विद्यार्थी मंदाकिनी काल के संबंध में अकसर ग़लतियाँ करती है । आप इस संबंध में मंदाकिनी की मदद कैसे करेंगे ?
Aउसे जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जुड़े उदाहरण प्रस्तुत करेंगे जिनमें वह कालों का प्रयोग कर सके
Bउसे कालों के नियम अच्छी तरह से कंठस्थ करने के लिए कहेंगे
Cव्याकरण के नियम समझाएँगे या लिखवाएँगे
Dमंदाकिनी को अपनी नोटबुक में दस बार काल लिखने के लिए कहेंगे
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Correct answer: (A) उसे जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जुड़े उदाहरण प्रस्तुत करेंगे जिनमें वह कालों का प्रयोग कर सके
Explanation
काल का सही प्रयोग वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जुड़े संदर्भों में अभ्यास करने से सीखा जाता है, नियम रटने या बार-बार लिखने से नहीं।
Q298CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
एक भाषा अध्यापिका अपनी कक्षा में समस्या-समाधान विधि को प्रभावशाली तरीके से संचालित करना चाहती है । उसे क्या करना चाहिए ?
Aविद्यार्थियों को अपने अभिभावकों से परामर्श लेने के लिए कहना चाहिए
Bविद्यार्थियों की गतिविधियों का दूर से ही अवलोकन करना चाहिए
Cअपसारी चिंतन (डाइवरजेंट) को प्रोत्साहित करना चाहिए
Dप्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए
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Correct answer: (C) अपसारी चिंतन (डाइवरजेंट) को प्रोत्साहित करना चाहिए
Explanation
समस्या-समाधान विधि में शिक्षक को विद्यार्थियों को एक से अधिक संभावित हल सोचने, यानी अपसारी चिंतन, के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
Q299CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
एक श्रोता एक श्रव्य सामग्री सुनते समय मुख्य विचार सुनता है, अनुमान लगाता है, निष्कर्ष निकालता है और सारांशीकरण करता है । इन युक्तियों को क्या कहा जाएगा ?
मुख्य विचार पकड़ना, अनुमान लगाना, निष्कर्ष निकालना और सारांश बनाना पूर्व ज्ञान और संदर्भ के सहारे पूरे अर्थ से भागों की ओर जाने वाली शीर्ष-अधोगामी (टॉप-डाउन) प्रक्रियाएँ हैं।
Q300CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
ध्वनिग्रामिक जागरूकता किससे संबंधित है ?
Aबोले जा रहे शब्दों में ध्वनिग्राम की पहचान करने और उनमें हेर-फेर करने की क्षमता
Bध्वनिग्राम और ग्राफीम के बीच संबंध स्थापित करने की योग्यता
Cशब्दों को सही तरीके से और प्रवाह के साथ पढ़ना
Dसही वर्तनी के साथ लिखना
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Correct answer: (B) ध्वनिग्राम और ग्राफीम के बीच संबंध स्थापित करने की योग्यता
Explanation
Note: the official key gives (2); ध्वनिग्रामिक जागरूकता की मानक परिभाषा विकल्प (1) है — बोले गए शब्दों में ध्वनिग्रामों को पहचानने और उनमें हेर-फेर करने की क्षमता। ध्वनिग्राम और ग्राफ़ीम (वर्ण) का संबंध जोड़ना (विकल्प 2) ध्वनि-वर्ण संबंध (फ़ोनिक्स) का आधार है, फिर भी आधिकारिक उत्तर कुंजी ने विकल्प (2) को सही माना है।
How to use these CTET Hindi questions
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