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Hindi Previous Year Questions (page 7)

450 Hindi questions asked in CTET previous year papers, each with the correct answer and explanation. Read them free on UTpaper, or attempt the full papers as timed online tests.

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Q301CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे सही उत्तर वाले विकल्प का चयन करिए। ‘अध्ययन’ शब्द का सामान्य अर्थ है – पढ़ना और इसका विशिष्ट अर्थ है – पढ़ने के साथ गुनना अर्थात् हम जो कुछ भी पढ़ते हैं, उस पर गहराई से चिंतन-मनन करना। अध्ययन के द्वारा अपनी रुचियों को विस्तृत, जागृत और परिष्कृत किया जा सकता है, तरह-तरह के विषयों का ज्ञान सहजता से प्राप्त किया जा सकता है, अंधविश्वासों और गलत धारणाओं को मिटाया जा सकता है, आत्मिक शान्ति का लाभ भी पाया जा सकता है। अध्ययन का तात्पर्य पुस्तक में छपी सूचना पढ़कर याद कर लेना नहीं है। अध्ययन के लिए असीमित विषयक्षेत्र हैं – साहित्य, संगीत, विज्ञान, धर्म, दर्शन, मनोरंजन आदि। अध्ययन ने नए क्षितिज का उद्घाटन किया है। यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि अध्ययन – मनन प्रत्येक क्षेत्र की मूल समृद्धि का आधार है। ‘जागृति’ का विलोम है -
  1. Aसृष्टि
  2. Bसुषुप्ति
  3. Cसचेत
  4. Dसीमित
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Correct answer: (B) सुषुप्ति

Explanation

‘जागृति’ का अर्थ है जागना या सचेत होना; इसका विलोम ‘सुषुप्ति’ (गहरी नींद की अवस्था) है।

Q302CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे सही उत्तर वाले विकल्प का चयन करिए। ‘अध्ययन’ शब्द का सामान्य अर्थ है – पढ़ना और इसका विशिष्ट अर्थ है – पढ़ने के साथ गुनना अर्थात् हम जो कुछ भी पढ़ते हैं, उस पर गहराई से चिंतन-मनन करना। अध्ययन के द्वारा अपनी रुचियों को विस्तृत, जागृत और परिष्कृत किया जा सकता है, तरह-तरह के विषयों का ज्ञान सहजता से प्राप्त किया जा सकता है, अंधविश्वासों और गलत धारणाओं को मिटाया जा सकता है, आत्मिक शान्ति का लाभ भी पाया जा सकता है। अध्ययन का तात्पर्य पुस्तक में छपी सूचना पढ़कर याद कर लेना नहीं है। अध्ययन के लिए असीमित विषयक्षेत्र हैं – साहित्य, संगीत, विज्ञान, धर्म, दर्शन, मनोरंजन आदि। अध्ययन ने नए क्षितिज का उद्घाटन किया है। यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि अध्ययन – मनन प्रत्येक क्षेत्र की मूल समृद्धि का आधार है। ‘अध्ययन से विकास, उन्नति और प्रगति के रास्ते खुलते हैं।’ यह भाव गद्यांश की किस पंक्ति में व्यक्त किया गया है?
  1. A‘अध्ययन’ का सामान्य अर्थ है पढ़ना।
  2. Bअध्ययन प्रत्येक क्षेत्र की मूल समृद्धि का आधार है।
  3. Cअध्ययन के लिए असीमित विषय क्षेत्र हैं।
  4. Dआत्मिक शान्ति का लाभ पाया जा सकता है।
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Correct answer: (B) अध्ययन प्रत्येक क्षेत्र की मूल समृद्धि का आधार है।

Explanation

गद्यांश की अंतिम पंक्ति कहती है कि अध्ययन-मनन प्रत्येक क्षेत्र की मूल समृद्धि का आधार है, यानी हर क्षेत्र का विकास और प्रगति अध्ययन से ही होती है।

Q303CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे सही उत्तर वाले विकल्प का चयन करिए। ‘अध्ययन’ शब्द का सामान्य अर्थ है – पढ़ना और इसका विशिष्ट अर्थ है – पढ़ने के साथ गुनना अर्थात् हम जो कुछ भी पढ़ते हैं, उस पर गहराई से चिंतन-मनन करना। अध्ययन के द्वारा अपनी रुचियों को विस्तृत, जागृत और परिष्कृत किया जा सकता है, तरह-तरह के विषयों का ज्ञान सहजता से प्राप्त किया जा सकता है, अंधविश्वासों और गलत धारणाओं को मिटाया जा सकता है, आत्मिक शान्ति का लाभ भी पाया जा सकता है। अध्ययन का तात्पर्य पुस्तक में छपी सूचना पढ़कर याद कर लेना नहीं है। अध्ययन के लिए असीमित विषयक्षेत्र हैं – साहित्य, संगीत, विज्ञान, धर्म, दर्शन, मनोरंजन आदि। अध्ययन ने नए क्षितिज का उद्घाटन किया है। यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि अध्ययन – मनन प्रत्येक क्षेत्र की मूल समृद्धि का आधार है। गद्यांश में अध्ययन के किस विषय का उल्लेख नहीं हुआ है?
  1. Aदर्शन
  2. Bविज्ञान
  3. Cइतिहास
  4. Dसाहित्य
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Correct answer: (C) इतिहास

Explanation

गद्यांश में साहित्य, संगीत, विज्ञान, धर्म, दर्शन और मनोरंजन का नाम है, पर इतिहास का उल्लेख नहीं है।

Q304CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे सही उत्तर वाले विकल्प का चयन करिए। ‘अध्ययन’ शब्द का सामान्य अर्थ है – पढ़ना और इसका विशिष्ट अर्थ है – पढ़ने के साथ गुनना अर्थात् हम जो कुछ भी पढ़ते हैं, उस पर गहराई से चिंतन-मनन करना। अध्ययन के द्वारा अपनी रुचियों को विस्तृत, जागृत और परिष्कृत किया जा सकता है, तरह-तरह के विषयों का ज्ञान सहजता से प्राप्त किया जा सकता है, अंधविश्वासों और गलत धारणाओं को मिटाया जा सकता है, आत्मिक शान्ति का लाभ भी पाया जा सकता है। अध्ययन का तात्पर्य पुस्तक में छपी सूचना पढ़कर याद कर लेना नहीं है। अध्ययन के लिए असीमित विषयक्षेत्र हैं – साहित्य, संगीत, विज्ञान, धर्म, दर्शन, मनोरंजन आदि। अध्ययन ने नए क्षितिज का उद्घाटन किया है। यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि अध्ययन – मनन प्रत्येक क्षेत्र की मूल समृद्धि का आधार है। ‘अध्ययन ने नए क्षितिज का उद्घाटन किया है।’ वाक्य से आशय है :
  1. Aअध्ययन से विकास का नया क्षेत्र सामने आया है।
  2. Bअध्ययन कल्पनाशीलता को पुष्ट करता है।
  3. Cनई-नई पुस्तकों का विमोचन होना ज़रूरी है।
  4. Dअध्ययन से अपार संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।
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Correct answer: (D) अध्ययन से अपार संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।

Explanation

‘नए क्षितिज का उद्घाटन’ का अर्थ है नई संभावनाओं के रास्ते खुलना; अतः अध्ययन से अपार संभावनाओं के द्वार खुलते हैं।

Q305CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे सही उत्तर वाले विकल्प का चयन करिए। ‘अध्ययन’ शब्द का सामान्य अर्थ है – पढ़ना और इसका विशिष्ट अर्थ है – पढ़ने के साथ गुनना अर्थात् हम जो कुछ भी पढ़ते हैं, उस पर गहराई से चिंतन-मनन करना। अध्ययन के द्वारा अपनी रुचियों को विस्तृत, जागृत और परिष्कृत किया जा सकता है, तरह-तरह के विषयों का ज्ञान सहजता से प्राप्त किया जा सकता है, अंधविश्वासों और गलत धारणाओं को मिटाया जा सकता है, आत्मिक शान्ति का लाभ भी पाया जा सकता है। अध्ययन का तात्पर्य पुस्तक में छपी सूचना पढ़कर याद कर लेना नहीं है। अध्ययन के लिए असीमित विषयक्षेत्र हैं – साहित्य, संगीत, विज्ञान, धर्म, दर्शन, मनोरंजन आदि। अध्ययन ने नए क्षितिज का उद्घाटन किया है। यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि अध्ययन – मनन प्रत्येक क्षेत्र की मूल समृद्धि का आधार है। ‘समृद्धि’ का अर्थ है -
  1. Aसंपन्नता
  2. Bसमिधा
  3. Cसम्राज्ञी
  4. Dसम्यक्
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Correct answer: (A) संपन्नता

Explanation

‘समृद्धि’ का अर्थ है धन-धान्य और साधनों से भरपूर होना, अर्थात् संपन्नता।

Q306CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे सही उत्तर वाले विकल्प का चयन करिए। ‘अध्ययन’ शब्द का सामान्य अर्थ है – पढ़ना और इसका विशिष्ट अर्थ है – पढ़ने के साथ गुनना अर्थात् हम जो कुछ भी पढ़ते हैं, उस पर गहराई से चिंतन-मनन करना। अध्ययन के द्वारा अपनी रुचियों को विस्तृत, जागृत और परिष्कृत किया जा सकता है, तरह-तरह के विषयों का ज्ञान सहजता से प्राप्त किया जा सकता है, अंधविश्वासों और गलत धारणाओं को मिटाया जा सकता है, आत्मिक शान्ति का लाभ भी पाया जा सकता है। अध्ययन का तात्पर्य पुस्तक में छपी सूचना पढ़कर याद कर लेना नहीं है। अध्ययन के लिए असीमित विषयक्षेत्र हैं – साहित्य, संगीत, विज्ञान, धर्म, दर्शन, मनोरंजन आदि। अध्ययन ने नए क्षितिज का उद्घाटन किया है। यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि अध्ययन – मनन प्रत्येक क्षेत्र की मूल समृद्धि का आधार है। अध्ययन के द्वारा क्या प्राप्त किया जा सकता है?
  1. Aरुचियों का विस्तारण।
  2. Bकार्यों का निरीक्षण।
  3. Cसूचनाओं का संग्रहण।
  4. Dअंधविश्वासों का अधिग्रहण।
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Correct answer: (A) रुचियों का विस्तारण।

Explanation

गद्यांश के अनुसार अध्ययन से रुचियों को विस्तृत, जागृत और परिष्कृत किया जा सकता है, इसलिए रुचियों का विस्तारण सही उत्तर है।

Q307CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे सही उत्तर वाले विकल्प का चयन करिए। ‘अध्ययन’ शब्द का सामान्य अर्थ है – पढ़ना और इसका विशिष्ट अर्थ है – पढ़ने के साथ गुनना अर्थात् हम जो कुछ भी पढ़ते हैं, उस पर गहराई से चिंतन-मनन करना। अध्ययन के द्वारा अपनी रुचियों को विस्तृत, जागृत और परिष्कृत किया जा सकता है, तरह-तरह के विषयों का ज्ञान सहजता से प्राप्त किया जा सकता है, अंधविश्वासों और गलत धारणाओं को मिटाया जा सकता है, आत्मिक शान्ति का लाभ भी पाया जा सकता है। अध्ययन का तात्पर्य पुस्तक में छपी सूचना पढ़कर याद कर लेना नहीं है। अध्ययन के लिए असीमित विषयक्षेत्र हैं – साहित्य, संगीत, विज्ञान, धर्म, दर्शन, मनोरंजन आदि। अध्ययन ने नए क्षितिज का उद्घाटन किया है। यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि अध्ययन – मनन प्रत्येक क्षेत्र की मूल समृद्धि का आधार है। उपसर्ग की दृष्टि से ‘समालोचना’ का विग्रह है -
  1. Aसम + आलोचना
  2. Bसमा + लोचना
  3. Cसम् + आलोचना
  4. Dस + म + आलोचना
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Correct answer: (C) सम् + आलोचना

Explanation

‘समालोचना’ में ‘सम्’ उपसर्ग है: सम् + आलोचना = समालोचना (म् और आ मिलकर ‘मा’ बनाते हैं)।

Q308CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर सबसे सही उत्तर वाले विकल्प का चयन करिए। ‘अध्ययन’ शब्द का सामान्य अर्थ है – पढ़ना और इसका विशिष्ट अर्थ है – पढ़ने के साथ गुनना अर्थात् हम जो कुछ भी पढ़ते हैं, उस पर गहराई से चिंतन-मनन करना। अध्ययन के द्वारा अपनी रुचियों को विस्तृत, जागृत और परिष्कृत किया जा सकता है, तरह-तरह के विषयों का ज्ञान सहजता से प्राप्त किया जा सकता है, अंधविश्वासों और गलत धारणाओं को मिटाया जा सकता है, आत्मिक शान्ति का लाभ भी पाया जा सकता है। अध्ययन का तात्पर्य पुस्तक में छपी सूचना पढ़कर याद कर लेना नहीं है। अध्ययन के लिए असीमित विषयक्षेत्र हैं – साहित्य, संगीत, विज्ञान, धर्म, दर्शन, मनोरंजन आदि। अध्ययन ने नए क्षितिज का उद्घाटन किया है। यह कहना अतिश्योक्ति न होगा कि अध्ययन – मनन प्रत्येक क्षेत्र की मूल समृद्धि का आधार है। ‘पढ़ने के साथ गुनना’ का क्या तात्पर्य है?
  1. Aपढ़े गए पर वक्तव्य तैयार करना।
  2. Bपढ़कर पुनर्लेखन करना।
  3. Cपढ़कर याद कर लेना।
  4. Dपढ़े गए पर चिंतन मनन करना।
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Correct answer: (D) पढ़े गए पर चिंतन मनन करना।

Explanation

गद्यांश में ही बताया गया है कि गुनने का अर्थ है पढ़ी हुई बात पर गहराई से चिंतन-मनन करना।

Q309CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। विज्ञापन का सामान्य अर्थ किसी प्रकार की नयी सूचना को जन-जन तक पहुँचाना है। यह सूचना सरकार द्वारा दी जाने वाली घोषणाएँ भी हो सकती हैं या फिर किसी नव शोधित, उत्पादित या निर्मित वस्तु के प्रचार से भी संबंधित हो सकती है। सामान्य-विशेष सभी तक विज्ञापित करने का काम प्राचीन काल में भी होता था और आज के युग में तो इसकी अनिवार्यता बढ़ती ही जा रही है। ढिंढोरा पीटना, मुनादी करना ये सब विज्ञापन के ही रूप थे। पुस्तकों के प्रकाशन व रेडियो के आविष्कार के साथ विज्ञापन के क्षेत्र में क्रान्ति आई। सभी प्रकार के सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन, नौकरी, उपलब्धि, यहाँ तक की वर-वधु की खोज यह भी विज्ञापन के क्षेत्र में आ गए हैं। यह कला के साथ-साथ एक व्यवसाय भी बन गया है। पत्र-पत्रिका, रेडियो, टी.वी., फिल्में ये सब विज्ञापन के सशक्त साधन हैं। ‘प्राचीन’ का विलोम है :
  1. Aअधीन
  2. Bभविष्य
  3. Cपरंपरागत
  4. Dनवीन
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Correct answer: (D) नवीन

Explanation

‘प्राचीन’ का अर्थ पुराना है, इसलिए इसका विलोम ‘नवीन’ (नया) है।

Q310CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। विज्ञापन का सामान्य अर्थ किसी प्रकार की नयी सूचना को जन-जन तक पहुँचाना है। यह सूचना सरकार द्वारा दी जाने वाली घोषणाएँ भी हो सकती हैं या फिर किसी नव शोधित, उत्पादित या निर्मित वस्तु के प्रचार से भी संबंधित हो सकती है। सामान्य-विशेष सभी तक विज्ञापित करने का काम प्राचीन काल में भी होता था और आज के युग में तो इसकी अनिवार्यता बढ़ती ही जा रही है। ढिंढोरा पीटना, मुनादी करना ये सब विज्ञापन के ही रूप थे। पुस्तकों के प्रकाशन व रेडियो के आविष्कार के साथ विज्ञापन के क्षेत्र में क्रान्ति आई। सभी प्रकार के सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन, नौकरी, उपलब्धि, यहाँ तक की वर-वधु की खोज यह भी विज्ञापन के क्षेत्र में आ गए हैं। यह कला के साथ-साथ एक व्यवसाय भी बन गया है। पत्र-पत्रिका, रेडियो, टी.वी., फिल्में ये सब विज्ञापन के सशक्त साधन हैं। गद्यांश के अनुसार कौन-सा वाक्य सही है?
  1. Aविज्ञापन की आवश्यकता घटती जा रही है।
  2. Bसांस्कृतिक आयोजन विज्ञापन की दुनिया से अछूते हैं।
  3. Cविज्ञापन एक आधुनिक कला है।
  4. Dयह कला भी है और एक व्यवसाय भी है।
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Correct answer: (D) यह कला भी है और एक व्यवसाय भी है।

Explanation

गद्यांश में लिखा है कि विज्ञापन कला के साथ-साथ एक व्यवसाय भी बन गया है; बाकी तीनों कथन गद्यांश के विपरीत हैं।

Q311CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। विज्ञापन का सामान्य अर्थ किसी प्रकार की नयी सूचना को जन-जन तक पहुँचाना है। यह सूचना सरकार द्वारा दी जाने वाली घोषणाएँ भी हो सकती हैं या फिर किसी नव शोधित, उत्पादित या निर्मित वस्तु के प्रचार से भी संबंधित हो सकती है। सामान्य-विशेष सभी तक विज्ञापित करने का काम प्राचीन काल में भी होता था और आज के युग में तो इसकी अनिवार्यता बढ़ती ही जा रही है। ढिंढोरा पीटना, मुनादी करना ये सब विज्ञापन के ही रूप थे। पुस्तकों के प्रकाशन व रेडियो के आविष्कार के साथ विज्ञापन के क्षेत्र में क्रान्ति आई। सभी प्रकार के सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन, नौकरी, उपलब्धि, यहाँ तक की वर-वधु की खोज यह भी विज्ञापन के क्षेत्र में आ गए हैं। यह कला के साथ-साथ एक व्यवसाय भी बन गया है। पत्र-पत्रिका, रेडियो, टी.वी., फिल्में ये सब विज्ञापन के सशक्त साधन हैं। प्राचीन काल में विज्ञापन का क्या स्वरूप था?
  1. Aपत्र-पत्रिकाओं में विज्ञापन छपवाना।
  2. Bमुनादी द्वारा विज्ञापन करवाना।
  3. Cटी.वी. द्वारा विज्ञापन प्रसारित करवाना।
  4. Dरेडियो द्वारा विज्ञापन प्रसारित करवाना।
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Correct answer: (B) मुनादी द्वारा विज्ञापन करवाना।

Explanation

गद्यांश के अनुसार प्राचीन काल में ढिंढोरा पीटना और मुनादी करना ही विज्ञापन के रूप थे; पत्र-पत्रिका, रेडियो और टी.वी. आधुनिक साधन हैं।

Q312CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। विज्ञापन का सामान्य अर्थ किसी प्रकार की नयी सूचना को जन-जन तक पहुँचाना है। यह सूचना सरकार द्वारा दी जाने वाली घोषणाएँ भी हो सकती हैं या फिर किसी नव शोधित, उत्पादित या निर्मित वस्तु के प्रचार से भी संबंधित हो सकती है। सामान्य-विशेष सभी तक विज्ञापित करने का काम प्राचीन काल में भी होता था और आज के युग में तो इसकी अनिवार्यता बढ़ती ही जा रही है। ढिंढोरा पीटना, मुनादी करना ये सब विज्ञापन के ही रूप थे। पुस्तकों के प्रकाशन व रेडियो के आविष्कार के साथ विज्ञापन के क्षेत्र में क्रान्ति आई। सभी प्रकार के सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन, नौकरी, उपलब्धि, यहाँ तक की वर-वधु की खोज यह भी विज्ञापन के क्षेत्र में आ गए हैं। यह कला के साथ-साथ एक व्यवसाय भी बन गया है। पत्र-पत्रिका, रेडियो, टी.वी., फिल्में ये सब विज्ञापन के सशक्त साधन हैं। ‘विज्ञापन के क्षेत्र में क्रान्ति आई।’ वाक्य से आशय है -
  1. Aविज्ञापन का विषय-क्षेत्र घट रहा है।
  2. Bविज्ञापन की सार्थकता बढ़ गयी है।
  3. Cविज्ञापन के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है।
  4. Dविज्ञापन से लोगों को जानकारी नहीं पहुँच रही है।
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Correct answer: (C) विज्ञापन के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है।

Explanation

‘क्रान्ति आना’ का अर्थ है बहुत बड़ा और अचानक बदलाव होना, अर्थात् विज्ञापन के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ।

Q313CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। विज्ञापन का सामान्य अर्थ किसी प्रकार की नयी सूचना को जन-जन तक पहुँचाना है। यह सूचना सरकार द्वारा दी जाने वाली घोषणाएँ भी हो सकती हैं या फिर किसी नव शोधित, उत्पादित या निर्मित वस्तु के प्रचार से भी संबंधित हो सकती है। सामान्य-विशेष सभी तक विज्ञापित करने का काम प्राचीन काल में भी होता था और आज के युग में तो इसकी अनिवार्यता बढ़ती ही जा रही है। ढिंढोरा पीटना, मुनादी करना ये सब विज्ञापन के ही रूप थे। पुस्तकों के प्रकाशन व रेडियो के आविष्कार के साथ विज्ञापन के क्षेत्र में क्रान्ति आई। सभी प्रकार के सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन, नौकरी, उपलब्धि, यहाँ तक की वर-वधु की खोज यह भी विज्ञापन के क्षेत्र में आ गए हैं। यह कला के साथ-साथ एक व्यवसाय भी बन गया है। पत्र-पत्रिका, रेडियो, टी.वी., फिल्में ये सब विज्ञापन के सशक्त साधन हैं। विज्ञापन का सामान्य अर्थ क्या है?
  1. Aकेवल सामान्य लोगों को जानकारी देना।
  2. Bसभी लोगों को भ्रमित करना।
  3. Cलोगों तक सूचनाएँ पहुँचाना।
  4. Dकेवल विशिष्ट लोगों को संदेश देना।
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Correct answer: (C) लोगों तक सूचनाएँ पहुँचाना।

Explanation

गद्यांश की पहली पंक्ति के अनुसार विज्ञापन का सामान्य अर्थ नई सूचना को जन-जन तक पहुँचाना है।

Q314CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। विज्ञापन का सामान्य अर्थ किसी प्रकार की नयी सूचना को जन-जन तक पहुँचाना है। यह सूचना सरकार द्वारा दी जाने वाली घोषणाएँ भी हो सकती हैं या फिर किसी नव शोधित, उत्पादित या निर्मित वस्तु के प्रचार से भी संबंधित हो सकती है। सामान्य-विशेष सभी तक विज्ञापित करने का काम प्राचीन काल में भी होता था और आज के युग में तो इसकी अनिवार्यता बढ़ती ही जा रही है। ढिंढोरा पीटना, मुनादी करना ये सब विज्ञापन के ही रूप थे। पुस्तकों के प्रकाशन व रेडियो के आविष्कार के साथ विज्ञापन के क्षेत्र में क्रान्ति आई। सभी प्रकार के सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन, नौकरी, उपलब्धि, यहाँ तक की वर-वधु की खोज यह भी विज्ञापन के क्षेत्र में आ गए हैं। यह कला के साथ-साथ एक व्यवसाय भी बन गया है। पत्र-पत्रिका, रेडियो, टी.वी., फिल्में ये सब विज्ञापन के सशक्त साधन हैं। प्रत्यय की दृष्टि से कौन-सा शब्द भिन्न है?
  1. Aललित
  2. Bशोधित
  3. Cउत्पादित
  4. Dनिर्मित
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Correct answer: (A) ललित

Explanation

शोधित, उत्पादित और निर्मित में ‘इत’ प्रत्यय जुड़ा है (शोध + इत, उत्पाद + इत, निर्माण से निर्मित), जबकि ‘ललित’ स्वयं में मूल शब्द है, इसलिए वह भिन्न है।

Q315CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। विज्ञापन का सामान्य अर्थ किसी प्रकार की नयी सूचना को जन-जन तक पहुँचाना है। यह सूचना सरकार द्वारा दी जाने वाली घोषणाएँ भी हो सकती हैं या फिर किसी नव शोधित, उत्पादित या निर्मित वस्तु के प्रचार से भी संबंधित हो सकती है। सामान्य-विशेष सभी तक विज्ञापित करने का काम प्राचीन काल में भी होता था और आज के युग में तो इसकी अनिवार्यता बढ़ती ही जा रही है। ढिंढोरा पीटना, मुनादी करना ये सब विज्ञापन के ही रूप थे। पुस्तकों के प्रकाशन व रेडियो के आविष्कार के साथ विज्ञापन के क्षेत्र में क्रान्ति आई। सभी प्रकार के सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन, नौकरी, उपलब्धि, यहाँ तक की वर-वधु की खोज यह भी विज्ञापन के क्षेत्र में आ गए हैं। यह कला के साथ-साथ एक व्यवसाय भी बन गया है। पत्र-पत्रिका, रेडियो, टी.वी., फिल्में ये सब विज्ञापन के सशक्त साधन हैं। गद्यांश में विज्ञापन के किस स्वरूप का उल्लेख नहीं हुआ है?
  1. Aभित्ति लेखन
  2. Bरेडियो
  3. Cपत्र-पत्रिका
  4. Dटी.वी.
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Correct answer: (A) भित्ति लेखन

Explanation

गद्यांश में रेडियो, पत्र-पत्रिका, टी.वी. और फिल्मों का उल्लेख है, पर भित्ति लेखन (दीवार पर लिखना) का नहीं।

Q316CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
सभी शिक्षार्थी विद्यालय में अपनी शिक्षा मातृभाषा में सीखते हैं और जैसे-जैसे वे अगली कक्षाओं में जाते हैं, बहुत सी भाषाएँ सीखते चलते हैं। ‘शिक्षा में भाषा’ नीति के अनुसार इसे क्या कहेंगे?
  1. Aभाषा शिक्षा की नींव के रूप में मातृभाषा
  2. Bमातृभाषा आधारित बहुभाषावाद
  3. Cसंस्कृति आधारित शिक्षा में भाषा नीति
  4. Dविद्यालयी शिक्षा के लिए त्रिभाषा सूत्र
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Correct answer: (B) मातृभाषा आधारित बहुभाषावाद

Explanation

मातृभाषा से शुरुआत करके धीरे-धीरे कई भाषाएँ जोड़ते जाना ‘मातृभाषा आधारित बहुभाषावाद’ (MTB-MLE) कहलाता है, जिसकी सिफ़ारिश भाषा नीति करती है।

Q317CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
उत्पादक शब्द संपदा क्या है?
  1. Aवे शब्द जिन्हें हम पहचान नहीं पाते हैं।
  2. Bवे शब्द जिनका हम सुनने के दौरान कभी-कभी प्रत्यास्मरण करते हैं।
  3. Cवे शब्द जिनका प्रयोग हम लेखन और बोलने में करते हैं।
  4. Dवे शब्द जिन्हें हम सुनने पर पहचान पाते हैं।
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Correct answer: (C) वे शब्द जिनका प्रयोग हम लेखन और बोलने में करते हैं।

Explanation

उत्पादक (सक्रिय) शब्द संपदा वे शब्द हैं जिन्हें हम स्वयं बोलने और लिखने में प्रयोग करते हैं; केवल पहचाने जाने वाले शब्द ग्रहणशील शब्द संपदा कहलाते हैं।

Q318CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
वह भाषा जो कक्षा में विविध प्रकार के विषय क्षेत्रों में प्रयुक्त की जाती है, अध्यापक उसे विद्यार्थियों को प्रस्तुत करते हैं और उसमें अन्तःक्रिया करते हैं। इस भाषा कौशल को क्या कहेंगे?
  1. Aभाषा प्रयुक्ति
  2. Bसंज्ञानात्मक अकादमिक भाषायी निपुणता
  3. Cबुनियादी अन्तःवैयक्तिक संप्रेषण कौशल
  4. Dजीवन के वास्तविक उद्देश्यों के लिए भाषा
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Correct answer: (B) संज्ञानात्मक अकादमिक भाषायी निपुणता

Explanation

विषयों की पढ़ाई में प्रयुक्त औपचारिक, अमूर्त भाषा कमिन्स के अनुसार संज्ञानात्मक अकादमिक भाषायी निपुणता (CALP) कहलाती है; रोज़मर्रा की बातचीत वाली भाषा BICS है।

Q319CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
नियम उन्मुखी भाषा निवेश से क्या तात्पर्य है?
  1. Aवे निवेश जो सूचनाओं पर बल देते हैं।
  2. Bलिखना सीखने के लिए निवेश की संभाव्यता।
  3. Cभाषा सीखने के लिए निवेश का अर्थ
  4. Dशब्द संपदा, उच्चारण और व्याकरण का प्रयोग
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Correct answer: (D) शब्द संपदा, उच्चारण और व्याकरण का प्रयोग

Explanation

रूप/नियम उन्मुखी निवेश भाषा के ढाँचे पर ध्यान देते हैं, यानी शब्द संपदा, उच्चारण और व्याकरण; जबकि अर्थ उन्मुखी निवेश सूचना पर बल देते हैं।

Q320CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
निम्नलिखित कथन में निहित व्याकरणिक ज्ञान के प्रकार से क्या तात्पर्य है? ‘नियमों के बारे में ज्ञान, उनका वर्णन करना और सीमित अभ्यास में उनका प्रयोग करना।’
  1. Aप्रक्रियात्मक ज्ञान
  2. Bघोषणात्मक ज्ञान
  3. Cदक्षता
  4. Dअधिसंज्ञानात्मक ज्ञान
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Correct answer: (B) घोषणात्मक ज्ञान

Explanation

नियमों को जानना और उनका वर्णन कर पाना ‘घोषणात्मक ज्ञान’ (जानना कि क्या है) है; नियमों का सहज प्रयोग प्रक्रियात्मक ज्ञान होता है।

Q321CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
निम्नलिखित कार्य को क्या कहा जाएगा? एक संक्षिप्त पाठ्यवस्तु के छोटे 2 खंड या प्रत्येक एक पंक्ति छोड़कर दूसरी पंक्ति शिक्षार्थियों को दो-दो के जोड़ों में दी जाती है। प्रत्येक शिक्षार्थी ने इसे अपने साथी को पढ़कर सुनाना है (डिक्टेट) और दूसरे ने लिखना है। फिर इस प्रक्रिया का विपरीतकरण होता है, दूसरा व्यक्ति सुनता है और पहला लिखता है और बाद में पाठ्य सामग्री को अन्तिम स्वरूप देने के लिए दोनों साथ मिलकर कार्य करते हैं।
  1. Aपारस्परिक श्रुतलेख
  2. Bव्याकरण श्रुतलेख
  3. Cप्रतिलेखन (ट्रांसक्रियेशन)
  4. Dअनुच्छेद श्रुतलेख
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Correct answer: (A) पारस्परिक श्रुतलेख

Explanation

इसमें दो साथी बारी-बारी से एक-दूसरे को पाठ बोलकर लिखवाते हैं और फिर मिलकर पूरा पाठ बनाते हैं; इसे पारस्परिक श्रुतलेख (म्यूचुअल डिक्टेशन) कहते हैं।

Q322CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
भाषा शिक्षण में ‘सामग्री को शिक्षणशास्त्रीय रूप से अनुभव कर पाने’ से क्या तात्पर्य है?
  1. Aअध्यापक को अपनी कक्षा के लिए शिक्षणशास्त्र समझने के समर्थ बनाना।
  2. Bकक्षा में प्रयोग के लिए विभिन्न प्रकार की शिक्षणशास्त्रीय युक्तियों की सूची बनाना।
  3. Cभाषा शिक्षणशास्त्र को समुन्नत करने के लिए गतिविधियों और कार्यों को शामिल करना।
  4. Dअध्यापक को शिक्षणशास्त्र स्वीकार करने के समर्थ बनाने हेतु सामग्री को शिक्षणशास्त्र में शामिल करना।
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Correct answer: (D) अध्यापक को शिक्षणशास्त्र स्वीकार करने के समर्थ बनाने हेतु सामग्री को शिक्षणशास्त्र में शामिल करना।

Explanation

सामग्री का शिक्षणशास्त्रीय अनुभव तब होता है जब सामग्री में ही शिक्षणशास्त्र समाया हो, ताकि उसे प्रयोग करते हुए अध्यापक उस शिक्षणशास्त्र को समझे और अपनाए।

Q323CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
निम्नलिखित में से कौन-सा अधिगम के लिए आकलन है? (रेखांकित शब्द: अधिगम के लिए)
  1. Aएक अवस्था विशेष में शिक्षार्थियों की उपलब्धि को निदानात्मक रूप से राज्य के द्वारा किया जाने वाला आकलन।
  2. Bप्रत्येक टर्म के अन्त में विद्यार्थियों की प्रगति का पर्यवेक्षण करने के लिए अभिकल्पित आकलन।
  3. Cवह आकलन जिसकी अभिकल्पना शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों की प्रगति का पर्यवेक्षण करने और उनमें सुधार लाने के लिए की जाती है।
  4. Dवह आकलन जिसकी अभिकल्पना वर्ष के अन्त में विद्यार्थियों की प्रगति जानने और उन्हें अगली कक्षा में भेजने के लिए की जाती है।
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Correct answer: (C) वह आकलन जिसकी अभिकल्पना शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों की प्रगति का पर्यवेक्षण करने और उनमें सुधार लाने के लिए की जाती है।

Explanation

अधिगम के लिए आकलन (रचनात्मक आकलन) पढ़ाई के दौरान लगातार होता है ताकि प्रगति देखकर सुधार किया जा सके; सत्र या वर्ष के अंत का आकलन ‘अधिगम का आकलन’ है।

Q324CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
आप निम्नलिखित में से किस कथन की काव्य शिक्षण अधिगम के लिए अनुशंसा नहीं करेंगे?
  1. Aकाव्य आनन्द के लिए है।
  2. Bकाव्य व्याकरण शिक्षण के लिए है।
  3. Cकाव्य शिक्षार्थियों की कल्पनाशीलता का अभ्यास करने के लिए है।
  4. Dकाव्य भाषा के साथ कार्य करने के लिए है।
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Correct answer: (B) काव्य व्याकरण शिक्षण के लिए है।

Explanation

कविता का उद्देश्य आनंद, कल्पनाशीलता और भाषा से खेलना है; कविता को व्याकरण सिखाने का साधन बनाना उचित नहीं है।

Q325CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
निम्नलिखित कार्य में क्या शामिल है? शिक्षार्थियों को एक होटल की भोजन तालिका (मैन्यु कार्ड) दिया जाता है। उन्हें ₹1800 की राशि के अन्तर्गत चार लोगों के लिए भोजन के लिए कहना है। एक शाकाहारी है, दूसरे को मशरूम से एलर्जी है। उन्होंने इसमें से ₹70 वापसी यात्रा के लिए भी रखने है। शिक्षार्थी भोजन संबंधी अपनी प्राथमिकताएँ और वापसी यात्रा हेतु रखी जाने वाली राशि के बारे में बात कर रहे हैं।
  1. Aसंज्ञानात्मक युक्तियाँ
  2. Bप्रस्तुति - अभ्यास - उत्पाद (भाषा)
  3. Cउच्च स्तरीय चिंतन कौशल
  4. Dअध्ययन संलग्नता - विमर्श - प्रयोग (भाषा)
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Correct answer: (D) अध्ययन संलग्नता - विमर्श - प्रयोग (भाषा)

Explanation

यह वास्तविक जीवन जैसा कार्य है जिसमें शिक्षार्थी पहले विषय से जुड़ते हैं, फिर आपस में विमर्श करते हैं और वास्तविक उद्देश्य के लिए भाषा का प्रयोग करते हैं; यही ‘संलग्नता - विमर्श - प्रयोग’ (ESA) का क्रम है, न कि नियंत्रित PPP अभ्यास।

Q326CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
भाषा अर्जन और भाषा अधिगम की सहजात परिकल्पना के बारे में कौन सा सही है?
  1. Aभाषा संकाय गंभीर अभ्यास और ड्रिल के माध्यम से बच्चों को भाषा उत्पन्न करने का गुण प्रदान करती है।
  2. Bभाषा को उत्पन्न करने और भाषा अर्जन हेतु भाषा संकाय बच्चों की स्थायी निधि है (उन्हें सम्पन्न बनाती है)।
  3. Cयह अभिभावकों, सहपाठियों और बच्चों के नज़दीक रहने वालों के प्रयास हैं और साथ-साथ भाषा अर्जन के लिए उत्तरदायी परिवेश है।
  4. Dभाषा केवल मनुष्य की अनूठी विशेषता है और केवल मनुष्य ही भाषा बोल सकते हैं।
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Correct answer: (B) भाषा को उत्पन्न करने और भाषा अर्जन हेतु भाषा संकाय बच्चों की स्थायी निधि है (उन्हें सम्पन्न बनाती है)।

Explanation

चॉम्स्की की सहजात परिकल्पना के अनुसार हर बच्चा जन्म से भाषा अर्जन की क्षमता (भाषा अर्जन उपकरण/भाषा संकाय) लेकर आता है; यही बच्चों की स्थायी निधि है।

Q327CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
निम्नलिखित में से कौन-सी गतिविधि बॉटम-अप श्रवण गतिविधि है?
  1. Aकिसी के द्वारा सुनते समय गड्मड् (जम्बल्ड) शब्दों को वाक्यों में पुनःव्यवस्थित करना।
  2. Bकविता गाना, तुरन्ता (एक्सटम्पोर) व्याख्यान, वादविवाद और चर्चाएँ।
  3. Cश्रुतलेख, क्लोज श्रवण, बहुवैकल्पिक प्रश्नों का प्रयोग, सकारात्मक और नकारात्मक कथनों की पहचान करना।
  4. Dसारांशीकरण, समग्रसंदेश का श्रवण और पृष्ठभूमि संबंधी ज्ञान का प्रयोग करना।
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Correct answer: (C) श्रुतलेख, क्लोज श्रवण, बहुवैकल्पिक प्रश्नों का प्रयोग, सकारात्मक और नकारात्मक कथनों की पहचान करना।

Explanation

बॉटम-अप श्रवण में छोटी इकाइयों (ध्वनि, शब्द, वाक्य) को ध्यान से सुनकर समझा जाता है; श्रुतलेख, क्लोज श्रवण और सही/गलत कथन पहचानना इसके उदाहरण हैं।

Q328CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
अधिगम अर्थ की खोज है। इसलिए अधिगम उन मुद्दों से आरम्भ होना चाहिए जिनमें शिक्षार्थी सक्रिय रूप से अर्थ खोजने की कोशिश कर रहे हैं। इस विचार की अनुशंसा कौन-सा शैक्षिक दर्शन करता है?
  1. Aबहुविध बुद्धि
  2. Bसंरचनावाद
  3. Cव्यवहारवाद
  4. Dरचनावाद
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Correct answer: (D) रचनावाद

Explanation

रचनावाद के अनुसार शिक्षार्थी सक्रिय होकर अपने अनुभवों से स्वयं अर्थ और ज्ञान का निर्माण करता है, इसलिए अधिगम को अर्थ की खोज माना जाता है।

Q329CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
एक अध्यापक कक्षा 8 के शिक्षार्थियों को निम्नलिखित प्रदत्त कार्य देता है। इस प्रकार के लेखन को क्या कहा जाएगा? अपने सहपाठी (जोड़ीदार) के साथ मानस मंथन करो, विचार बिन्दु नोट करो और एक ऐसा लेखा तैयार करो जिसमें इस विषय पर पक्ष और विपक्ष के लिए दो-दो तर्क हों। टॉपिक - “विद्यार्थियों को मुद्रित पाठ्य पुस्तकें देने की आवश्यकता नहीं है।”
  1. Aविमर्शात्मक लेखन
  2. Bवर्णनात्मक लेखन
  3. Cनिज लेखन
  4. Dव्याख्यात्मक लेखन
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Correct answer: (A) विमर्शात्मक लेखन

Explanation

किसी विषय पर पक्ष और विपक्ष दोनों के तर्क देकर लिखना विमर्शात्मक (डिस्कर्सिव) लेखन है।

Q330CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 8 Feb 2026
संध्या मशीन के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए एक आलेख पढ़ती है। उसके इस पठन को क्या कहेंगे?
  1. Aसरसरी तौर पर पठन (स्किमिंग)
  2. Bबारीकी से पठन (स्केनिंग)
  3. Cसरसरी दृष्टि
  4. Dसमीक्षा करना
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Correct answer: (B) बारीकी से पठन (स्केनिंग)

Explanation

कोई विशेष जानकारी खोजने के लिए पाठ को पढ़ना ‘बारीकी से पठन’ (स्कैनिंग) है; पूरा सार जानने के लिए जल्दी-जल्दी पढ़ना स्किमिंग होता है।

Q331CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : यह बात ध्यान देने की है कि ईर्ष्या व्यक्ति-विशेष से होती है। यह नहीं होता कि जिस किसी को ऐश्वर्य, गुण या मन से सम्पन्न देखा उसी से ईर्ष्या हो गई। ईर्ष्या उन्हीं से होती है जिनके विषय में यह धारणा होती है कि लोगों की दृष्टि हमारे साथ-साथ उन पर भी अवश्य पड़ती होगी। अपने से दूरस्थ होने के कारण अपने साथ-साथ जिन पर लोगों का ध्यान जाने का निश्चय नहीं होता उनके प्रति ईर्ष्या नहीं उत्पन्न होती। काशी में रहने वाली किसी धानी को अमेरिका के किसी धानी की बात सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। हिन्दी के किसी कवि को इटली के किसी कवि का महत्त्व सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। संबंधियों, बालसखाओं, सहपाठियों और पड़ोसियों के बीच ईर्ष्या का विकास अधिक देखा जाता है। लड़कपन से जो आदमी एक साथ उठते-बैठते देखे गए हैं उन्हीं में से कोई एक-दूसरे की बढ़ती से जलता हुआ भी पाया गया है। यदि दो साथियों में से कोई किसी अच्छे पद पर पहुँच गया तो वह इस उद्योग में देखा जाता है कि दूसरा किसी अच्छे पद पर न पहुँचने पाए। प्रायः अपनी उन्नति के गुप्त बाधकों का पता लगाते-लगाते लोग अपने किसी बड़े पुराने मित्र तक पहुँच जाते हैं। जिस समय संसर्ग सूत्र में बाँधकर हम औरों को अपने साथ एक पंक्ति में खड़ा करते हैं उस समय सहानुभूति, सहायता आदि की संभावना प्रतिष्ठित होने के साथ ही साथ ईर्ष्या और द्वेष की संभावना की नींव भी पड़ जाती है। अपने किसी विधान से हम भलाई ही भलाई की संभावना का सूत्रपात करें और इस प्रकार भविष्य के अनिश्चय में बाधा डालें, यह कभी हो ही नहीं सकता। भविष्य की अनिश्चयात्मकता अटल और अजेय है। अपनी लाख विद्या-बुद्धि से भी हम उसे बिलकुल हटा नहीं सकते। अब ध्यान देने की बात यह निकली कि ईर्ष्या के संचार के लिए ईर्ष्या करने वाले और ईर्ष्या के पात्र के अतिरिक्त स्थिति पर ध्यान देने वाले समाज की भी आवश्यकता है। इसी समाज की धारणा पर प्रभाव डालने के लिए ही ईर्ष्या की जाती है; ऐश्वर्य, गुण या मन का गुप्त रूप से बिना किसी समुदाय को विदित कराए, सुख या संतोष भोगने के लिए नहीं। हम ईर्ष्या किससे करते हैं?
  1. Aजिन्हें लोग हमारे साथ खेलता देखते हैं
  2. Bजिन्हें लोग हमारे साथ पढ़ता देखते हैं
  3. Cजिन पर लोगों की हमारे साथ दृष्टि पड़ती है
  4. Dजिन्हें लोग हमारे साथ नौकरी करते देखते हैं
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Correct answer: (C) जिन पर लोगों की हमारे साथ दृष्टि पड़ती है

Explanation

गद्यांश के अनुसार ईर्ष्या उन्हीं से होती है जिनके बारे में हमें लगता है कि लोगों की दृष्टि हमारे साथ-साथ उन पर भी अवश्य पड़ती होगी। इसलिए विकल्प (3) सही है।

Q332CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : यह बात ध्यान देने की है कि ईर्ष्या व्यक्ति-विशेष से होती है। यह नहीं होता कि जिस किसी को ऐश्वर्य, गुण या मन से सम्पन्न देखा उसी से ईर्ष्या हो गई। ईर्ष्या उन्हीं से होती है जिनके विषय में यह धारणा होती है कि लोगों की दृष्टि हमारे साथ-साथ उन पर भी अवश्य पड़ती होगी। अपने से दूरस्थ होने के कारण अपने साथ-साथ जिन पर लोगों का ध्यान जाने का निश्चय नहीं होता उनके प्रति ईर्ष्या नहीं उत्पन्न होती। काशी में रहने वाली किसी धानी को अमेरिका के किसी धानी की बात सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। हिन्दी के किसी कवि को इटली के किसी कवि का महत्त्व सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। संबंधियों, बालसखाओं, सहपाठियों और पड़ोसियों के बीच ईर्ष्या का विकास अधिक देखा जाता है। लड़कपन से जो आदमी एक साथ उठते-बैठते देखे गए हैं उन्हीं में से कोई एक-दूसरे की बढ़ती से जलता हुआ भी पाया गया है। यदि दो साथियों में से कोई किसी अच्छे पद पर पहुँच गया तो वह इस उद्योग में देखा जाता है कि दूसरा किसी अच्छे पद पर न पहुँचने पाए। प्रायः अपनी उन्नति के गुप्त बाधकों का पता लगाते-लगाते लोग अपने किसी बड़े पुराने मित्र तक पहुँच जाते हैं। जिस समय संसर्ग सूत्र में बाँधकर हम औरों को अपने साथ एक पंक्ति में खड़ा करते हैं उस समय सहानुभूति, सहायता आदि की संभावना प्रतिष्ठित होने के साथ ही साथ ईर्ष्या और द्वेष की संभावना की नींव भी पड़ जाती है। अपने किसी विधान से हम भलाई ही भलाई की संभावना का सूत्रपात करें और इस प्रकार भविष्य के अनिश्चय में बाधा डालें, यह कभी हो ही नहीं सकता। भविष्य की अनिश्चयात्मकता अटल और अजेय है। अपनी लाख विद्या-बुद्धि से भी हम उसे बिलकुल हटा नहीं सकते। अब ध्यान देने की बात यह निकली कि ईर्ष्या के संचार के लिए ईर्ष्या करने वाले और ईर्ष्या के पात्र के अतिरिक्त स्थिति पर ध्यान देने वाले समाज की भी आवश्यकता है। इसी समाज की धारणा पर प्रभाव डालने के लिए ही ईर्ष्या की जाती है; ऐश्वर्य, गुण या मन का गुप्त रूप से बिना किसी समुदाय को विदित कराए, सुख या संतोष भोगने के लिए नहीं। _____ के बीच ईर्ष्या नहीं फूलती-फलती।
  1. Aसहपाठियों
  2. Bपड़ोसियों
  3. Cदूर रहने वालों
  4. Dरिश्तेदारों
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Correct answer: (C) दूर रहने वालों

Explanation

गद्यांश में कहा गया है कि जो लोग हमसे दूर हैं (जैसे अमेरिका का धनी या इटली का कवि) उनसे ईर्ष्या नहीं होती, जबकि संबंधियों, सहपाठियों और पड़ोसियों में ईर्ष्या अधिक बढ़ती है। अतः दूर रहने वालों के बीच ईर्ष्या नहीं फूलती-फलती।

Q333CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : यह बात ध्यान देने की है कि ईर्ष्या व्यक्ति-विशेष से होती है। यह नहीं होता कि जिस किसी को ऐश्वर्य, गुण या मन से सम्पन्न देखा उसी से ईर्ष्या हो गई। ईर्ष्या उन्हीं से होती है जिनके विषय में यह धारणा होती है कि लोगों की दृष्टि हमारे साथ-साथ उन पर भी अवश्य पड़ती होगी। अपने से दूरस्थ होने के कारण अपने साथ-साथ जिन पर लोगों का ध्यान जाने का निश्चय नहीं होता उनके प्रति ईर्ष्या नहीं उत्पन्न होती। काशी में रहने वाली किसी धानी को अमेरिका के किसी धानी की बात सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। हिन्दी के किसी कवि को इटली के किसी कवि का महत्त्व सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। संबंधियों, बालसखाओं, सहपाठियों और पड़ोसियों के बीच ईर्ष्या का विकास अधिक देखा जाता है। लड़कपन से जो आदमी एक साथ उठते-बैठते देखे गए हैं उन्हीं में से कोई एक-दूसरे की बढ़ती से जलता हुआ भी पाया गया है। यदि दो साथियों में से कोई किसी अच्छे पद पर पहुँच गया तो वह इस उद्योग में देखा जाता है कि दूसरा किसी अच्छे पद पर न पहुँचने पाए। प्रायः अपनी उन्नति के गुप्त बाधकों का पता लगाते-लगाते लोग अपने किसी बड़े पुराने मित्र तक पहुँच जाते हैं। जिस समय संसर्ग सूत्र में बाँधकर हम औरों को अपने साथ एक पंक्ति में खड़ा करते हैं उस समय सहानुभूति, सहायता आदि की संभावना प्रतिष्ठित होने के साथ ही साथ ईर्ष्या और द्वेष की संभावना की नींव भी पड़ जाती है। अपने किसी विधान से हम भलाई ही भलाई की संभावना का सूत्रपात करें और इस प्रकार भविष्य के अनिश्चय में बाधा डालें, यह कभी हो ही नहीं सकता। भविष्य की अनिश्चयात्मकता अटल और अजेय है। अपनी लाख विद्या-बुद्धि से भी हम उसे बिलकुल हटा नहीं सकते। अब ध्यान देने की बात यह निकली कि ईर्ष्या के संचार के लिए ईर्ष्या करने वाले और ईर्ष्या के पात्र के अतिरिक्त स्थिति पर ध्यान देने वाले समाज की भी आवश्यकता है। इसी समाज की धारणा पर प्रभाव डालने के लिए ही ईर्ष्या की जाती है; ऐश्वर्य, गुण या मन का गुप्त रूप से बिना किसी समुदाय को विदित कराए, सुख या संतोष भोगने के लिए नहीं। किसी परिचित के प्रतिष्ठित हो जाने से
  1. Aउसके विकास को रोकने का मन करता है
  2. Bहमें कोई फर्क नहीं पड़ता है
  3. Cहम उसे पहले से अधिक इज्जत देते हैं
  4. Dईर्ष्या और द्वेष की नींव पड़ती है
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Correct answer: (D) ईर्ष्या और द्वेष की नींव पड़ती है

Explanation

गद्यांश के अनुसार जब हम दूसरों को अपने साथ एक पंक्ति में खड़ा करते हैं तो सहानुभूति के साथ-साथ ईर्ष्या और द्वेष की संभावना की नींव भी पड़ जाती है। परिचित के प्रतिष्ठित होने पर यही होता है।

Q334CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : यह बात ध्यान देने की है कि ईर्ष्या व्यक्ति-विशेष से होती है। यह नहीं होता कि जिस किसी को ऐश्वर्य, गुण या मन से सम्पन्न देखा उसी से ईर्ष्या हो गई। ईर्ष्या उन्हीं से होती है जिनके विषय में यह धारणा होती है कि लोगों की दृष्टि हमारे साथ-साथ उन पर भी अवश्य पड़ती होगी। अपने से दूरस्थ होने के कारण अपने साथ-साथ जिन पर लोगों का ध्यान जाने का निश्चय नहीं होता उनके प्रति ईर्ष्या नहीं उत्पन्न होती। काशी में रहने वाली किसी धानी को अमेरिका के किसी धानी की बात सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। हिन्दी के किसी कवि को इटली के किसी कवि का महत्त्व सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। संबंधियों, बालसखाओं, सहपाठियों और पड़ोसियों के बीच ईर्ष्या का विकास अधिक देखा जाता है। लड़कपन से जो आदमी एक साथ उठते-बैठते देखे गए हैं उन्हीं में से कोई एक-दूसरे की बढ़ती से जलता हुआ भी पाया गया है। यदि दो साथियों में से कोई किसी अच्छे पद पर पहुँच गया तो वह इस उद्योग में देखा जाता है कि दूसरा किसी अच्छे पद पर न पहुँचने पाए। प्रायः अपनी उन्नति के गुप्त बाधकों का पता लगाते-लगाते लोग अपने किसी बड़े पुराने मित्र तक पहुँच जाते हैं। जिस समय संसर्ग सूत्र में बाँधकर हम औरों को अपने साथ एक पंक्ति में खड़ा करते हैं उस समय सहानुभूति, सहायता आदि की संभावना प्रतिष्ठित होने के साथ ही साथ ईर्ष्या और द्वेष की संभावना की नींव भी पड़ जाती है। अपने किसी विधान से हम भलाई ही भलाई की संभावना का सूत्रपात करें और इस प्रकार भविष्य के अनिश्चय में बाधा डालें, यह कभी हो ही नहीं सकता। भविष्य की अनिश्चयात्मकता अटल और अजेय है। अपनी लाख विद्या-बुद्धि से भी हम उसे बिलकुल हटा नहीं सकते। अब ध्यान देने की बात यह निकली कि ईर्ष्या के संचार के लिए ईर्ष्या करने वाले और ईर्ष्या के पात्र के अतिरिक्त स्थिति पर ध्यान देने वाले समाज की भी आवश्यकता है। इसी समाज की धारणा पर प्रभाव डालने के लिए ही ईर्ष्या की जाती है; ऐश्वर्य, गुण या मन का गुप्त रूप से बिना किसी समुदाय को विदित कराए, सुख या संतोष भोगने के लिए नहीं। ईर्ष्या पैदा करने के लिए आवश्यक नहीं है
  1. Aईर्ष्या करने वाला
  2. Bकिसी का ऐश्वर्य
  3. Cईर्ष्या का पात्र
  4. Dस्थिति पर ध्यान देने वाला समाज
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Correct answer: (B) किसी का ऐश्वर्य

Explanation

गद्यांश के अनुसार ईर्ष्या के लिए तीन चीज़ें आवश्यक हैं: ईर्ष्या करने वाला, ईर्ष्या का पात्र और स्थिति पर ध्यान देने वाला समाज। 'किसी का ऐश्वर्य' इनमें आवश्यक शर्त के रूप में नहीं गिनाया गया है।

Q335CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : यह बात ध्यान देने की है कि ईर्ष्या व्यक्ति-विशेष से होती है। यह नहीं होता कि जिस किसी को ऐश्वर्य, गुण या मन से सम्पन्न देखा उसी से ईर्ष्या हो गई। ईर्ष्या उन्हीं से होती है जिनके विषय में यह धारणा होती है कि लोगों की दृष्टि हमारे साथ-साथ उन पर भी अवश्य पड़ती होगी। अपने से दूरस्थ होने के कारण अपने साथ-साथ जिन पर लोगों का ध्यान जाने का निश्चय नहीं होता उनके प्रति ईर्ष्या नहीं उत्पन्न होती। काशी में रहने वाली किसी धानी को अमेरिका के किसी धानी की बात सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। हिन्दी के किसी कवि को इटली के किसी कवि का महत्त्व सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। संबंधियों, बालसखाओं, सहपाठियों और पड़ोसियों के बीच ईर्ष्या का विकास अधिक देखा जाता है। लड़कपन से जो आदमी एक साथ उठते-बैठते देखे गए हैं उन्हीं में से कोई एक-दूसरे की बढ़ती से जलता हुआ भी पाया गया है। यदि दो साथियों में से कोई किसी अच्छे पद पर पहुँच गया तो वह इस उद्योग में देखा जाता है कि दूसरा किसी अच्छे पद पर न पहुँचने पाए। प्रायः अपनी उन्नति के गुप्त बाधकों का पता लगाते-लगाते लोग अपने किसी बड़े पुराने मित्र तक पहुँच जाते हैं। जिस समय संसर्ग सूत्र में बाँधकर हम औरों को अपने साथ एक पंक्ति में खड़ा करते हैं उस समय सहानुभूति, सहायता आदि की संभावना प्रतिष्ठित होने के साथ ही साथ ईर्ष्या और द्वेष की संभावना की नींव भी पड़ जाती है। अपने किसी विधान से हम भलाई ही भलाई की संभावना का सूत्रपात करें और इस प्रकार भविष्य के अनिश्चय में बाधा डालें, यह कभी हो ही नहीं सकता। भविष्य की अनिश्चयात्मकता अटल और अजेय है। अपनी लाख विद्या-बुद्धि से भी हम उसे बिलकुल हटा नहीं सकते। अब ध्यान देने की बात यह निकली कि ईर्ष्या के संचार के लिए ईर्ष्या करने वाले और ईर्ष्या के पात्र के अतिरिक्त स्थिति पर ध्यान देने वाले समाज की भी आवश्यकता है। इसी समाज की धारणा पर प्रभाव डालने के लिए ही ईर्ष्या की जाती है; ऐश्वर्य, गुण या मन का गुप्त रूप से बिना किसी समुदाय को विदित कराए, सुख या संतोष भोगने के लिए नहीं। ‘सूत्रपात करना’ का आशय है
  1. Aबहुत प्रयत्न करना
  2. Bकुछ न करना
  3. Cप्रारम्भ करना
  4. Dसमाप्त करना
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Correct answer: (C) प्रारम्भ करना

Explanation

'सूत्रपात करना' का अर्थ है किसी काम की शुरुआत करना, अर्थात् प्रारम्भ करना।

Q336CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : यह बात ध्यान देने की है कि ईर्ष्या व्यक्ति-विशेष से होती है। यह नहीं होता कि जिस किसी को ऐश्वर्य, गुण या मन से सम्पन्न देखा उसी से ईर्ष्या हो गई। ईर्ष्या उन्हीं से होती है जिनके विषय में यह धारणा होती है कि लोगों की दृष्टि हमारे साथ-साथ उन पर भी अवश्य पड़ती होगी। अपने से दूरस्थ होने के कारण अपने साथ-साथ जिन पर लोगों का ध्यान जाने का निश्चय नहीं होता उनके प्रति ईर्ष्या नहीं उत्पन्न होती। काशी में रहने वाली किसी धानी को अमेरिका के किसी धानी की बात सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। हिन्दी के किसी कवि को इटली के किसी कवि का महत्त्व सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। संबंधियों, बालसखाओं, सहपाठियों और पड़ोसियों के बीच ईर्ष्या का विकास अधिक देखा जाता है। लड़कपन से जो आदमी एक साथ उठते-बैठते देखे गए हैं उन्हीं में से कोई एक-दूसरे की बढ़ती से जलता हुआ भी पाया गया है। यदि दो साथियों में से कोई किसी अच्छे पद पर पहुँच गया तो वह इस उद्योग में देखा जाता है कि दूसरा किसी अच्छे पद पर न पहुँचने पाए। प्रायः अपनी उन्नति के गुप्त बाधकों का पता लगाते-लगाते लोग अपने किसी बड़े पुराने मित्र तक पहुँच जाते हैं। जिस समय संसर्ग सूत्र में बाँधकर हम औरों को अपने साथ एक पंक्ति में खड़ा करते हैं उस समय सहानुभूति, सहायता आदि की संभावना प्रतिष्ठित होने के साथ ही साथ ईर्ष्या और द्वेष की संभावना की नींव भी पड़ जाती है। अपने किसी विधान से हम भलाई ही भलाई की संभावना का सूत्रपात करें और इस प्रकार भविष्य के अनिश्चय में बाधा डालें, यह कभी हो ही नहीं सकता। भविष्य की अनिश्चयात्मकता अटल और अजेय है। अपनी लाख विद्या-बुद्धि से भी हम उसे बिलकुल हटा नहीं सकते। अब ध्यान देने की बात यह निकली कि ईर्ष्या के संचार के लिए ईर्ष्या करने वाले और ईर्ष्या के पात्र के अतिरिक्त स्थिति पर ध्यान देने वाले समाज की भी आवश्यकता है। इसी समाज की धारणा पर प्रभाव डालने के लिए ही ईर्ष्या की जाती है; ऐश्वर्य, गुण या मन का गुप्त रूप से बिना किसी समुदाय को विदित कराए, सुख या संतोष भोगने के लिए नहीं। लड़कपन के साथी की बढ़ती से कोई
  1. Aजलता है
  2. Bखुश होता है
  3. Cद्वेष करता है
  4. Dसुखी होता है
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Correct answer: (A) जलता है

Explanation

गद्यांश में कहा गया है कि लड़कपन से साथ उठने-बैठने वालों में से कोई एक-दूसरे की बढ़ती से जलता हुआ भी पाया गया है। अतः सही उत्तर 'जलता है' है।

Q337CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : यह बात ध्यान देने की है कि ईर्ष्या व्यक्ति-विशेष से होती है। यह नहीं होता कि जिस किसी को ऐश्वर्य, गुण या मन से सम्पन्न देखा उसी से ईर्ष्या हो गई। ईर्ष्या उन्हीं से होती है जिनके विषय में यह धारणा होती है कि लोगों की दृष्टि हमारे साथ-साथ उन पर भी अवश्य पड़ती होगी। अपने से दूरस्थ होने के कारण अपने साथ-साथ जिन पर लोगों का ध्यान जाने का निश्चय नहीं होता उनके प्रति ईर्ष्या नहीं उत्पन्न होती। काशी में रहने वाली किसी धानी को अमेरिका के किसी धानी की बात सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। हिन्दी के किसी कवि को इटली के किसी कवि का महत्त्व सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। संबंधियों, बालसखाओं, सहपाठियों और पड़ोसियों के बीच ईर्ष्या का विकास अधिक देखा जाता है। लड़कपन से जो आदमी एक साथ उठते-बैठते देखे गए हैं उन्हीं में से कोई एक-दूसरे की बढ़ती से जलता हुआ भी पाया गया है। यदि दो साथियों में से कोई किसी अच्छे पद पर पहुँच गया तो वह इस उद्योग में देखा जाता है कि दूसरा किसी अच्छे पद पर न पहुँचने पाए। प्रायः अपनी उन्नति के गुप्त बाधकों का पता लगाते-लगाते लोग अपने किसी बड़े पुराने मित्र तक पहुँच जाते हैं। जिस समय संसर्ग सूत्र में बाँधकर हम औरों को अपने साथ एक पंक्ति में खड़ा करते हैं उस समय सहानुभूति, सहायता आदि की संभावना प्रतिष्ठित होने के साथ ही साथ ईर्ष्या और द्वेष की संभावना की नींव भी पड़ जाती है। अपने किसी विधान से हम भलाई ही भलाई की संभावना का सूत्रपात करें और इस प्रकार भविष्य के अनिश्चय में बाधा डालें, यह कभी हो ही नहीं सकता। भविष्य की अनिश्चयात्मकता अटल और अजेय है। अपनी लाख विद्या-बुद्धि से भी हम उसे बिलकुल हटा नहीं सकते। अब ध्यान देने की बात यह निकली कि ईर्ष्या के संचार के लिए ईर्ष्या करने वाले और ईर्ष्या के पात्र के अतिरिक्त स्थिति पर ध्यान देने वाले समाज की भी आवश्यकता है। इसी समाज की धारणा पर प्रभाव डालने के लिए ही ईर्ष्या की जाती है; ऐश्वर्य, गुण या मन का गुप्त रूप से बिना किसी समुदाय को विदित कराए, सुख या संतोष भोगने के लिए नहीं। ‘पड़ोसियों’ पड़ोसी संज्ञा का _____ रूप है।
  1. Aसामान्य एकवचन
  2. Bसामान्य बहुवचन
  3. Cतिर्यक बहुवचन
  4. Dतिर्यक एकवचन
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Correct answer: (C) तिर्यक बहुवचन

Explanation

'पड़ोसियों' में 'ओं' विभक्ति-योग्य (परसर्ग से पहले आने वाला) बहुवचन रूप है, जैसे 'पड़ोसियों के बीच'। इसे तिर्यक बहुवचन कहते हैं; सामान्य (मूल) बहुवचन 'पड़ोसी' ही रहता है।

Q338CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : यह बात ध्यान देने की है कि ईर्ष्या व्यक्ति-विशेष से होती है। यह नहीं होता कि जिस किसी को ऐश्वर्य, गुण या मन से सम्पन्न देखा उसी से ईर्ष्या हो गई। ईर्ष्या उन्हीं से होती है जिनके विषय में यह धारणा होती है कि लोगों की दृष्टि हमारे साथ-साथ उन पर भी अवश्य पड़ती होगी। अपने से दूरस्थ होने के कारण अपने साथ-साथ जिन पर लोगों का ध्यान जाने का निश्चय नहीं होता उनके प्रति ईर्ष्या नहीं उत्पन्न होती। काशी में रहने वाली किसी धानी को अमेरिका के किसी धानी की बात सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। हिन्दी के किसी कवि को इटली के किसी कवि का महत्त्व सुनकर ईर्ष्या नहीं होगी। संबंधियों, बालसखाओं, सहपाठियों और पड़ोसियों के बीच ईर्ष्या का विकास अधिक देखा जाता है। लड़कपन से जो आदमी एक साथ उठते-बैठते देखे गए हैं उन्हीं में से कोई एक-दूसरे की बढ़ती से जलता हुआ भी पाया गया है। यदि दो साथियों में से कोई किसी अच्छे पद पर पहुँच गया तो वह इस उद्योग में देखा जाता है कि दूसरा किसी अच्छे पद पर न पहुँचने पाए। प्रायः अपनी उन्नति के गुप्त बाधकों का पता लगाते-लगाते लोग अपने किसी बड़े पुराने मित्र तक पहुँच जाते हैं। जिस समय संसर्ग सूत्र में बाँधकर हम औरों को अपने साथ एक पंक्ति में खड़ा करते हैं उस समय सहानुभूति, सहायता आदि की संभावना प्रतिष्ठित होने के साथ ही साथ ईर्ष्या और द्वेष की संभावना की नींव भी पड़ जाती है। अपने किसी विधान से हम भलाई ही भलाई की संभावना का सूत्रपात करें और इस प्रकार भविष्य के अनिश्चय में बाधा डालें, यह कभी हो ही नहीं सकता। भविष्य की अनिश्चयात्मकता अटल और अजेय है। अपनी लाख विद्या-बुद्धि से भी हम उसे बिलकुल हटा नहीं सकते। अब ध्यान देने की बात यह निकली कि ईर्ष्या के संचार के लिए ईर्ष्या करने वाले और ईर्ष्या के पात्र के अतिरिक्त स्थिति पर ध्यान देने वाले समाज की भी आवश्यकता है। इसी समाज की धारणा पर प्रभाव डालने के लिए ही ईर्ष्या की जाती है; ऐश्वर्य, गुण या मन का गुप्त रूप से बिना किसी समुदाय को विदित कराए, सुख या संतोष भोगने के लिए नहीं। उन्नति के गुप्त बाधक को खोजने पर हमें क्या पता चलता है?
  1. Aवह सहपाठी था
  2. Bवह बालसखा था
  3. Cवह पड़ोसी था
  4. Dवह पुराना मित्र था
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Correct answer: (D) वह पुराना मित्र था

Explanation

गद्यांश के अनुसार अपनी उन्नति के गुप्त बाधकों का पता लगाते-लगाते लोग अपने किसी बड़े पुराने मित्र तक पहुँच जाते हैं। अतः बाधक पुराना मित्र निकलता है।

Q339CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : समाज में पड़ते ही मनुष्य देखने लगता है कि उसकी स्थिति दोहरी हो गई है। वह देखता है कि मैं यह हूँ, और मैं बड़ा समझा जाता हूँ। इस निश्चय के साथ एक यह निश्चय और जुड़ जाने से कि मैं बड़ा समझा जाता हूँ मनुष्य के आनंद या सुख के अनुभव में वृद्धि होती है। इसी प्रकार मैं क्षुद्र हूँ इस धारणा के साथ मैं क्षुद्र समझा जाता हूँ इस धारणा के योग से दुःख के अनुभव की वृद्धि होती है। इस प्रकार स्थिति के एकांत और सामाजिक दो विभाग हो जाने से कोई तो दोनों विभागों पर दृष्टि रख सकते हैं और कोई एक ही पर। शक्तिशाली और प्रतिभा सम्पन्न मनुष्य पहले यह प्रयत्न करते हैं कि ‘हम ऐसे हों’। फिर वैसे हो जाने पर यदि आवश्यक हुआ तो वे यह प्रयत्न भी करते हैं कि ‘हम ऐसे समझे जाएँ’। इन दोनों के प्रयत्न जुदा-जुदा हैं। संसार में शक्ति सम्पन्न सब नहीं होते, इससे बहुत से लोग स्थिति के पहले विभाग के लिए जिन प्रयत्नों की आवश्यकता है उनमें अपने को असमर्थ देख दूसरे ही विभाग से किसी प्रकार अपना संतोष करना चाहते हैं और उसी पर दृष्टि रखकर प्रयत्न करते हैं। ईर्ष्या ऐसे लोगों के हृदय में बहुत जगह पाती है और उनके प्रयत्नों में सहायक भी होती है। भाव प्रवर्तन आदि के बल से जिस समुदाय के प्राणी परस्पर ऐसे बन गए हैं कि अपने इंद्रियानुभव और भावनाओं तक को जवाब देकर दूसरों के इंद्रियानुभव और भावनाओं द्वारा निर्वाह कर सकते हैं, उसी से ईर्ष्या का विकास हो सकता है। अतः ईर्ष्या का अनन्य अधिकार मनुष्य जाति ही पर है। एक कुत्ता किसी दूसरे कुत्तों को कुछ खाते देख उसे आप खाने की इच्छा कर सकता है, पर वह यह नहीं चाह सकता कि चाहे हम खाएँ या न खाएँ वह दूसरा कुत्ता न खाने पाए। दूसरे कुत्तों की दृष्टि में हमारी स्थिति कैसी है, इसकी चिंता उस कुत्ते को न होगी। अपने विषय में दूसरों के चित्त में अच्छी धारणा उत्पन्न करने का प्रयत्न अच्छी बात है। इस प्रयत्न को जो बुरा रूप प्राप्त होता है वह असत्य के समावेश के कारण, दूसरों की धारणा की अवास्तविकता और अपनी स्थिति की सापेक्षता के कारण, जब हम अपने विषय में दूसरों की झूठी धारणा और अपनी स्थिति के सापेक्ष रूप मात्र से संतोष करना चाहते हैं तभी बुराइयों के लिए जगह होती है और ईर्ष्या की राह खुलती है। मनुष्य का दुःख बढ़ने का कारण है
  1. Aलोग मुझे कुछ नहीं समझते
  2. Bमैं जैसा हूँ उससे कम समझा जाता हूँ
  3. Cमैं जैसा हूँ वैसा ही समझा जाता हूँ
  4. Dमैं समझा ही नहीं जाता हूँ
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Correct answer: (B) मैं जैसा हूँ उससे कम समझा जाता हूँ

Explanation

गद्यांश के अनुसार 'मैं क्षुद्र हूँ' के साथ 'मैं क्षुद्र समझा जाता हूँ' की धारणा जुड़ने से दुःख बढ़ता है, यानी जब व्यक्ति को लगता है कि वह जैसा है उससे कम समझा जाता है।

Q340CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : समाज में पड़ते ही मनुष्य देखने लगता है कि उसकी स्थिति दोहरी हो गई है। वह देखता है कि मैं यह हूँ, और मैं बड़ा समझा जाता हूँ। इस निश्चय के साथ एक यह निश्चय और जुड़ जाने से कि मैं बड़ा समझा जाता हूँ मनुष्य के आनंद या सुख के अनुभव में वृद्धि होती है। इसी प्रकार मैं क्षुद्र हूँ इस धारणा के साथ मैं क्षुद्र समझा जाता हूँ इस धारणा के योग से दुःख के अनुभव की वृद्धि होती है। इस प्रकार स्थिति के एकांत और सामाजिक दो विभाग हो जाने से कोई तो दोनों विभागों पर दृष्टि रख सकते हैं और कोई एक ही पर। शक्तिशाली और प्रतिभा सम्पन्न मनुष्य पहले यह प्रयत्न करते हैं कि ‘हम ऐसे हों’। फिर वैसे हो जाने पर यदि आवश्यक हुआ तो वे यह प्रयत्न भी करते हैं कि ‘हम ऐसे समझे जाएँ’। इन दोनों के प्रयत्न जुदा-जुदा हैं। संसार में शक्ति सम्पन्न सब नहीं होते, इससे बहुत से लोग स्थिति के पहले विभाग के लिए जिन प्रयत्नों की आवश्यकता है उनमें अपने को असमर्थ देख दूसरे ही विभाग से किसी प्रकार अपना संतोष करना चाहते हैं और उसी पर दृष्टि रखकर प्रयत्न करते हैं। ईर्ष्या ऐसे लोगों के हृदय में बहुत जगह पाती है और उनके प्रयत्नों में सहायक भी होती है। भाव प्रवर्तन आदि के बल से जिस समुदाय के प्राणी परस्पर ऐसे बन गए हैं कि अपने इंद्रियानुभव और भावनाओं तक को जवाब देकर दूसरों के इंद्रियानुभव और भावनाओं द्वारा निर्वाह कर सकते हैं, उसी से ईर्ष्या का विकास हो सकता है। अतः ईर्ष्या का अनन्य अधिकार मनुष्य जाति ही पर है। एक कुत्ता किसी दूसरे कुत्तों को कुछ खाते देख उसे आप खाने की इच्छा कर सकता है, पर वह यह नहीं चाह सकता कि चाहे हम खाएँ या न खाएँ वह दूसरा कुत्ता न खाने पाए। दूसरे कुत्तों की दृष्टि में हमारी स्थिति कैसी है, इसकी चिंता उस कुत्ते को न होगी। अपने विषय में दूसरों के चित्त में अच्छी धारणा उत्पन्न करने का प्रयत्न अच्छी बात है। इस प्रयत्न को जो बुरा रूप प्राप्त होता है वह असत्य के समावेश के कारण, दूसरों की धारणा की अवास्तविकता और अपनी स्थिति की सापेक्षता के कारण, जब हम अपने विषय में दूसरों की झूठी धारणा और अपनी स्थिति के सापेक्ष रूप मात्र से संतोष करना चाहते हैं तभी बुराइयों के लिए जगह होती है और ईर्ष्या की राह खुलती है। मनुष्य के लिए आनंददायक है
  1. Aमैं जैसा हूँ उससे बहुत अधिक बड़ा समझा जाता हूँ
  2. Bमैं जैसा हूँ उससे निम्न समझा जाता हूँ
  3. Cमैं जैसा हूँ वैसा ही जाना जाता हूँ
  4. Dमैं जैसा हूँ उससे बड़ा समझा जाता हूँ
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Correct answer: (D) मैं जैसा हूँ उससे बड़ा समझा जाता हूँ

Explanation

गद्यांश में लिखा है कि 'मैं बड़ा समझा जाता हूँ' यह निश्चय जुड़ने से आनंद या सुख बढ़ता है। अतः 'मैं जैसा हूँ उससे बड़ा समझा जाता हूँ' सही है; 'बहुत अधिक' की बात गद्यांश में नहीं है।

Q341CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : समाज में पड़ते ही मनुष्य देखने लगता है कि उसकी स्थिति दोहरी हो गई है। वह देखता है कि मैं यह हूँ, और मैं बड़ा समझा जाता हूँ। इस निश्चय के साथ एक यह निश्चय और जुड़ जाने से कि मैं बड़ा समझा जाता हूँ मनुष्य के आनंद या सुख के अनुभव में वृद्धि होती है। इसी प्रकार मैं क्षुद्र हूँ इस धारणा के साथ मैं क्षुद्र समझा जाता हूँ इस धारणा के योग से दुःख के अनुभव की वृद्धि होती है। इस प्रकार स्थिति के एकांत और सामाजिक दो विभाग हो जाने से कोई तो दोनों विभागों पर दृष्टि रख सकते हैं और कोई एक ही पर। शक्तिशाली और प्रतिभा सम्पन्न मनुष्य पहले यह प्रयत्न करते हैं कि ‘हम ऐसे हों’। फिर वैसे हो जाने पर यदि आवश्यक हुआ तो वे यह प्रयत्न भी करते हैं कि ‘हम ऐसे समझे जाएँ’। इन दोनों के प्रयत्न जुदा-जुदा हैं। संसार में शक्ति सम्पन्न सब नहीं होते, इससे बहुत से लोग स्थिति के पहले विभाग के लिए जिन प्रयत्नों की आवश्यकता है उनमें अपने को असमर्थ देख दूसरे ही विभाग से किसी प्रकार अपना संतोष करना चाहते हैं और उसी पर दृष्टि रखकर प्रयत्न करते हैं। ईर्ष्या ऐसे लोगों के हृदय में बहुत जगह पाती है और उनके प्रयत्नों में सहायक भी होती है। भाव प्रवर्तन आदि के बल से जिस समुदाय के प्राणी परस्पर ऐसे बन गए हैं कि अपने इंद्रियानुभव और भावनाओं तक को जवाब देकर दूसरों के इंद्रियानुभव और भावनाओं द्वारा निर्वाह कर सकते हैं, उसी से ईर्ष्या का विकास हो सकता है। अतः ईर्ष्या का अनन्य अधिकार मनुष्य जाति ही पर है। एक कुत्ता किसी दूसरे कुत्तों को कुछ खाते देख उसे आप खाने की इच्छा कर सकता है, पर वह यह नहीं चाह सकता कि चाहे हम खाएँ या न खाएँ वह दूसरा कुत्ता न खाने पाए। दूसरे कुत्तों की दृष्टि में हमारी स्थिति कैसी है, इसकी चिंता उस कुत्ते को न होगी। अपने विषय में दूसरों के चित्त में अच्छी धारणा उत्पन्न करने का प्रयत्न अच्छी बात है। इस प्रयत्न को जो बुरा रूप प्राप्त होता है वह असत्य के समावेश के कारण, दूसरों की धारणा की अवास्तविकता और अपनी स्थिति की सापेक्षता के कारण, जब हम अपने विषय में दूसरों की झूठी धारणा और अपनी स्थिति के सापेक्ष रूप मात्र से संतोष करना चाहते हैं तभी बुराइयों के लिए जगह होती है और ईर्ष्या की राह खुलती है। ईर्ष्या पर _____ का एकाधिकार है।
  1. Aप्राणी जगत्
  2. Bजानवरों
  3. Cमानव जाति
  4. Dन प्राणी जगत् का न मानव जगत् का
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Correct answer: (C) मानव जाति

Explanation

गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि ईर्ष्या का अनन्य अधिकार मनुष्य जाति ही पर है; कुत्ते का उदाहरण देकर बताया गया है कि पशु ईर्ष्या नहीं करते। अतः उत्तर 'मानव जाति' है।

Q342CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : समाज में पड़ते ही मनुष्य देखने लगता है कि उसकी स्थिति दोहरी हो गई है। वह देखता है कि मैं यह हूँ, और मैं बड़ा समझा जाता हूँ। इस निश्चय के साथ एक यह निश्चय और जुड़ जाने से कि मैं बड़ा समझा जाता हूँ मनुष्य के आनंद या सुख के अनुभव में वृद्धि होती है। इसी प्रकार मैं क्षुद्र हूँ इस धारणा के साथ मैं क्षुद्र समझा जाता हूँ इस धारणा के योग से दुःख के अनुभव की वृद्धि होती है। इस प्रकार स्थिति के एकांत और सामाजिक दो विभाग हो जाने से कोई तो दोनों विभागों पर दृष्टि रख सकते हैं और कोई एक ही पर। शक्तिशाली और प्रतिभा सम्पन्न मनुष्य पहले यह प्रयत्न करते हैं कि ‘हम ऐसे हों’। फिर वैसे हो जाने पर यदि आवश्यक हुआ तो वे यह प्रयत्न भी करते हैं कि ‘हम ऐसे समझे जाएँ’। इन दोनों के प्रयत्न जुदा-जुदा हैं। संसार में शक्ति सम्पन्न सब नहीं होते, इससे बहुत से लोग स्थिति के पहले विभाग के लिए जिन प्रयत्नों की आवश्यकता है उनमें अपने को असमर्थ देख दूसरे ही विभाग से किसी प्रकार अपना संतोष करना चाहते हैं और उसी पर दृष्टि रखकर प्रयत्न करते हैं। ईर्ष्या ऐसे लोगों के हृदय में बहुत जगह पाती है और उनके प्रयत्नों में सहायक भी होती है। भाव प्रवर्तन आदि के बल से जिस समुदाय के प्राणी परस्पर ऐसे बन गए हैं कि अपने इंद्रियानुभव और भावनाओं तक को जवाब देकर दूसरों के इंद्रियानुभव और भावनाओं द्वारा निर्वाह कर सकते हैं, उसी से ईर्ष्या का विकास हो सकता है। अतः ईर्ष्या का अनन्य अधिकार मनुष्य जाति ही पर है। एक कुत्ता किसी दूसरे कुत्तों को कुछ खाते देख उसे आप खाने की इच्छा कर सकता है, पर वह यह नहीं चाह सकता कि चाहे हम खाएँ या न खाएँ वह दूसरा कुत्ता न खाने पाए। दूसरे कुत्तों की दृष्टि में हमारी स्थिति कैसी है, इसकी चिंता उस कुत्ते को न होगी। अपने विषय में दूसरों के चित्त में अच्छी धारणा उत्पन्न करने का प्रयत्न अच्छी बात है। इस प्रयत्न को जो बुरा रूप प्राप्त होता है वह असत्य के समावेश के कारण, दूसरों की धारणा की अवास्तविकता और अपनी स्थिति की सापेक्षता के कारण, जब हम अपने विषय में दूसरों की झूठी धारणा और अपनी स्थिति के सापेक्ष रूप मात्र से संतोष करना चाहते हैं तभी बुराइयों के लिए जगह होती है और ईर्ष्या की राह खुलती है। ‘मानव की स्थिति दोहरी हो गई है’ का आशय है
  1. Aजैसा हूँ वैसा नहीं समझा जाता
  2. Bजैसा हूँ वैसा ही समझा जाता हूँ
  3. Cन समझता हूँ, न समझना चाहता हूँ
  4. Dकोई कुछ भी समझे मुझे फर्क नहीं पड़ता
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Correct answer: (A) जैसा हूँ वैसा नहीं समझा जाता

Explanation

समाज में आकर मनुष्य की स्थिति दो भागों में बँट जाती है: वह जो वास्तव में है और वह जैसा समझा जाता है। ये दोनों अलग हो सकते हैं, यानी वह जैसा है वैसा नहीं समझा जाता; इसलिए विकल्प (1) सही है।

Q343CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : समाज में पड़ते ही मनुष्य देखने लगता है कि उसकी स्थिति दोहरी हो गई है। वह देखता है कि मैं यह हूँ, और मैं बड़ा समझा जाता हूँ। इस निश्चय के साथ एक यह निश्चय और जुड़ जाने से कि मैं बड़ा समझा जाता हूँ मनुष्य के आनंद या सुख के अनुभव में वृद्धि होती है। इसी प्रकार मैं क्षुद्र हूँ इस धारणा के साथ मैं क्षुद्र समझा जाता हूँ इस धारणा के योग से दुःख के अनुभव की वृद्धि होती है। इस प्रकार स्थिति के एकांत और सामाजिक दो विभाग हो जाने से कोई तो दोनों विभागों पर दृष्टि रख सकते हैं और कोई एक ही पर। शक्तिशाली और प्रतिभा सम्पन्न मनुष्य पहले यह प्रयत्न करते हैं कि ‘हम ऐसे हों’। फिर वैसे हो जाने पर यदि आवश्यक हुआ तो वे यह प्रयत्न भी करते हैं कि ‘हम ऐसे समझे जाएँ’। इन दोनों के प्रयत्न जुदा-जुदा हैं। संसार में शक्ति सम्पन्न सब नहीं होते, इससे बहुत से लोग स्थिति के पहले विभाग के लिए जिन प्रयत्नों की आवश्यकता है उनमें अपने को असमर्थ देख दूसरे ही विभाग से किसी प्रकार अपना संतोष करना चाहते हैं और उसी पर दृष्टि रखकर प्रयत्न करते हैं। ईर्ष्या ऐसे लोगों के हृदय में बहुत जगह पाती है और उनके प्रयत्नों में सहायक भी होती है। भाव प्रवर्तन आदि के बल से जिस समुदाय के प्राणी परस्पर ऐसे बन गए हैं कि अपने इंद्रियानुभव और भावनाओं तक को जवाब देकर दूसरों के इंद्रियानुभव और भावनाओं द्वारा निर्वाह कर सकते हैं, उसी से ईर्ष्या का विकास हो सकता है। अतः ईर्ष्या का अनन्य अधिकार मनुष्य जाति ही पर है। एक कुत्ता किसी दूसरे कुत्तों को कुछ खाते देख उसे आप खाने की इच्छा कर सकता है, पर वह यह नहीं चाह सकता कि चाहे हम खाएँ या न खाएँ वह दूसरा कुत्ता न खाने पाए। दूसरे कुत्तों की दृष्टि में हमारी स्थिति कैसी है, इसकी चिंता उस कुत्ते को न होगी। अपने विषय में दूसरों के चित्त में अच्छी धारणा उत्पन्न करने का प्रयत्न अच्छी बात है। इस प्रयत्न को जो बुरा रूप प्राप्त होता है वह असत्य के समावेश के कारण, दूसरों की धारणा की अवास्तविकता और अपनी स्थिति की सापेक्षता के कारण, जब हम अपने विषय में दूसरों की झूठी धारणा और अपनी स्थिति के सापेक्ष रूप मात्र से संतोष करना चाहते हैं तभी बुराइयों के लिए जगह होती है और ईर्ष्या की राह खुलती है। ‘ईर्ष्या ऐसे लोगों के हृदय में जगह पाती है’, का आशय है
  1. Aऐसे लोग ही ईर्ष्या करते हैं
  2. Bऐसे लोगों के हृदय में ईर्ष्या छिपी रहती है
  3. Cऐसे लोगों का हृदय ईर्ष्या से भर जाता है
  4. Dऐसे लोगों के हृदय में ईर्ष्या का घर होता है
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Correct answer: (C) ऐसे लोगों का हृदय ईर्ष्या से भर जाता है

Explanation

'ऐसे लोग' वे हैं जो अपने को असमर्थ पाकर केवल दूसरों की नज़र में बड़ा दिखने से संतोष करना चाहते हैं। 'ईर्ष्या हृदय में जगह पाती है' का अर्थ है कि उनका हृदय ईर्ष्या से भर जाता है।

Q344CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : समाज में पड़ते ही मनुष्य देखने लगता है कि उसकी स्थिति दोहरी हो गई है। वह देखता है कि मैं यह हूँ, और मैं बड़ा समझा जाता हूँ। इस निश्चय के साथ एक यह निश्चय और जुड़ जाने से कि मैं बड़ा समझा जाता हूँ मनुष्य के आनंद या सुख के अनुभव में वृद्धि होती है। इसी प्रकार मैं क्षुद्र हूँ इस धारणा के साथ मैं क्षुद्र समझा जाता हूँ इस धारणा के योग से दुःख के अनुभव की वृद्धि होती है। इस प्रकार स्थिति के एकांत और सामाजिक दो विभाग हो जाने से कोई तो दोनों विभागों पर दृष्टि रख सकते हैं और कोई एक ही पर। शक्तिशाली और प्रतिभा सम्पन्न मनुष्य पहले यह प्रयत्न करते हैं कि ‘हम ऐसे हों’। फिर वैसे हो जाने पर यदि आवश्यक हुआ तो वे यह प्रयत्न भी करते हैं कि ‘हम ऐसे समझे जाएँ’। इन दोनों के प्रयत्न जुदा-जुदा हैं। संसार में शक्ति सम्पन्न सब नहीं होते, इससे बहुत से लोग स्थिति के पहले विभाग के लिए जिन प्रयत्नों की आवश्यकता है उनमें अपने को असमर्थ देख दूसरे ही विभाग से किसी प्रकार अपना संतोष करना चाहते हैं और उसी पर दृष्टि रखकर प्रयत्न करते हैं। ईर्ष्या ऐसे लोगों के हृदय में बहुत जगह पाती है और उनके प्रयत्नों में सहायक भी होती है। भाव प्रवर्तन आदि के बल से जिस समुदाय के प्राणी परस्पर ऐसे बन गए हैं कि अपने इंद्रियानुभव और भावनाओं तक को जवाब देकर दूसरों के इंद्रियानुभव और भावनाओं द्वारा निर्वाह कर सकते हैं, उसी से ईर्ष्या का विकास हो सकता है। अतः ईर्ष्या का अनन्य अधिकार मनुष्य जाति ही पर है। एक कुत्ता किसी दूसरे कुत्तों को कुछ खाते देख उसे आप खाने की इच्छा कर सकता है, पर वह यह नहीं चाह सकता कि चाहे हम खाएँ या न खाएँ वह दूसरा कुत्ता न खाने पाए। दूसरे कुत्तों की दृष्टि में हमारी स्थिति कैसी है, इसकी चिंता उस कुत्ते को न होगी। अपने विषय में दूसरों के चित्त में अच्छी धारणा उत्पन्न करने का प्रयत्न अच्छी बात है। इस प्रयत्न को जो बुरा रूप प्राप्त होता है वह असत्य के समावेश के कारण, दूसरों की धारणा की अवास्तविकता और अपनी स्थिति की सापेक्षता के कारण, जब हम अपने विषय में दूसरों की झूठी धारणा और अपनी स्थिति के सापेक्ष रूप मात्र से संतोष करना चाहते हैं तभी बुराइयों के लिए जगह होती है और ईर्ष्या की राह खुलती है। सही कथन चुनिए :
  1. Aईर्ष्या का बहुवचन रूप है ईर्ष्ये।
  2. Bईर्ष्या का बहुवचन रूप है इर्ष्याएँ।
  3. Cईर्ष्या का बहुवचन रूप है ईर्ष्यायों।
  4. Dईर्ष्या का बहुवचन रूप नहीं होता।
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Correct answer: (D) ईर्ष्या का बहुवचन रूप नहीं होता।

Explanation

'ईर्ष्या' एक भाववाचक संज्ञा है। भाववाचक संज्ञाएँ सामान्यतः एकवचन में ही प्रयोग होती हैं, इसलिए 'ईर्ष्या' का बहुवचन रूप नहीं होता।

Q345CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर प्रश्न के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए : समाज में पड़ते ही मनुष्य देखने लगता है कि उसकी स्थिति दोहरी हो गई है। वह देखता है कि मैं यह हूँ, और मैं बड़ा समझा जाता हूँ। इस निश्चय के साथ एक यह निश्चय और जुड़ जाने से कि मैं बड़ा समझा जाता हूँ मनुष्य के आनंद या सुख के अनुभव में वृद्धि होती है। इसी प्रकार मैं क्षुद्र हूँ इस धारणा के साथ मैं क्षुद्र समझा जाता हूँ इस धारणा के योग से दुःख के अनुभव की वृद्धि होती है। इस प्रकार स्थिति के एकांत और सामाजिक दो विभाग हो जाने से कोई तो दोनों विभागों पर दृष्टि रख सकते हैं और कोई एक ही पर। शक्तिशाली और प्रतिभा सम्पन्न मनुष्य पहले यह प्रयत्न करते हैं कि ‘हम ऐसे हों’। फिर वैसे हो जाने पर यदि आवश्यक हुआ तो वे यह प्रयत्न भी करते हैं कि ‘हम ऐसे समझे जाएँ’। इन दोनों के प्रयत्न जुदा-जुदा हैं। संसार में शक्ति सम्पन्न सब नहीं होते, इससे बहुत से लोग स्थिति के पहले विभाग के लिए जिन प्रयत्नों की आवश्यकता है उनमें अपने को असमर्थ देख दूसरे ही विभाग से किसी प्रकार अपना संतोष करना चाहते हैं और उसी पर दृष्टि रखकर प्रयत्न करते हैं। ईर्ष्या ऐसे लोगों के हृदय में बहुत जगह पाती है और उनके प्रयत्नों में सहायक भी होती है। भाव प्रवर्तन आदि के बल से जिस समुदाय के प्राणी परस्पर ऐसे बन गए हैं कि अपने इंद्रियानुभव और भावनाओं तक को जवाब देकर दूसरों के इंद्रियानुभव और भावनाओं द्वारा निर्वाह कर सकते हैं, उसी से ईर्ष्या का विकास हो सकता है। अतः ईर्ष्या का अनन्य अधिकार मनुष्य जाति ही पर है। एक कुत्ता किसी दूसरे कुत्तों को कुछ खाते देख उसे आप खाने की इच्छा कर सकता है, पर वह यह नहीं चाह सकता कि चाहे हम खाएँ या न खाएँ वह दूसरा कुत्ता न खाने पाए। दूसरे कुत्तों की दृष्टि में हमारी स्थिति कैसी है, इसकी चिंता उस कुत्ते को न होगी। अपने विषय में दूसरों के चित्त में अच्छी धारणा उत्पन्न करने का प्रयत्न अच्छी बात है। इस प्रयत्न को जो बुरा रूप प्राप्त होता है वह असत्य के समावेश के कारण, दूसरों की धारणा की अवास्तविकता और अपनी स्थिति की सापेक्षता के कारण, जब हम अपने विषय में दूसरों की झूठी धारणा और अपनी स्थिति के सापेक्ष रूप मात्र से संतोष करना चाहते हैं तभी बुराइयों के लिए जगह होती है और ईर्ष्या की राह खुलती है। “दृष्टि रखकर प्रयत्न करते हैं” में ‘रखकर’ _____ है।
  1. Aक्रिया
  2. Bवर्तमानकालिक कृदंत
  3. Cभूतकालिक कृदंत
  4. Dसंयोजक
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Correct answer: (C) भूतकालिक कृदंत

Explanation

'रखकर' धातु 'रख' में 'कर' जोड़कर बना कृदंत है, जो बताता है कि 'प्रयत्न करने' से पहले 'दृष्टि रखने' का काम पूरा हो चुका है। पूरी हो चुकी क्रिया का बोध कराने के कारण आधिकारिक उत्तर इसे भूतकालिक कृदंत मानता है (व्याकरण में इसे पूर्वकालिक कृदंत भी कहते हैं)।

Q346CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
एक शिक्षार्थी बिना मदद के क्या कर सकता है और किसी वयस्क या अधिक समर्थ सहपाठी के सहयोग से क्या कर सकता है, इन दोनों के बीच की स्थिति को क्या कहेंगे?
  1. Aपरिपक्वता का स्तर
  2. Bनिकटस्थ विकास का क्षेत्र
  3. Cउपलब्धि का क्षेत्र
  4. Dदूरस्थ अधिगम
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Correct answer: (B) निकटस्थ विकास का क्षेत्र

Explanation

बच्चा अकेले जो कर सकता है और किसी वयस्क या समर्थ साथी की मदद से जो कर सकता है, उसके बीच के अंतर को वाइगोत्स्की ने 'निकटस्थ (समीपस्थ) विकास का क्षेत्र' (ZPD) कहा है।

Q347CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
प्रमस्तिष्क में क्षति के कारण भाषा के कार्य में विकार जिससे भाषिक स्वरूपों व नियमों को समझने और उत्पन्न करने में कठिनाई हो, उसे क्या कहेंगे?
  1. Aवाचाघात (अफ़ेज़िया)
  2. Bपठन वैकल्य (डिस्लेक्सिया)
  3. Cगणन वैकल्य (डिस्कैलकुलिया)
  4. Dउच्चारण वैकल्य (डिसरथिया)
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Correct answer: (A) वाचाघात (अफ़ेज़िया)

Explanation

मस्तिष्क की क्षति से भाषा को समझने और बोलने/बनाने की क्षमता में आई कमी को वाचाघात (अफ़ेज़िया) कहते हैं। डिस्लेक्सिया पढ़ने से, डिस्कैलकुलिया गणना से और डिसरथिया उच्चारण की मांसपेशियों से जुड़ा है।

Q348CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
उस प्रक्रिया का नाम बताइए जिसके द्वारा भाषा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को स्थानांतरित होती है।
  1. Aसांस्कृतिक प्रसारण
  2. Bउत्पादकता
  3. Cयादृच्छिकता
  4. Dविस्थापन
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Correct answer: (A) सांस्कृतिक प्रसारण

Explanation

भाषा जन्म से अपने-आप नहीं आती, बल्कि समाज और संस्कृति के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को सिखाई जाती है। भाषा के इस गुण को सांस्कृतिक प्रसारण कहते हैं।

Q349CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
12–18 माह की आयु के बच्चे पहचाने जाने योग्य एक इकाईवाली ध्वनियाँ निकालना शुरू कर देते हैं, यह अवधि जिसके अंतर्गत प्रतिदिन की वस्तुओं के लिए एक ही पदावली बोली जाती है, क्या कहलाती है?
  1. Aकूजन (कूईंग)
  2. Bसंक्षिप्त वाक् (टेलिग्राफ़िक)
  3. Cएक-शब्दीय वाक्य अवस्था
  4. Dबबलाना
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Correct answer: (C) एक-शब्दीय वाक्य अवस्था

Explanation

12-18 माह के बच्चे एक ही शब्द से पूरी बात कहते हैं (जैसे 'पानी' = मुझे पानी दो)। इसे एक-शब्दीय वाक्य (होलोफ्रेस्टिक) अवस्था कहते हैं; कूजन और बबलाना इससे पहले, संक्षिप्त (टेलिग्राफ़िक) वाक् इसके बाद आते हैं।

Q350CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 7 Feb 2026
पठन और लेखन कौशलों पर नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए : A : पठन की समझ और योग्यता लेखन की योग्यता को प्रभावित करती है। B : पठन और लेखन दोनों पृथक् प्रक्रियाएँ हैं और एक-दूसरे से स्वतंत्र होकर विकसित होती हैं। सही विकल्प चुनिए।
  1. AA और B दोनों सही हैं
  2. BA सही है लेकिन B गलत है
  3. CA और B दोनों गलत हैं
  4. DA गलत है लेकिन B सही है
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Correct answer: (B) A सही है लेकिन B गलत है

Explanation

पढ़ने से शब्द-भंडार और वाक्य-रचना की समझ बढ़ती है, जिससे लेखन बेहतर होता है; इसलिए A सही है। पठन और लेखन एक-दूसरे से जुड़े और एक-दूसरे को मज़बूत करने वाले कौशल हैं, स्वतंत्र नहीं; इसलिए B गलत है।

How to use these CTET Hindi questions

Every question here was asked in a real CTET paper; the paper and shift are shown on the card, and the number opens the question on its own page. Try each one before tapping Show answer, then attempt the full CTET papers as timed tests to check your speed under exam conditions.

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