229 गद्यांश / पद्यांश (Hindi) questions asked in CTET previous year papers, each with the correct answer and explanation. Read them free on UTpaper, or attempt the full papers as timed online tests.
Q101CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 15 Dec 2024
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तरवाले विकल्प को चुनिए :
व्यंग्य निरंतरता की माँग करता है और निरंतरता में नवीन की उपस्थिति का आग्रह स्वयं मौजूद हो जाता है। लेकिन निरंतरता का एक खतरा यह है कि व्यंग्यकार खुद को दोहराने लगते हैं। जो भाषा उनकी पृथक् पहचान और चमक बना रही होती थी वह कमजोरी हो जाती है। ज्यादा लेखन का बोझ विशेषकर व्यंग्य में दोहराव की दरिद्रता लाता है। प्रायः व्यंग्यकार भाषा के खेल में उलझ जाते हैं पर सशक्त व्यंग्य के लिए उन्हें भाषा को शक्ति बनाना होगा। समर्थ और समृद्ध भाषा के साथ-साथ व्यंग्य की गरिमा की रक्षा भी करना एक बड़ी बात है, वरना प्रायः व्यंग्यकार भाषा को रचना-दक्षता मानकर, कारक परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य चीजों और स्थितियों की खिल्ली उड़ाना शुरू कर देते हैं।
‘व्यंग्य निरंतरता की माँग करता है’ का आशय है
Aलेखन सतत रूप से चलते रहना चाहिए
Bआगामी रचना में पूर्व में लिखे गए का उल्लेख होना चाहिए
Cप्रत्येक रचना में नवीनता का पुट होना चाहिए
Dहर रचनाकार को अपनी रचना में व्यंग्य का समावेशन करना चाहिए
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Correct answer: (C) प्रत्येक रचना में नवीनता का पुट होना चाहिए
Explanation
गद्यांश के अनुसार व्यंग्य निरंतरता माँगता है और उस निरंतरता में नवीनता की उपस्थिति का आग्रह अपने-आप जुड़ जाता है, अर्थात हर रचना में कुछ नया होना चाहिए।
Q102CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 15 Dec 2024
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तरवाले विकल्प को चुनिए :
व्यंग्य निरंतरता की माँग करता है और निरंतरता में नवीन की उपस्थिति का आग्रह स्वयं मौजूद हो जाता है। लेकिन निरंतरता का एक खतरा यह है कि व्यंग्यकार खुद को दोहराने लगते हैं। जो भाषा उनकी पृथक् पहचान और चमक बना रही होती थी वह कमजोरी हो जाती है। ज्यादा लेखन का बोझ विशेषकर व्यंग्य में दोहराव की दरिद्रता लाता है। प्रायः व्यंग्यकार भाषा के खेल में उलझ जाते हैं पर सशक्त व्यंग्य के लिए उन्हें भाषा को शक्ति बनाना होगा। समर्थ और समृद्ध भाषा के साथ-साथ व्यंग्य की गरिमा की रक्षा भी करना एक बड़ी बात है, वरना प्रायः व्यंग्यकार भाषा को रचना-दक्षता मानकर, कारक परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य चीजों और स्थितियों की खिल्ली उड़ाना शुरू कर देते हैं।
गद्यांश में निरंतरता के किस खतरे की बात उठाई गई है?
Aव्यंग्यकार एक साथ अनेक रचनाएँ लिखने लगते हैं
Bपिछली रचनाओं का कलेवर आगामी रचनाओं में झलकने लगा है
Cव्यंग्य के पाठक बहुत कम हो गए हैं
Dव्यंग्य के सराहना बोध की क्षमता खत्म होती जा रही है
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Correct answer: (B) पिछली रचनाओं का कलेवर आगामी रचनाओं में झलकने लगा है
Explanation
गद्यांश में निरंतरता का खतरा यह बताया गया है कि व्यंग्यकार खुद को दोहराने लगते हैं, यानी पिछली रचनाओं का कलेवर आगे की रचनाओं में झलकने लगता है।
Q103CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 15 Dec 2024
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तरवाले विकल्प को चुनिए :
व्यंग्य निरंतरता की माँग करता है और निरंतरता में नवीन की उपस्थिति का आग्रह स्वयं मौजूद हो जाता है। लेकिन निरंतरता का एक खतरा यह है कि व्यंग्यकार खुद को दोहराने लगते हैं। जो भाषा उनकी पृथक् पहचान और चमक बना रही होती थी वह कमजोरी हो जाती है। ज्यादा लेखन का बोझ विशेषकर व्यंग्य में दोहराव की दरिद्रता लाता है। प्रायः व्यंग्यकार भाषा के खेल में उलझ जाते हैं पर सशक्त व्यंग्य के लिए उन्हें भाषा को शक्ति बनाना होगा। समर्थ और समृद्ध भाषा के साथ-साथ व्यंग्य की गरिमा की रक्षा भी करना एक बड़ी बात है, वरना प्रायः व्यंग्यकार भाषा को रचना-दक्षता मानकर, कारक परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य चीजों और स्थितियों की खिल्ली उड़ाना शुरू कर देते हैं।
अधिकाधिक रचनाएँ लिखने का क्या परिणाम होता है?
Aविषयवस्तु में नवीनता का अभाव दिखाई देता है
Bरचनाकार की ख्याति दूर-दूर तक फैलती है
Cपाठकों को अनेक रचनाएँ एक साथ पढ़ने के लिए मिलती हैं
Dप्रकाशक के लिए चयन करना कठिन हो जाता है
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Correct answer: (A) विषयवस्तु में नवीनता का अभाव दिखाई देता है
Explanation
गद्यांश कहता है कि ज्यादा लेखन का बोझ व्यंग्य में दोहराव की दरिद्रता लाता है, यानी विषयवस्तु में नवीनता का अभाव हो जाता है।
Q104CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 15 Dec 2024
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तरवाले विकल्प को चुनिए :
व्यंग्य निरंतरता की माँग करता है और निरंतरता में नवीन की उपस्थिति का आग्रह स्वयं मौजूद हो जाता है। लेकिन निरंतरता का एक खतरा यह है कि व्यंग्यकार खुद को दोहराने लगते हैं। जो भाषा उनकी पृथक् पहचान और चमक बना रही होती थी वह कमजोरी हो जाती है। ज्यादा लेखन का बोझ विशेषकर व्यंग्य में दोहराव की दरिद्रता लाता है। प्रायः व्यंग्यकार भाषा के खेल में उलझ जाते हैं पर सशक्त व्यंग्य के लिए उन्हें भाषा को शक्ति बनाना होगा। समर्थ और समृद्ध भाषा के साथ-साथ व्यंग्य की गरिमा की रक्षा भी करना एक बड़ी बात है, वरना प्रायः व्यंग्यकार भाषा को रचना-दक्षता मानकर, कारक परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य चीजों और स्थितियों की खिल्ली उड़ाना शुरू कर देते हैं।
सशक्त व्यंग्य के लिए सबसे आवश्यक तत्त्व क्या है?
Aविषयवस्तु में दोहराव
Bसमर्थ व समृद्ध भाषा
Cअधिक-से-अधिक लिखना
Dव्यंग्यकार की व्यक्तिगत पहचान
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Correct answer: (B) समर्थ व समृद्ध भाषा
Explanation
गद्यांश के अनुसार सशक्त व्यंग्य के लिए व्यंग्यकार को भाषा को शक्ति बनाना होगा; समर्थ और समृद्ध भाषा ही सबसे आवश्यक तत्त्व है।
Q105CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 15 Dec 2024
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तरवाले विकल्प को चुनिए :
व्यंग्य निरंतरता की माँग करता है और निरंतरता में नवीन की उपस्थिति का आग्रह स्वयं मौजूद हो जाता है। लेकिन निरंतरता का एक खतरा यह है कि व्यंग्यकार खुद को दोहराने लगते हैं। जो भाषा उनकी पृथक् पहचान और चमक बना रही होती थी वह कमजोरी हो जाती है। ज्यादा लेखन का बोझ विशेषकर व्यंग्य में दोहराव की दरिद्रता लाता है। प्रायः व्यंग्यकार भाषा के खेल में उलझ जाते हैं पर सशक्त व्यंग्य के लिए उन्हें भाषा को शक्ति बनाना होगा। समर्थ और समृद्ध भाषा के साथ-साथ व्यंग्य की गरिमा की रक्षा भी करना एक बड़ी बात है, वरना प्रायः व्यंग्यकार भाषा को रचना-दक्षता मानकर, कारक परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य चीजों और स्थितियों की खिल्ली उड़ाना शुरू कर देते हैं।
‘खिल्ली उड़ाना’ का भाव है
Aखिलखिलाकर हँसना
Bगौरवगान करना
Cहास-परिहास करना
Dउपहास करना
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Correct answer: (D) उपहास करना
Explanation
'खिल्ली उड़ाना' मुहावरे का अर्थ है किसी की हँसी उड़ाना या मज़ाक बनाना, अर्थात उपहास करना।
Q106CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 15 Dec 2024
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तरवाले विकल्प को चुनिए :
व्यंग्य निरंतरता की माँग करता है और निरंतरता में नवीन की उपस्थिति का आग्रह स्वयं मौजूद हो जाता है। लेकिन निरंतरता का एक खतरा यह है कि व्यंग्यकार खुद को दोहराने लगते हैं। जो भाषा उनकी पृथक् पहचान और चमक बना रही होती थी वह कमजोरी हो जाती है। ज्यादा लेखन का बोझ विशेषकर व्यंग्य में दोहराव की दरिद्रता लाता है। प्रायः व्यंग्यकार भाषा के खेल में उलझ जाते हैं पर सशक्त व्यंग्य के लिए उन्हें भाषा को शक्ति बनाना होगा। समर्थ और समृद्ध भाषा के साथ-साथ व्यंग्य की गरिमा की रक्षा भी करना एक बड़ी बात है, वरना प्रायः व्यंग्यकार भाषा को रचना-दक्षता मानकर, कारक परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य चीजों और स्थितियों की खिल्ली उड़ाना शुरू कर देते हैं।
‘पृथक् पहचान’, गद्यांश के संदर्भ में रेखांकित शब्द के स्थान पर कौन-सा शब्द उपयुक्त होगा? (रेखांकित शब्द: पृथक्)
Aमहान
Bमजबूत
Cविशिष्ट
Dसमृद्ध
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Correct answer: (C) विशिष्ट
Explanation
'पृथक् पहचान' का अर्थ है अलग, अपनी खास पहचान; इसलिए 'पृथक्' के स्थान पर 'विशिष्ट' शब्द सबसे उपयुक्त है।
Q107CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 15 Dec 2024
नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तरवाले विकल्प को चुनिए :
व्यंग्य निरंतरता की माँग करता है और निरंतरता में नवीन की उपस्थिति का आग्रह स्वयं मौजूद हो जाता है। लेकिन निरंतरता का एक खतरा यह है कि व्यंग्यकार खुद को दोहराने लगते हैं। जो भाषा उनकी पृथक् पहचान और चमक बना रही होती थी वह कमजोरी हो जाती है। ज्यादा लेखन का बोझ विशेषकर व्यंग्य में दोहराव की दरिद्रता लाता है। प्रायः व्यंग्यकार भाषा के खेल में उलझ जाते हैं पर सशक्त व्यंग्य के लिए उन्हें भाषा को शक्ति बनाना होगा। समर्थ और समृद्ध भाषा के साथ-साथ व्यंग्य की गरिमा की रक्षा भी करना एक बड़ी बात है, वरना प्रायः व्यंग्यकार भाषा को रचना-दक्षता मानकर, कारक परिस्थितियों को छोड़कर सामान्य चीजों और स्थितियों की खिल्ली उड़ाना शुरू कर देते हैं।
‘चमक’ में कौन-सा प्रत्यय लगाकर सार्थक शब्द बन सकता है?
Aईला
Bइया
Cआरी
Dएरा
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Correct answer: (A) ईला
Explanation
चमक + ईला = चमकीला, जो एक सार्थक विशेषण शब्द है; अन्य प्रत्ययों से सार्थक शब्द नहीं बनता।
Q108CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (121 - 128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
एक स्वतंत्र और जनतांत्रिक समाज के लिए सामान्य संस्कृति को पोषित करने वाली उच्चस्तरीय शिक्षा बहुत आवश्यक है। यह तभी संभव है जब शिक्षा बहुत से कार्यकलापों का आयोजन करे। यह सब ‘विद्यालय’ जैसी संस्था में संभव हो सकता है। विद्यालय शिक्षा से जुड़ी नीतियों को कार्यान्वित करते हैं। जीवन की गुणवत्ता के संदर्भ में शिक्षा का एक विशिष्ट स्थान है। यह मानव जीवन के विभिन्न पक्षों पर बहुआयामी प्रभाव डालती है। शिक्षा का कार्य शिक्षार्थी को भय से मुक्ति दिलाना है। विद्यालय यह काम कर सकता है। विद्यालय में शिक्षा का वातावरण बच्चों को जानकारी देने, लिखना-पढ़ना सिखाने तक सीमित रखने के बजाए उन्हें स्वतः सीखने के लिए बढ़ावा देने वाला हो जिससे उनमें विभिन्न संस्कृतियों की समझ पैदा होगी।
विद्यालय का परिवेश कैसा होना चाहिए?
Aलिखना सिखाने वाला।
Bजानकारी देने वाला।
Cपढ़ना सिखाने वाला।
Dस्वतः अधिगम को बढ़ावा देने वाला।
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Correct answer: (D) स्वतः अधिगम को बढ़ावा देने वाला।
Explanation
गद्यांश के अंत में कहा गया है कि विद्यालय का वातावरण केवल जानकारी देने या लिखना-पढ़ना सिखाने तक सीमित न होकर बच्चों को स्वतः सीखने के लिए बढ़ावा देने वाला हो। इसलिए विकल्प (4) सही है।
Q109CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (121 - 128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
एक स्वतंत्र और जनतांत्रिक समाज के लिए सामान्य संस्कृति को पोषित करने वाली उच्चस्तरीय शिक्षा बहुत आवश्यक है। यह तभी संभव है जब शिक्षा बहुत से कार्यकलापों का आयोजन करे। यह सब ‘विद्यालय’ जैसी संस्था में संभव हो सकता है। विद्यालय शिक्षा से जुड़ी नीतियों को कार्यान्वित करते हैं। जीवन की गुणवत्ता के संदर्भ में शिक्षा का एक विशिष्ट स्थान है। यह मानव जीवन के विभिन्न पक्षों पर बहुआयामी प्रभाव डालती है। शिक्षा का कार्य शिक्षार्थी को भय से मुक्ति दिलाना है। विद्यालय यह काम कर सकता है। विद्यालय में शिक्षा का वातावरण बच्चों को जानकारी देने, लिखना-पढ़ना सिखाने तक सीमित रखने के बजाए उन्हें स्वतः सीखने के लिए बढ़ावा देने वाला हो जिससे उनमें विभिन्न संस्कृतियों की समझ पैदा होगी।
‘विद्यालय’ के संदर्भ में कौन-सी बात सही है?
Aविद्यालय स्व-अधिगम को प्रेरित नहीं करते हैं।
Bविद्यालय में शिक्षा जैसा कार्य संभव नहीं है।
Cविद्यालय धर्म से जुड़ी नीतियों को कार्यान्वित नहीं करते हैं।
Dविद्यालय बच्चों पर बहुआयामी प्रभाव नहीं डालते हैं।
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Correct answer: (C) विद्यालय धर्म से जुड़ी नीतियों को कार्यान्वित नहीं करते हैं।
Explanation
गद्यांश के अनुसार विद्यालय "शिक्षा" से जुड़ी नीतियों को कार्यान्वित करते हैं, धर्म से जुड़ी नीतियों की कोई बात नहीं कही गई है। बाकी तीनों कथन गद्यांश के विपरीत हैं, इसलिए विकल्प (3) सही है।
Q110CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (121 - 128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
एक स्वतंत्र और जनतांत्रिक समाज के लिए सामान्य संस्कृति को पोषित करने वाली उच्चस्तरीय शिक्षा बहुत आवश्यक है। यह तभी संभव है जब शिक्षा बहुत से कार्यकलापों का आयोजन करे। यह सब ‘विद्यालय’ जैसी संस्था में संभव हो सकता है। विद्यालय शिक्षा से जुड़ी नीतियों को कार्यान्वित करते हैं। जीवन की गुणवत्ता के संदर्भ में शिक्षा का एक विशिष्ट स्थान है। यह मानव जीवन के विभिन्न पक्षों पर बहुआयामी प्रभाव डालती है। शिक्षा का कार्य शिक्षार्थी को भय से मुक्ति दिलाना है। विद्यालय यह काम कर सकता है। विद्यालय में शिक्षा का वातावरण बच्चों को जानकारी देने, लिखना-पढ़ना सिखाने तक सीमित रखने के बजाए उन्हें स्वतः सीखने के लिए बढ़ावा देने वाला हो जिससे उनमें विभिन्न संस्कृतियों की समझ पैदा होगी।
शिक्षा किस प्रकार से संस्कृति को पोषित करने वाली बन सकती है?
Aबच्चों के लिए बहुत से कार्यकलापों का आयोजन करके
Bबच्चों को तरह-तरह की सूचनाएँ देकर
Cबच्चों में पठन-लेखन का कौशल विकसित करके
Dबच्चों को विद्यालय में नामांकित करके
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Correct answer: (A) बच्चों के लिए बहुत से कार्यकलापों का आयोजन करके
Explanation
गद्यांश के पहले दो वाक्यों के अनुसार संस्कृति को पोषित करने वाली शिक्षा तभी संभव है जब शिक्षा बहुत से कार्यकलापों का आयोजन करे। इसलिए विकल्प (1) सही है।
Q111CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (121 - 128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
एक स्वतंत्र और जनतांत्रिक समाज के लिए सामान्य संस्कृति को पोषित करने वाली उच्चस्तरीय शिक्षा बहुत आवश्यक है। यह तभी संभव है जब शिक्षा बहुत से कार्यकलापों का आयोजन करे। यह सब ‘विद्यालय’ जैसी संस्था में संभव हो सकता है। विद्यालय शिक्षा से जुड़ी नीतियों को कार्यान्वित करते हैं। जीवन की गुणवत्ता के संदर्भ में शिक्षा का एक विशिष्ट स्थान है। यह मानव जीवन के विभिन्न पक्षों पर बहुआयामी प्रभाव डालती है। शिक्षा का कार्य शिक्षार्थी को भय से मुक्ति दिलाना है। विद्यालय यह काम कर सकता है। विद्यालय में शिक्षा का वातावरण बच्चों को जानकारी देने, लिखना-पढ़ना सिखाने तक सीमित रखने के बजाए उन्हें स्वतः सीखने के लिए बढ़ावा देने वाला हो जिससे उनमें विभिन्न संस्कृतियों की समझ पैदा होगी।
‘विद्यालय’ का संधि विच्छेद होगा -
Aविद्य + अलय
Bविद्या + आलय
Cविद्या + अलय
Dविद्य + आलय
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Correct answer: (B) विद्या + आलय
Explanation
विद्यालय = विद्या + आलय। यहाँ आ + आ मिलकर आ हो गया है, अतः यह दीर्घ स्वर संधि है।
Q112CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (121 - 128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
एक स्वतंत्र और जनतांत्रिक समाज के लिए सामान्य संस्कृति को पोषित करने वाली उच्चस्तरीय शिक्षा बहुत आवश्यक है। यह तभी संभव है जब शिक्षा बहुत से कार्यकलापों का आयोजन करे। यह सब ‘विद्यालय’ जैसी संस्था में संभव हो सकता है। विद्यालय शिक्षा से जुड़ी नीतियों को कार्यान्वित करते हैं। जीवन की गुणवत्ता के संदर्भ में शिक्षा का एक विशिष्ट स्थान है। यह मानव जीवन के विभिन्न पक्षों पर बहुआयामी प्रभाव डालती है। शिक्षा का कार्य शिक्षार्थी को भय से मुक्ति दिलाना है। विद्यालय यह काम कर सकता है। विद्यालय में शिक्षा का वातावरण बच्चों को जानकारी देने, लिखना-पढ़ना सिखाने तक सीमित रखने के बजाए उन्हें स्वतः सीखने के लिए बढ़ावा देने वाला हो जिससे उनमें विभिन्न संस्कृतियों की समझ पैदा होगी।
गद्यांश के अनुसार शिक्षार्थी को भय से मुक्ति दिलाने का कार्य किसका है?
Aनीति
Bसमाज
Cसंस्कृति
Dशिक्षा
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Correct answer: (D) शिक्षा
Explanation
गद्यांश में स्पष्ट लिखा है - "शिक्षा का कार्य शिक्षार्थी को भय से मुक्ति दिलाना है।" इसलिए उत्तर शिक्षा है।
Q113CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (121 - 128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
एक स्वतंत्र और जनतांत्रिक समाज के लिए सामान्य संस्कृति को पोषित करने वाली उच्चस्तरीय शिक्षा बहुत आवश्यक है। यह तभी संभव है जब शिक्षा बहुत से कार्यकलापों का आयोजन करे। यह सब ‘विद्यालय’ जैसी संस्था में संभव हो सकता है। विद्यालय शिक्षा से जुड़ी नीतियों को कार्यान्वित करते हैं। जीवन की गुणवत्ता के संदर्भ में शिक्षा का एक विशिष्ट स्थान है। यह मानव जीवन के विभिन्न पक्षों पर बहुआयामी प्रभाव डालती है। शिक्षा का कार्य शिक्षार्थी को भय से मुक्ति दिलाना है। विद्यालय यह काम कर सकता है। विद्यालय में शिक्षा का वातावरण बच्चों को जानकारी देने, लिखना-पढ़ना सिखाने तक सीमित रखने के बजाए उन्हें स्वतः सीखने के लिए बढ़ावा देने वाला हो जिससे उनमें विभिन्न संस्कृतियों की समझ पैदा होगी।
कौन-सा शब्द भिन्न है?
Aस्वतंत्र
Bशिक्षा
Cसंस्कृति
Dसमाज
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Correct answer: (A) स्वतंत्र
Explanation
शिक्षा, संस्कृति और समाज संज्ञा शब्द हैं, जबकि "स्वतंत्र" विशेषण है (जैसे स्वतंत्र समाज)। इसलिए "स्वतंत्र" भिन्न शब्द है।
Q114CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (121 - 128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
एक स्वतंत्र और जनतांत्रिक समाज के लिए सामान्य संस्कृति को पोषित करने वाली उच्चस्तरीय शिक्षा बहुत आवश्यक है। यह तभी संभव है जब शिक्षा बहुत से कार्यकलापों का आयोजन करे। यह सब ‘विद्यालय’ जैसी संस्था में संभव हो सकता है। विद्यालय शिक्षा से जुड़ी नीतियों को कार्यान्वित करते हैं। जीवन की गुणवत्ता के संदर्भ में शिक्षा का एक विशिष्ट स्थान है। यह मानव जीवन के विभिन्न पक्षों पर बहुआयामी प्रभाव डालती है। शिक्षा का कार्य शिक्षार्थी को भय से मुक्ति दिलाना है। विद्यालय यह काम कर सकता है। विद्यालय में शिक्षा का वातावरण बच्चों को जानकारी देने, लिखना-पढ़ना सिखाने तक सीमित रखने के बजाए उन्हें स्वतः सीखने के लिए बढ़ावा देने वाला हो जिससे उनमें विभिन्न संस्कृतियों की समझ पैदा होगी।
जनतांत्रिक समाज के लिए किस तरह की शिक्षा की आवश्यकता है?
Aजानकारी देने वाली।
Bसंस्कृति का संवर्द्धन करने वाली।
Cवर्ग भेद पैदा करने वाली।
Dआजीविका के अवसर देने वाली।
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Correct answer: (B) संस्कृति का संवर्द्धन करने वाली।
Explanation
गद्यांश के अनुसार स्वतंत्र और जनतांत्रिक समाज के लिए सामान्य संस्कृति को पोषित करने वाली (अर्थात् संस्कृति का संवर्द्धन करने वाली) उच्चस्तरीय शिक्षा आवश्यक है। इसलिए विकल्प (2) सही है।
Q115CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (121 - 128) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
एक स्वतंत्र और जनतांत्रिक समाज के लिए सामान्य संस्कृति को पोषित करने वाली उच्चस्तरीय शिक्षा बहुत आवश्यक है। यह तभी संभव है जब शिक्षा बहुत से कार्यकलापों का आयोजन करे। यह सब ‘विद्यालय’ जैसी संस्था में संभव हो सकता है। विद्यालय शिक्षा से जुड़ी नीतियों को कार्यान्वित करते हैं। जीवन की गुणवत्ता के संदर्भ में शिक्षा का एक विशिष्ट स्थान है। यह मानव जीवन के विभिन्न पक्षों पर बहुआयामी प्रभाव डालती है। शिक्षा का कार्य शिक्षार्थी को भय से मुक्ति दिलाना है। विद्यालय यह काम कर सकता है। विद्यालय में शिक्षा का वातावरण बच्चों को जानकारी देने, लिखना-पढ़ना सिखाने तक सीमित रखने के बजाए उन्हें स्वतः सीखने के लिए बढ़ावा देने वाला हो जिससे उनमें विभिन्न संस्कृतियों की समझ पैदा होगी।
‘जनतांत्रिक’ में कौन सा प्रत्यय है?
Aत
Bक
Cइत
Dइक
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Correct answer: (D) इक
Explanation
"जनतांत्रिक" शब्द "जनतंत्र" में "इक" प्रत्यय जोड़कर बना है (जनतंत्र + इक)। इक प्रत्यय लगने पर पहले स्वर की वृद्धि होती है (त -> ता)।
Q116CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (129 - 135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
विभिन्न भाषाओं में साहित्य की विशिष्ट विधा के रूप में संस्मरण का महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी में भी संस्मरण लिखने की एक सुदीर्घ परंपरा है। जनमन की जीवन-यात्रा की अंतरंग छवियों को संस्मरण कह सकते हैं। संस्मरणों में, जीवन में आने वाले व्यक्तियों, पात्रों, स्थानों और घटनाओं की अंतरंग छवियाँ प्रस्तुत की जाती है। इसीलिए इसमें साधारण से साधारण और महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण पात्र और प्रसंग शामिल होते हैं। कई बार साहित्यकार अपने संस्मरण को एक व्यापक यथार्थ से ही जोड़कर रखते हैं तो कई बार उसमें अपनी कल्पना का भी पुट भर देते हैं। कुछ साहित्यकार अपने संस्मरण के माध्यम से मानवीय सरोकारों को भी अभिव्यक्त करते हैं।
‘सुदीर्घ’ का अर्थ है -
Aबहुत लंबा
Bअति उत्तम
Cअति निपुण
Dअति सुंदर
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Correct answer: (A) बहुत लंबा
Explanation
"सुदीर्घ" में "सु" (अच्छी तरह/बहुत) और "दीर्घ" (लंबा) है, अतः इसका अर्थ है - बहुत लंबा।
Q117CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (129 - 135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
विभिन्न भाषाओं में साहित्य की विशिष्ट विधा के रूप में संस्मरण का महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी में भी संस्मरण लिखने की एक सुदीर्घ परंपरा है। जनमन की जीवन-यात्रा की अंतरंग छवियों को संस्मरण कह सकते हैं। संस्मरणों में, जीवन में आने वाले व्यक्तियों, पात्रों, स्थानों और घटनाओं की अंतरंग छवियाँ प्रस्तुत की जाती है। इसीलिए इसमें साधारण से साधारण और महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण पात्र और प्रसंग शामिल होते हैं। कई बार साहित्यकार अपने संस्मरण को एक व्यापक यथार्थ से ही जोड़कर रखते हैं तो कई बार उसमें अपनी कल्पना का भी पुट भर देते हैं। कुछ साहित्यकार अपने संस्मरण के माध्यम से मानवीय सरोकारों को भी अभिव्यक्त करते हैं।
गद्यांश के अनुसार संस्मरण क्या है?
Aविशिष्ट विचार दर्शन
Bस्मृतियों का संकलन
Cजीवन यात्रा की अंतरंग छवियाँ
Dशब्दों का सरस प्रयोग
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Correct answer: (C) जीवन यात्रा की अंतरंग छवियाँ
Explanation
गद्यांश में कहा गया है - "जनमन की जीवन-यात्रा की अंतरंग छवियों को संस्मरण कह सकते हैं।" इसलिए विकल्प (3) सही है।
Q118CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (129 - 135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
विभिन्न भाषाओं में साहित्य की विशिष्ट विधा के रूप में संस्मरण का महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी में भी संस्मरण लिखने की एक सुदीर्घ परंपरा है। जनमन की जीवन-यात्रा की अंतरंग छवियों को संस्मरण कह सकते हैं। संस्मरणों में, जीवन में आने वाले व्यक्तियों, पात्रों, स्थानों और घटनाओं की अंतरंग छवियाँ प्रस्तुत की जाती है। इसीलिए इसमें साधारण से साधारण और महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण पात्र और प्रसंग शामिल होते हैं। कई बार साहित्यकार अपने संस्मरण को एक व्यापक यथार्थ से ही जोड़कर रखते हैं तो कई बार उसमें अपनी कल्पना का भी पुट भर देते हैं। कुछ साहित्यकार अपने संस्मरण के माध्यम से मानवीय सरोकारों को भी अभिव्यक्त करते हैं।
कुछ साहित्यकार संस्मरण के माध्यम से क्या अभिव्यक्त करते हैं?
Aसंघर्षशीलता
Bमानवीय सरोकार
Cसमाजवादी दृष्टिकोण
Dवैज्ञानिक चेतना
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Correct answer: (B) मानवीय सरोकार
Explanation
गद्यांश के अंतिम वाक्य के अनुसार कुछ साहित्यकार अपने संस्मरण के माध्यम से मानवीय सरोकारों को अभिव्यक्त करते हैं।
Q119CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (129 - 135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
विभिन्न भाषाओं में साहित्य की विशिष्ट विधा के रूप में संस्मरण का महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी में भी संस्मरण लिखने की एक सुदीर्घ परंपरा है। जनमन की जीवन-यात्रा की अंतरंग छवियों को संस्मरण कह सकते हैं। संस्मरणों में, जीवन में आने वाले व्यक्तियों, पात्रों, स्थानों और घटनाओं की अंतरंग छवियाँ प्रस्तुत की जाती है। इसीलिए इसमें साधारण से साधारण और महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण पात्र और प्रसंग शामिल होते हैं। कई बार साहित्यकार अपने संस्मरण को एक व्यापक यथार्थ से ही जोड़कर रखते हैं तो कई बार उसमें अपनी कल्पना का भी पुट भर देते हैं। कुछ साहित्यकार अपने संस्मरण के माध्यम से मानवीय सरोकारों को भी अभिव्यक्त करते हैं।
भिन्न शब्द समूह की पहचान करें -
Aव्यापक यथार्थ
Bजीवन यात्रा
Cसुदीर्घ परंपरा
Dअंतरंग छवि
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Correct answer: (B) जीवन यात्रा
Explanation
व्यापक यथार्थ, सुदीर्घ परंपरा और अंतरंग छवि में पहला शब्द विशेषण और दूसरा विशेष्य है (कर्मधारय रचना)। "जीवन यात्रा" में दोनों शब्द संज्ञा हैं (जीवन की यात्रा - तत्पुरुष), इसलिए यह भिन्न है।
Q120CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (129 - 135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
विभिन्न भाषाओं में साहित्य की विशिष्ट विधा के रूप में संस्मरण का महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी में भी संस्मरण लिखने की एक सुदीर्घ परंपरा है। जनमन की जीवन-यात्रा की अंतरंग छवियों को संस्मरण कह सकते हैं। संस्मरणों में, जीवन में आने वाले व्यक्तियों, पात्रों, स्थानों और घटनाओं की अंतरंग छवियाँ प्रस्तुत की जाती है। इसीलिए इसमें साधारण से साधारण और महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण पात्र और प्रसंग शामिल होते हैं। कई बार साहित्यकार अपने संस्मरण को एक व्यापक यथार्थ से ही जोड़कर रखते हैं तो कई बार उसमें अपनी कल्पना का भी पुट भर देते हैं। कुछ साहित्यकार अपने संस्मरण के माध्यम से मानवीय सरोकारों को भी अभिव्यक्त करते हैं।
संस्मरण में साधारण से लेकर महत्वपूर्ण पात्र और प्रसंग शामिल होते हैं, क्योंकि -
Aइसमें जीवन में आने वाले किसी भी पात्र, प्रसंग, घटना का चित्रण होता है।
Bयह साधारण साहित्यकार द्वारा लिखे जाते हैं।
Cयह विशिष्ट साहित्यकार द्वारा लिखे जाते हैं।
Dइसमें विशिष्ट घटनाओं व पात्रों का ही चित्रण किया जाता है।
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Correct answer: (A) इसमें जीवन में आने वाले किसी भी पात्र, प्रसंग, घटना का चित्रण होता है।
Explanation
गद्यांश के अनुसार संस्मरण में जीवन में आने वाले व्यक्तियों, पात्रों, स्थानों और घटनाओं की छवियाँ प्रस्तुत की जाती हैं, "इसीलिए" इसमें साधारण और महत्वपूर्ण दोनों तरह के पात्र व प्रसंग आते हैं। अतः विकल्प (1) सही है।
Q121CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (129 - 135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
विभिन्न भाषाओं में साहित्य की विशिष्ट विधा के रूप में संस्मरण का महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी में भी संस्मरण लिखने की एक सुदीर्घ परंपरा है। जनमन की जीवन-यात्रा की अंतरंग छवियों को संस्मरण कह सकते हैं। संस्मरणों में, जीवन में आने वाले व्यक्तियों, पात्रों, स्थानों और घटनाओं की अंतरंग छवियाँ प्रस्तुत की जाती है। इसीलिए इसमें साधारण से साधारण और महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण पात्र और प्रसंग शामिल होते हैं। कई बार साहित्यकार अपने संस्मरण को एक व्यापक यथार्थ से ही जोड़कर रखते हैं तो कई बार उसमें अपनी कल्पना का भी पुट भर देते हैं। कुछ साहित्यकार अपने संस्मरण के माध्यम से मानवीय सरोकारों को भी अभिव्यक्त करते हैं।
प्रस्तुत गद्यांश साहित्य की किस विधा के बारे में है?
Aनिबंध
Bजीवनी
Cकहानी
Dसंस्मरण
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Correct answer: (D) संस्मरण
Explanation
पूरा गद्यांश संस्मरण के स्वरूप, परंपरा और विशेषताओं के बारे में है, इसलिए विधा संस्मरण है।
Q122CTET December 2024 Paper 2 Maths & Science, 14 Dec 2024
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (129 - 135) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :
विभिन्न भाषाओं में साहित्य की विशिष्ट विधा के रूप में संस्मरण का महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी में भी संस्मरण लिखने की एक सुदीर्घ परंपरा है। जनमन की जीवन-यात्रा की अंतरंग छवियों को संस्मरण कह सकते हैं। संस्मरणों में, जीवन में आने वाले व्यक्तियों, पात्रों, स्थानों और घटनाओं की अंतरंग छवियाँ प्रस्तुत की जाती है। इसीलिए इसमें साधारण से साधारण और महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण पात्र और प्रसंग शामिल होते हैं। कई बार साहित्यकार अपने संस्मरण को एक व्यापक यथार्थ से ही जोड़कर रखते हैं तो कई बार उसमें अपनी कल्पना का भी पुट भर देते हैं। कुछ साहित्यकार अपने संस्मरण के माध्यम से मानवीय सरोकारों को भी अभिव्यक्त करते हैं।
गद्यांश के संदर्भ में कौन-सा वाक्य सही नहीं है?
Aसंस्मरण में साधारण व विशिष्ट हर तरह के प्रसंग शामिल होते हैं।
Bसाहित्यकार संस्मरण में अपनी कल्पना का भी पुट भर देते हैं।
Cसंस्मरण का विशिष्ट विधा के रूप में महत्वपूर्ण स्थान है।
Dसंस्मरण केवल हिंदी साहित्य की ही विधा है।
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Correct answer: (D) संस्मरण केवल हिंदी साहित्य की ही विधा है।
Explanation
गद्यांश के अनुसार विभिन्न भाषाओं में संस्मरण का महत्वपूर्ण स्थान है और हिंदी में "भी" इसकी परंपरा है। इसलिए "संस्मरण केवल हिंदी साहित्य की ही विधा है" कथन सही नहीं है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह नहीं है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना, ट्रेजेडी यह रही है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय - प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है - इस ओर हमारे पश्चिम शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। हम बिना पश्चिम को मॉडल बनाए, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर, औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं, कभी इसका ख्याल भी हमारे शासकों को आया हो, ऐसा नहीं जान पड़ता।
हमें औद्योगिक विकास के लिए __________ की आवश्यकता है।
Aअमेरिकी मॉडल
Bयूरोपीय मॉडल
Cभारतीय मॉडल
Dपश्चिमी मॉडल
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Correct answer: (C) भारतीय मॉडल
Explanation
गद्यांश के अनुसार हम पश्चिम को मॉडल बनाए बिना, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप तय कर सकते हैं। इसलिए हमें भारतीय मॉडल की आवश्यकता है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह नहीं है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना, ट्रेजेडी यह रही है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय - प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है - इस ओर हमारे पश्चिम शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। हम बिना पश्चिम को मॉडल बनाए, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर, औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं, कभी इसका ख्याल भी हमारे शासकों को आया हो, ऐसा नहीं जान पड़ता।
‘शिक्षित’ में मूल शब्द तथा प्रत्यय है :
Aशिक्षा + इत
Bशिक्षा +ईत
Cशिक्षि + त
Dशिक्षा + त
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Correct answer: (A) शिक्षा + इत
Explanation
‘शिक्षित’ = शिक्षा + इत। ‘इत’ प्रत्यय से विशेषण बनते हैं, जैसे - पुष्प + इत = पुष्पित, फल + इत = फलित।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह नहीं है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना, ट्रेजेडी यह रही है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय - प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है - इस ओर हमारे पश्चिम शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। हम बिना पश्चिम को मॉडल बनाए, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर, औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं, कभी इसका ख्याल भी हमारे शासकों को आया हो, ऐसा नहीं जान पड़ता।
समूह से भिन्न शब्द है __________।
Aसंस्कृति
Bभारतीय
Cमर्यादा
Dशर्त
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Correct answer: (B) भारतीय
Explanation
संस्कृति, मर्यादा और शर्त - तीनों संज्ञा शब्द हैं, जबकि ‘भारतीय’ विशेषण है (भारत + ईय)। इसलिए ‘भारतीय’ समूह से भिन्न है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह नहीं है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना, ट्रेजेडी यह रही है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय - प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है - इस ओर हमारे पश्चिम शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। हम बिना पश्चिम को मॉडल बनाए, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर, औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं, कभी इसका ख्याल भी हमारे शासकों को आया हो, ऐसा नहीं जान पड़ता।
योजनाएँ निर्धारित करते समय प्रमुख है __________।
Aप्रकृति की अपेक्षा मनुष्य की उन्नति का विशेष ध्यान रखना
Bप्राकृतिक सौंदर्य का विशेष ध्यान रखना
Cसमय सीमा का ध्यान रखना
Dप्रकृति और मनुष्य के संतुलन को बनाए रखना
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Correct answer: (D) प्रकृति और मनुष्य के संतुलन को बनाए रखना
Explanation
लेखक की चिंता यह है कि योजनाएँ बनाते समय प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन नष्ट होने से बचाने पर ध्यान नहीं दिया गया। अतः योजनाओं में प्रकृति और मनुष्य का संतुलन बनाए रखना सबसे प्रमुख है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह नहीं है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना, ट्रेजेडी यह रही है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय - प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है - इस ओर हमारे पश्चिम शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। हम बिना पश्चिम को मॉडल बनाए, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर, औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं, कभी इसका ख्याल भी हमारे शासकों को आया हो, ऐसा नहीं जान पड़ता।
गद्यांश में किस बिंदु को अनुचित ठहराया है?
Aऔद्योगिक विकास
Bपश्चिमी अंधानुकरण को
Cप्रकृति की उपेक्षा
Dप्रकृति को अधिक महत्व
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Correct answer: (B) पश्चिमी अंधानुकरण को
Explanation
लेखक कहता है कि औद्योगीकरण चुनना ट्रेजेडी नहीं है; असली ट्रेजेडी पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाना है। इसलिए पश्चिम के अंधानुकरण को अनुचित ठहराया गया है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह नहीं है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना, ट्रेजेडी यह रही है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय - प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है - इस ओर हमारे पश्चिम शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। हम बिना पश्चिम को मॉडल बनाए, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर, औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं, कभी इसका ख्याल भी हमारे शासकों को आया हो, ऐसा नहीं जान पड़ता।
स्वतंत्रता के बाद भारत की त्रासदी है __________।
Aपश्चिमी देशों का अंधानुकरण
Bभारतीय मॉडल
Cऔद्योगीकरण
Dपंचवर्षीय योजनाएँ
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Correct answer: (A) पश्चिमी देशों का अंधानुकरण
Explanation
गद्यांश के अनुसार स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी (त्रासदी) पश्चिम की देखादेखी और नकल करना है, यानी पश्चिमी देशों का अंधानुकरण।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह नहीं है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना, ट्रेजेडी यह रही है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय - प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है - इस ओर हमारे पश्चिम शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। हम बिना पश्चिम को मॉडल बनाए, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर, औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं, कभी इसका ख्याल भी हमारे शासकों को आया हो, ऐसा नहीं जान पड़ता।
गद्यांश में किसके संतुलन की बात की गई है?
Aप्रकृति, मानव और उद्योग
Bप्रकृति, मानव और मानवता
Cप्रकृति, मानवता और विकास
Dप्रकृति, मानव और संस्कृति
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Correct answer: (D) प्रकृति, मानव और संस्कृति
Explanation
गद्यांश में साफ लिखा है - ‘प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन’। मनुष्य = मानव, इसलिए उत्तर ‘प्रकृति, मानव और संस्कृति’ है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
स्वातंत्र्योत्तर भारत की सबसे बड़ी ट्रेजेडी यह नहीं है कि शासक वर्ग ने औद्योगीकरण का मार्ग चुना, ट्रेजेडी यह रही है कि पश्चिम की देखादेखी और नकल में योजनाएँ बनाते समय - प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का नाजुक संतुलन किस तरह नष्ट होने से बचाया जा सकता है - इस ओर हमारे पश्चिम शिक्षित सत्ताधारियों का ध्यान कभी नहीं गया। हम बिना पश्चिम को मॉडल बनाए, अपनी शर्तों और मर्यादाओं के आधार पर, औद्योगिक विकास का भारतीय स्वरूप निर्धारित कर सकते हैं, कभी इसका ख्याल भी हमारे शासकों को आया हो, ऐसा नहीं जान पड़ता।
‘संतुलन’ का विलोम शब्द है :
Aआसंतुलन
Bअसंतुलीत
Cअसंतुलित
Dअसंतुलन
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Correct answer: (D) असंतुलन
Explanation
‘संतुलन’ संज्ञा है, इसका विलोम ‘अ’ उपसर्ग लगाकर ‘असंतुलन’ बनता है। ‘असंतुलित’ विशेषण है (संतुलित का विलोम), और बाकी दो वर्तनी की दृष्टि से गलत हैं।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
गद्यांश के अनुसार सभी व्यक्ति -
Aसमान वेतन के अधिकारी हैं।
Bव्यवसाय में लगे हुए हैं।
Cएक समान हैं।
Dमहत्वपूर्ण हैं।
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Correct answer: (C) एक समान हैं।
Explanation
गद्यांश का मुख्य भाव यही है कि परमात्मा की नजर में और पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं। गद्यांश इसी वाक्य पर समाप्त होता है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
गद्यांश के आधार पर कहा जा सकता है कि हम सभी समान हैं क्योंकि -
Aहम ईश्वर की संतान हैं।
Bहम कंपनी के कर्मचारी हैं।
Cहमारी जीवन-शैली समान हैं।
Dहमारा जीवन-लक्ष्य समान हैं।
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Correct answer: (A) हम ईश्वर की संतान हैं।
Explanation
अंतिम वाक्य में कहा गया है कि बाहर से अलग दिखने पर भी ‘पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते’ हम सभी एक समान हैं। अर्थात् कारण है - हम ईश्वर की संतान हैं।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
सभी व्यक्तियों को समान दृष्टि से देखने में सहायक है -
Aव्यवहारिक होना
Bध्यान का अभ्यास
Cसमान दृष्टि का अभ्यास
Dआचरण का अभ्यास
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Correct answer: (B) ध्यान का अभ्यास
Explanation
गद्यांश में लिखा है - ‘ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है।’ इसलिए सही उत्तर ध्यान का अभ्यास है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
किसी भी कार्य की सफलता में __________ योगदान होता है।
Aसभी की सम दृष्टि का
Bपदाधिकारियों के श्रम का
Cसभी के परिश्रम का
Dसभी के धन का
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Correct answer: (C) सभी के परिश्रम का
Explanation
गद्यांश के अनुसार कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता; अधिक या कम वेतन पाने वाले सभी अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। अतः सफलता में सभी के परिश्रम का योगदान होता है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
समूह से भिन्न शब्द है -
Aसंस्कृति
Bज़्यादा
Cव्यक्ति
Dमहत्वपूर्ण
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Correct answer: (B) ज़्यादा
Explanation
संस्कृति, व्यक्ति और महत्वपूर्ण - तीनों संस्कृत से आए तत्सम शब्द हैं, जबकि ‘ज़्यादा’ फ़ारसी/अरबी से आया आगत (विदेशी) शब्द है। इसलिए यह समूह से भिन्न है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
‘संस्कृति’ शब्द में __________ प्रत्यय का प्रयोग होगा।
Aइय
Bईय
Cइक
Dइत
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Correct answer: (C) इक
Explanation
‘संस्कृति’ में ‘इक’ प्रत्यय लगाने पर विशेषण ‘सांस्कृतिक’ बनता है (आदि स्वर की वृद्धि के साथ), जैसे - समाज से सामाजिक, इतिहास से ऐतिहासिक।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।
इस ब्रह्मांड में हम सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे से ज्यादा खास नहीं है क्योंकि परमात्मा की नजर में हम सब एक समान हैं। ध्यान-अभ्यास हमें सभी जीवों को एक समान देखने में मदद करता है। हम मानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो एक चौकीदार, क्लर्क या कैशियर है, वह उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी कंपनी का कोई मालिक। हमें समझ आता है कि किसी कंपनी का मालिक कर्मचारियों के बिना काम नहीं कर सकता। चाहे वे अधिक वेतन पाने वाले हों या सबसे कम वेतन पाने वाले। सभी लोग अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं। भले ही हम बाहर से रंग, रूप, समाज, संस्कृति आदि के स्तर पर अलग दिखते हैं लेकिन पिता-परमेश्वर की संतान होने के नाते हम सभी एक समान हैं।
गद्यांश में सभी मनुष्यों को समान भाव से देखने एवं __________ पर बल दिया गया है।
Aव्यवहार करने
Bविशेष मानने
Cसमान वेतन देने
Dसमान नौकरी देने
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Correct answer: (A) व्यवहार करने
Explanation
गद्यांश कहता है कि चौकीदार, क्लर्क या कैशियर भी मालिक जितना ही महत्वपूर्ण है, यानी सबको समान भाव से देखना और उनके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए। समान वेतन या नौकरी की बात गद्यांश में नहीं है।
Q138CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द भिन्न है ?
Aधैर्य
Bक्षमा
Cदुर्बल
Dक्रोध
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Correct answer: (C) दुर्बल
Explanation
धैर्य, क्षमा और क्रोध भाववाचक संज्ञाएँ हैं, जबकि ‘दुर्बल’ विशेषण है (दुर्बल व्यक्ति), इसलिए यह शब्द भिन्न है।
Q139CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
‘ऊँचाई प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम है ।’ इस वाक्य में ‘सशक्त’ एक ______________ विशेषण है ।
Aपरिमाणवाचक
Bगुणवाचक
Cसार्वनामिक
Dसंख्यावाचक
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Correct answer: (B) गुणवाचक
Explanation
‘सशक्त’ शब्द ‘माध्यम’ के गुण (शक्ति से युक्त होना) को बताता है, इसलिए यह गुणवाचक विशेषण है।
Q140CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
क्षमा क्या नहीं है ?
Aआत्म साधना
Bआत्मा का स्वभाव
Cआत्मा का आभूषण
Dआत्मा का नैसर्गिक गुण
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Correct answer: (A) आत्म साधना
Explanation
गद्यांश में क्षमा को आत्मा का आभूषण, आत्मा का स्वभाव और आत्मा का नैसर्गिक गुण कहा गया है; ‘आत्म साधना’ नहीं कहा गया (क्षमाशीलता को साधना सिद्धि का राजपथ कहा गया है)।
Q141CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
गंतव्य पर कौन पहुँचता है ?
Aक्षमाशील और शांत चित्त व्यक्ति
Bश्रेष्ठ और कुलीन व्यक्ति
Cशांत चित्त और धैर्यवान व्यक्ति
Dसमर्थ और धैर्यवान व्यक्ति
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Correct answer: (A) क्षमाशील और शांत चित्त व्यक्ति
Explanation
गद्यांश के अनुसार जो व्यक्ति क्षमाशीलता अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है।
Q142CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
धर्म का दरवाजा किसके लिए खुलता है ?
Aक्षमा न माँगने वाले व्यक्ति के लिए
Bक्षमादान न करने वाले के लिए
Cक्षमादान का अभ्यास करने वाले के लिए
Dक्षमा माँगने वाले के लिए
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Correct answer: (C) क्षमादान का अभ्यास करने वाले के लिए
Explanation
गद्यांश में लिखा है कि जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता; अर्थात् यह क्षमादान का अभ्यास करने वाले के लिए खुलता है।
Q143CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
व्यक्तित्व का महत्त्वपूर्ण घटक क्या है ?
Aक्रोध
Bगरिमा
Cइंद्रिय संयम
Dक्षमा
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Correct answer: (D) क्षमा
Explanation
गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है।
Q144CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 121 से 127) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
अनियंत्रित कामना, अक्षमता और अज्ञानता की उत्पत्ति है क्रोध । क्षमा के स्वभाव को आवृत करने वाले क्रोध को पहले जीतना आवश्यक है । अक्रोध से क्रोध को जीता जाता है, क्योंकि क्रोध का अभाव ही क्षमा है ।
जिसके पास अपना आत्मबल नहीं होता वह दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता । समर्थ ही क्षमा करना जानता है । जो दुर्बल है वह कभी क्षमा नहीं कर सकता । इसलिए क्रोध को धैर्य और विवेक से क्षमा के स्वधर्म को प्राप्त करना चाहिए । बड़ा व्यक्ति या बड़े हृदय वाला कौन कहलाता है ? वह जो सहन करना जानता है, जो क्षमा करना जानता है । क्षमा और इन्द्रिय संयम आनंद साम्राज्य की कुंजी है । क्षमा आत्मा का आभूषण, आत्मा का नैसर्गिक गुण है । यह आत्मा का स्वभाव है । क्षमाशीलता साधना सिद्धि का राजपथ है । जिसने क्षमादान का अभ्यास नहीं किया, उसके लिए धर्म का दरवाजा कभी नहीं खुलता । क्षमा व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक है । क्षमाशीलता इंसान की इंसानियत को गरिमा और ऊँचाई प्रदान करने का सशक्त माध्यम है । इसके अभाव में मनुष्य असुर बन जाता है ।
वास्तव में, क्षमाशीलता मनुष्य के आध्यात्मिक शुद्धिकरण की एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे उसके व्यक्तित्व का निखार होने के साथ उसकी आत्मा का भी उत्थान होता है । क्षमा, श्रेष्ठ और कुलीन आत्माओं का आभूषण है । जो व्यक्ति जीवन की प्रतिकूल पगडंडियों पर क्षमाशीलता को अपनाते हुए शांत चित्त होकर आगे बढ़ता है, वही अपने गंतव्य पर सफलतापूर्वक पहुँचता है ।
क्षमा करना कौन जानता है ?
Aसमर्थवान व्यक्ति
Bसक्षम व्यक्ति
Cआत्मबलहीन व्यक्ति
Dक्रोधहीन व्यक्ति
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Correct answer: (A) समर्थवान व्यक्ति
Explanation
गद्यांश के अनुसार ‘समर्थ ही क्षमा करना जानता है’, दुर्बल या आत्मबलहीन व्यक्ति क्षमा नहीं कर सकता; इसलिए समर्थवान व्यक्ति सही है।
Q145CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द भिन्न है ?
Aसहनशीलता
Bसँभालता
Cसहिष्णुता
Dमहानता
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Correct answer: (B) सँभालता
Explanation
सहनशीलता, सहिष्णुता और महानता भाववाचक संज्ञाएँ हैं, जबकि ‘सँभालता’ क्रिया का रूप है, इसलिए यह भिन्न है।
Q146CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
अक्षम लोग में ‘लोग’ ___________ संज्ञा है ।
Aगणनीय
Bनिर्जीव
Cसमूहवाचक
Dव्यक्तिवाचक
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Correct answer: (C) समूहवाचक
Explanation
‘लोग’ शब्द किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि व्यक्तियों के समूह का बोध कराता है, इसलिए यह समूहवाचक संज्ञा है।
Q147CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
सामर्थ्युक्त, पुरुषार्थहीन और अधैर्यवान _____________ शब्द हैं ।
Aविशेषण
Bक्रिया-विशेषण
Cसंज्ञा
Dसर्वनाम
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Correct answer: (A) विशेषण
Explanation
सामर्थ्युक्त, पुरुषार्थहीन और अधैर्यवान तीनों शब्द व्यक्ति/गुण की विशेषता बताते हैं, इसलिए ये विशेषण हैं।
Q148CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
क्षमा माँगने से व्यक्ति का कद _____________ ।
Aसमान रहता है
Bपहले से घट जाता है
Cपहले से बढ़ जाता है
Dबदल जाता है
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Correct answer: (C) पहले से बढ़ जाता है
Explanation
गद्यांश के अनुसार अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से हृदय में विनयशीलता आती है और व्यक्ति का कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है।
Q149CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
वाक्य पूरा कीजिए :
अहमवश अपनी ग़लती न मानकर ____________ ।
Aक्षमा माँग लेते हैं
Bक्षमा नहीं माँगते
Cक्षमा माँगने में संकोच करते हैं
Dक्षमा दान कर देते हैं
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Correct answer: (C) क्षमा माँगने में संकोच करते हैं
Explanation
गद्यांश में कहा गया है कि अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं।
Q150CTET February 2026 Paper 2 Maths & Science, 1 Mar 2026
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्र.सं. 128 से 135) में सही/सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए ।
क्षमा सभी धर्मों का आधार है । क्षमा नफ़रत का निदान है । क्षमादान देना और क्षमा याचना करना दोनों महानता की निशानी हैं । क्षमा देने वाले की भाँति क्षमा माँगने वाला भी उतना ही श्रेष्ठ है । अपनी ग़लती पर क्षमा माँगने से उसके हृदय में विनयशीलता का जो भाव उपजता है, इससे उसका कद पहले की अपेक्षा और अधिक बढ़ जाता है । नीति में क्षमा का स्थान बहुत ऊँचा है । क्षमा भाव नीति का ही अंग है । यह अहंकार के त्याग का सूचक है । क्षमा के धरातल पर दो व्यक्तित्व उभरते हैं एक आप और एक सामने वाला । अहम के वशीभूत होकर जब हम अपनी ग़लती नहीं स्वीकारते तो क्षमा के विषय में संकोच करते हैं ।
यह भी संभव है कि समय-समय पर ग्लानि की अनुभूति हृदय में हो, पर इसको उजागर होने से रोक देता है । इस पीड़ा की प्रतीति हर मनुष्य को होती है । इसी प्रकार सामने वाला भी सोचता होगा कि हम क्षमा माँगें और वह क्षमा कर देगा । यह द्वंद्व निरंतर चलता है और इसका निराकरण क्षमा से जाता है । क्षमा में लेशमात्र भी कायरता नहीं है । सहिष्णुता, समता, सहनशीलता, मैत्रीभाव और उदारता जैसे सामर्थ्य युक्त गुण, पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में उत्पन्न नहीं हो सकते । निश्चित ही इन गुणों को पाने में अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताने का प्रयास करते हैं । यह अधीरों का एवं कठिन पुरुषार्थ से बचने का उपक्रम होता है । क्षमा व्यक्तित्व में तेजस्विता उत्पन्न करती है ।
_____________ लोग क्षमा को कायरता कहते हैं ।
Aसहिष्णु
Bउदार
Cक्षमाशील
Dपुरुषार्थहीन
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Correct answer: (D) पुरुषार्थहीन
Explanation
गद्यांश के अनुसार सहिष्णुता, उदारता जैसे गुण पुरुषार्थहीन या अधैर्यवान लोगों में नहीं होते और ऐसे अक्षम लोग ही क्षमा को कायरता बताते हैं।
How to use these CTET Hindi questions
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